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षष्ठ पुतली प्रभावती: अन्धा महर्षि, विषैला सरोवर और संजीवनी मुकुट का पावन त्याग

सिंहासन बत्तीसी (३२ पुतलियों की अमर गाथा)• katha

षष्ठ पुतली प्रभावती: अन्धा महर्षि, विषैला सरोवर और संजीवनी मुकुट का पावन त्याग

The Sixth Statue: Prabhavati & The Poisoned Lake

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दृश्य 1

षष्ठ सूर्योदय और प्रभावती का प्रबोधन

The Sixth Dawn & Prabhavati
Golden sunlight streams across the white lotus marble dais toward the 32-step throne

षष्ठ प्रभात की स्वर्णिम किरणों ने धारानगरी के प्रासाद को आलोकित किया, जहाँ राजा भोज ने पूर्ण निष्ठा से अपनी साधना पूर्ण की।

Panel 1
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King Bhoja in royal saffron traveling robes walks with solemn stride toward the sixth step

केसरिया परिधान धारण कर राजा भोज विनीत चरणों से छठी सीढ़ी की ओर बढ़े।

Panel 2
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The marble floor erupts with brilliant solar-amber and golden radiance

जैसे ही राजा का चरण छठी सीढ़ी के निकट पहुँचा, संगमरमर का फर्श सूर्य-कान्त और स्वर्णिम दिव्य प्रकाश से धधक उठा!

Panel 3
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The sixth carved statue Prabhavati opens her glowing solar-golden eyes, laughing musically
पुतली प्रभावती
ठहरो, राजा भोज! इस छठी सीढ़ी पर पैर धरने का दुस्साहस मत करो!

छठी कांस्य-पुतली—प्रभावती—की सूर्य-समान आँखें खुलीं और वह स्वर्ण-कमल कलश हाथ में लिए दिव्य हँसी के साथ सजीव हो उठी!

पुतली प्रभावती

ठहरो, राजा भोज! इस छठी सीढ़ी पर पैर धरने का दुस्साहस मत करो!

Panel 4
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King Bhoja pauses in deep reverence with folded hands, gazing at the living bronze maiden
राजा भोज
हे प्रभावती देवि! विक्रमादित्य के किस अलौकिक साहस और त्याग की पावन गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

राजा भोज ने नतमस्तक होकर हाथ जोड़े और स्वर्ण-कलश धारण की हुई पुतली की ओर देखा।

राजा भोज

हे प्रभावती देवि! विक्रमादित्य के किस अलौकिक साहस और त्याग की पावन गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

Panel 5
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Prabhavati speaks: 'Do you possess the fearlessness of Vikramaditya when he drank poison to test a cure?'
पुतली प्रभावती
क्या तुममें विक्रमादित्य जैसा अदम्य साहस है, जब उन्होंने मरते हुए तीर्थयात्रियों की औषधि परखने के लिए स्वयं प्राणघाती विष पी लिया था, और अमरता का संजीवनी मुकुट एक अंधे तपस्वी को दान कर दिया था?

प्रभावती ने स्वर्ण-कमल कलश उठाकर गम्भीर वाणी में कहा:

पुतली प्रभावती

क्या तुममें विक्रमादित्य जैसा अदम्य साहस है, जब उन्होंने मरते हुए तीर्थयात्रियों की औषधि परखने के लिए स्वयं प्राणघाती विष पी लिया था, और अमरता का संजीवनी मुकुट एक अंधे तपस्वी को दान कर दिया था?

Panel 6
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दृश्य 2

नीलगिरि का विषैला सरोवर और अन्धे महर्षि का क्रन्दन

The Poisoned Pilgrim Lake of Mount Nilgiri
At the foot of Mount Nilgiri, a sacred pilgrimage lake foams with lethal purple venom

नीलगिरि पर्वत की तलहटी में स्थित पावन सरोवर पाताल के महा-नाग 'कालसर्प' के विष से उबलकर बैंगनी और प्राणघाती हो चुका था।

Panel 7
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Hundreds of poor pilgrims and ascetics lie shivering along the shore with burning fever

सैकड़ों दीन तीर्थयात्री, नारियाँ और संन्यासी उस विषैले जल को पीकर तीव्र दाह-ज्वर से तट पर तड़प रहे थे।

Panel 8
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Sage Somapa sits weeping beside the lake, raising trembling blind hands in prayer
महामुनि सोमप
हे जगदीश्वर! इन निर्दोष भक्तों के प्राणों की रक्षा करो! मेरी देह ले लो, परन्तु इनका संहार रोको!

