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विंशति पुतली ज्ञानवती: देव-अश्व का विवाद, खुर-चिह्न परीक्षण और प्रज्ञाचक्षु का निष्पक्ष न्याय

सिंहासन बत्तीसी (३२ पुतलियों की अमर गाथा)• katha

विंशति पुतली ज्ञानवती: देव-अश्व का विवाद, खुर-चिह्न परीक्षण और प्रज्ञाचक्षु का निष्पक्ष न्याय

The Twentieth Statue: Jnanavati & The Disputed Stallion

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दृश्य 1

बीसवाँ सूर्योदय और ज्ञानवती का प्रबोधन

The Twentieth Dawn & Jnanavati
Morning sunlight streams across the sandstone colonnade onto the 32-step golden throne

बीसवें प्रभात की स्वर्णिम किरणों ने धारानगरी के राजप्रासाद को आलोकित किया, जहाँ राजा भोज ने पूर्ण निष्ठा से अपनी साधना पूर्ण की।

Panel 1
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King Bhoja in sacred saffron silks approaches the twentieth step of the throne

केसरिया परिधान धारण कर राजा भोज विनीत चरणों से बीसवीं सीढ़ी की ओर बढ़े।

Panel 2
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The marble dais erupts with brilliant sapphire-blue and golden radiance

जैसे ही राजा का चरण बीसवीं सीढ़ी के निकट पहुँचा, मणिक वेदी नील-मणि और प्रखर स्वर्णिम दिव्य प्रकाश से प्रदीप्त हो उठी!

Panel 3
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The twentieth carved statue Jnanavati opens her glowing sapphire-blue eyes, laughing musically
पुतली ज्ञानवती
ठहरो, राजा भोज! इस बीसवीं सीढ़ी पर कदम रखने का दुस्साहस मत करो!

बीसवीं कांस्य-पुतली—ज्ञानवती—की नील-नयन खुले और वह सुवर्ण-अश्व-लगाम व न्याय-पत्र हाथ में लिए दिव्य हँसी के साथ सजीव हो उठी!

पुतली ज्ञानवती

ठहरो, राजा भोज! इस बीसवीं सीढ़ी पर कदम रखने का दुस्साहस मत करो!

Panel 4
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King Bhoja halts in deep reverence with folded hands, gazing at the living bronze maiden
राजा भोज
हे ज्ञानवती देवि! विक्रमादित्य के किस न्याय-कौशल और प्राणी-विज्ञान के परीक्षण की गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

राजा भोज ने नतमस्तक होकर हाथ जोड़े और अश्व-लगाम धारण की हुई पुतली की ओर देखा।

राजा भोज

हे ज्ञानवती देवि! विक्रमादित्य के किस न्याय-कौशल और प्राणी-विज्ञान के परीक्षण की गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

Panel 5
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Jnanavati speaks: 'Do you possess the forensic discernment of Vikramaditya?'
पुतली ज्ञानवती
क्या तुममें विक्रमादित्य जैसा सूक्ष्म न्याय-विवेक और प्राणी-मनोविज्ञान की दृष्टि है, जब पचास झूठे धनी गवाहों और जाली दस्तावेजों के जाल से उन्होंने एक निर्धन चरवाहे के देव-अश्व को नेत्र-पट्टी बाँधकर सत्य से छुड़ा लिया?

ज्ञानवती ने सुवर्ण-अश्व-लगाम उठाकर गम्भीर वाणी में कहा:

पुतली ज्ञानवती

क्या तुममें विक्रमादित्य जैसा सूक्ष्म न्याय-विवेक और प्राणी-मनोविज्ञान की दृष्टि है, जब पचास झूठे धनी गवाहों और जाली दस्तावेजों के जाल से उन्होंने एक निर्धन चरवाहे के देव-अश्व को नेत्र-पट्टी बाँधकर सत्य से छुड़ा लिया?

