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चतुर्दश पुतली तारामती: असत्य का नगर, मणिक-व्यापारी का संताप और सत्य-दर्पण का न्याय

सिंहासन बत्तीसी (३२ पुतलियों की अमर गाथा)• katha

चतुर्दश पुतली तारामती: असत्य का नगर, मणिक-व्यापारी का संताप और सत्य-दर्पण का न्याय

The Fourteenth Statue: Taramati & The Mirror of Truth

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दृश्य 1

चतुर्दश सूर्योदय और तारामती का प्रबोधन

The Fourteenth Dawn & Taramati
Morning sunlight streams across the sandstone colonnade onto the 32-step golden throne

चौदहवें प्रभात की स्वर्णिम किरणों ने धारानगरी के राजप्रासाद को आलोकित किया, जहाँ राजा भोज ने पूर्ण निष्ठा से अपनी साधना पूर्ण की।

Panel 1
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King Bhoja in sacred saffron silks approaches the fourteenth step of the throne

केसरिया परिधान धारण कर राजा भोज विनीत चरणों से चौदहवीं सीढ़ी की ओर बढ़े।

Panel 2
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The marble dais erupts with brilliant starlight-silver and golden radiance

जैसे ही राजा का चरण चौदहवीं सीढ़ी के निकट पहुँचा, मणिक वेदी तारक-रजत और स्वर्णिम दिव्य प्रकाश से प्रदीप्त हो उठी!

Panel 3
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The fourteenth carved statue Taramati opens her glowing starlight-silver eyes, laughing musically
पुतली तारामती
ठहरो, राजा भोज! इस चौदहवीं सीढ़ी पर कदम रखने का दुस्साहस मत करो!

चौदहवीं कांस्य-पुतली—तारामती—की तारक-नेत्र खुले और वह सत्य-दर्पण हाथ में लिए दिव्य हँसी के साथ सजीव हो उठी!

पुतली तारामती

ठहरो, राजा भोज! इस चौदहवीं सीढ़ी पर कदम रखने का दुस्साहस मत करो!

Panel 4
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King Bhoja halts in deep reverence with folded hands, gazing at the living bronze maiden
राजा भोज
हे तारामती देवि! विक्रमादित्य के किस गुप्तचर साहस और सत्य-दर्पण के न्याय की गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

राजा भोज ने नतमस्तक होकर हाथ जोड़े और सत्य-दर्पण धारण की हुई पुतली की ओर देखा।

राजा भोज

हे तारामती देवि! विक्रमादित्य के किस गुप्तचर साहस और सत्य-दर्पण के न्याय की गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

Panel 5
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Taramati speaks: 'Do you possess the daring undercover courage of Vikramaditya?'
पुतली तारामती
क्या तुममें विक्रमादित्य जैसा गुप्तचर साहस और सूक्ष्म न्याय-बुद्धि है, जब कूटमणि नगरी के धूर्त स्वर्णकारों और भ्रष्ट न्यायाधीशों ने एक निर्दोष व्यापारी के अनमोल रत्न लूट लिए, और विक्रमादित्य ने छद्मवेश में जाकर सूर्य-दर्पण से पूरे षड्यन्त्र को उघाड़ दिया?

तारामती ने सत्य-दर्पण उठाकर गम्भीर वाणी में कहा:

पुतली तारामती

क्या तुममें विक्रमादित्य जैसा गुप्तचर साहस और सूक्ष्म न्याय-बुद्धि है, जब कूटमणि नगरी के धूर्त स्वर्णकारों और भ्रष्ट न्यायाधीशों ने एक निर्दोष व्यापारी के अनमोल रत्न लूट लिए, और विक्रमादित्य ने छद्मवेश में जाकर सूर्य-दर्पण से पूरे षड्यन्त्र को उघाड़ दिया?

