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एकोनविंशति पुतली रूपरेखा: रेशमी चित्र-पट, गान्धार की लुप्त राजकुमारी और निष्काम रक्षा-धर्म

सिंहासन बत्तीसी (३२ पुतलियों की अमर गाथा)• katha

एकोनविंशति पुतली रूपरेखा: रेशमी चित्र-पट, गान्धार की लुप्त राजकुमारी और निष्काम रक्षा-धर्म

The Nineteenth Statue: Ruparekha & The Painted Silk Scroll

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दृश्य 1

उन्नीसवाँ सूर्योदय और रूपरेखा का प्रबोधन

The Nineteenth Dawn & Ruparekha
Morning sunlight streams across the sandstone colonnade onto the 32-step golden throne

उन्नीसवें प्रभात की स्वर्णिम किरणों ने धारानगरी के राजप्रासाद को आलोकित किया, जहाँ राजा भोज ने पूर्ण निष्ठा से अपनी साधना पूर्ण की।

Panel 1
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King Bhoja in sacred saffron silks approaches the nineteenth step of the throne

केसरिया परिधान धारण कर राजा भोज विनीत चरणों से उन्नीसवीं सीढ़ी की ओर बढ़े।

Panel 2
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The marble dais erupts with brilliant jade-green and rose-golden radiance

जैसे ही राजा का चरण उन्नीसवीं सीढ़ी के निकट पहुँचा, मणिक वेदी मरकत-हरित और गुलाब-स्वर्णिम दिव्य प्रकाश से प्रदीप्त हो उठी!

Panel 3
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The nineteenth carved statue Ruparekha opens her glowing jade-green eyes, laughing musically
पुतली रूपरेखा
ठहरो, राजा भोज! इस उन्नीसवीं सीढ़ी पर कदम रखने का दुस्साहस मत करो!

उन्नीसवीं कांस्य-पुतली—रूपरेखा—की मरकत-नयन खुले और वह सुवर्ण-तूलिका व रेशमी चित्र-पट हाथ में लिए दिव्य हँसी के साथ सजीव हो उठी!

पुतली रूपरेखा

ठहरो, राजा भोज! इस उन्नीसवीं सीढ़ी पर कदम रखने का दुस्साहस मत करो!

Panel 4
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King Bhoja halts in deep reverence with folded hands, gazing at the living bronze maiden
राजा भोज
हे रूपरेखा देवि! विक्रमादित्य के किस निष्काम रक्षा-धर्म और गान्धार-पराक्रम की अमर गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

राजा भोज ने नतमस्तक होकर हाथ जोड़े और चित्र-पट धारण की हुई पुतली की ओर देखा।

राजा भोज

हे रूपरेखा देवि! विक्रमादित्य के किस निष्काम रक्षा-धर्म और गान्धार-पराक्रम की अमर गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

Panel 5
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Ruparekha speaks: 'Do you possess the selfless chivalric honor of Vikramaditya?'
पुतली रूपरेखा
क्या तुममें विक्रमादित्य जैसा निष्काम रक्षा-धर्म और क्षत्रिय-तेज है, जब एक चित्र-पट देखकर वे बर्फीले तूफानों को चीरते हुए गान्धार की बन्दी राजकुमारी को दस्युओं के दुर्ग से छुड़ा लाए और बिना किसी पुरस्कार या विवाह के उसे पिता को सौंप दिया?

रूपरेखा ने रेशमी चित्र-पट खोलकर गम्भीर वाणी में कहा:

पुतली रूपरेखा

क्या तुममें विक्रमादित्य जैसा निष्काम रक्षा-धर्म और क्षत्रिय-तेज है, जब एक चित्र-पट देखकर वे बर्फीले तूफानों को चीरते हुए गान्धार की बन्दी राजकुमारी को दस्युओं के दुर्ग से छुड़ा लाए और बिना किसी पुरस्कार या विवाह के उसे पिता को सौंप दिया?

