Skip to content

चतुर्विंशति पुतली करुणावती: चेदि देश का महा-अकाल, राज-अन्नागार का त्याग और सम्राट की अन्तिम ग्रास-रोटी

सिंहासन बत्तीसी (३२ पुतलियों की अमर गाथा)• katha

चतुर्विंशति पुतली करुणावती: चेदि देश का महा-अकाल, राज-अन्नागार का त्याग और सम्राट की अन्तिम ग्रास-रोटी

The Twenty-Fourth Statue: Karunavati & The Seven Famines of Chedi

ऑडियो सुनें•0:00 / --:--
0:00 / --:--
दृश्य 1

चौबीसवाँ सूर्योदय और करुणावती का प्रबोधन

The Twenty-Fourth Dawn & Karunavati
Morning sunlight streams across the sandstone colonnade onto the 32-step golden throne

चौबीसवें प्रभात की स्वर्णिम किरणों ने धारानगरी के राजप्रासाद को आलोकित किया, जहाँ राजा भोज ने तीसरे खण्ड (सीज़न ३) के समापन हेतु अपनी साधना पूर्ण की।

Panel 1
•
King Bhoja in sacred saffron silks approaches the twenty-fourth step of the throne

केसरिया परिधान धारण कर राजा भोज विनीत चरणों से चौबीसवीं सीढ़ी की ओर बढ़े।

Panel 2
•
The marble dais erupts with brilliant mother-pearl white and lotus-golden radiance

जैसे ही राजा का चरण चौबीसवीं सीढ़ी के निकट पहुँचा, मणिक वेदी मुक्ता-धवल और पद्म-स्वर्णिम दिव्य प्रकाश से प्रदीप्त हो उठी!

Panel 3
•
The twenty-fourth carved statue Karunavati opens her glowing mother-pearl eyes, laughing musically
पुतली करुणावती
ठहरो, राजा भोज! इस चौबीसवीं सीढ़ी पर कदम रखने का दुस्साहस मत करो!

चौबीसवीं कांस्य-पुतली—करुणावती—की मुक्ता-नयन खुले और वह सुवर्ण-धान्य-मञ्जरी व अन्न-पात्र हाथ में लिए दिव्य हँसी के साथ सजीव हो उठी!

पुतली करुणावती

ठहरो, राजा भोज! इस चौबीसवीं सीढ़ी पर कदम रखने का दुस्साहस मत करो!

Panel 4
•
King Bhoja halts in deep reverence with folded hands, gazing at the living bronze maiden
राजा भोज
हे करुणावती देवि! विक्रमादित्य के किस महा-त्याग और अकाल-पीड़ितों के उद्धार की गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

राजा भोज ने नतमस्तक होकर हाथ जोड़े और धान्य-मञ्जरी धारण की हुई पुतली की ओर देखा।

राजा भोज

हे करुणावती देवि! विक्रमादित्य के किस महा-त्याग और अकाल-पीड़ितों के उद्धार की गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

Panel 5
•
Karunavati speaks: 'Do you possess the supreme sacrificial compassion of Vikramaditya?'
पुतली करुणावती
क्या तुममें विक्रमादित्य जैसा महा-करुणा का तेज है, जब चेदि देश के सात वर्षीय महा-अकाल में उन्होंने अपने सारे राज-अन्नागार खोल दिए, कुश की चटाई पर सोकर उपवास किया और अपने मुख की अन्तिम जौ-रोटी एक अनाथ अंधी बालिका को खिला दी?

करुणावती ने सुवर्ण-धान्य-मञ्जरी उठाकर गम्भीर वाणी में कहा:

पुतली करुणावती

क्या तुममें विक्रमादित्य जैसा महा-करुणा का तेज है, जब चेदि देश के सात वर्षीय महा-अकाल में उन्होंने अपने सारे राज-अन्नागार खोल दिए, कुश की चटाई पर सोकर उपवास किया और अपने मुख की अन्तिम जौ-रोटी एक अनाथ अंधी बालिका को खिला दी?

