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प्रस्तावना: धारानगरी, चरवाहा बालक का टीला और बत्तीस सीढ़ियों के दिव्य सिंहासन का प्राकट्य

सिंहासन बत्तीसी (३२ पुतलियों की अमर गाथा)• katha

प्रस्तावना: धारानगरी, चरवाहा बालक का टीला और बत्तीस सीढ़ियों के दिव्य सिंहासन का प्राकट्य

Prologue: The Discovery of the Buried Throne

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दृश्य 1

विवादित चारागाह और चरवाहा बालक का टीला

The Disputed Meadow & The Cowherd
Sunlit rural meadow outside ancient Dharanagari with blooming yellow mustard fields and grazing cattle

प्राचीन मालवा की सुरम्य भूमि पर, धारानगरी के उपकण्ठ में फैले विस्तृत चारागाह सुनहरी धूप में नहा रहे थे; पीली सरसों के लहलहाते खेतों के मध्य गऊएँ चर रही थीं, किंतु उस शांत दोपहर की नीरवता सहसा क्रोधपूर्ण गर्जना से भंग हो गई।

Panel 1
•
Two wealthy turbaned landowners in a fierce argument over cattle and stone boundary markers
कृषक देवदत्त
तूने आधी रात के घने अंधकार में सीमा-प्रस्तर सरका दिए, सोमका! ये पाँच दुधारू गायें और उनके बछड़े मेरी पैतृक गौशाला के हैं!
कृषक सोमका
झूठ मत बोल, देवदत्त! यह प्राचीन नीम का वृक्ष साक्षी है कि यह भूमि मेरे पूर्वजों की है। मेरी चरागाह से एक भी खुर बाहर नहीं जाएगा!

दो समृद्ध कृषक, देवदत्त और सोमका, भूमि की मेढ़ और गोधन के स्वामित्व को लेकर लाठियाँ ताने, लाल आँखों से एक-दूसरे को घूरते हुए विवाद कर रहे थे।

कृषक देवदत्त

तूने आधी रात के घने अंधकार में सीमा-प्रस्तर सरका दिए, सोमका! ये पाँच दुधारू गायें और उनके बछड़े मेरी पैतृक गौशाला के हैं!

कृषक सोमका

झूठ मत बोल, देवदत्त! यह प्राचीन नीम का वृक्ष साक्षी है कि यह भूमि मेरे पूर्वजों की है। मेरी चरागाह से एक भी खुर बाहर नहीं जाएगा!

Panel 2
•
Chandrabhanu resting peacefully atop a high grassy green earthen mound, watching with calm eyes

चारागाह के मध्य हरी दूब से ढका एक ऊँचा मिट्टी का टीला था; उस टीले के शिखर पर चौदह वर्षीय चरवाहा बालक चन्द्रभानु अपनी बाँस की छड़ी लिए शान्त भाव से बैठा था।

Panel 3
•
The landowners march toward the mound, intending to ask the youth to fetch the town elder
कृषक देवदत्त
चल टीले पर! इस चरवाहे से कहेंगे कि ग्राम-मुखिया को बुलाकर लाए!

विवाद इतना उग्र हो चुका था कि रक्तपात निश्चित जान पड़ता था; दोनों कृषक एक-दूसरे के वस्त्र खींचते हुए ग्राम-प्रधान को बुलाने के लिए टीले की ओर बढ़े।

कृषक देवदत्त

चल टीले पर! इस चरवाहे से कहेंगे कि ग्राम-मुखिया को बुलाकर लाए!

Panel 4
•
Chandrabhanu sits upright on the mound, his posture turning majestic as he raises his staff
चन्द्रभानु (टीले पर)
ठहरो! व्यर्थ कोलाहल त्यागकर अपने विवाद को मेरे धर्म-न्यायालय में प्रस्तुत करो! सत्य को चीखने की आवश्यकता नहीं होती, और असत्य चाहे जितना चीखे, धर्म के सम्मुख ठहर नहीं सकता!

