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द्वाविंशति पुतली अनुरोधवती: निष्ठावान् तन्तुवाय का पावन वस्त्र, सुवर्ण-तूरी का विवाद और सत्य-श्रम का न्याय

सिंहासन बत्तीसी (३२ पुतलियों की अमर गाथा)• katha

द्वाविंशति पुतली अनुरोधवती: निष्ठावान् तन्तुवाय का पावन वस्त्र, सुवर्ण-तूरी का विवाद और सत्य-श्रम का न्याय

The Twenty-Second Statue: Anurodhavati & The Master Weaver

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दृश्य 1

बाईसवाँ सूर्योदय और अनुरोधवती का प्रबोधन

The Twenty-Second Dawn & Anurodhavati
Morning sunlight streams across the sandstone colonnade onto the 32-step golden throne

बाईसवें प्रभात की स्वर्णिम किरणों ने धारानगरी के राजप्रासाद को आलोकित किया, जहाँ राजा भोज ने पूर्ण निष्ठा से अपनी साधना पूर्ण की।

Panel 1
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King Bhoja in sacred saffron silks approaches the twenty-second step of the throne

केसरिया परिधान धारण कर राजा भोज विनीत चरणों से बाईसवीं सीढ़ी की ओर बढ़े।

Panel 2
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The marble dais erupts with brilliant saffron-golden and topaz-amber radiance

जैसे ही राजा का चरण बाईसवीं सीढ़ी के निकट पहुँचा, मणिक वेदी कुंकुम-स्वर्णिम और पुखराज-पीत दिव्य प्रकाश से प्रदीप्त हो उठी!

Panel 3
•
The twenty-second carved statue Anurodhavati opens her glowing saffron-golden eyes, laughing musically
पुतली अनुरोधवती
ठहरो, राजा भोज! इस बाईसवीं सीढ़ी पर कदम रखने का दुस्साहस मत करो!

बाईसवीं कांस्य-पुतली—अनुरोधवती—की स्वर्णिम-नयन खुले और वह सुवर्ण-तूरी (शटल) व रेशमी वस्त्र हाथ में लिए दिव्य हँसी के साथ सजीव हो उठी!

पुतली अनुरोधवती

ठहरो, राजा भोज! इस बाईसवीं सीढ़ी पर कदम रखने का दुस्साहस मत करो!

Panel 4
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King Bhoja halts in deep reverence with folded hands, gazing at the living bronze maiden
राजा भोज
हे अनुरोधवती देवि! विक्रमादित्य के किस शिल्प-विवेक और श्रमजीवियों की रक्षा की अमर गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

राजा भोज ने नतमस्तक होकर हाथ जोड़े और सुवर्ण-तूरी धारण की हुई पुतली की ओर देखा।

राजा भोज

हे अनुरोधवती देवि! विक्रमादित्य के किस शिल्प-विवेक और श्रमजीवियों की रक्षा की अमर गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

Panel 5
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Anurodhavati speaks: 'Do you possess the forensic discernment and reverence for honest labor of Vikramaditya?'
पुतली अनुरोधवती
क्या तुममें विक्रमादित्य जैसा सूक्ष्म शिल्प-विवेक और पसीने के श्रम का आदर है, जब एक शक्तिशाली व्यापारी महाजन मण्डल ने निर्धन बुनकर पर चोरी का कलंक लगाया, और सम्राट ने लौंग-जल व सूत्र-गणना से सत्य को उजागर कर दिया?

अनुरोधवती ने सुवर्ण-तूरी उठाकर गम्भीर वाणी में कहा:

पुतली अनुरोधवती

क्या तुममें विक्रमादित्य जैसा सूक्ष्म शिल्प-विवेक और पसीने के श्रम का आदर है, जब एक शक्तिशाली व्यापारी महाजन मण्डल ने निर्धन बुनकर पर चोरी का कलंक लगाया, और सम्राट ने लौंग-जल व सूत्र-गणना से सत्य को उजागर कर दिया?

