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चतुर्थ पुतली कामकन्दला: माधवानल का संगीत, सुवर्ण-वृष्टि और कला-पारखी विक्रमादित्य

सिंहासन बत्तीसी (३२ पुतलियों की अमर गाथा)• katha

चतुर्थ पुतली कामकन्दला: माधवानल का संगीत, सुवर्ण-वृष्टि और कला-पारखी विक्रमादित्य

The Fourth Statue: Kamakandala & The Gold-Raining Cloud

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दृश्य 1

चतुर्थ सूर्योदय और कामकन्दला का प्रबोधन

The Fourth Dawn & Kamakandala
Golden sunlight streams through carved jali screens onto the 32-step throne

चतुर्थ प्रभात की स्वर्णिम रश्मियों ने धारानगरी के राजप्रासाद को आलोकित किया, जहाँ राजा भोज ने पूर्ण निष्ठा से अपना उपवास पूर्ण किया।

Panel 1
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King Bhoja in sacred saffron silks approaches the fourth step of the golden throne

केसरिया रेशमी वस्त्र धारण कर राजा भोज मन्द-मन्द चरणों से चौथी सीढ़ी की ओर बढ़े।

Panel 2
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The marble floor erupts with blinding ruby-crimson and golden radiance

जैसे ही राजा ने चौथा चरण उठाया, संगमरमर का फर्श माणिक्य-लाल और स्वर्णिम दिव्य प्रकाश से धधक उठा!

Panel 3
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The fourth carved bronze statue Kamakandala opens her glowing ruby-red eyes, laughing musically
पुतली कामकन्दला
ठहरो, राजा भोज! इस चौथी सीढ़ी पर कदम रखने का दुस्साहस मत करो!

चौथी कांस्य-पुतली—कामकन्दला—की माणिक आँखें खुलीं और वह वीणा-झंकार-जैसी मधुर हँसी के साथ सजीव हो उठी!

पुतली कामकन्दला

ठहरो, राजा भोज! इस चौथी सीढ़ी पर कदम रखने का दुस्साहस मत करो!

Panel 4
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King Bhoja pauses in deep reverence with folded hands, gazing at the living bronze maiden
राजा भोज
हे कामकन्दला देवि! विक्रमादित्य के किस कला-प्रेम और त्याग की पावन गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

राजा भोज ने विनीत भाव से हाथ जोड़े और सुवर्ण वीणा धारण की हुई पुतली की ओर देखा।

राजा भोज

हे कामकन्दला देवि! विक्रमादित्य के किस कला-प्रेम और त्याग की पावन गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

Panel 5
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Kamakandala speaks: 'Do you possess the aesthetic wisdom and sacrifice of Vikramaditya?'
पुतली कामकन्दला
क्या तुममें विक्रमादित्य जैसी कला-पारखी दृष्टि और उदारता है, जब उन्होंने निष्कासित गन्धर्व-कलाकार माधवानल और नृत्यांगना कामकन्दला के शुद्ध प्रेम के लिए पूरे राज्य पर स्वर्ण की वर्षा करा दी थी?

कामकन्दला ने वीणा के तारों को झंकृत कर दिव्य वाणी में कहा:

पुतली कामकन्दला

क्या तुममें विक्रमादित्य जैसी कला-पारखी दृष्टि और उदारता है, जब उन्होंने निष्कासित गन्धर्व-कलाकार माधवानल और नृत्यांगना कामकन्दला के शुद्ध प्रेम के लिए पूरे राज्य पर स्वर्ण की वर्षा करा दी थी?

Panel 6
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दृश्य 2

निष्कासित वीणा-वादक माधवानल और मध्यरात्रि उज्जयिनी

The Exiled Musician Madhavanala
In ancient Ujjayini near Mahakala temple, Madhavanala sits weeping on stone steps, playing his veena
कवि माधवानल
हे महाकाल! क्या कला का कोई मूल्य नहीं? क्या ईर्ष्यालु राजाओं के भय से सत्य का स्वर सदा मूक रहेगा?

प्राचीन उज्जयिनी में महाकाल मन्दिर के शिला-सोपानों पर निष्कासित विद्वान् कवि एवं वीणा-वादक माधवानल अश्रु बहाते हुए वीणा बजा रहे थे।

कवि माधवानल

हे महाकाल! क्या कला का कोई मूल्य नहीं? क्या ईर्ष्यालु राजाओं के भय से सत्य का स्वर सदा मूक रहेगा?

