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सप्तदश पुतली विद्यावती: नव-रत्नों की सभा, दण्डी संन्यासी का एक धान्य और ज्ञानी का पावन सत्कार

सिंहासन बत्तीसी (३२ पुतलियों की अमर गाथा)• katha

सप्तदश पुतली विद्यावती: नव-रत्नों की सभा, दण्डी संन्यासी का एक धान्य और ज्ञानी का पावन सत्कार

The Seventeenth Statue: Vidyavati & The Assembly of Scholars

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दृश्य 1

सप्तदश सूर्योदय और विद्यावती का प्रबोधन

The Seventeenth Dawn & Vidyavati
Morning sunlight streams across the sandstone colonnade onto the 32-step golden throne, launching Season 3

सत्रहवें प्रभात की स्वर्णिम किरणों ने धारानगरी के राजप्रासाद को आलोकित किया, जहाँ राजा भोज ने तृतीय सत्र (सीज़न ३) के शुभारम्भ हेतु विशेष तपस्या पूर्ण की।

Panel 1
•
King Bhoja in sacred saffron silks approaches the seventeenth step of the throne

केसरिया परिधान धारण कर राजा भोज विनीत चरणों से सत्रहवीं सीढ़ी की ओर बढ़े।

Panel 2
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The marble dais erupts with brilliant sapphire-azure and emerald radiance

जैसे ही राजा का चरण सत्रहवीं सीढ़ी के निकट पहुँचा, मणिक वेदी नील-मणि और मरकत-हरित दिव्य प्रकाश से प्रदीप्त हो उठी!

Panel 3
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The seventeenth carved statue Vidyavati opens her glowing sapphire-azure eyes, laughing musically
पुतली विद्यावती
ठहरो, राजा भोज! इस सत्रहवीं सीढ़ी पर कदम रखने का दुस्साहस मत करो!

सत्रहवीं कांस्य-पुतली—विद्यावती—की नील-नयन खुले और वह सुवर्ण-ज्ञान-ग्रन्थ व स्फटिक-माला हाथ में लिए दिव्य हँसी के साथ सजीव हो उठी!

पुतली विद्यावती

ठहरो, राजा भोज! इस सत्रहवीं सीढ़ी पर कदम रखने का दुस्साहस मत करो!

Panel 4
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King Bhoja halts in deep reverence with folded hands, gazing at the living bronze maiden
राजा भोज
हे विद्यावती देवि! विक्रमादित्य के किस ज्ञान-विवेक और निरहंकार सत्कार की पावन गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

राजा भोज ने नतमस्तक होकर हाथ जोड़े और ज्ञान-ग्रन्थ धारण की हुई पुतली की ओर देखा।

राजा भोज

हे विद्यावती देवि! विक्रमादित्य के किस ज्ञान-विवेक और निरहंकार सत्कार की पावन गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

Panel 5
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Vidyavati speaks: 'Do you possess the boundless reverence for true wisdom of Vikramaditya?'
पुतली विद्यावती
क्या तुममें विक्रमादित्य जैसा सच्चा ज्ञान-विवेक और अहंकार-रहित भाव है, जब पाँच सौ अभिमानी पण्डितों ने नव-रत्न भेंट किए, और विक्रमादित्य ने केवल एक चावल का दाना लाने वाले मौनी संन्यासी को सर्वोच्च आसन पर बैठाकर मस्तक झुकाया?

विद्यावती ने सुवर्ण-ज्ञान-ग्रन्थ उठाकर गम्भीर वाणी में कहा:

पुतली विद्यावती

क्या तुममें विक्रमादित्य जैसा सच्चा ज्ञान-विवेक और अहंकार-रहित भाव है, जब पाँच सौ अभिमानी पण्डितों ने नव-रत्न भेंट किए, और विक्रमादित्य ने केवल एक चावल का दाना लाने वाले मौनी संन्यासी को सर्वोच्च आसन पर बैठाकर मस्तक झुकाया?

