
Legendary King of Ujjain & Supreme Judge• ग्रंथ: Betal Pachisi
महाराज विक्रमादित्य
King Vikramaditya
The ideal, invincible Emperor of Ujjayini celebrated across millennia for unyielding courage, truthfulness, profound wisdom, and unerring sense of justice.
अन्य नाम व उपाधियाँ
VikramRaja Vikramaditya of UjjayiniThe Great Discerner
संबंधित अध्याय
कहानियां जिनमें यह पात्र उपस्थित हैं
अध्याय 0
प्रारंभ: भिक्षु का गुप्त रत्न, तांत्रिक षड्यंत्र और महाश्मशान का वचन
अध्याय 1
प्रथम बेताल: पद्मावती के चार गुप्त संकेत
अध्याय 2
द्वितीय बेताल: तीन प्रेमी, तीन मार्ग और संजीवनी विद्या
अध्याय 3
तृतीय बेताल: शुक-सारिका का द्युत और कटी नाक का रहस्य
अध्याय 4
चतुर्थ बेताल: वीरवर का आत्मबलिदान और राजा शूद्रक का त्याग
अध्याय 5
पंचम बेताल: सोमप्रभा और तीन गुणी वर
अध्याय 6
षष्ठ बेताल: मदनसुन्दरी और सिरों की अदला-बदली
अध्याय 7
सप्तम बेताल: सत्त्वशील और जलमग्न स्वर्ण-नगरी
अध्याय 8
अष्टम बेताल: तीन अतिसुकुमार रानियां
अध्याय 9
नवम बेताल: राजकुमारी अनंगरति और चार गुणी कारीगर
अध्याय 10
दशम बेताल: मदनसेना और चोर का धर्म
अध्याय 11
एकादश बेताल: हरिस्यामी और दान के भोजन में विष
अध्याय 12
द्वादश बेताल: तीन अति-संवेदनशील भाई
अध्याय 13
त्रयोदश बेताल: जीमूतवाहन का आत्म-बलिदान
अध्याय 14
चतुर्दश बेताल: सेठ की कन्या और शूली पर चढ़ा चोर
अध्याय 15
पंचदश बेताल: चार मित्र और जीवित किया गया सिंह
अध्याय 16
षोडश बेताल: राजा, ब्राह्मण-युवक और ब्रह्मराक्षस
अध्याय 17
सप्तदश बेताल: चंद्रस्वामी और गुरु का मायाजाल
अध्याय 18
अष्टादश बेताल: माता-पुत्री और पिता-पुत्र का कुल-बंधन
अध्याय 19
एकोनविंशति बेताल: चतुर चोर और निडर राजकुमारी
अध्याय 20
विंशति बेताल: मृत्यु-वेदी पर हंसने वाला ब्राह्मण बालक
अध्याय 21
एकविंशति बेताल: अनंगमंजरी और मणिवर्मा की प्रेम-कथा
अध्याय 22
द्वाविंशति बेताल: चार विद्वान भाइयों की विद्या
अध्याय 23
त्रयोविंशति बेताल: वृद्ध योगी और परकाया-प्रवेश
अध्याय 24
चतुर्विंशति बेताल: एक अद्भुत संबंध और अनसुलझी पहेली
अध्याय 25
पंचविंशति बेताल: तांत्रिक शान्तशील का वध और चक्रवर्ती साम्राज्य
अध्याय 0
प्रस्तावना: धारानगरी, चरवाहा बालक का टीला और बत्तीस सीढ़ियों के दिव्य सिंहासन का प्राकट्य
अध्याय 1
प्रथम पुतली रत्नमञ्जरी: चिन्तामणि रत्न, दरिद्र पण्डित और परम त्याग का रहस्य
अध्याय 2
द्वितीय पुतली चित्रलेखा: निर्धन ब्राह्मण, महाकाली की वेदी और सम्राट का शीश-बलिदान
अध्याय 3
तृतीय पुतली चन्द्रकला: खोया हुआ दिव्य मुक्ता-हार, समुद्र-यात्रा और घड़ियाल का उद्धार
अध्याय 4
चतुर्थ पुतली कामकन्दला: माधवानल का संगीत, सुवर्ण-वृष्टि और कला-पारखी विक्रमादित्य
अध्याय 5
पञ्चम पुतली लीलावती: वन का चोर, राजा का सत्य-व्रत और पारसमणि का पावन त्याग
अध्याय 6
षष्ठ पुतली प्रभावती: अन्धा महर्षि, विषैला सरोवर और संजीवनी मुकुट का पावन त्याग