जैसे ही चन्द्रभानु टीले की चोटी पर सीधा बैठा, उसका मुखमण्डल सूर्य-समान तेजस्वी हो उठा और उसने बाँस की छड़ी को राज-दण्ड की भाँति उठा लिया!

चन्द्रभानु (टीले पर)

ठहरो! व्यर्थ कोलाहल त्यागकर अपने विवाद को मेरे धर्म-न्यायालय में प्रस्तुत करो! सत्य को चीखने की आवश्यकता नहीं होती, और असत्य चाहे जितना चीखे, धर्म के सम्मुख ठहर नहीं सकता!

Panel 5
•
Chandrabhanu interrogates the farmers, pointing to reveal hidden ancestral boundary stones
चन्द्रभानु (टीले पर)
मिट्टी के गर्भ में सुरक्षित ये प्राचीन कीलें सिद्ध करती हैं कि भूमि देवदत्त की है, किंतु बछड़े सोमका की गाय से जन्मे हैं। भूमि देवदत्त को सौंपी जाए और बछड़े सोमका को!

टीले पर विराजे बालक ने किसी प्रकाण्ड न्यायविद की भाँति वर्षा के जल-प्रवाह, वृक्षों की जड़ों के विस्तार और हल के पुराने चिह्नों का सूक्ष्म विश्लेषण किया और भूमि खोदकर प्राचीन लौह-कीलों को प्रत्यक्ष करा दिया!

चन्द्रभानु (टीले पर)

मिट्टी के गर्भ में सुरक्षित ये प्राचीन कीलें सिद्ध करती हैं कि भूमि देवदत्त की है, किंतु बछड़े सोमका की गाय से जन्मे हैं। भूमि देवदत्त को सौंपी जाए और बछड़े सोमका को!

Panel 6
•
दृश्य 2

विलुप्त विवेक और राजदरबार में संवाद

The Vanishing Wisdom & The Royal Court
The farmers fall to their knees in tears of gratitude and reconciliation before the young judge

दोनों समृद्ध कृषक विस्मय के अश्रु बहाते हुए गले लग गए और बालक के अद्वितीय न्याय के सम्मुख नतमस्तक हो गए।

Panel 7
•
Chandrabhanu hops down from the mound, laughing and running after a stray calf

किंतु जैसे ही चन्द्रभानु टीले से नीचे कूदा, वह तुरंत साधारण ग्वाला बन गया और हँसता हुआ बछड़े के पीछे दौड़ा!

Panel 8
•
The landowners test the boy on flat ground; the boy stammers with zero recollection
कृषक देवदत्त
पुत्र! हमें फिर बताओ, तुम्हें भूमि के भीतर दबी कीलों का ज्ञान कैसे हुआ?
चन्द्रभानु (समतल पर)
कैसा निर्णय, काका? मुझे तो केवल इतना पता है कि मेरी काली गऊ को पोखर के पास की हरी घास पसंद है!

समतल भूमि पर पूछने पर वह लजा गया; उसे अपने द्वारा दिए गए गंभीर न्याय-निर्णय का किञ्चित भी स्मरण न था!

कृषक देवदत्त

पुत्र! हमें फिर बताओ, तुम्हें भूमि के भीतर दबी कीलों का ज्ञान कैसे हुआ?

चन्द्रभानु (समतल पर)

कैसा निर्णय, काका? मुझे तो केवल इतना पता है कि मेरी काली गऊ को पोखर के पास की हरी घास पसंद है!

Panel 9
•
In the grand sandstone court of Dharanagari, the farmers describe the miracle to King Bhoja

यह विस्मयकारी समाचार धारानगरी के भव्य राजदरबार तक पहुँचा; राजा भोज के सम्मुख उपस्थित होकर कृषकों ने टीले का अलौकिक चमत्कार सुनाया।

Panel 10
•
The Chief Prime Minister and royal philosophers debate the news with skepticism
महामन्त्री
महाराज, यह असम्भव है! मिट्टी कभी मनुष्य की बुद्धि नहीं बदल सकती!

