सिंहासन बत्तीसी (३२ पुतलियों की अमर गाथा)
Centuries after Emperor Vikramaditya, King Bhoja discovers Vikramaditya's buried 32-step golden throne. As Bhoja attempts to ascend, each of the thirty-two living celestial Apsara statues comes alive, recounting an extraordinary tale of Vikramaditya's supreme sacrifice, justice, and selflessness.

प्रस्तावना: धारानगरी, चरवाहा बालक का टीला और बत्तीस सीढ़ियों के दिव्य सिंहासन का प्राकट्य
प्राचीन धारानगरी में राजा भोज एक चमत्कारी मिट्टी के टीले का रहस्य जानने पहुँचते हैं, जहाँ एक साधारण चरवाहा बालक चन्द्रभानु बैठते ही न्याय के साक्षात् देव की भाँति अकाट्य निर्णय सुनाता है। चालीस हाथ गहरी खुदाई कराने पर धरती के गर्भ से सम्राट विक्रमादित्य का बत्तीस सीढ़ियों वाला दिव्य सुवर्ण-सिंहासन प्रकट होता है। जैसे ही राजा भोज प्रथम सीढ़ी पर चरण रखते हैं, प्रथम सजीव पुतली रत्नमञ्जरी जाग उठती है।