अध्याय 7
सप्तम पुतली कौशल्या: दो दिव्य उपहार, दरिद्र ब्राह्मण और अक्षय-पात्र का पावन दान
अध्याय 8
अष्टम पुतली सुखाविका: दो दैवज्ञ, राजा का मृत्यु-योग और व्याघ्र-शावक का पावन उद्धार
अध्याय 9
नवम पुतली अनुराधिका: दो माताएँ, शिशु का विवाद और सुवर्ण-पालने का न्याय
अध्याय 10
दशम पुतली पद्मावती: चोरी की राजमुद्रा, नदी का वणिक और जल-मसी परीक्षण का रहस्य
अध्याय 11
एकादश पुतली कीर्तिमती: सहस्र दीपों का नगर, निष्ठावान् प्रहरी वीरवर और राज-लक्ष्मी का पावन उद्धार
अध्याय 12
द्वादश पुतली आनन्दमयी: मानसरोवर का स्वर्ण-हंस, वन के संन्यासी का कमण्डलु और सहस्र कामधेनु का पावन दान
अध्याय 13
त्रयोदश पुतली रतिप्रिया: तीन समरूप कांस्य-प्रतिमाएँ, शिल्पी की पहेली और सुवर्ण-तार की गूढ़ परीक्षा
अध्याय 14
चतुर्दश पुतली तारामती: असत्य का नगर, मणिक-व्यापारी का संताप और सत्य-दर्पण का न्याय
अध्याय 15
पञ्चदश पुतली कमलिनी: चारण कवि का गीत, समुद्र-तट का गोताखोर और अनन्त मुक्ता-दान का रहस्य
अध्याय 16
षोडश पुतली मनमोहिनी: पाताल-लोक का सिंहासन, नाग-राजकुमारी और आत्म-बलिदान की अमर मणि
अध्याय 17
सप्तदश पुतली विद्यावती: नव-रत्नों की सभा, दण्डी संन्यासी का एक धान्य और ज्ञानी का पावन सत्कार
अध्याय 18
अष्टादश पुतली तारावती: तीन गूढ़ पहेलियाँ, निशीथ जागरण और अक्षय-स्वर्णपात्र का पावन दान
अध्याय 19
एकोनविंशति पुतली रूपरेखा: रेशमी चित्र-पट, गान्धार की लुप्त राजकुमारी और निष्काम रक्षा-धर्म
अध्याय 20
विंशति पुतली ज्ञानवती: देव-अश्व का विवाद, खुर-चिह्न परीक्षण और प्रज्ञाचक्षु का निष्पक्ष न्याय
अध्याय 21
एकविंशति पुतली चन्द्रज्योति: माया-गुहा का भ्रम, योगिनी का शाप और निष्काम आत्म-तेज
अध्याय 22
द्वाविंशति पुतली अनुरोधवती: निष्ठावान् तन्तुवाय का पावन वस्त्र, सुवर्ण-तूरी का विवाद और सत्य-श्रम का न्याय
अध्याय 23
त्रयोविंशति पुतली धर्मवती: मृग-शिशु की करुणा, व्याध का बाण और सम्राट का अभय-दान
अध्याय 24
चतुर्विंशति पुतली करुणावती: चेदि देश का महा-अकाल, राज-अन्नागार का त्याग और सम्राट की अन्तिम ग्रास-रोटी
अध्याय 25
पञ्चविंशति पुतली प्रेमवती: समुद्र-मन्थन का रहस्य, वरुण देव का रत्न-पात्र और निष्काम प्रेम-समर्पण
अध्याय 26
षड्विंशति पुतली ध्वनिमती: सात सुरों का प्रज्ञाचक्षु साधक, वीणा का टूटा तार और गान्धर्व-नाद का चमत्कार
अध्याय 27
सप्तविंशति पुतली वसुमती: भूमि में गड़ा स्वर्ण-कलश, दो निष्कपट किसानों का अनूठा विवाद और सम्राट का धर्म-न्याय
अध्याय 28
अष्टाविंशति पुतली वैदेही: निशीथ प्रच्छन्न-भ्रमण, स्वाभिमानी ब्राह्मण की क्षुधा और गुप्त अन्न-सत्कार
अध्याय 29
एकोनत्रिंशति पुतली मानवती: शापग्रस्त गन्धर्व, दावाग्नि का संहार और सम्राट का जीवन-कवच
अध्याय 30
त्रिंशत् पुतली जयलक्ष्मी: सार्वभौम त्याग का महा-यज्ञ, सुवर्ण-वेदी और निर्धन भिक्षुक की विजय
अध्याय 31