प्रधान अमात्य और राज-पण्डितों ने संशय व्यक्त किया: 'महाराज, क्या मिट्टी का कोई टीला किसी अनपढ़ चरवाहे को देवगुरु बृहस्पति जैसा विवेक दे सकता है?'

महामन्त्री

महाराज, यह असम्भव है! मिट्टी कभी मनुष्य की बुद्धि नहीं बदल सकती!

Panel 11
•
King Bhoja raises his scepter, ordering the royal cavalry prepared to investigate

राजा भोज ने स्वर्ण-जड़ित राज-दण्ड को स्पर्श करते हुए कहा: 'एक सच्चा धर्मात्मा राजा केवल कानों से सुनकर उपहास नहीं करता, वह अपनी आँखों से सत्य की परीक्षा करता है। अश्व सज्ज किए जाएँ!'

Panel 12
•
दृश्य 3

राजा भोज की परीक्षा और लाक्षा-मुहर का रहस्य

King Bhoja
King Bhoja in traveling silks rides a white Marwari stallion across mustard fields

अगले ही प्रभात, राजा भोज अपने मन्त्रियों, न्यायविदों और सशस्त्र रक्षकों के साथ श्वेत मारवाड़ी अश्व पर सवार होकर चारागाह पहुँचे।

Panel 13
•
King Bhoja approaches the mound where Chandrabhanu sits grazing his cows

टीले पर पहुँचकर राजा भोज ने देखा कि वही ग्रामीण बालक बाँस की छड़ी लिए साधारण भाव से बैठा था।

Panel 14
•
King Bhoja presents a complex legal riddle involving three forged wills and wax seals
राजा भोज
हे बालक! जब तीनों मुहरें प्रामाणिक प्रतीत हों, तब धर्म-सिंहासन सत्य का निर्णय कैसे करे?

राजा भोज ने टीले पर बैठे बालक के सम्मुख तीन कूट-रचित वसीयतों, गुप्त राजकीय मुहरों और स्वर्ण-मुद्राओं का अत्यंत उलझा हुआ विवाद प्रस्तुत किया।

राजा भोज

हे बालक! जब तीनों मुहरें प्रामाणिक प्रतीत हों, तब धर्म-सिंहासन सत्य का निर्णय कैसे करे?

Panel 15
•
Chandrabhanu points with absolute authority, explaining the solar melting rates of wax seals
चन्द्रभानु (टीले पर)
महाराज, ग्रीष्म की धूप में लाख को तपाया जाए। कूट-रचित राल सत्य की मुहर से पहले पिघलकर अपना पाखंड प्रकट कर देती है!

टीले पर बैठे चन्द्रभानु ने तनिक भी संकोच न किया; उसने लाख के पिघलने की गति, लेखनी के दबाव और राजकीय मुहर की धातु का अद्वितीय विश्लेषण किया!

चन्द्रभानु (टीले पर)

महाराज, ग्रीष्म की धूप में लाख को तपाया जाए। कूट-रचित राल सत्य की मुहर से पहले पिघलकर अपना पाखंड प्रकट कर देती है!

Panel 16
•
The Chief Minister and scholars look at each other in utter shock as the solution works

धूप में तपाने पर जाली मुहर तुरंत बह निकली; राज-पण्डितों और मन्त्रियों के मुख खुले के खुले रह गए!

Panel 17
•
Chandrabhanu hops down from the mound and turns into a shy, unlettered youth once again

जैसे ही बालक टीले से नीचे उतरा, वह पुनः लजाता हुआ अबोध ग्वाला बन गया। अब राजा भोज ने स्वयं टीले की ओर कदम बढ़ाए।

Panel 18
•
दृश्य 4

सम्राट की आत्म-जागृति और उत्खनन की आज्ञा

The Sovereign
King Bhoja climbs the grassy earthen mound, his silk robes rustling as he reaches the crest

राजा भोज मन्द-मन्द गति से उस पावन टीले पर चढ़े; जैसे ही उनके चरण शिखर पर टिके, उनके भीतर एक अलौकिक विद्युत-तरंग दौड़ गई!