Panel 6
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दृश्य 2

पाँच सौ पण्डितों की महा-विद्वत्-सभा और नव-रत्न

The Grand Conclave of Five Hundred Scholars
In the opulent assembly hall of ancient Ujjayini, Vikramaditya presides over a grand gathering

उज्जयिनी के विशाल मणिक-सभागार में सम्राट विक्रमादित्य की अध्यक्षता में आर्यावर्त के पाँच सौ प्रख्यात आचार्यों की महा-विद्वत्-सभा आयोजित हुई।

Panel 7
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Renowned philosophers in rich silks debate heatedly with palm-leaf manuscripts
काशी के पण्डित
तर्क की पराकाष्ठा ही ब्रह्म-ज्ञान का प्रमाण है!

काशी, मिथिला और तक्षशिला से आए विद्वान् रेशमी वस्त्रों में न्याय, वैशेषिक और वेदान्त के गूढ़ सूत्रों पर उग्र शास्त्रार्थ कर रहे थे।

काशी के पण्डित

तर्क की पराकाष्ठा ही ब्रह्म-ज्ञान का प्रमाण है!

Panel 8
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Proud scholar Vidyanidhi presents a golden tray containing nine dazzling planetary gems
विद्वद्वरेण्य विद्यानिधि
महाराज! ये नव-रत्न हमारे प्रकाण्ड ज्ञान और आपकी चक्रवर्ती सत्ता के अमर प्रतीक हैं!

प्रधान तार्किक विद्यानिधि ने सुवर्ण-थाल में जड़े नौ अलौकिक नव-रत्न (माणिक्य, मुक्ता, विद्रुम, मरकत, पुखराज, हीरा, नीलम, गोमेद, वैदूर्य) सम्राट को भेंट किए।

विद्वद्वरेण्य विद्यानिधि

महाराज! ये नव-रत्न हमारे प्रकाण्ड ज्ञान और आपकी चक्रवर्ती सत्ता के अमर प्रतीक हैं!

Panel 9
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The nine planetary gems gleaming in emerald, ruby, pearl, sapphire, and diamond brilliance

थाल में रखे नव-रत्नों का तेज पूरी राजसभा को चौंधिया रहा था; पण्डित अपनी बौद्धिक श्रेष्ठता पर गर्व से फूले न समा रहे थे।

Panel 10
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The proud scholar proclaims that supreme sovereignty is founded upon scholastic conquest

विद्यानिधि ने घोषणा की: 'संसार में विद्या की शक्ति और रत्नों का वैभव ही राजा को अमर बनाते हैं!'

Panel 11
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Vikramaditya listens with a calm discerning smile, seeing the pride behind their words

विक्रमादित्य मन्द मुस्कान से देखते रहे; उन्हें दिखाई दिया कि इस पाण्डित्य के पीछे अहंकार और राज-आश्रय पाने की लालसा छिपी है।

Panel 12
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दृश्य 3

मौन संन्यासी महर्षि ज्ञानशील और एक पवित्र धान्य

The Silent Forest Hermit & The Single Grain
Barefoot and dressed in simple tree-bark garments, Sage Jnana-Shila walks quietly past palace guards

तभी विन्ध्याचल की गुफाओं में साधना करने वाले सत्तर वर्षीय मौनी संन्यासी महर्षि ज्ञानशील नंगे पाँव वल्कल वस्त्र पहने राजसभा में प्रविष्ट हुए।

Panel 13
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The silent sage enters the grand hall, his presence calm and radiant

संन्यासी के मुख-मण्डल पर अगाध शान्ति और दिव्य तेज था; उनके हाथ में न कोई पोथी थी, न कोई आभूषण।

Panel 14
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Proud scholars point and whisper in mocking laughter at the rustic ascetic's rough robes
अभिमानी पण्डित
इस अनपढ़ वनवासी का इस विद्वत्-सभा में क्या काम?!

रेशमी वस्त्रों में सजे पण्डितों ने उस फटेहाल वनवासी को देखकर उपहास किया और कानाफूसी करने लगे।

अभिमानी पण्डित

इस अनपढ़ वनवासी का इस विद्वत्-सभा में क्या काम?!