Panel 7
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The haunting veena melody touches the hearts of birds and deer, who gather in silence

उनकी वीणा के स्वर इतने अलौकिक थे कि वन के मृग और पक्षी मन्त्र-मुग्ध होकर मौन भाव से उनके चारों ओर एकत्र हो गए।

Panel 8
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Vikramaditya in night traveler's disguise stops in awe, listening to the divine ragas

मध्यरात्रि में नगर-भ्रमण करते हुए सम्राट विक्रमादित्य उस अद्वितीय गान्धर्व-संगीत को सुनकर स्तब्ध रह गए।

Panel 9
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Vikramaditya invites the young scholar inside, learning of his banishment

विक्रमादित्य ने युवा विद्वान् को आदरपूर्वक सम्बोधित किया और उनके निष्कासन का दुःखद वृत्तान्त सुना।

Panel 10
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Madhavanala weeps: 'In Kamavati lives Kamakandala; tyrant King Kamasena keeps her captive!'

माधवानल ने कहा: 'कामावती नगरी में अनुपम नृत्यांगना कामकन्दला रहती हैं; हम दोनों की आत्माएँ संगीत से जुड़ी हैं, परन्तु अहंकारी राजा कामसेन ने उन्हें बन्दिनी बना रखा है!'

Panel 11
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Vikramaditya places a reassuring hand on the musician's shoulder
सम्राट विक्रमादित्य
सच्ची कला और निष्कलंक प्रेम कभी पराजित नहीं हो सकते! मैं स्वयं तुम्हारे साथ कामावती चलूँगा!

विक्रमादित्य ने अभय-मुद्रा में कहा:

सम्राट विक्रमादित्य

सच्ची कला और निष्कलंक प्रेम कभी पराजित नहीं हो सकते! मैं स्वयं तुम्हारे साथ कामावती चलूँगा!

Panel 12
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दृश्य 3

कामावती का राजदरबार और भ्रमर-नृत्य की सूक्ष्म परीक्षा

The Secret Dance & The Rhythmic Bee Test
In the opulent marble court of Kamavati, King Kamasena watches a grand dance performance

कामावती के भव्य राजसभा में राजा कामसेन के समक्ष महा-नृत्यांगना कामकन्दला का शास्त्रीय नृत्य आरम्भ हुआ।

Panel 13
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Kamakandala performs an intricate classical dance, her golden ankle bells echoing with mathematical precision

कामकन्दला के घुँघरुओं की झंकार और मृदंग के ताल का ऐसा अद्भुत समन्वय था कि पूरी राजसभा सम्मोहित हो उठी।

Panel 14
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A black bee flies inside Kamakandala's crimson bodice; she subtly flexes her shoulder to breathe it out safely

नृत्य के मध्य एक काला भौंरा उनकी कंचुकी में प्रविष्ट हो गया; बिना ताल तोड़े, कामकन्दला ने श्वास-बल और कंधे की सूक्ष्म गति से भौंरे को बाहर निकाल दिया!

Panel 15
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Madhavanala alone recognizes the mastery of her breath control, standing up to toss his last gold coin
कवि माधवानल
अद्भुत! श्वास और ताल का ऐसा दिव्य योग केवल स्वर्ग की अप्सरा ही सिद्ध कर सकती है!

सहस्रों दर्शकों में केवल माधवानल ने उस अलौकिक श्वास-नियन्त्रण को पहचाना और उठकर अपनी अन्तिम स्वर्ण-मुद्रा उनके चरणों में समर्पित कर दी!

कवि माधवानल

अद्भुत! श्वास और ताल का ऐसा दिव्य योग केवल स्वर्ग की अप्सरा ही सिद्ध कर सकती है!

Panel 16
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King Kamasena rises from his throne in furious arrogance: 'How dare a beggar reward my dancer?!'
राजा कामसेन
सैनिको! इस उद्दण्ड भिक्षुक को कारागार में डालो और प्रातःकाल प्राणदण्ड दो!

राजा कामसेन अहंकार में गरज उठा: 'एक दरिद्र भिक्षुक की यह मजाल कि राजा से पहले मेरी राज-नर्तकी को पुरस्कृत करे?!'

राजा कामसेन

सैनिको! इस उद्दण्ड भिक्षुक को कारागार में डालो और प्रातःकाल प्राणदण्ड दो!