Panel 19
•
King Bhoja stands illuminated by a golden inner glow, feeling all earthly pride dissolve
राजा भोज
हे परमेश्वर! यह दिव्यता इस साधारण मिट्टी में नहीं है। इस भूमि के गर्भ में किसी महान चक्रवर्ती सम्राट की पुण्यात्मा अथवा उसका पावन आसन विश्राम कर रहा है!

समस्त सांसारिक अहंकार और राज्य का मद क्षण भर में भस्म हो गया; उनकी आत्मा में निष्पक्ष धर्म, सत्य और सार्वभौम न्याय का अगाध समुद्र हिलोरें लेने लगा।

राजा भोज

हे परमेश्वर! यह दिव्यता इस साधारण मिट्टी में नहीं है। इस भूमि के गर्भ में किसी महान चक्रवर्ती सम्राट की पुण्यात्मा अथवा उसका पावन आसन विश्राम कर रहा है!

Panel 20
•
King Bhoja steps down to flat ground; the miraculous clarity gently recedes

समतल भूमि पर उतरते ही वह अलौकिक विस्तार पुनः सामान्य चेतना में सिमट गया, जिससे राजा का विश्वास अटल हो गया।

Panel 21
•
King Bhoja orders royal excavators, master architects, and royal elephants summoned
राजा भोज
हम इस पावन धरोहर को संसार के सम्मुख प्रकट करेंगे!

राजा भोज ने तुरंत राज-शिल्पियों और सेनापतियों को आज्ञा दी: 'इस टीले के नीचे चालीस हाथ गहरा उत्खनन आरम्भ किया जाए!'

राजा भोज

हम इस पावन धरोहर को संसार के सम्मुख प्रकट करेंगे!

Panel 22
•
Chandrabhanu is granted a lifetime royal pension and pasture deed by King Bhoja

राजा ने चरवाहा बालक चन्द्रभानु को जीवन-पर्यन्त राजसी वृत्ति और सम्पूर्ण चारागाह का भू-स्वामित्व सहर्ष प्रदान किया।

Panel 23
•
The encampment around the mound sets up torches as night falls over the excavation site

संध्या ढलते ही टीले के चारों ओर सहस्रों मशालें प्रज्वलित हो उठीं और इतिहास के सबसे बड़े पुरातात्विक उत्खनन का शंखनाद हुआ।

Panel 24
•
दृश्य 5

चालीस हाथ का उत्खनन और सुवर्ण-सिंहासन का प्राकट्य

The Forty-Cubit Excavation & The Golden Throne
Hundreds of workers digging deep into red soil under torchlight, hauling earth in brass basins

मशालों के प्रखर प्रकाश में सैकड़ों श्रमिकों ने दिन-रात एक कर दिया; लोहे की कुदालों से लाल मिट्टी को खोदा गया और पीतल के बर्तनों में भरकर बाहर निकाला गया।

Panel 25
•
At forty cubits deep, an iron pickaxe strikes resonant metal, sending shower of golden sparks
प्रधान शिल्पी
महाराज! नीचे धातु की कोई विशाल स्वर्णिम संरचना है!

चालीस हाथ की गहराई पर पहुँचते ही, एक श्रमिक की कुदाल किसी अति-दृढ़ धातु से टकराई—स्वर्णिम चिनगारियाँ छिटकीं और महा-मन्दिर के घण्टे जैसी सुमधुर झंकार गूँज उठी!

प्रधान शिल्पी

महाराज! नीचे धातु की कोई विशाल स्वर्णिम संरचना है!

Panel 26
•
Excavators carefully sweep away red earth, uncovering thirty-two golden steps

श्रमिकों ने सावधानी से सदियों पुरानी मिट्टी की परतों को हटाया; पाताल की गहराइयों से बत्तीस स्वर्णिम सीढ़ियों वाला एक अलौकिक सिंहासन प्रकट हुआ!