Panel 6
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दृश्य 2

ताम्रलिप्ति के मणिक-व्यापारी की व्यथा और सात पद्मराग मणियाँ

The Swindled Gem Merchant of Tamralipti
In the grand audience hall of ancient Ujjayini, Vikramaditya listens to an emotional petition

उज्जयिनी के सभागार में ताम्रलिप्ति का प्रतिष्ठित मणिक-व्यापारी मणिभद्र फूट-फूट कर रोते हुए सम्राट विक्रमादित्य के सम्मुख उपस्थित हुआ।

Panel 7
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Merchant Manibhadra kneels before the throne, lamenting how he was robbed in Kutamani Nagari
व्यापारी मणिभद्र
महाराज! उस नगर में हर गवाह बिकाऊ है और हर न्यायाधीश हिस्सेदार! उन्होंने मेरे असली रत्न बदलकर काँच के पत्थर रख दिए और मुझे कंगाल कर बाहर फेंक दिया!

मणिभद्र ने बताया कि सीमांत व्यापारिक नगर 'कूटमणि नगरी' (असत्य का नगर) में धूर्त स्वर्णकारों और भ्रष्ट अधिकारियों ने मिलकर उसकी सात अनमोल पद्मराग मणियाँ चुरा लीं!

व्यापारी मणिभद्र

महाराज! उस नगर में हर गवाह बिकाऊ है और हर न्यायाधीश हिस्सेदार! उन्होंने मेरे असली रत्न बदलकर काँच के पत्थर रख दिए और मुझे कंगाल कर बाहर फेंक दिया!

Panel 8
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Flashback close-up of seven glowing, flawless deep-crimson Padmaraga rubies

वे सातों पद्मराग मणियाँ इतनी कान्तिमान थीं कि घने अन्धकार में भी दीपक की भाँति लाल प्रकाश बिखेरती थीं।

Panel 9
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In a dark tavern of Kutamani Nagari, Suvarnadatta and corrupt officials swap the rubies for glass beads

कूटमणि नगरी की गुप्त मदिराशाला में स्वर्णकार सुवर्णदत्त और नगर-दण्डाधिकारी ने आधी रात को बक्से का ताला खोलकर असली रत्नों की जगह लाल काँच के मनके रख दिए थे।

Panel 10
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The swindled merchant thrown out into the dusty street by corrupt city guards

जब व्यापारी ने न्यायालय में गुहार लगाई, तो भ्रष्ट न्यायाधीश ने बीस झूठे गवाह खड़े कर उल्टे व्यापारी पर दस हज़ार दीनार का जुरमाना ठोक दिया!

Panel 11
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Vikramaditya stands tall, vowing: 'Dharma shall prevail even in the den of deceivers!'
सम्राट विक्रमादित्य
धैर्य रखो, मणिभद्र! तुम्हारे सातों रत्न ससम्मान तुम्हें वापस मिलेंगे!

विक्रमादित्य ने अचल संकल्प लिया: 'असत्य के गढ़ में भी धर्म की विजय होगी! मैं स्वयं कूटमणि नगरी जाऊँगा!'

सम्राट विक्रमादित्य

धैर्य रखो, मणिभद्र! तुम्हारे सातों रत्न ससम्मान तुम्हें वापस मिलेंगे!

Panel 12
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दृश्य 3

हीरकवर्धन का छद्मवेश और कूटमणि नगरी में प्रवेश

The Emperor
Disguised as a flashy young diamond merchant named Hirakavardhana, Vikramaditya arrives on an ornate camel

दक्षिण के धनी, अनुभवहीन युवा हीरक-व्यापारी 'हीरकवर्धन' का वेश बनाकर विक्रमादित्य सजे-धजे ऊँट पर कूटमणि नगरी पहुँचे।

Panel 13
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The crowded streets of Kutamani Nagari filled with shady goldsmiths and calculating merchants

कूटमणि नगरी के बाज़ारों में कपटी व्यापारी और षड्यन्त्रकारी पहरेदार नए शिकार की ताक में रहते थे।

Panel 14
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Goldsmith Suvarnadatta approaches the wealthy traveler with flattering smiles
स्वर्णकार सुवर्णदत्त
पधारिए, सेठ जी! हमारे नगर की सुरक्षा-तिजोरी में अपने अनमोल रत्न सुरक्षित रखिए!