Panel 15
•
Sage Jnana-Shila walks calmly to the royal dais without uttering a single word

बिना किसी शास्त्रार्थ या विवाद के महर्षि ज्ञानशील मन्द गति से सीधे सम्राट के सिंहासन की वेदी तक पहुँचे।

Panel 16
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The sage gently places a single pure unhusked grain of sacred rice on the golden tray

संन्यासी ने पीपल के पत्ते से एक अनकुटा, शुद्ध अक्षत—धान का एक अकेला दाना—उठाकर नव-रत्नों के थाल के मध्य में रख दिया।

Panel 17
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Scholar Vidyanidhi laughs arrogantly: 'What worth is a single grain before nine imperial gems?!'
विद्वद्वरेण्य विद्यानिधि
एक निर्धन वनवासी हमारे नव-रत्नों के सामने चावल का एक दाना रखकर क्या सिद्ध करना चाहता है?! क्या यह राजसभा का उपहास नहीं है?!

विद्यानिधि ठहाका मार कर हँस पड़े:

विद्वद्वरेण्य विद्यानिधि

एक निर्धन वनवासी हमारे नव-रत्नों के सामने चावल का एक दाना रखकर क्या सिद्ध करना चाहता है?! क्या यह राजसभा का उपहास नहीं है?!

Panel 18
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दृश्य 4

एक धान्य की महिमा और सुवर्ण-तुला का दिव्य निर्णय

The Parable of the Single Grain & The Cosmic Scales
Vikramaditya stands up from his throne, bowing his crowned head in profound respect

सम्राट विक्रमादित्य अपने सिंहासन से उतर आए और मुकुट झुकाकर मौनी संन्यासी के चरणों में साष्टांग प्रणाम किया।

Panel 19
•
Royal attendants bring a large golden judicial scale and place it in the center of the dais
सम्राट विक्रमादित्य
आज इस तुला पर पाण्डित्य के दम्भ और सादगी के सत्य का परीक्षण होगा!

विक्रमादित्य ने राज-तुला मँगवाई और सभागार के मध्य में स्थापित कराई।

सम्राट विक्रमादित्य

आज इस तुला पर पाण्डित्य के दम्भ और सादगी के सत्य का परीक्षण होगा!

Panel 20
•
The Emperor places the nine gems on one pan, and the hermit's single grain of rice on the opposite pan

सम्राट ने तुला के एक पलड़े पर नौ भारी अलौकिक रत्न रखे और दूसरे पलड़े पर संन्यासी का वह अकेला अक्षत-धान्य रख दिया।

Panel 21
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Vikramaditya proclaims: 'A million diamonds cannot sprout a blade of grass; a single grain holds cosmic life!'
सम्राट विक्रमादित्य
लाखों हीरे मिलकर भी एक तिनका नहीं उगा सकते और न ही किसी भूखे का पेट भर सकते हैं; परन्तु यह एक अक्षत-धान्य अपने भीतर अनन्त जीवन और सृष्टि का बीज संजोए हुए है! यही निरहंकार ज्ञान का सार है!

विक्रमादित्य ने गम्भीर वाणी में सत्य का उद्घोष किया:

सम्राट विक्रमादित्य

लाखों हीरे मिलकर भी एक तिनका नहीं उगा सकते और न ही किसी भूखे का पेट भर सकते हैं; परन्तु यह एक अक्षत-धान्य अपने भीतर अनन्त जीवन और सृष्टि का बीज संजोए हुए है! यही निरहंकार ज्ञान का सार है!

Panel 22
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Blazing with divine spiritual light, the pan holding the single grain of rice tips downwards

अलौकिक चमत्कार हुआ—दिव्य पुण्य-भार से चावल के एक अकेले दाने वाला पलड़ा भारी होकर नीचे झुक गया, जबकि नौ भारी रत्न ऊपर उठ गए!