Panel 6
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दृश्य 2

उज्जयिनी की राजसभा, श्वेत अश्व और सामन्त का षड्यन्त्र

The Disputed Celestial Stallion & Fifty False Witnesses
In the grand audience hall of Ujjayini, Vikramaditya presides over a heated property dispute

उज्जयिनी के सभागार में सम्राट विक्रमादित्य के सम्मुख एक अभूतपूर्व और जटिल विवाद प्रस्तुत हुआ।

Panel 7
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In the center of the marble court stands Shweta-Ketu, its silver mane gleaming like moonlight

सभागार के मध्य में दूध जैसा श्वेत, चाँदी जैसी अयाल वाला एक अलौकिक सिन्धी अश्व 'श्वेतकेतु' खड़ा था, जिसकी चाल पवन से भी तीव्र थी।

Panel 8
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Lord Vrishabhadatta presents forged pedigree scrolls, claiming the horse
सामन्त वृषभदत्त
महाराज! यह उच्च कुलीन अश्व मेरे अस्तबल की धरोहर है; इस कंगाल चरवाहे ने इसे चुराया है!

धनी सामन्त वृषभदत्त ने जाली वंशावली पत्र और स्वर्ण-काठी दिखाते हुए दावा किया कि यह अश्व उसके निजी अस्तबल से चुराया गया है।

सामन्त वृषभदत्त

महाराज! यह उच्च कुलीन अश्व मेरे अस्तबल की धरोहर है; इस कंगाल चरवाहे ने इसे चुराया है!

Panel 9
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A crowd of fifty wealthy aristocrats swear false oaths that the horse belongs to the noble lord
बिकाऊ गवाह
हम सब शपथ लेते हैं कि यह घोड़ा सामन्त वृषभदत्त का ही है!

सामन्त के पक्ष में पचास धनी जागीरदारों और नगर-सेठों ने झूठी शपथ ली कि उन्होंने इस घोड़े को सामन्त के बाड़े में पलते देखा है।

बिकाऊ गवाह

हम सब शपथ लेते हैं कि यह घोड़ा सामन्त वृषभदत्त का ही है!

Panel 10
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Somaka weeps before the throne: 'I raised this orphan foal on goat's milk!'
अश्वपालक सोमका
मेरे पास धनवान् गवाह नहीं हैं, पर मेरा घोड़ा मुझे पहचानता है!

फटेहाल अठारह वर्षीय अनाथ चरवाहा सोमका फूट-फूट कर रो पड़ा: 'महाराज! मैंने इसे लावारिस बछड़े के रूप में बकरी का दूध पिलाकर और जंगली घास खिलाकर पाला है!'

अश्वपालक सोमका

मेरे पास धनवान् गवाह नहीं हैं, पर मेरा घोड़ा मुझे पहचानता है!

Panel 11
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The royal magistrates prepare to sentence the stable-boy to punishment based on written scrolls

न्यायाधीश कागजी मुहरों और पचास गवाहों के दबाव में आकर चरवाहे को कारागार और कोड़े लगाने का दण्ड सुनाने ही वाले थे।

Panel 12
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दृश्य 3

शालिहोत्र अश्व-शास्त्र और सम्राट का सूक्ष्म परीक्षण

The Emperor
Vikramaditya raises his hand with royal authority, stepping down to examine the horse
सम्राट विक्रमादित्य
रुकिए! जहाँ पचास मनुष्य धन के लोभ में सत्य को ढक सकते हैं, वहाँ मूक पशु का हृदय कभी असत्य नहीं बोलता!

सम्राट विक्रमादित्य ने अपना हाथ उठाकर न्यायाधीशों को रोका और स्वयं सिंहासन से नीचे उतरकर अश्व के समीप पहुँचे।

सम्राट विक्रमादित्य

रुकिए! जहाँ पचास मनुष्य धन के लोभ में सत्य को ढक सकते हैं, वहाँ मूक पशु का हृदय कभी असत्य नहीं बोलता!