Panel 17
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King Kamasena orders his royal guards to seize Madhavanala and drag him away

सशस्त्र प्रहरियों ने माधवानल को घेर लिया, जबकि कामकन्दला अश्रुपूरित नेत्रों से काँप उठीं।

Panel 18
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दृश्य 4

सम्राट विक्रमादित्य का प्राकट्य और कामावती में सुवर्ण-वृष्टि

Vikramaditya
Vikramaditya throws off his traveler's cloak, striding into the court center with sovereign authority
सम्राट विक्रमादित्य
ठहरो, कामसेन! सच्चे कला-पारखी का सम्मान करना राजा का धर्म है, अहंकार में दण्ड देना नहीं!

उसी क्षण विक्रमादित्य ने अपना साधारण वस्त्र उतार फेंका और चक्रवर्ती सम्राट के अदम्य तेज के साथ राजसभा के मध्य आ खड़े हुए!

सम्राट विक्रमादित्य

ठहरो, कामसेन! सच्चे कला-पारखी का सम्मान करना राजा का धर्म है, अहंकार में दण्ड देना नहीं!

Panel 19
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Vikramaditya defends the poet: 'A true king honors aesthetic perfection!'

विक्रमादित्य ने पूरी सभा के सम्मुख भ्रमर और श्वास-संचालन का वह गुप्त रहस्य प्रकट किया जिसे मूर्ख राजा न समझ सका था।

Panel 20
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King Kamasena scoffs: 'Can your words fill my royal treasury with gold?'
राजा कामसेन
स्वर्ण दो, अन्यथा यह कवि कल का सूर्य नहीं देखेगा!

कामसेन ने कुटिलता से कहा: 'यदि इस भिखारी की कला इतनी मूल्यवान है, तो क्या तुम्हारी बातें मेरे राजकोष को सोने से भर सकती हैं?'

राजा कामसेन

स्वर्ण दो, अन्यथा यह कवि कल का सूर्य नहीं देखेगा!

Panel 21
•
Vikramaditya raises his right hand and chants ancient Vedic hymns, invoking celestial cloud forces

विक्रमादित्य ने दाहिना हाथ उठाया और वेताल-सिद्धि तथा मेघ-मन्त्रों का सस्वर आह्वान किया!

Panel 22
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The palace roof opens as a luminous golden cloud gathers, showering millions of gleaming gold coins

राजप्रासाद के ऊपर देदीप्यमान सुवर्ण-मेघ घिर आए और कामावती के पूरे सभा-भवन में लाखों चमचमाती स्वर्ण-मुद्राओं की घनघोर वृष्टि होने लगी!

Panel 23
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King Kamasena, his ministers, and the entire assembly fall to their knees in shock and reverence
राजा कामसेन
क्षमा करें, हे चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य! मेरी आँखें आपके पावन तेज से खुल गई हैं!

राजा कामसेन और समस्त दरबारी भय और विस्मय से काँपते हुए सोने के ढेरों के बीच घुटनों के बल गिर पड़े!

राजा कामसेन

क्षमा करें, हे चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य! मेरी आँखें आपके पावन तेज से खुल गई हैं!

Panel 24
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दृश्य 5

माधवानल-कामकन्दला का पावन परिणय और सम्राट का निस्पृह दान

The Sacred Union of Lovers
King Kamasena prostrates before Emperor Vikramaditya in tears

राजा कामसेन ने हाथ जोड़कर सम्राट के चरणों में क्षमा-याचना की और कामकन्दला को बन्धन-मुक्त कर दिया।

Panel 25
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Kamakandala steps forward, tears of pure devotion streaming down her cheeks as she looks upon Madhavanala
नृत्यांगना कामकन्दला
आपके संगीत और सम्राट के धर्म ने आज मुझे नया जीवन प्रदान किया है!

कामकन्दला अश्रु-विगलित नयनों से आगे बढ़ीं और माधवानल के चरणों में नमन किया।

नृत्यांगना कामकन्दला

आपके संगीत और सम्राट के धर्म ने आज मुझे नया जीवन प्रदान किया है!

Panel 26
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Emperor Vikramaditya gently joins the hands of Madhavanala and Kamakandala under jasmine petals
सम्राट विक्रमादित्य
जहाँ कला और प्रेम शुद्ध हों, वहाँ देवत्व स्वयं पहरा देता है! तुम दोनों का परिणय अमर रहेगा!