Panel 6
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दृश्य 2

गान्धार के चित्रकार चित्रसेन का आगमन और रेशमी चित्र-पट

The Master Painter & The Wondrous Silk Scroll
In the opulent spring court of Ujjayini, Vikramaditya receives a petition from a travelling artist

उज्जयिनी के वसन्तोत्सव के राज-दरबार में गान्धार के सुप्रसिद्ध चित्रकार चित्रसेन अपनी फटी चादर में लिपटा एक रेशमी बक्सा लेकर सम्राट के सम्मुख उपस्थित हुए।

Panel 7
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Chitrasena unfurls an exquisite painted silk scroll depicting Princess Chandramukhi
चित्रकार चित्रसेन
महाराज! यह गान्धार-नरेश सिंहवर्धन की पुत्री राजकुमारी चन्द्रमुखी का साक्षात् रूप है!

चित्रसेन ने सभा के सम्मुख एक अलौकिक रेशमी चित्र-पट खोला, जिस पर गान्धार की परम सुन्दरी राजकुमारी चन्द्रमुखी का सजीव चित्र बना था।

चित्रकार चित्रसेन

महाराज! यह गान्धार-नरेश सिंहवर्धन की पुत्री राजकुमारी चन्द्रमुखी का साक्षात् रूप है!

Panel 8
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Close-up of the painted princess, radiating celestial beauty with soft tears glistening

चित्र में राजकुमारी के नयनों से अश्रु टपकते प्रतीत हो रहे थे; उसकी अलौकिक शोभा देखकर पूरी राजसभा मुग्ध हो गई।

Panel 9
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Chitrasena weeps, recounting how bandit warlord Khadgadhara kidnapped the princess
चित्रकार चित्रसेन
महाराज सिंहवर्धन पुत्री के वियोग में मृत्यु-शय्या पर पड़े हैं और उत्तर का कोई राजा उस बर्फीले दर्रे को पार करने का साहस नहीं करता!

चित्रकार ने रोते हुए व्यथा सुनाई कि छह मास पूर्व हिमवन्त पर्वत के क्रूर दस्युपति खड्गधर ने सीमा पर आक्रमण कर राजकुमारी का अपहरण कर लिया और अपने अभेद्य बर्फीले दुर्ग 'खड्ग-दुर्ग' में बन्दी बना रखा है!

चित्रकार चित्रसेन

महाराज सिंहवर्धन पुत्री के वियोग में मृत्यु-शय्या पर पड़े हैं और उत्तर का कोई राजा उस बर्फीले दर्रे को पार करने का साहस नहीं करता!

Panel 10
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Vikramaditya rises from his throne: 'A daughter of Bharat suffering in an icy dungeon is a dishonor!'
सम्राट विक्रमादित्य
चित्रसेन! मुझे उस दुर्ग का मानचित्र दिखाओ; राजकुमारी अवश्य मुक्त होगी!

विक्रमादित्य ने सिंहासन से उठकर वज्र-समान स्वर में कहा: 'भारतवर्ष की किसी भी अबला कन्या का कारागार में तड़पना समस्त क्षत्रियों के लिए लज्जा का विषय है! मैं आज ही गान्धार के हिम-शिखरों पर प्रस्थान करूँगा!'

सम्राट विक्रमादित्य

चित्रसेन! मुझे उस दुर्ग का मानचित्र दिखाओ; राजकुमारी अवश्य मुक्त होगी!

Panel 11
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Vikramaditya dons fur-lined leather armor, saddling his black warhorse Meghavarna

विक्रमादित्य ने चर्म-कवच धारण किया, वूट्ज़ तलवार कसी और अपने प्रसिद्ध काले अश्व 'मेघवर्ण' पर सवार होकर उत्तर दिशा की ओर कूच कर दिया।

Panel 12
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दृश्य 3

हिमवन्त के बर्फीले दर्रे और सम्राट का अगाध दया-भाव

The Perilous Journey Through Frozen Passes
Vikramaditya and the painter ride into the towering snow-covered mountain peaks

विक्रमादित्य और चित्रकार गान्धार की दुर्गम पर्वतमालाओं और आकाश चूमते हिमवन्त शिखरों में प्रविष्ट हुए।

Panel 13
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A ferocious mountain blizzard strikes; fierce icy winds threaten to sweep them off the cliff

अचानक भीषण हिम-तूफान आया; बर्फीली हवाओं और हिम-स्खलन (एवलांच) की गर्जना से संकीर्ण दर्रे काँप उठे!