Panel 6
•
दृश्य 2

चेदि देश का महा-अकाल, शरणार्थियों की पुकार और मन्त्रियों का संकोच

The Seven-Year Famine of Chedi & The Border Crisis
A catastrophic drought grips the neighboring realm of Chedi: cracked dry riverbeds and burning sun

पड़ोसी चेदि जनपद में लगातार सात वर्षों से वर्षा की एक बूँद न गिरी थी; नदियाँ सूखकर दरारें बन चुकी थीं और फसलें जलकर राख हो गई थीं।

Panel 7
•
Thousands of emaciated refugees from Chedi stream along the dusty highways toward Ujjayini
चेदि शरणार्थी
महाराज विक्रमादित्य के द्वार खोलो! हमारे बच्चे भूख से मर रहे हैं!

लाखों भूखे, प्यासे और असहाय शरणार्थी अपने बच्चों को कन्धों पर उठाए उज्जयिनी की सीमाओं की ओर अन्न की भीख माँगते हुए आ रहे थे।

चेदि शरणार्थी

महाराज विक्रमादित्य के द्वार खोलो! हमारे बच्चे भूख से मर रहे हैं!

Panel 8
•
In Ujjayini, corrupt grain merchants lock stone vaults, hoarding sacks of wheat
जमाखोर व्यापारी
जब अनाज का एक-एक दाना सोने के भाव बिकेगा, तब हम तिजोरियाँ खोलेंगे!

उज्जयिनी के कुछ स्वार्थी धनी व्यापारियों ने अपने भूमिगत गोदामों में ताले जड़ दिए और अनाज के दाम पचास गुना बढ़ाकर अकाल से लाभ कमाने का षड्यन्त्र रचा।

जमाखोर व्यापारी

जब अनाज का एक-एक दाना सोने के भाव बिकेगा, तब हम तिजोरियाँ खोलेंगे!

Panel 9
•
In royal court, ministers advise Vikramaditya to shut city gates and turn away refugees
महामन्त्री
चेदि का अकाल हमारा नहीं है, महाराज! हमें अपनी प्रजा की रक्षा करनी चाहिए!

राजसभा में मन्त्रियों ने विक्रमादित्य को परामर्श दिया: 'महाराज! सीमाओं पर लोहे के फाटक बन्द कर दीजिए, अन्यथा उज्जयिनी में भी अन्न का संकट आ जाएगा!'

महामन्त्री

चेदि का अकाल हमारा नहीं है, महाराज! हमें अपनी प्रजा की रक्षा करनी चाहिए!

Panel 10
•
Vikramaditya slams his fist in righteous fury: 'The earth belongs to God, not to borders!'
सम्राट विक्रमादित्य
जो राजा भूखे पड़ोसी को देखकर द्वार बन्द कर ले, वह सम्राट नहीं, कायर है!

विक्रमादित्य ने क्रोध में अपनी मुट्ठी सिंहासन पर मारी: 'यह वसुधा परमात्मा की है, सीमाओं की नहीं! जब तक विक्रमादित्य जीवित है, भारत-भूमि पर कोई मनुष्य भूख से नहीं मरेगा!'

सम्राट विक्रमादित्य

जो राजा भूखे पड़ोसी को देखकर द्वार बन्द कर ले, वह सम्राट नहीं, कायर है!

Panel 11
•
Imperial guards break iron locks on corrupt merchants' vaults, confiscating hoarded wheat

राज-रक्षकों ने तत्काल जमाखोर व्यापारियों के भूमिगत गोदामों के ताले तोड़ डाले और सारा जमा अनाज जन-कल्याण हेतु जब्त कर लिया।

Panel 12
•
दृश्य 3

चालीस राज-अन्नागारों का उद्घाटन और सम्राट का अन्न-त्याग व्रत

Opening the Imperial Granaries & The Emperor
Vikramaditya personally breaks the wax seals on all forty massive underground imperial granaries

विक्रमादित्य ने स्वयं जाकर उज्जयिनी के सभी चालीस विशाल भूमिगत राज-अन्नागारों की राज-मुहरें तोड़ दीं।

Panel 13
•
Hundreds of bullock carts overflowing with golden wheat roll out along all highways
अन्न-अधिकारी
सम्राट का आदेश है—प्रत्येक शरणार्थी परिवार को बिना किसी मूल्य के अनाज दिया जाए!