Panel 13
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Vikramaditya inspects the horse's hooves, coat, and pulse using equestrian science

विक्रमादित्य ने प्राचीन शालिहोत्र अश्व-शास्त्र के अनुसार घोड़े के खुरों, नथुनों और श्वास की गति का सूक्ष्म निरीक्षण किया।

Panel 14
•
The horse flinches away from the nobleman's perfume, but its ears perk toward Somaka

घोड़ा सामन्त के इत्र और चाबुक की गन्ध से घृणा में पीछे हट रहा था, परन्तु सोमका के धीमी सीटी बजाते ही उसके कान आदर से खड़े हो जाते थे!

Panel 15
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Vikramaditya declares: 'We shall conduct the Blindfold Trial in the courtyard!'
सम्राट विक्रमादित्य
जो इसका वास्तविक स्वामी होगा, अंधा होने पर भी यह अश्व उसी के चरणों में मस्तक झुकाएगा!

विक्रमादित्य ने घोषणा की: 'राजप्रासाद के खुले प्रांगण में इस अश्व की आँखों पर पट्टी बाँधकर परीक्षा होगी!'

सम्राट विक्रमादित्य

जो इसका वास्तविक स्वामी होगा, अंधा होने पर भी यह अश्व उसी के चरणों में मस्तक झुकाएगा!

Panel 16
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The royal guards clear a large circular dusty arena in the sunlit palace courtyard

राज-रक्षकों ने धूप से चमकते प्रांगण में एक विशाल गोलाकार अखाड़ा तैयार किया।

Panel 17
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Thousands of Ujjayini citizens and courtiers gather around the arena rails

हज़ारों नागरिक और दरबारी रेलिंग के चारों ओर दम साधे खड़े हो गए; न्याय की अनोखी परीक्षा आरम्भ होने वाली थी।

Panel 18
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दृश्य 4

नेत्र-पट्टी परीक्षा और मूक पशु का सत्य

The Blindfold Equine Behavior Trial
Royal handlers bind a thick black silk blindfold over Shweta-Ketu's eyes

अश्वपालकों ने 'श्वेतकेतु' की आँखों पर काली रेशमी पट्टी बाँध दी और उसकी दिशा भ्रष्ट करने हेतु उसे तीन बार गोल घुमाया।

Panel 19
•
Lord Vrishabhadatta steps into the ring, shouting commands; the stallion rears up aggressively
सामन्त वृषभदत्त
ऐ दुष्ट घोड़े! पहचान अपने स्वामी को!

सामन्त वृषभदत्त ने अखाड़े में कदम रखकर कड़क आवाज में पुकारा और चाबुक लहराया; पट्टी बँधा अश्व क्रुद्ध होकर पिछले पैरों पर खड़ा हो गया और हवा में दुलत्ती चलाई!

सामन्त वृषभदत्त

ऐ दुष्ट घोड़े! पहचान अपने स्वामी को!

Panel 20
•
The arrogant nobleman stumbles backwards into the dust, terrified of being trampled

सामन्त भयभीत होकर धूल में पीछे गिर पड़ा; घोड़े ने उसे लगभग कुचल ही दिया था!

Panel 21
•
Stable-boy Somaka steps barefoot into the arena, whistling a gentle village melody

अब विक्रमादित्य के आदेश पर निर्धन सोमका नंगे पाँव अखाड़े में उतरा और बिना छुए अपनी पुरानी देहाती धुन में सीटी बजाई।

Panel 22
•
Hearing the soft voice, the blinded stallion instantly lowers its head, whinnying softly
दर्शक
देखो! पट्टी बँधा घोड़ा अपने सच्चे बालक की ओर बढ़ रहा है!

सीटी सुनते ही अंधे बने अश्व का सारा क्रोध शान्त हो गया; उसने मन्द हिनहिनाहट के साथ सिर झुकाया और धीरे-धीरे सोमका की ओर बढ़ा!