Panel 6
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दृश्य 2

काशी का निष्ठावान् तन्तुवाय और महाजन का षड्यन्त्र

The Master Weaver & The Stolen Silk Accusation
In the grand audience hall of ancient Ujjayini, Vikramaditya presides over a petition

उज्जयिनी के राज-सभागार में काशी का साठ वर्षीय निर्धन तन्तुवाय (बुनकर) पद्मनाभ तीन वर्षों की अनथक साधना से बुना हुआ एक अलौकिक वस्त्र लेकर उपस्थित हुआ।

Panel 7
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Padmanabha presents an ethereal gold-and-silk mantle woven over three years
तन्तुवाय पद्मनाभ
महाराज! मैंने गायत्री मन्त्र के एक-एक जाप के साथ इस वस्त्र के तार काते हैं; यह आपकी चक्रवर्ती शोभा हेतु समर्पित है!

पद्मनाभ ने सम्राट के चरणों में 'सुवर्ण-उत्तरीय' खोला, जो पंख से भी हल्का, शुद्ध सोने के तारों और कमल-तन्तुओं से बुना हुआ था।

तन्तुवाय पद्मनाभ

महाराज! मैंने गायत्री मन्त्र के एक-एक जाप के साथ इस वस्त्र के तार काते हैं; यह आपकी चक्रवर्ती शोभा हेतु समर्पित है!

Panel 8
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Guild President Seth Hemadatta bursts into the court with armed guards
श्रेष्ठि हेमदत्त
यह वस्त्र हमारे महाजन मण्डल की सम्पत्ति है! इस चोर ने हमारे गोदाम से सोने के तार और प्राचीन सुवर्ण-तूरी चुराकर यह चादर बनाई है!

तभी वस्त्र-व्यापारी महाजन मण्डल का धनी अध्यक्ष—श्रेष्ठि हेमदत्त—पहरेदारों के साथ आ धमका और चीखने लगा!

श्रेष्ठि हेमदत्त

यह वस्त्र हमारे महाजन मण्डल की सम्पत्ति है! इस चोर ने हमारे गोदाम से सोने के तार और प्राचीन सुवर्ण-तूरी चुराकर यह चादर बनाई है!

Panel 9
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Hemadatta presents forged ledger scrolls and four bribed master appraisers
बिकाऊ पारखी
हम सब प्रमाणित करते हैं कि यह सोना और बुनाई महाजन मण्डल की ही है!

हेमदत्त ने राज-मुहर लगे जाली बही-खाते और चार बिकाऊ पारखियों को गवाह के रूप में पेश किया जिन्होंने शपथ खाई कि सोना महाजन का ही है।

बिकाऊ पारखी

हम सब प्रमाणित करते हैं कि यह सोना और बुनाई महाजन मण्डल की ही है!

Panel 10
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Padmanabha weeps before the Emperor: 'I have never touched stolen gold in sixty years!'

वृद्ध पद्मनाभ थर-थर काँपते हुए रो पड़ा: 'मैंने साठ वर्षों के जीवन में कभी किसी का एक तिनका नहीं चुराया; यह वस्त्र मेरे अपने पसीने और तपस्या की कमाई है!'

Panel 11
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The court magistrates examine the stamped registers, preparing to sentence the weaver

न्यायाधीश महाजन के बही-खातों से प्रभावित होकर तन्तुवाय के हाथ काटने और वस्त्र जब्त करने का दण्ड सुनाने ही वाले थे।

Panel 12
•
दृश्य 3

शिल्प-शास्त्र और सम्राट का रासायनिक परीक्षण

The Emperor
Vikramaditya raises his hand, stepping down to examine the contested silk fabric
सम्राट विक्रमादित्य
ठहरो! कागजी बही-खाते झूठे हो सकते हैं, परन्तु वस्त्र के एक-एक धागे में बुनकर की आत्मा और तकनीक का साक्ष्य अंकित होता है!

सम्राट विक्रमादित्य ने अपना हाथ उठाकर दण्ड रोका और स्वयं वस्त्र के समीप आकर उसके रेशों का सूक्ष्म निरीक्षण किया।

सम्राट विक्रमादित्य

ठहरो! कागजी बही-खाते झूठे हो सकते हैं, परन्तु वस्त्र के एक-एक धागे में बुनकर की आत्मा और तकनीक का साक्ष्य अंकित होता है!