सैकड़ों बैलगाड़ियों में कनक, चावल और दालें भरकर राजमार्गों पर शरणार्थियों के शिविरों तक भेजी जाने लगीं।

अन्न-अधिकारी

सम्राट का आदेश है—प्रत्येक शरणार्थी परिवार को बिना किसी मूल्य के अनाज दिया जाए!

Panel 14
•
Free community soup kitchens established along every riverbank, serving hot food
सेवादार
गरम भोजन तैयार है! कोई भी व्यक्ति भूखा न लौटे!

शिप्रा और नर्मदा के तटों पर विशाल 'अन्न-सत्र' स्थापित हुए, जहाँ प्रतिदिन पचास हज़ार से अधिक भूखों को गरम भोजन परोसा जाने लगा।

सेवादार

गरम भोजन तैयार है! कोई भी व्यक्ति भूखा न लौटे!

Panel 15
•
Vikramaditya takes a sacred vow: 'Until all are fed, I shall eat one dry bread and sleep on grass!'
सम्राट विक्रमादित्य
प्रजा के भूखे रहते सम्राट को मिष्ठान्न का अधिकार नहीं है!

महाकाल मन्दिर में विक्रमादित्य ने कठोर प्रजा-व्रत का संकल्प लिया: 'जब तक चेदि की भूमि हरी नहीं होती और अन्तिम शरणार्थी तृप्त नहीं होता, मैं दिन में केवल एक सूखी जौ की रोटी खाऊँगा और कुश की चटाई पर सोऊँगा!'

सम्राट विक्रमादित्य

प्रजा के भूखे रहते सम्राट को मिष्ठान्न का अधिकार नहीं है!

Panel 16
•
At night in the palace, Vikramaditya sleeps humbly upon a simple mat of kusha grass

स्वर्ण-पलंग का त्याग कर सम्राट राजप्रासाद के फर्श पर कुश की सादी चटाई बिछाकर सोने लगे।

Panel 17
•
On the twenty-first day of the fast, hot winds swirl across the dusty gates of Ujjayini

व्रत के इक्कीसवें दिन लू के थपेड़े चल रहे थे; सम्राट स्वयं भोजनालयों का निरीक्षण करने नंगे पाँव नगर-द्वार की ओर निकले।

Panel 18
•
दृश्य 4

सूखे वटवृक्ष की छाँव, अंधी अनाथ बालिका और अन्तिम ग्रास का दान

The Roadside Beggar & The Final Crust of Bread
Vikramaditya walks barefoot in simple linen robes among the refugee camps

साधारण सूती वस्त्रों में विक्रमादित्य शिविरों में घूम-घूम कर प्रत्येक दुखी की सुध ले रहे थे।

Panel 19
•
An attendant brings the Emperor his single daily meal: a small dry crust of barley bread

सन्ध्या समय परिचारक ने सम्राट का दैनिक आहार प्रस्तुत किया—एक सूखी छोटी जौ की रोटी और एक कटोरा कुएँ का शीतल जल।

Panel 20
•
Near the roadside under a dead banyan tree, orphan Kalyani lies collapsed in the dust

जैसे ही सम्राट ने रोटी मुँह के पास की, मार्ग किनारे सूखे वटवृक्ष के नीचे से एक मन्द सिसकी सुनाई दी—आठ वर्षीय अंधी अनाथ बालिका कल्याणी तप्त धूल में बेसुध पड़ी थी!

Panel 21
•
The blind child whispers: 'Water... a crumb of bread... mother has died...'
अनाथ कल्याणी
कोई है जो मुझे रोटी का एक तिनका दे दे?...

कंकाल-समान बालिका ने अपने काँपते हाथ फैलाए: 'पानी... एक टुकड़ा रोटी... मेरी माँ मर चुकी है... मुझे भूख से बचा लो...'