तट पर नब्बे वर्षीय वृद्ध अन्धे महर्षि सोमप अश्रु बहाते हुए अपने काँपते हाथ उठाकर ईश्वर से रक्षा की गुहार लगा रहे थे।

महामुनि सोमप

हे जगदीश्वर! इन निर्दोष भक्तों के प्राणों की रक्षा करो! मेरी देह ले लो, परन्तु इनका संहार रोको!

Panel 9
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Vikramaditya in royal armor arrives on a white stallion, carrying pouches of healing herbs

उसी क्षण श्वेत अश्व पर तीव्र गति से सम्राट विक्रमादित्य हिमालयी दिव्य जड़ी-बूटियों की थैलियाँ लेकर पहुँचे।

Panel 10
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Vikramaditya kneels beside the blind sage, examining the foaming purple water

विक्रमादित्य ने अन्धे मुनि के चरणों में बैठकर तड़पते तीर्थयात्रियों की नब्ज जाँची।

Panel 11
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Sage Somapa warns: 'Touch not the water! A single sip curdles the blood!'
महामुनि सोमप
इस जल को मत छूना, वीर! पाताल के कालसर्प का विष इतना तीव्र है कि एक बूँद दस श्वासों में रक्त जमा देती है!
सम्राट विक्रमादित्य
धैर्य रखें, महर्षि! धर्म की शक्ति विष से अधिक बलवान है!

महर्षि सोमप ने चेतावनी दी:

महामुनि सोमप

इस जल को मत छूना, वीर! पाताल के कालसर्प का विष इतना तीव्र है कि एक बूँद दस श्वासों में रक्त जमा देती है!

सम्राट विक्रमादित्य

धैर्य रखें, महर्षि! धर्म की शक्ति विष से अधिक बलवान है!

Panel 12
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दृश्य 3

सम्राट का निर्भय विष-पान और सोमवल्लरी का प्रभाव

The King
Vikramaditya makes a fearless vow: 'A king never gives medicine he has not tested on himself!'

विक्रमादित्य ने अदम्य संकल्प लिया: 'धर्मात्मा राजा अपनी प्रजा को कभी ऐसी औषधि नहीं देता जिसे उसने पहले अपने शरीर पर न परखा हो!'

Panel 13
•
Vikramaditya dips a brass chalice into the foaming purple lake and drinks the venom without fear

विक्रमादित्य ने पीतल का पात्र उस उबलते विषैले जल में डुबोया और बिना एक पल हिचकिचाए पूरा विष कण्ठस्थ कर लिया!

Panel 14
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The dark poison surges through his veins; his bronze skin turns indigo as he enters deep meditation

तीव्र हलाहल शिराओं में दौड़ गया; सम्राट की देह नीली पड़ने लगी और दृष्टि धुँधला गई, परन्तु वे पद्मासन लगाकर प्राणायाम में लीन हो गए।

Panel 15
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In deep yogic concentration, Vikramaditya crushes the golden Soma-Vallari herb, drinking the juice

गम्भीर योग-समाधि में विक्रमादित्य ने स्वर्णिम 'सोमवल्लरी' जड़ी-बूटी को हाथ से निचोड़कर उसका दिव्य रस पी लिया।

Panel 16
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A surge of pure solar golden heat erupts from his heart, burning the dark venom

हृदय-चक्र से प्रखर सौर-अग्नि प्रज्वलित हुई जिसने विष के प्रभाव को क्षण-भर में भस्म कर शरीर को पुनः स्वर्ण-समान कान्तिमान बना दिया!

Panel 17
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Vikramaditya stands tall with blazing eyes, having proven the exact dosage of the antidote
सम्राट विक्रमादित्य
औषधि सिद्ध हो चुकी है! अब एक भी तीर्थयात्री काल के गाल में नहीं समाएगा!

सम्राट विक्रमादित्य तेजस्वी नयनों के साथ उठ खड़े हुए; उन्होंने औषधि की अचूक मात्रा और प्रभाव स्वयं सिद्ध कर दिया था!

सम्राट विक्रमादित्य

औषधि सिद्ध हो चुकी है! अब एक भी तीर्थयात्री काल के गाल में नहीं समाएगा!