Panel 13
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Vikramaditya explains textile science: 'Commercial looms use starch gums, but a master spins with lotus dew!'

विक्रमादित्य ने शिल्प-शास्त्र का मर्म बताया: 'व्यापारिक करघों का कपड़ा गोंद और मिलावटी रंगों से चमकता है, जबकि सच्चे साधक का वस्त्र पर्वत के मोम और कमल-जल से काता जाता है!'

Panel 14
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Vikramaditya commands attendants to bring basins of warm clove water and crystal magnifying lenses

विक्रमादित्य ने राज-परिचारकों को गुनगुने लौंग-जल के पात्र और स्फटिक के विशाल आवर्धक लेन्स (लेंस) लाने की आज्ञा दी।

Panel 15
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The judicial table is prepared in the sunlit center of the hall

सभागार के मध्य में न्यायिक परीक्षण की वेदी तैयार की गई; दरबारी और व्यापारी कौतूहल से घेरकर खड़े हो गए।

Panel 16
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Hemadatta sweats slightly as the Emperor prepares the chemical and physical tests
श्रेष्ठि हेमदत्त
महाराज! परीक्षण की क्या आवश्यकता है जब हमारे पास मोहरबंद रजिस्टर हैं?!

श्रेष्ठि हेमदत्त के माथे पर पसीने की बूँदें छलक आईं; उसे इस रासायनिक और सूक्ष्म परीक्षण की आशा न थी!

श्रेष्ठि हेमदत्त

महाराज! परीक्षण की क्या आवश्यकता है जब हमारे पास मोहरबंद रजिस्टर हैं?!

Panel 17
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Padmanabha stands peacefully with folded hands, trusting in the purity of his labor

तन्तुवाय पद्मनाभ हाथ जोड़े शान्त खड़ा रहा; उसे अपने श्रम की पवित्रता और ईश्वर के न्याय पर पूर्ण विश्वास था।

Panel 18
•
दृश्य 4

लौंग-जल परीक्षण, १०८ सूत्रों की गणना और सत्य का प्रकटीकरण

The Thread-Count & Clove-Water Trial
Vikramaditya dips a strip of commercial guild silk alongside a thread from Padmanabha's mantle

विक्रमादित्य ने महाजन के कारखाने के रेशम का एक टुकड़ा और पद्मनाभ के वस्त्र का एक धागा गुनगुने लौंग-जल में एक साथ डुबोया।

Panel 19
•
The guild silk immediately bleeds murky chemical dye and thick starch gum

महाजन के रेशम से तत्काल कृत्रिम काला-पीला रंग और चिपचिपा मांडी-गोंद छूटने लगा, जिससे पानी गन्दला हो गया!

Panel 20
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Padmanabha's master thread remains pure, sparkling, and releases the sweet fragrance of beeswax and lotus
दरबारी
अद्भुत! इस धागे से कमल और मोम की दिव्य सुगन्ध आ रही है!

परन्तु पद्मनाभ का धागा जल में काँच जैसा निर्मल चमकता रहा और उससे शुद्ध पहाड़ी मधुमक्खी के मोम व कमल-जल की मनभावन सुगन्ध फूट पड़ी!

दरबारी

अद्भुत! इस धागे से कमल और मोम की दिव्य सुगन्ध आ रही है!

Panel 21
•
Vikramaditya inspects the fabric under a polished crystal magnifying lens

अब विक्रमादित्य ने स्फटिक के आवर्धक लेंस से वस्त्र की बुनाई के ताने-बाने की सूक्ष्म गणना आरम्भ की।

Panel 22
•
Under magnification, exactly 1,008 micro-threads per inch are woven in the sacred Vedic count

लेंस के नीचे प्रति अंगुल में ठीक **एक हज़ार आठ (१००८)** सूक्ष्म सूत्र निकले—१०८ वैदिक मन्त्रों की लयबद्ध हस्तशिल्प तकनीक, जो किसी भी व्यावसायिक करघे से असम्भव थी!