सम्राट विक्रमादित्य ने मन्द मुस्कान से दोनों निष्कलंक कलाकारों के हाथ मिलाए और चमेली के पुष्पों से उनका अभिषेक किया।

सम्राट विक्रमादित्य

जहाँ कला और प्रेम शुद्ध हों, वहाँ देवत्व स्वयं पहरा देता है! तुम दोनों का परिणय अमर रहेगा!

Panel 27
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Emperor Vikramaditya grants the couple a magnificent golden palace in Ujjayini

विक्रमादित्य ने दोनों को उज्जयिनी में एक भव्य सुवर्ण-प्रासाद और जीवन-पर्यन्त का राजसी सम्मान प्रदान किया, स्वयं के लिए कुछ न माँगा।

Panel 28
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The people of Kamavati and Ujjayini celebrate the triumph of pure love and artistry

कामावती और उज्जयिनी की प्रजा ने शुद्ध प्रेम और दिव्य कला की विजय का महा-उत्सव मनाया।

Panel 29
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Emperor Vikramaditya departs the festival in quiet humility, his heart filled with joy

उत्सव के कोलाहल के बीच सम्राट विक्रमादित्य मौन भाव से अपनी राजधानी लौट आए; उनका हृदय परोपकार के आनन्द से परिपूर्ण था।

Panel 30
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दृश्य 6

कामकन्दला का निर्णय और राजा भोज का संकोच

Kamakandala
Back in Dharanagari palace, Kamakandala looks directly at King Bhoja with glowing ruby eyes

धारानगरी के सभा-भवन में सजीव पुतली कामकन्दला ने राजा भोज को गम्भीर दृष्टि से देखा।

Panel 31
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Kamakandala demands: 'Have you ever risked your throne to protect true art, showered an empire in gold?'
पुतली कामकन्दला
अब कहो, राजा भोज—क्या तुमने कभी कला के सम्मान हेतु अपना सर्वस्व दाँव पर लगाया है, सोने की वर्षा कराकर दो प्रेमियों को मिलाया है और अपने लिए एक नर्तकी भी नहीं माँगी? यदि ऐसा त्याग है, तो कदम बढ़ाओ!

कामकन्दला ने अन्तिम चुनौती प्रस्तुत की:

पुतली कामकन्दला

अब कहो, राजा भोज—क्या तुमने कभी कला के सम्मान हेतु अपना सर्वस्व दाँव पर लगाया है, सोने की वर्षा कराकर दो प्रेमियों को मिलाया है और अपने लिए एक नर्तकी भी नहीं माँगी? यदि ऐसा त्याग है, तो कदम बढ़ाओ!

Panel 32
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King Bhoja lowers his head in deep humility and introspection, realizing his own pride
राजा भोज
मुझमें विक्रमादित्य जैसी अलौकिक कला-दृष्टि और निःस्वार्थ त्याग नहीं है, देवि। मैं इस चौथी सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

राजा भोज ने लज्जा और श्रद्धा से सिर झुका लिया:

राजा भोज

मुझमें विक्रमादित्य जैसी अलौकिक कला-दृष्टि और निःस्वार्थ त्याग नहीं है, देवि। मैं इस चौथी सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

Panel 33
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King Bhoja steps down from the fourth step, ordering royal stipends for artists and poets

राजा भोज चौथी सीढ़ी से नीचे उतरे और धारानगरी तथा पूरे मालवा के सभी कवियों, गायकों और शिल्पियों को राजसी वृत्ति देने का आदेश दिया।

Panel 34
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King Bhoja issues royal decrees granting lifetime tax-free land grants to musicians and poets

कला-भवनों और संगीत-शालाओं की स्थापना कर कलाकारों को अभय-दान दिया गया।

Panel 35
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Twilight conches sound across Dharanagari as Kamakandala smiles and freezes back into silent bronze
राजा भोज
कल प्रातःकाल मैं पाँचवीं सीढ़ी पर चरण रखूँगा और पाँचवीं पुतली—लीलावती—की अमर गाथा सुनूँगा!

संध्याकाल के शंख गूँज उठे और कामकन्दला मन्द मुस्कान के साथ पुनः मौन कांस्य-प्रतिमा बन गई। **सिंहासन बत्तीसी का चौथा दिन सम्पन्न हुआ!**

राजा भोज

कल प्रातःकाल मैं पाँचवीं सीढ़ी पर चरण रखूँगा और पाँचवीं पुतली—लीलावती—की अमर गाथा सुनूँगा!

Panel 36
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