स्वर्णकार सुवर्णदत्त ने उस युवा सेठ की मणियों से जड़ी लोहे की तिजोरी देखकर मीठी बातों का जाल बिछाया।

स्वर्णकार सुवर्णदत्त

पधारिए, सेठ जी! हमारे नगर की सुरक्षा-तिजोरी में अपने अनमोल रत्न सुरक्षित रखिए!

Panel 15
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The corrupt syndicate treats the disguised King to sweet wines and elaborate banquets

षड्यन्त्रकारियों ने नगर की सबसे भव्य धर्मशाला में विक्रमादित्य को स्वादिष्ट भोज और सुरा अर्पित कर असावधान करने का प्रयास किया।

Panel 16
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In the dark vault under oil lamps, Suvarnadatta picks the lock, swapping the real gems with lead weights

मध्यरात्रि को दीपक के मन्द प्रकाश में सुवर्णदत्त ने तिजोरी खोलकर असली हीरे निकाल लिए और सीसे के टुकड़े व काँच के मनके भर दिए!

Panel 17
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In the shadows above, Vikramaditya watches the entire theft with a calm calculating warrior smile
विक्रमादित्य (छाया में)
लोभ ने तुम्हारे विवेक को अन्धा कर दिया है; कल सूर्योदय के साथ तुम्हारा कपट खुलेगा!

ऊपर अन्धकार में छिपे विक्रमादित्य ने पूरी चोरी को अपनी आँखों से देखा और मन्द मुस्कान से सिर हिलाया। जाल पूरा बिछ चुका था!

विक्रमादित्य (छाया में)

लोभ ने तुम्हारे विवेक को अन्धा कर दिया है; कल सूर्योदय के साथ तुम्हारा कपट खुलेगा!

Panel 18
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दृश्य 4

नगर-न्यायालय का षड्यन्त्र और सूर्य-सत्य दर्पण का प्राकट्य

The Courtroom Trap & The Solar Truth Mirror
The next morning in the crowded municipal court, the disguised Vikramaditya claims his chest was looted

अगले दिन प्रातःकाल नगर-न्यायालय में विक्रमादित्य ने अपनी तिजोरी से असली हीरे गायब होने की शिकायत दर्ज कराई।

Panel 19
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Suvarnadatta and the corrupt judge laugh arrogantly, presenting twenty bought witnesses
भ्रष्ट न्यायाधीश
तुम्हारा दावा झूठा है! तुमने नगर की तिजोरी का अपमान किया है!

सुवर्णदत्त और भ्रष्ट न्यायाधीश ने ठहाका लगाया और बीस झूठे गवाह खड़े कर दिए जिन्होंने शपथ खाई कि सेठ केवल घटिया काँच लाया था!

भ्रष्ट न्यायाधीश

तुम्हारा दावा झूठा है! तुमने नगर की तिजोरी का अपमान किया है!

Panel 20
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The disguised Vikramaditya steps forward calmly: 'Let the Vedic Mirror of Solar Truth judge the gems!'

छद्मवेशी विक्रमादित्य ने मन्द मुस्कान के साथ कहा: 'जब मनुष्य के मुख झूठे हो जाएँ, तो वैदिक सूर्य-सत्य दर्पण से न्याय कराया जाए!'

Panel 21
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Vikramaditya unveils a magnificent polished convex speculum-bronze mirror carved with solar mantras

विक्रमादित्य ने सूर्य-मन्त्रों से अभिमन्त्रित एक विशाल, गोल उत्तल कांस्य-दर्पण (ज्योतिर्-दर्पण) वेदी पर स्थापित किया!

Panel 22
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Vikramaditya explains: 'A true diamond reflects blinding white solar fire; fake glass casts black smoke shadows!'
हीरकवर्धन
यदि तुम्हारी तिजोरी के पत्थर सच्चे हैं, तो उन्हें इस दर्पण के सम्मुख रखो!