Panel 23
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The ministers and guild appraisers gasp as the physical textile evidence proves the truth
प्रधान धर्माधिकारी
यह वस्त्र साक्षात् साधना की रचना है; यह किसी कारखाने का हो ही नहीं सकता!

सारे मन्त्री और पारखी विस्मय से स्तब्ध रह गए; वस्त्र के धागों ने स्वयं चीख-चीख कर अपने सच्चे स्वामी का नाम बता दिया था!

प्रधान धर्माधिकारी

यह वस्त्र साक्षात् साधना की रचना है; यह किसी कारखाने का हो ही नहीं सकता!

Panel 24
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दृश्य 5

महाजन का दण्ड, वस्त्र का सम्मान और महा-वस्त्राध्यक्ष का पद

The Fall of the Guild & The Weaver
Caught by forensic science, Seth Hemadatta and his appraisers fall to their knees, confessing
श्रेष्ठि हेमदत्त
क्षमा करें, महाराज! हमने इसके अद्वितीय रूप को देखकर लोभ में झूठा मुकदमा रचा था!

वैज्ञानिक साक्ष्य के सामने श्रेष्ठि हेमदत्त और उसके चारों झूठे पारखी थर-थर काँपते हुए घुटनों पर गिर पड़े और अपना सारा षड्यन्त्र स्वीकार कर लिया।

श्रेष्ठि हेमदत्त

क्षमा करें, महाराज! हमने इसके अद्वितीय रूप को देखकर लोभ में झूठा मुकदमा रचा था!

Panel 25
•
Vikramaditya revokes the corrupt guild president's license, fining him twenty thousand gold dinars

विक्रमादित्य ने हेमदत्त का व्यापारिक अधिकार-पत्र रद्द कर उस पर बीस हज़ार स्वर्ण-दीनार का दण्ड लगाया और वह सारी धनराशि पद्मनाभ को दिलवाई!

Panel 26
•
Vikramaditya drapes the magnificent gold-and-silk mantle over his shoulders
सम्राट विक्रमादित्य
पवित्र श्रम से बुना हुआ यह वस्त्र किसी भी स्वर्ण-मुकुट से अधिक पावन और मूल्यवान है!

सम्राट ने वह पावन सुवर्ण-उत्तरीय ससम्मान अपने कन्धों पर धारण किया और राजसभा जगमगा उठी।

सम्राट विक्रमादित्य

पवित्र श्रम से बुना हुआ यह वस्त्र किसी भी स्वर्ण-मुकुट से अधिक पावन और मूल्यवान है!

Panel 27
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The Emperor appoints Padmanabha as Chief Master of the Imperial Silk Guild

विक्रमादित्य ने पद्मनाभ को पाँच हज़ार स्वर्ण-दीनार का अतिरिक्त पुरस्कार दिया और उन्हें पूरे मालवा का 'महा-वस्त्राध्यक्ष' नियुक्त किया।

Panel 28
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Padmanabha touches the Emperor's feet in tears of joy, his craftsmanship honored
तन्तुवाय पद्मनाभ
आपने निर्धन के पसीने को भगवान के प्रसाद का सम्मान दिया, महाराज!

पद्मनाभ ने आनन्द के अश्रुओं से सम्राट के चरण स्पर्श किए; साठ वर्षों की उपेक्षित कला आज आर्यावर्त के सिंहासन पर प्रतिष्ठित हो चुकी थी!

तन्तुवाय पद्मनाभ

आपने निर्धन के पसीने को भगवान के प्रसाद का सम्मान दिया, महाराज!

Panel 29
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The entire assembly of Ujjayini erupts in thunderous cheering, celebrating honest labor

उज्जयिनी का सभागार जयघोष से गूँज उठा: 'श्रम-रक्षक सम्राट विक्रमादित्य की जय हो!'