Panel 14
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The painter collapses into the deep snow, shivering with frostbite and altitude sickness
चित्रकार चित्रसेन
महाराज... मुझे यहीं छोड़ दें... आप आगे बढ़ें...

चित्रकार चित्रसेन अत्यधिक ठण्ड और श्वास-कष्ट से मूर्च्छित होकर गहरी बर्फ में गिर पड़ा।

चित्रकार चित्रसेन

महाराज... मुझे यहीं छोड़ दें... आप आगे बढ़ें...

Panel 15
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Vikramaditya wraps his own royal wool cloak around the painter, lifting him onto his shoulders
सम्राट विक्रमादित्य
एक भी निर्दोष साथी को त्यागे बिना विजय प्राप्त करना ही सच्चा धर्म है!

विक्रमादित्य ने अपना राजसी ऊनी लबादा उतारकर चित्रकार को लपेटा और उस मूर्च्छित व्यक्ति को अपने चौड़े कन्धों पर उठा लिया!

सम्राट विक्रमादित्य

एक भी निर्दोष साथी को त्यागे बिना विजय प्राप्त करना ही सच्चा धर्म है!

Panel 16
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Inside an ancient frozen Shiva rock cave, Vikramaditya kindles a campfire

एक प्राचीन शिव-गुहा में आश्रय लेकर विक्रमादित्य ने योग-अग्नि से काष्ठ प्रज्वलित किए और उष्ण जड़ी-बूटियों के रस से चित्रकार को नव-जीवन दिया।

Panel 17
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Under the silver moon, the jagged peaks of Mount Himavanta gleam in cold menacing beauty

मध्यरात्रि की चाँदनी में खड्ग-दुर्ग का बर्फीला शिखर सामने दिखाई दे रहा था; युद्ध का क्षण निकट आ चुका था।

Panel 18
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दृश्य 4

खड्ग-दुर्ग पर आक्रमण, पाषाण-प्राचीर और दस्यु-संहार

The Infiltration of Khadga-Durg & The Icy Duel
The forbidding stone fortress of Khadga-Durg perched on a vertical ice needle

खड्ग-दुर्ग एक सीधी बर्फीली चट्टान पर बना था, जिसके चारों ओर अगाध खाई और पहरेदार तैनात थे।

Panel 19
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Vikramaditya scales the frozen vertical ice cliff using iron pitons and ropes

हिम-तूफान की ओट में विक्रमादित्य ने लोहे के अंकुशों और रस्सियों की सहायता से खड़ी बर्फीली प्राचीर को मूक गति से लाँघ लिया!

Panel 20
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In a freezing stone watchtower, Princess Chandramukhi is chained to a pillar

शीत-कक्ष में राजकुमारी चन्द्रमुखी लोहे की बेड़ियों में जकड़ी हुई एक पाषाण-शिवलिंग के सम्मुख रक्षा की प्रार्थना कर रही थी।

Panel 21
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Bandit warlord Khadgadhara and twenty armed mountain raiders burst in with battle-axes
दस्युपति खड्गधर
कौन है जो मेरी मांद में घुसने का साहस करता है?! इसे बर्फ में काट डालो!

तभी दस्युपति खड्गधर अपने बीस खूंखार डाकुओं के साथ भारी कुल्हाड़े और बर्छियां लहराता हुआ कमरे में कूद पड़ा!

दस्युपति खड्गधर

कौन है जो मेरी मांद में घुसने का साहस करता है?! इसे बर्फ में काट डालो!

Panel 22
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Kinetic sword duel on the icy stone parapet, sparks flying as Wootz blade strikes
सम्राट विक्रमादित्य
अधर्म का दण्ड मृत्यु या आत्मसमर्पण है!