विक्रमादित्य ने रहस्य बताया: 'सच्चा हीरा सूर्य की धूप में इस दर्पण के सामने श्वेत अग्नि बिखेरता है, जबकि काँच और सीसा काली धूसर छाया फेंकते हैं!'

हीरकवर्धन

यदि तुम्हारी तिजोरी के पत्थर सच्चे हैं, तो उन्हें इस दर्पण के सम्मुख रखो!

Panel 23
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The thousands of gathered citizens press forward in breathless anticipation
नागरिक
सूर्य का प्रकाश अब सत्य और कपट का निर्णय करेगा!

हज़ारों की संख्या में उपस्थित नागरिक दम साधे खड़े हो गए; धूप की किरणें सीधे दर्पण पर चमक रही थीं।

नागरिक

सूर्य का प्रकाश अब सत्य और कपट का निर्णय करेगा!

Panel 24
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दृश्य 5

सत्य का विस्फोट, सम्राट का प्राकट्य और कूटमणि का उद्धार

The Chemical Exposure & Syndicate Dismantled
The nervous goldsmith holds the glass stones before the sunlit mirror; the fake glass casts dark murky shadows
स्वर्णकार सुवर्णदत्त
यह... यह कैसे हो सकता है?!

काँपते हाथों से सुवर्णदत्त ने काँच के पत्थर दर्पण के सामने रखे; उनसे काली, गन्दली धुएँ जैसी छाया निकली और कोई तेज नहीं फूटा!

स्वर्णकार सुवर्णदत्त

यह... यह कैसे हो सकता है?!

Panel 25
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Vikramaditya produces the real gems; blinding beams of white solar light erupt from the mirror

विक्रमादित्य ने दण्डाधिकारी की गुप्त थैली से असली रत्न निकालकर दर्पण के सम्मुख किए; प्रचण्ड श्वेत सूर्य-प्रकाश के बाणों से पूरा न्यायालय जगमगा उठा!

Panel 26
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Vikramaditya casts off his disguise, revealing his imperial turban, sword, and royal signet ring
सम्राट विक्रमादित्य
मैं उज्जयिनी का सम्राट विक्रमादित्य हूँ! असत्य के इस गढ़ का आज अन्त होगा!

विक्रमादित्य ने अपना छद्मवेश उतार फेंका; मस्तक पर लाल-स्वर्णिम पगड़ी और हाथ में चक्रवर्ती गरुड़-मुद्रा चमक उठी!

सम्राट विक्रमादित्य

मैं उज्जयिनी का सम्राट विक्रमादित्य हूँ! असत्य के इस गढ़ का आज अन्त होगा!

Panel 27
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Suvarnadatta and the corrupt judge collapse to the floor in trembling terror, begging for mercy

सम्राट का नाम सुनते ही सुवर्णदत्त और भ्रष्ट न्यायाधीश भय से मूर्च्छित होकर चरणों में गिर पड़े और सारा षड्यन्त्र स्वीकार कर लिया।

Panel 28
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Vikramaditya orders the corrupt syndicate arrested and seven rubies restored to Manibhadra
व्यापारी मणिभद्र
महाराज! आपने असत्य के नगर को धर्म का धाम बना दिया!

विक्रमादित्य ने अपराधियों को कारागार भेजा और व्यापारी मणिभद्र को उसके सातों पद्मराग रत्न व बीस हज़ार दीनार क्षतिपूर्ति दिलवाई।

व्यापारी मणिभद्र

महाराज! आपने असत्य के नगर को धर्म का धाम बना दिया!