Panel 23
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The five hundred scholars gasp in breathless shock as the scale reveals the spiritual weight
विद्वद्वरेण्य विद्यानिधि
यह... यह ईश्वरीय न्याय है! हमारे पाण्डित्य का अहंकार नष्ट हो गया!

पाँच सौ पण्डित स्तब्ध होकर अपने स्थान पर खड़े रह गए; अहंकार का पर्वत ज्ञान के एक कण के सामने चूर-चूर हो गया!

विद्वद्वरेण्य विद्यानिधि

यह... यह ईश्वरीय न्याय है! हमारे पाण्डित्य का अहंकार नष्ट हो गया!

Panel 24
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दृश्य 5

सर्वोच्च ज्ञान-सिंहासन और नव-रत्नों का लोकोपकार

The Highest Throne of Wisdom & Renunciation
Proud scholars bow their heads in deep humility, realizing the folly of intellectual arrogance
मिथिला के आचार्य
हम शब्दों के जाल में उलझे रहे, जबकि सत्य इस मौन संन्यासी के साथ था!

पाँच सौ विद्वानों ने लज्जा और आत्म-ग्लानि से सिर झुका लिया; वे समझ गए कि सच्चा ज्ञान वाद-विवाद में नहीं, निष्काम जीवन में है।

मिथिला के आचार्य

हम शब्दों के जाल में उलझे रहे, जबकि सत्य इस मौन संन्यासी के साथ था!

Panel 25
•
Vikramaditya takes Sage Jnana-Shila by the hand, seating him on the supreme ivory throne
सम्राट विक्रमादित्य
जिसके हृदय में परमात्मा का सत्य है, वही आर्यावर्त का वास्तविक अधिपति है!

विक्रमादित्य ने महर्षि ज्ञानशील का हाथ थामकर उन्हें राजसभा के सर्वोच्च गजदन्त-सिंहासन पर ससम्मान बैठाया।

सम्राट विक्रमादित्य

जिसके हृदय में परमात्मा का सत्य है, वही आर्यावर्त का वास्तविक अधिपति है!

Panel 26
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In ultimate humility, the Emperor washes the dust from the hermit's feet with sacred Ganga water
महामन्त्री
सम्राट ने ज्ञान के वास्तविक स्वरूप को मुकुट से ऊँचा स्थान दिया है!

सम्राट ने सुवर्ण-पात्र से गंगाजल लेकर स्वयं अपने हाथों से वनवासी संन्यासी के चरण पखारे।

महामन्त्री

सम्राट ने ज्ञान के वास्तविक स्वरूप को मुकुट से ऊँचा स्थान दिया है!

Panel 27
•
Vikramaditya distributes the nine gems to build free libraries, gurukuls, and public granaries

विक्रमादित्य ने उन नव-रत्नों को बेचकर राज्य-भर में निःशुल्क गुरुकुल, ग्रन्थागार और अन्नागार स्थापित करने का आदेश दिया।

Panel 28
•
Sage Jnana-Shila places his hand on the Emperor's forehead, radiating divine grace

महर्षि ज्ञानशील ने सम्राट के मस्तक पर हाथ रखकर मौन आशीर्वाद दिया: 'जो सत्य को मुकुट से ऊँचा रखता है, उसका यश युग-युगान्तर तक अमर रहेगा!'

Panel 29
•
The entire assembly of five hundred scholars prostrates before the hermit and the Emperor

पाँच सौ पण्डितों ने एक स्वर में महर्षि और सम्राट के चरणों में साष्टांग प्रणाम किया; ज्ञान-सभा साक्षात् तपोभूमि बन गई।

Panel 30
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दृश्य 6

विद्यावती का निर्णय और तृतीय सत्र (सीज़न ३) का शुभारम्भ

Vidyavati
Back in Dharanagari palace, Vidyavati looks directly at King Bhoja with sapphire-azure eyes

धारानगरी के सभा-भवन में सजीव पुतली विद्यावती ने राजा भोज को गम्भीर नील-नयनों से देखा।

Panel 31
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Vidyavati challenges: 'Have you ever honored silent, egoless wisdom above proud scholars?'
पुतली विद्यावती
अब कहो, राजा भोज—क्या तुमने कभी पाँच सौ पण्डितों के नव-रत्नों और पाण्डित्य-दम्भ के ऊपर एक मौनी संन्यासी के चावल के दाने को तौलकर सर्वोच्च सम्मान दिया है? यदि ऐसा निष्काम ज्ञान-विवेक तुममें है, तो कदम बढ़ाओ! अन्यथा लौट जाओ!