Panel 18
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दृश्य 4

सरोवर का शुद्धिकरण और कालसर्प की पराजय

The Lake Purified & The Serpent Subdued
Vikramaditya dissolves large urns of the golden antidote into the mountain springs
सम्राट विक्रमादित्य
यह दिव्य संजीवनी रस ग्रहण करो, भाइयो! अमृत का प्रभाव विष को नष्ट कर देगा!

विक्रमादित्य ने बड़े मिट्टी के घड़ों में औषधि घोलकर पर्वत के झरनों में प्रवाहित कर दी और हर मरणासन्न भक्त को अमृत-घूँट पिलाया।

सम्राट विक्रमादित्य

यह दिव्य संजीवनी रस ग्रहण करो, भाइयो! अमृत का प्रभाव विष को नष्ट कर देगा!

Panel 19
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Hundreds of revived pilgrims open their eyes, weeping in joyful relief
जीवित हुआ भक्त
ईश्वर की कृपा! हमारा दाह-ज्वर शान्त हो गया!

सैकड़ों मरते हुए भक्त आँखें खोलकर उठ बैठे और अश्रु बहाते हुए नव-जीवन का आनन्द मनाने लगे!

जीवित हुआ भक्त

ईश्वर की कृपा! हमारा दाह-ज्वर शान्त हो गया!

Panel 20
•
Enraged that its venom was broken, the giant serpent drake bursts from the lake bed

विष निष्प्रभावी होते देख क्रुद्ध चालीस हाथ लम्बा महा-नाग 'कालसर्प' जल फाड़कर बाहर निकला!

Panel 21
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Vikramaditya leaps into mid-air with his steel sword, cleanly severing the serpent's crest horn

विक्रमादित्य ने हवा में छलांग लगाई और अपनी वूट्ज़ खड्ग से बिना वध किए नाग का विषैला मणि-शृंग काट दिया!

Panel 22
•
Humbled by the Emperor's aura, the serpent drake bows and retreats peacefully

सम्राट के धर्म-तेज से नतमस्तक होकर नाग ने फन झुका लिया और पाताल में लौट गया।

Panel 23
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The lake turns crystal clear as celestial gods shower flowers, manifesting the Sanjeevani Crown
Celestial Voice
धर्म के रक्षक को स्वर्ग का अमर मुकुट प्राप्त हो!

सरोवर का जल स्फटिक जैसा निर्मल हो गया और आकाश से पुष्प-वर्षा के मध्य अमरता का दिव्य 'संजीवनी मुकुट' तट पर प्रकट हुआ!

Celestial Voice

धर्म के रक्षक को स्वर्ग का अमर मुकुट प्राप्त हो!

Panel 24
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दृश्य 5

संजीवनी मुकुट का पावन दान और महर्षि का दिव्य चक्षु

The Gift to the Blind Sage
The grateful pilgrims beg Emperor Vikramaditya to wear the divine Sanjeevani Crown
तीर्थयात्री प्रमुख
महाराज! आप इस अमर मुकुट को धारण कर युगों-युगों तक इस पृथ्वी पर शासन करें!

कृतज्ञ तीर्थयात्रियों ने हाथ जोड़कर विक्रमादित्य से अमरता का वह दिव्य मुकुट धारण करने की विनती की।

तीर्थयात्री प्रमुख

महाराज! आप इस अमर मुकुट को धारण कर युगों-युगों तक इस पृथ्वी पर शासन करें!

Panel 25
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Vikramaditya smiles with serene detachment: 'True immortality is earned through Dharma!'

विक्रमादित्य ने मन्द मुस्कान से अस्वीकार किया: 'सच्ची अमरता धर्म के आचरण से प्राप्त होती है, मुकुटों से नहीं!'

Panel 26
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Vikramaditya walks to the blind sage Somapa, gently placing the Sanjeevani Crown upon his head
सम्राट विक्रमादित्य
यह मुकुट आपके तपोबल और करुणा का सम्मान है, महर्षि!

विक्रमादित्य उस नब्बे वर्षीय वृद्ध अन्धे महर्षि सोमप के पास गए और वह दिव्य मुकुट उनके मस्तक पर रख दिया!

सम्राट विक्रमादित्य

यह मुकुट आपके तपोबल और करुणा का सम्मान है, महर्षि!