बर्फीली प्राचीर पर विक्रमादित्य की वूट्ज़ तलवार बिजली की भाँति कौंधी; एक-एक कर डाकुओं के अस्त्र कटकर खाई में गिरने लगे!

सम्राट विक्रमादित्य

अधर्म का दण्ड मृत्यु या आत्मसमर्पण है!

Panel 23
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Vikramaditya cleaves the warlord's heavy axe in two, disarming and subduing Khadgadhara

एक प्रचण्ड वार से विक्रमादित्य ने दस्युपति के भारी कुल्हाड़े को दो टुकड़ों में काट दिया और उसे घुटनों पर झुकाकर आत्मसमर्पण पर विवश कर दिया!

Panel 24
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दृश्य 5

राजकुमारी की मुक्ति, गान्धार-राज का कृतज्ञ समर्पण और निष्काम शील

The Sacred Return & Supreme Renunciation
Vikramaditya slices through the princess's iron chains, wrapping his mantle around her
राजकुमारी चन्द्रमुखी
आप कौन देवपुरुष हैं जिन्होंने नरक से मेरी रक्षा की?!

विक्रमादित्य ने तलवार की नोक से राजकुमारी की बेड़ियां काट दीं और अपना वस्त्र उनके कन्धों पर रखकर अभय दिया।

राजकुमारी चन्द्रमुखी

आप कौन देवपुरुष हैं जिन्होंने नरक से मेरी रक्षा की?!

Panel 25
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Vikramaditya guides the princess and painter safely down the thawing mountain valleys

सम्राट ने राजकुमारी और चित्रकार को अपने अश्व पर सुरक्षित बैठाकर गान्धार की राजधानी पुरुषपुर की ओर प्रस्थान किया।

Panel 26
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Inside the palace of Purushapura, King Sinhavardhana embraces his daughter in tears of joy

पुरुषपुर के राजप्रासाद में अपनी जीवित और सुरक्षित पुत्री को देखकर गान्धार-नरेश सिंहवर्धन हर्ष के आंसुओं से रो पड़े और उनका रोग तत्काल दूर हो गया!

Panel 27
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The Gandhara King offers his treasury of rubies and Princess Chandramukhi's hand in marriage
गान्धार-नरेश सिंहवर्धन
यह राज्य और मेरी पुत्री दोनों आपके चरणों में समर्पित हैं, हे आर्यावर्त के सूर्य!

गान्धार-नरेश ने हाथ जोड़कर अपना आधा राज्य, मणियों का अपार खजाना और राजकुमारी चन्द्रमुखी का पाणिग्रहण करने का प्रस्ताव रखा।

गान्धार-नरेश सिंहवर्धन

यह राज्य और मेरी पुत्री दोनों आपके चरणों में समर्पित हैं, हे आर्यावर्त के सूर्य!

Panel 28
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Vikramaditya gently declines: 'A Kshatriya protects Dharma without price!'
सम्राट विक्रमादित्य
मुझे एक भी मणिक या पुरस्कार नहीं चाहिए!

विक्रमादित्य ने नतमस्तक होकर हाथ जोड़े: 'धर्म-रक्षा क्षत्रिय का पावन कर्तव्य है, कोई व्यापार नहीं! राजकुमारी चन्द्रमुखी मेरी पुत्री के समान पूज्य हैं और यह खजाना गान्धार की प्रजा का है!'

सम्राट विक्रमादित्य

मुझे एक भी मणिक या पुरस्कार नहीं चाहिए!

Panel 29
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The entire court of Gandhara bows in profound reverence as Vikramaditya mounts his horse

गान्धार की पूरी राजसभा उस निष्काम सम्राट के त्याग और शील के सम्मुख नतमस्तक हो गई; विक्रमादित्य बिना कोई कर लिए उज्जयिनी लौट पड़े।

Panel 30
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दृश्य 6

रूपरेखा का निर्णय और राजा भोज का संकोच

Ruparekha
Back in Dharanagari palace, Ruparekha looks directly at King Bhoja with jade-green eyes

धारानगरी के सभा-भवन में सजीव पुतली रूपरेखा ने राजा भोज को गम्भीर मरकत-नयनों से देखा।