दर्शक

देखो! पट्टी बँधा घोड़ा अपने सच्चे बालक की ओर बढ़ रहा है!

Panel 23
•
The white horse rests its head against the weeping boy's shoulder, licking his hands
अश्वपालक सोमका
मेरा श्वेतकेतु! तू मुझे कभी नहीं भूल सकता!

अश्व ने अपना मस्तक सोमका के सीने से सटा दिया और रोते हुए बालक के हाथों को चाटने लगा; मूक प्राणी का असीम प्रेम देखकर पूरी राजसभा की आँखें भर आईं!

अश्वपालक सोमका

मेरा श्वेतकेतु! तू मुझे कभी नहीं भूल सकता!

Panel 24
•
दृश्य 5

अन्न-परीक्षण, सामन्त का अपराध-स्वीकार और सत्य का जयकार

The Feeding Test & Justice Restored
Vikramaditya places two troughs: the noble's honeyed grain vs. Somaka's mountain grass

अन्तिम संशय मिटाने हेतु विक्रमादित्य ने दो थाल मँगवाए: एक में सामन्त का मधु-मिश्रित दाना था और दूसरे में सोमका की पहाड़ी हरी घास।

Panel 25
•
The horse ignores the rich grain, eagerly eating the sweet mountain grass from Somaka's hands

अश्व ने सामन्त के महँगे दाने को मुँह भी नहीं लगाया और सोमका के हाथों से पहाड़ी घास को बड़े प्रेम से खा लिया!

Panel 26
•
Caught by animal truth, Lord Vrishabhadatta falls to his knees, confessing his plot
सामन्त वृषभदत्त
क्षमा करें, महाराज! इसके तेज को देखकर मेरे मन में लोभ आ गया था!

पशु के अकाट्य साक्ष्य के सामने सामन्त वृषभदत्त थर-थर काँपने लगा और सम्राट के चरणों में गिरकर सारा षड्यन्त्र स्वीकार कर लिया।

सामन्त वृषभदत्त

क्षमा करें, महाराज! इसके तेज को देखकर मेरे मन में लोभ आ गया था!

Panel 27
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Vikramaditya restores the horse to Somaka, fining the corrupt lord ten thousand gold dinars
सम्राट विक्रमादित्य
न्याय में निर्धन का एक सच्चा आँसू पचास धनवानों के स्वर्ण-पत्रों से भारी होता है!

विक्रमादित्य ने सामन्त की जागीर जब्त कर उस पर दस हज़ार स्वर्ण-दीनार का जुरमाना लगाया और वह सारी धनराशि सोमका को क्षतिपूर्ति में दिलवाई!

सम्राट विक्रमादित्य

न्याय में निर्धन का एक सच्चा आँसू पचास धनवानों के स्वर्ण-पत्रों से भारी होता है!

Panel 28
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Vikramaditya appoints Somaka as Master of the Imperial Stables

सम्राट ने निष्कपट सोमका को उज्जयिनी के राज-अस्तबलों का महा-अश्वाध्यक्ष नियुक्त किया।

Panel 29
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The crowd erupts in cheers as Somaka rides his liberated white stallion around the palace arena

हज़ारों नागरिकों के जयघोष के बीच सोमका ने अपने श्वेत अश्व पर विजय-सवारी की; धर्म और सत्य की विजय हुई!

Panel 30
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दृश्य 6

ज्ञानवती का निर्णय और राजा भोज का संकोच

Jnanavati
Back in Dharanagari palace, Jnanavati looks directly at King Bhoja with sapphire-blue eyes

धारानगरी के सभा-भवन में सजीव पुतली ज्ञानवती ने राजा भोज को गम्भीर नील-नयनों से देखा।

Panel 31
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Jnanavati challenges: 'Have you ever protected a poor stable-boy against fifty wealthy lords?'
पुतली ज्ञानवती
अब कहो, राजा भोज—क्या तुमने कभी पचास धनवान् झूठे गवाहों और जाली दस्तावेजों के जाल को भेदकर मूक पशु के मनोविज्ञान से किसी निर्धन चरवाहे को न्याय दिलाया है? यदि ऐसी वैज्ञानिक न्याय-दृष्टि तुममें है, तो कदम बढ़ाओ! अन्यथा लौट जाओ!