Panel 27
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Instantly, the sage's blindness vanishes, his skin becomes young, and divine vision opens

मुकुट का स्पर्श होते ही महर्षि का अन्धापन मिट गया, उनकी झुर्रियाँ लुप्त होकर देह तेजस्वी युवा जैसी हो गई और दिव्य ज्ञान-नेत्र खुल गए!

Panel 28
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Sage Somapa falls to his knees in tears of devotion: 'You are Emperor Vikramaditya himself!'
महामुनि सोमप
सम्राट होकर भी आपने दीन भक्तों के लिए विष पिया और अमरता का मुकुट मुझे दे दिया!

दिव्य दृष्टि पाते ही महर्षि ने उस महापुरुष को पहचाना और चरणों में गिर पड़े: 'आप उज्जयिनी के चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य हैं—साक्षात् धर्म के अवतार!'

महामुनि सोमप

सम्राट होकर भी आपने दीन भक्तों के लिए विष पिया और अमरता का मुकुट मुझे दे दिया!

Panel 29
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Emperor Vikramaditya departs the sacred mountain into the golden sunset in quiet humility

सम्राट विक्रमादित्य मुनि को प्रणाम कर गोधूलि वेला में मौन भाव से लौट आए; पर्वत पर शान्ति और आरोग्य का प्रकाश फैल चुका था।

Panel 30
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दृश्य 6

प्रभावती का निर्णय और राजा भोज का संकोच

Prabhavati
Back in Dharanagari palace, Prabhavati looks directly at King Bhoja with glowing solar-golden eyes

धारानगरी के सभा-भवन में सजीव पुतली प्रभावती ने राजा भोज को गम्भीर सूर्य-नयनों से देखा।

Panel 31
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Prabhavati challenges: 'Have you ever drank lethal poison to test a cure, and given the Crown of Immortality away?'
पुतली प्रभावती
अब कहो, राजा भोज—क्या तुमने कभी प्रजा के कल्याण हेतु विष-पान कर औषधि सिद्ध की है, और अमरता का मुकुट किसी अंधे मुनि को बिना स्वार्थ दान दिया है? यदि ऐसा साहस है, तो कदम बढ़ाओ!

प्रभावती ने अन्तिम चुनौती प्रस्तुत की:

पुतली प्रभावती

अब कहो, राजा भोज—क्या तुमने कभी प्रजा के कल्याण हेतु विष-पान कर औषधि सिद्ध की है, और अमरता का मुकुट किसी अंधे मुनि को बिना स्वार्थ दान दिया है? यदि ऐसा साहस है, तो कदम बढ़ाओ!

Panel 32
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King Bhoja lowers his head in deep humility, acknowledging Vikramaditya's fearlessness
राजा भोज
मुझमें विक्रमादित्य जैसा अदम्य साहस और अमरता को ठुकराने वाला त्याग नहीं है, देवि। मैं इस छठी सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

राजा भोज ने लज्जा और श्रद्धा से सिर झुका लिया:

राजा भोज

मुझमें विक्रमादित्य जैसा अदम्य साहस और अमरता को ठुकराने वाला त्याग नहीं है, देवि। मैं इस छठी सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

Panel 33
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King Bhoja steps down from the sixth step, ordering pure water reservoirs constructed

राजा भोज छठी सीढ़ी से नीचे उतरे और धारानगरी तथा पूरे मालवा के प्रत्येक गाँव में शुद्ध पेयजल के जलाशय और औषधालय खुदवाने का आदेश दिया।

Panel 34
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King Bhoja issues royal decrees establishing clean water tanks and herbal gardens

राज्य-भर में आरोग्य-कूपों और वानस्पतिक उद्यानों का निर्माण आरम्भ हुआ।

Panel 35
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Twilight conches sound across Dharanagari as Prabhavati smiles and freezes back into silent bronze
राजा भोज
कल प्रातःकाल मैं सातवीं सीढ़ी पर चरण रखूँगा और सातवीं पुतली—कौशल्या—की अमर गाथा सुनूँगा!

संध्याकाल के शंख गूँज उठे और प्रभावती मन्द मुस्कान के साथ पुनः मौन कांस्य-प्रतिमा बन गई। **सिंहासन बत्तीसी का छठा दिन सम्पन्न हुआ!**

राजा भोज

कल प्रातःकाल मैं सातवीं सीढ़ी पर चरण रखूँगा और सातवीं पुतली—कौशल्या—की अमर गाथा सुनूँगा!

Panel 36
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