Panel 31
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Ruparekha challenges: 'Have you ever crossed freezing blizzards to rescue a maiden?'
पुतली रूपरेखा
अब कहो, राजा भोज—क्या तुमने कभी चित्र-पट देखकर बर्फीले तूफानों को चीरते हुए किसी अबला कन्या की रक्षा की है, और राजकुमारी व आधे राज्य का प्रस्ताव बिना लोभ के लौटाया है? यदि ऐसा अदम्य शौर्य और निष्काम शील तुममें है, तो कदम बढ़ाओ! अन्यथा लौट जाओ!

रूपरेखा ने उन्नीसवीं सीढ़ी की चुनौती दी:

पुतली रूपरेखा

अब कहो, राजा भोज—क्या तुमने कभी चित्र-पट देखकर बर्फीले तूफानों को चीरते हुए किसी अबला कन्या की रक्षा की है, और राजकुमारी व आधे राज्य का प्रस्ताव बिना लोभ के लौटाया है? यदि ऐसा अदम्य शौर्य और निष्काम शील तुममें है, तो कदम बढ़ाओ! अन्यथा लौट जाओ!

Panel 32
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King Bhoja lowers his head in deep humility and introspection, acknowledging Vikramaditya's chivalry
राजा भोज
मुझमें विक्रमादित्य जैसा निष्काम रक्षा-धर्म, हिम-शिखरों का अदम्य शौर्य और राजकुमारी व राज्य को तृणवत् लौटाने का पावन शील नहीं है, देवि। मैं इस उन्नीसवीं सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

राजा भोज ने लज्जा और श्रद्धा से सिर झुका लिया:

राजा भोज

मुझमें विक्रमादित्य जैसा निष्काम रक्षा-धर्म, हिम-शिखरों का अदम्य शौर्य और राजकुमारी व राज्य को तृणवत् लौटाने का पावन शील नहीं है, देवि। मैं इस उन्नीसवीं सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

Panel 33
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King Bhoja steps down from the nineteenth step, ordering border defense shelters established

राजा भोज उन्नीसवीं सीढ़ी से नीचे उतरे और धारानगरी तथा मालवा के सीमांत क्षेत्रों में आपदा-राहत छावनियाँ, पर्वतीय आश्रय-गृह और महिला-रक्षा वाहिनी स्थापित करने की आज्ञा दी।

Panel 34
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King Bhoja issues royal proclamations establishing women's protection trusts

राज्य-भर में स्त्रियों की सुरक्षा और पर्वतीय यात्रियों की सहायता हेतु विशेष सुरक्षा-कोष का गठन हुआ।

Panel 35
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Twilight conches echo across Dharanagari as Ruparekha smiles and freezes back into silent bronze

संध्याकाल के शंख गूँज उठे और रूपरेखा मन्द मुस्कान के साथ पुनः मौन कांस्य-प्रतिमा बन गई। **सिंहासन बत्तीसी का उन्नीसवाँ दिन सम्पन्न हुआ!**

Panel 36
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The remaining thirteen celestial statues gleam in the evening torchlight

शेष तेरह कांस्य-पुतलियाँ सन्ध्या की मशालों में जगमगाती रहीं, बीसवीं पुतली (ज्ञानवती) की अमर गाथा की प्रतीक्षा करते हुए।

Panel 37
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King Bhoja departs the throne hall in quiet contemplation, inspired by Vikramaditya's honor
राजा भोज
"कल प्रातःकाल हम बीसवीं सीढ़ी पर कदम रखेंगे और बीसवीं पुतली—ज्ञानवती—की अमर गाथा सुनेंगे!"

राजा भोज निष्काम शील और पवित्र रक्षा-धर्म के अमर आदर्शों को हृदय में संजोकर मौन भाव से राजसभा से प्रस्थान कर गए।

राजा भोज

"कल प्रातःकाल हम बीसवीं सीढ़ी पर कदम रखेंगे और बीसवीं पुतली—ज्ञानवती—की अमर गाथा सुनेंगे!"

Panel 38
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