ज्ञानवती ने बीसवीं सीढ़ी की चुनौती दी:

पुतली ज्ञानवती

अब कहो, राजा भोज—क्या तुमने कभी पचास धनवान् झूठे गवाहों और जाली दस्तावेजों के जाल को भेदकर मूक पशु के मनोविज्ञान से किसी निर्धन चरवाहे को न्याय दिलाया है? यदि ऐसी वैज्ञानिक न्याय-दृष्टि तुममें है, तो कदम बढ़ाओ! अन्यथा लौट जाओ!

Panel 32
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King Bhoja lowers his head in deep humility and introspection, acknowledging Vikramaditya's wisdom
राजा भोज
मुझमें विक्रमादित्य जैसा सूक्ष्म प्राणी-विज्ञान, जाली गवाहों के षड्यन्त्र को पशु-व्यवहार से भेदने की दृष्टि और निर्धनों की रक्षा का साहस नहीं है, देवि। मैं इस बीसवीं सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

राजा भोज ने लज्जा और श्रद्धा से सिर झुका लिया:

राजा भोज

मुझमें विक्रमादित्य जैसा सूक्ष्म प्राणी-विज्ञान, जाली गवाहों के षड्यन्त्र को पशु-व्यवहार से भेदने की दृष्टि और निर्धनों की रक्षा का साहस नहीं है, देवि। मैं इस बीसवीं सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

Panel 33
•
King Bhoja steps down from the twentieth step, ordering judicial reforms established

राजा भोज बीसवीं सीढ़ी से नीचे उतरे और धारानगरी तथा पूरे मालवा में झूठी गवाही देने वालों के विरुद्ध कठोर दण्ड और किसान-पशुधन संरक्षण न्यायालय स्थापित करने की आज्ञा दी।

Panel 34
•
King Bhoja issues royal proclamations establishing peasant property rights

राज्य-भर में निर्धन चरवाहों और किसानों के पशुधन की सुरक्षा हेतु विशेष न्याय-मण्डलों का गठन हुआ।

Panel 35
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Twilight conches echo across Dharanagari as Jnanavati smiles and freezes back into silent bronze

संध्याकाल के शंख गूँज उठे और ज्ञानवती मन्द मुस्कान के साथ पुनः मौन कांस्य-प्रतिमा बन गई। **सिंहासन बत्तीसी का बीसवाँ दिन सम्पन्न हुआ!**

Panel 36
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The remaining twelve celestial statues gleam in the evening torchlight

शेष बारह कांस्य-पुतलियाँ सन्ध्या की मशालों में जगमगाती रहीं, इक्कीसवीं पुतली (चन्द्रज्योति) की अमर गाथा की प्रतीक्षा करते हुए।

Panel 37
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King Bhoja departs the throne hall in quiet contemplation, inspired by Vikramaditya's justice
राजा भोज
"कल प्रातःकाल हम इक्कीसवीं सीढ़ी पर कदम रखेंगे और इक्कीसवीं पुतली—चन्द्रज्योति—की अमर गाथा सुनेंगे!"

राजा भोज पशु-प्रेम, निष्पक्ष न्याय और सत्य की शक्ति को हृदय में संजोकर मौन भाव से राजसभा से प्रस्थान कर गए।

राजा भोज

"कल प्रातःकाल हम इक्कीसवीं सीढ़ी पर कदम रखेंगे और इक्कीसवीं पुतली—चन्द्रज्योति—की अमर गाथा सुनेंगे!"

Panel 38
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