Panel 29
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The honest citizens and merchants of Kutamani Nagari celebrate under a shower of flower petals

कूटमणि नगरी की प्रजा ने पुष्प-वर्षा के साथ धर्म के सूर्य चक्रवर्ती विक्रमादित्य का महा-उत्सव मनाया।

Panel 30
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दृश्य 6

तारामती का निर्णय और राजा भोज का संकोच

Taramati
Back in Dharanagari palace, Taramati looks directly at King Bhoja with starlight-silver eyes

धारानगरी के सभा-भवन में सजीव पुतली तारामती ने राजा भोज को गम्भीर रजत-नयनों से देखा।

Panel 31
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Taramati challenges: 'Have you ever risked your life in disguise to dismantle a corrupt syndicate?'
पुतली तारामती
अब कहो, राजा भोज—क्या तुमने कभी प्रजा की रक्षा हेतु अकेले छद्मवेश में असत्य के गढ़ में प्रविष्ट होकर सत्य-दर्पण से कपट का अन्त किया है? यदि ऐसा अदम्य साहस तुममें है, तो कदम बढ़ाओ! अन्यथा लौट जाओ!

तारामती ने चौदहवीं सीढ़ी की चुनौती दी:

पुतली तारामती

अब कहो, राजा भोज—क्या तुमने कभी प्रजा की रक्षा हेतु अकेले छद्मवेश में असत्य के गढ़ में प्रविष्ट होकर सत्य-दर्पण से कपट का अन्त किया है? यदि ऐसा अदम्य साहस तुममें है, तो कदम बढ़ाओ! अन्यथा लौट जाओ!

Panel 32
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King Bhoja lowers his head in deep humility and introspection, acknowledging Vikramaditya's courage
राजा भोज
मुझमें विक्रमादित्य जैसा गुप्तचर साहस और सत्य-दर्पण से कपट को भेदने का वैज्ञानिक विवेक नहीं है, देवि। मैं इस चौदहवीं सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

राजा भोज ने लज्जा और श्रद्धा से सिर झुका लिया:

राजा भोज

मुझमें विक्रमादित्य जैसा गुप्तचर साहस और सत्य-दर्पण से कपट को भेदने का वैज्ञानिक विवेक नहीं है, देवि। मैं इस चौदहवीं सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

Panel 33
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King Bhoja steps down from the fourteenth step, ordering trade inspection tribunals established

राजा भोज चौदहवीं सीढ़ी से नीचे उतरे और धारानगरी तथा पूरे मालवा के बाज़ारों में स्वतंत्र व्यापार-निरीक्षण और उपभोक्ता संरक्षण न्यायालय स्थापित करने का आदेश दिया।

Panel 34
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King Bhoja issues royal proclamations establishing consumer protection tribunals

राज्य-भर में व्यापारियों और ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा हेतु प्रामाणिक माप-तोल मण्डलों का गठन हुआ।

Panel 35
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Twilight conches echo across Dharanagari as Taramati smiles and freezes back into silent bronze

संध्याकाल के शंख गूँज उठे और तारामती मन्द मुस्कान के साथ पुनः मौन कांस्य-प्रतिमा बन गई। **सिंहासन बत्तीसी का चौदहवाँ दिन सम्पन्न हुआ!**

Panel 36
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The remaining eighteen celestial statues gleam in the evening torchlight

शेष अठारह कांस्य-पुतलियाँ सन्ध्या की मशालों में जगमगाती रहीं, पंद्रहवीं पुतली की अमर गाथा की प्रतीक्षा करते हुए।

Panel 37
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King Bhoja departs the throne room in quiet contemplation, inspired by Vikramaditya's justice
राजा भोज
कल प्रातःकाल हम पंद्रहवीं सीढ़ी पर कदम रखेंगे और पंद्रहवीं पुतली—कमलिनी—की अमर गाथा सुनेंगे!

राजा भोज धर्म और निष्पक्ष न्याय के अमर आदर्शों से प्रेरित होकर मौन भाव से राजसभा से प्रस्थान कर गए।

राजा भोज

कल प्रातःकाल हम पंद्रहवीं सीढ़ी पर कदम रखेंगे और पंद्रहवीं पुतली—कमलिनी—की अमर गाथा सुनेंगे!

Panel 38
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