Panel 30
•
दृश्य 6

अनुरोधवती का निर्णय और राजा भोज का संकोच

Anurodhavati
Back in Dharanagari palace, Anurodhavati looks directly at King Bhoja with saffron-golden eyes

धारानगरी के सभा-भवन में सजीव पुतली अनुरोधवती ने राजा भोज को गम्भीर स्वर्णिम नयनों से देखा।

Panel 31
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Anurodhavati challenges: 'Have you ever protected a poor weaver against a powerful corporate guild?'
पुतली अनुरोधवती
अब कहो, राजा भोज—क्या तुमने कभी शक्तिशाली महाजनों के जाली बही-खातों को विज्ञान से झुठलाकर किसी निर्धन बुनकर के पसीने का सत्कार किया है? यदि ऐसा सूक्ष्म शिल्प-विवेक और श्रम-गौरव तुममें है, तो कदम बढ़ाओ! अन्यथा लौट जाओ!

अनुरोधवती ने बाईसवीं सीढ़ी की चुनौती दी:

पुतली अनुरोधवती

अब कहो, राजा भोज—क्या तुमने कभी शक्तिशाली महाजनों के जाली बही-खातों को विज्ञान से झुठलाकर किसी निर्धन बुनकर के पसीने का सत्कार किया है? यदि ऐसा सूक्ष्म शिल्प-विवेक और श्रम-गौरव तुममें है, तो कदम बढ़ाओ! अन्यथा लौट जाओ!

Panel 32
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King Bhoja lowers his head in deep humility and introspection, acknowledging Vikramaditya's wisdom
राजा भोज
मुझमें विक्रमादित्य जैसा सूक्ष्म शिल्प-विवेक, महाजनों के दबाव से ऊपर उठकर निष्पक्ष न्याय करने की दृष्टि और श्रमजीवियों को मुकुट के समान आदर देने का शील नहीं है, देवि। मैं इस बाईसवीं सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

राजा भोज ने लज्जा और श्रद्धा से सिर झुका लिया:

राजा भोज

मुझमें विक्रमादित्य जैसा सूक्ष्म शिल्प-विवेक, महाजनों के दबाव से ऊपर उठकर निष्पक्ष न्याय करने की दृष्टि और श्रमजीवियों को मुकुट के समान आदर देने का शील नहीं है, देवि। मैं इस बाईसवीं सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

Panel 33
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King Bhoja steps down from the twenty-second step, ordering artisan guild protections established

राजा भोज बाईसवीं सीढ़ी से नीचे उतरे और धारानगरी तथा पूरे मालवा में हस्तशिल्पियों, बुनकरों और दस्तकारों हेतु निःशुल्क कच्चा माल और न्याय-संरक्षण मण्डल स्थापित करने की आज्ञा दी।

Panel 34
•
King Bhoja issues royal proclamations establishing fair artisan wage protections

राज्य-भर में बुनकरों के शोषण को रोकने और उनके अधिकारों की रक्षा हेतु विशेष शिल्प-न्यासों का गठन हुआ।

Panel 35
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Twilight conches echo across Dharanagari as Anurodhavati smiles and freezes back into silent bronze

संध्याकाल के शंख गूँज उठे और अनुरोधवती मन्द मुस्कान के साथ पुनः मौन कांस्य-प्रतिमा बन गई। **सिंहासन बत्तीसी का बाईसवाँ दिन सम्पन्न हुआ!**

Panel 36
•
The remaining ten celestial statues gleam in the evening torchlight

शेष दस कांस्य-पुतलियाँ सन्ध्या की मशालों में जगमगाती रहीं, तेईसवीं पुतली (धर्मवती) की अमर गाथा की प्रतीक्षा करते हुए।

Panel 37
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King Bhoja departs the throne hall in quiet contemplation, inspired by Vikramaditya's justice
राजा भोज
"कल प्रातःकाल हम तेईसवीं सीढ़ी पर कदम रखेंगे और तेईसवीं पुतली—धर्मवती—की अमर गाथा सुनेंगे!"

राजा भोज श्रम के गौरव और निष्पक्ष न्याय के अमर सत्यों को हृदय में संजोकर मौन भाव से राजसभा से प्रस्थान कर गए।

राजा भोज

"कल प्रातःकाल हम तेईसवीं सीढ़ी पर कदम रखेंगे और तेईसवीं पुतली—धर्मवती—की अमर गाथा सुनेंगे!"

Panel 38
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