विद्यावती ने सत्रहवीं सीढ़ी की चुनौती दी:

पुतली विद्यावती

अब कहो, राजा भोज—क्या तुमने कभी पाँच सौ पण्डितों के नव-रत्नों और पाण्डित्य-दम्भ के ऊपर एक मौनी संन्यासी के चावल के दाने को तौलकर सर्वोच्च सम्मान दिया है? यदि ऐसा निष्काम ज्ञान-विवेक तुममें है, तो कदम बढ़ाओ! अन्यथा लौट जाओ!

Panel 32
•
King Bhoja lowers his head in deep humility and introspection, acknowledging Vikramaditya's discernment
राजा भोज
मुझमें विक्रमादित्य जैसा सच्चा ज्ञान-विवेक, पण्डितों के दम्भ को पहचानने की दृष्टि और सादगी के सामने नतमस्तक होने का त्याग नहीं है, देवि। मैं इस सत्रहवीं सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

राजा भोज ने लज्जा और श्रद्धा से सिर झुका लिया:

राजा भोज

मुझमें विक्रमादित्य जैसा सच्चा ज्ञान-विवेक, पण्डितों के दम्भ को पहचानने की दृष्टि और सादगी के सामने नतमस्तक होने का त्याग नहीं है, देवि। मैं इस सत्रहवीं सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

Panel 33
•
King Bhoja steps down from the seventeenth step, ordering rural gurukul endowments established

राजा भोज सत्रहवीं सीढ़ी से नीचे उतरे और धारानगरी तथा पूरे मालवा में ग्रामीण आचार्यों, वनवासी आश्रमों और ग्रन्थागारों हेतु राज-कोष से स्थाई अनुदान जारी करने का आदेश दिया।

Panel 34
•
King Bhoja issues royal proclamations establishing free endowments for rural gurukuls

राज्य-भर में सादगी और आध्यात्मिक ज्ञान के संवर्धन हेतु विद्वत्-परिषदों का पुनर्गठन हुआ।

Panel 35
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Twilight conches echo across Dharanagari as Vidyavati smiles and freezes back into silent bronze

संध्याकाल के शंख गूँज उठे और विद्यावती मन्द मुस्कान के साथ पुनः मौन कांस्य-प्रतिमा बन गई। **सिंहासन बत्तीसी का सत्रहवाँ दिन सम्पन्न हुआ और सीज़न ३ का शुभारम्भ हुआ!**

Panel 36
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The remaining fifteen celestial statues gleam in the evening torchlight

शेष पंद्रह कांस्य-पुतलियाँ सन्ध्या की मशालों में जगमगाती रहीं, अठारहवीं पुतली (तारावती) की अमर गाथा की प्रतीक्षा करते हुए।

Panel 37
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King Bhoja departs the throne hall in quiet contemplation, inspired by Vikramaditya's wisdom
राजा भोज
"कल प्रातःकाल हम अठारहवीं सीढ़ी पर कदम रखेंगे और अठारहवीं पुतली—तारावती—की अमर गाथा सुनेंगे!"

राजा भोज ज्ञान के अहंकार-रहित उच्चतर सत्यों को आत्मसात करते हुए मौन भाव से राजसभा से प्रस्थान कर गए।

राजा भोज

"कल प्रातःकाल हम अठारहवीं सीढ़ी पर कदम रखेंगे और अठारहवीं पुतली—तारावती—की अमर गाथा सुनेंगे!"

Panel 38
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