अनाथ कल्याणी

कोई है जो मुझे रोटी का एक तिनका दे दे?...

Panel 22
•
Without hesitation, Vikramaditya kneels on the burning earth, cradling the dying orphan

बिना एक क्षण गँवाए विक्रमादित्य तप्त धूल में घुटनों के बल बैठ गए और उस मरणासन्न बालिका को अपनी गोद में समेट लिया।

Panel 23
•
Vikramaditya feeds his own single crust of bread and cup of water into the child's lips
सम्राट विक्रमादित्य
खाओ, मेरी बच्ची! तुम्हारा पिता विक्रमादित्य तुम्हारे पास है!

सम्राट ने अपनी पूरे दिन की एकमात्र सूखी रोटी के टुकड़े तोड़कर और जल की बूँदें उस बालिका के सूखे होठों में अपने हाथों से खिलाईं; पिता के समान अश्रु सम्राट की दाढ़ी पर बह रहे थे!

सम्राट विक्रमादित्य

खाओ, मेरी बच्ची! तुम्हारा पिता विक्रमादित्य तुम्हारे पास है!

Panel 24
•
दृश्य 5

वरुण देव का मेघ-वर्षण, अमृत-वृष्टि और चेदि देश का पुनरुद्धार

The Miraculous Rains of Varuna & Rebirth of Chedi
The little girl opens her tearful eyes, smiling in life-saving bliss

रोटी और जल पाते ही बालिका के नयनों में चेतना लौट आई; उसने कृतज्ञता से सम्राट की उँगलियों को थाम लिया।

Panel 25
•
The heavens rumble with mighty thunder; dark indigo rain clouds suddenly gather

उसी क्षण आकाश में प्रचण्ड मेघ-गर्जना हुई; एक नश्वर सम्राट के इस अलौकिक आत्म-त्याग को देखकर स्वर्ग के देव-कपाट खुल गए!

Panel 26
•
Torrential, sweet monsoon rain cascades down upon the parched earth, filling dry rivers

वरुण देव की कृपा से मूसलाधार शीतल अमृत-वृष्टि आरम्भ हो गई; सात वर्षों से प्यासी चेदि और मालवा की धरती तृप्त हो उठी!

Panel 27
•
Thousands of farmers, refugees, and children dance in ecstasy under the life-giving downpour
चेदि का कृषक
वर्षा आ गई! सम्राट विक्रमादित्य के आत्म-त्याग से हमारी धरती फिर जी उठी!

हज़ारों किसान, शरणार्थी और बच्चे वर्षा के जल में आनन्द से नाचने लगे; हाहाकार का स्थान विजय-उत्सव ने ले लिया!

चेदि का कृषक

वर्षा आ गई! सम्राट विक्रमादित्य के आत्म-त्याग से हमारी धरती फिर जी उठी!

Panel 28
•
Vikramaditya gifts fifty thousand bullocks, plowshares, and seed bags to Chedi

विक्रमादित्य ने चेदि के पुनर्निर्माण हेतु पचास हज़ार बैल, हल और उत्तम बीज उपहार में दिए, बिना एक इंच भूमि पर अधिकार जमाए!

Panel 29
•
A brilliant seven-colored rainbow arcs over the green lush fields of Chedi and Ujjayini

हरे-भरे खेतों के ऊपर सतरंगी इन्द्रधनुष खिल उठा; विक्रमादित्य की महा-करुणा ने अकाल और मृत्यु को सदा के लिए पराजित कर दिया!

Panel 30
•
दृश्य 6

करुणावती का निर्णय और सीज़न ३ का भव्य समापन

Karunavati
Back in Dharanagari palace, Karunavati looks directly at King Bhoja with mother-pearl eyes

धारानगरी के सभा-भवन में सजीव पुतली करुणावती ने राजा भोज को गम्भीर मुक्ता-नयनों से देखा।

Panel 31
•
Karunavati challenges: 'Have you ever emptied state granaries and given your final crust of bread?'
पुतली करुणावती
अब कहो, राजा भोज—क्या तुमने कभी विदेशी अकाल-पीड़ितों हेतु अपने सारे राज-अन्नागार खाली किए हैं? क्या स्वयं कुश की चटाई पर भूखे रहकर अपनी अन्तिम रोटी किसी अंधी अनाथ बालिका को खिलाई है? यदि ऐसा असीम आत्म-बलिदान और वात्सल्य तुममें है, तो कदम बढ़ाओ! अन्यथा लौट जाओ!

करुणावती ने चौबीसवीं सीढ़ी और सीज़न ३ के समापन की चुनौती दी:

पुतली करुणावती

अब कहो, राजा भोज—क्या तुमने कभी विदेशी अकाल-पीड़ितों हेतु अपने सारे राज-अन्नागार खाली किए हैं? क्या स्वयं कुश की चटाई पर भूखे रहकर अपनी अन्तिम रोटी किसी अंधी अनाथ बालिका को खिलाई है? यदि ऐसा असीम आत्म-बलिदान और वात्सल्य तुममें है, तो कदम बढ़ाओ! अन्यथा लौट जाओ!

Panel 32
•
King Bhoja lowers his head in deep humility and introspection, acknowledging Vikramaditya's sacrifice
राजा भोज
मुझमें विक्रमादित्य जैसा देव-तुल्य आत्म-त्याग, पराये दुःख को अपना मानकर स्वयं भूखे रहने का व्रत और अन्तिम ग्रास का दान देने का शील नहीं है, देवि। मैं इस चौबीसवीं सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

राजा भोज ने लज्जा और श्रद्धा से सिर झुका लिया:

राजा भोज

मुझमें विक्रमादित्य जैसा देव-तुल्य आत्म-त्याग, पराये दुःख को अपना मानकर स्वयं भूखे रहने का व्रत और अन्तिम ग्रास का दान देने का शील नहीं है, देवि। मैं इस चौबीसवीं सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

Panel 33
•
King Bhoja steps down from the twenty-fourth step, ordering emergency grain banks established

राजा भोज चौबीसवीं सीढ़ी से नीचे उतरे और धारानगरी तथा पूरे मालवा में आपातकालीन अकाल-अन्नागार, निःशुल्क अन्न-सत्र और सीमा-शरणार्थी आश्रय गृह स्थापित करने की आज्ञा दी।

Panel 34
•
King Bhoja issues royal proclamations establishing emergency famine grain reserves

राज्य-भर में अन्न-सुरक्षा न्यास और अनाथ पुनर्वास केन्द्रों का गठन हुआ।

Panel 35
•
Twilight conches echo across Dharanagari as Karunavati smiles and freezes back into silent bronze

संध्याकाल के शंख गूँज उठे और करुणावती मन्द मुस्कान के साथ पुनः मौन कांस्य-प्रतिमा बन गई। **सिंहासन बत्तीसी का सीज़न ३ (सप्तदश से चतुर्विंशति पुतली) भव्य रूप से सम्पन्न हुआ!**

Panel 36
•
The remaining eight celestial statues gleam in the evening torchlight, awaiting Season 4

शेष आठ कांस्य-पुतलियाँ सन्ध्या की मशालों में जगमगाती रहीं, अन्तिम सीज़न ४ (परम-सोपान शिखर — पञ्चविंशति से द्वात्रिंशत् पुतली) के आरम्भ की प्रतीक्षा करते हुए।

Panel 37
•
King Bhoja departs the throne hall in quiet contemplation, inspired by Vikramaditya's sacrifice
राजा भोज
"कल प्रातःकाल हम पच्चीसवीं सीढ़ी पर कदम रखेंगे और अन्तिम सीज़न ४ का शुभारम्भ करेंगे!"

राजा भोज महा-करुणा और आत्म-त्याग के अमर सत्यों को हृदय में संजोकर मौन भाव से राजसभा से प्रस्थान कर गए।

राजा भोज

"कल प्रातःकाल हम पच्चीसवीं सीढ़ी पर कदम रखेंगे और अन्तिम सीज़न ४ का शुभारम्भ करेंगे!"

Panel 38
•