Panel 27
•
Thirty-two sculpted celestial Apsaras flank the golden steps, each holding symbolic emblems

प्रत्येक सीढ़ी के दोनों ओर अत्यंत सजीव बत्तीस अप्सरा-पुतलियाँ हाथ जोड़े और चँवर-कमल लिए अलौकिक कला-सौन्दर्य के साथ विराजमान थीं।

Panel 28
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An ancient Brahmi inscription on the central gold dais is read aloud by torchlight
राज-पण्डित
यह तो महाराज विक्रमादित्य का साक्षात् बत्तीसी सिंहासन है!

दीपकों के प्रकाश में स्वर्ण-पीठिका पर प्राचीन ब्राह्मी लिपि चमक उठी: 'उज्जयिनी के परम प्रतापी चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य का धर्म-सिंहासन!'

राज-पण्डित

यह तो महाराज विक्रमादित्य का साक्षात् बत्तीसी सिंहासन है!

Panel 29
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Fifty royal war elephants hoist the colossal golden throne from the excavation pit

पचास मतवाले गजराजों ने मोटे रस्सों की सहायता से उस विशाल सिंहासन को जयघोष के बीच धरती के गर्भ से बाहर निकाला; राजा भोज ने नतमस्तक होकर उस पावन आसन की धूलि अपने मस्तक पर लगाई!

Panel 30
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दृश्य 6

महा-अभिषेक, राज्यारोहण और प्रथम पुतली का प्रबोधन

The Consecration & Ratnamanjari
Vedic priests bathe the golden throne with holy Gangajal, raw milk, saffron, and sandalwood paste

विद्वान ब्राह्मणों ने पवित्र गंगाजल, गोदुग्ध, हरिद्रा, केसर और चन्दन से उस दिव्य पीठ का वैदिक महा-अभिषेक किया; चारों ओर धूप-दीप की सुगन्ध फैल गई।

Panel 31
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The throne is consecrated on an eight-petaled lotus white marble dais in Dharanagari
राजा भोज
धारानगरी में न्याय का नया सूर्य उदित होगा!

राजदरबार के मुख्य मण्डप में, श्वेत संगमरमर की अष्टदल कमल वेदी पर उस बत्तीस सीढ़ियों वाले सुवर्ण सिंहासन की प्रतिष्ठा की गई।

राजा भोज

धारानगरी में न्याय का नया सूर्य उदित होगा!

Panel 32
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King Bhoja observes a three-day fast in white linen, purifying his mind for coronation dawn

राज-ज्योतिषियों ने पावन सूर्योदय का मुहूर्त निश्चित किया; राजा भोज ने तीन दिनों तक कठोर उपवास रखकर अपनी आत्मा को पवित्र किया और केसरिया रेशमी वस्त्र धारण किए।

Panel 33
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On coronation dawn, King Bhoja lifts his right foot toward the first step; golden light erupts

जैसे ही राजा भोज ने अपना दाहिना चरण सिंहासन की पहली सीढ़ी पर रखने के लिए उठाया, सम्पूर्ण मण्डप में एक अलौकिक स्वर्णिम प्रकाश छा गया!

Panel 34
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Statue 1 Ratnamanjari comes alive, her bronze eyes glowing with divine amusement
पुतली रत्नमञ्जरी
ठहरो, राजा भोज! इस सिंहासन पर चरण रखने का दुस्साहस मत करो! हम देवराज इन्द्र की शाप-ग्रस्त बत्तीस अप्सराएँ हैं, जो इस पाषाण-पीठ में बंधी हैं। इस दिव्य आसन पर वही राजा बैठ सकता है, जिसका हृदय उज्जयिनी के सम्राट विक्रमादित्य के समान निष्काम, परोपकारी, निर्भीक और अहंकार-शून्य हो!

पहली सीढ़ी पर प्रतिष्ठित कांस्य-पुतली—रत्नमञ्जरी—की आँखें सहसा सजीव हो उठीं और वह एक सहस्र मन्दिर-घण्टियों की मधुर झंकार के साथ खिलखिलाकर हँस पड़ी!

पुतली रत्नमञ्जरी

ठहरो, राजा भोज! इस सिंहासन पर चरण रखने का दुस्साहस मत करो! हम देवराज इन्द्र की शाप-ग्रस्त बत्तीस अप्सराएँ हैं, जो इस पाषाण-पीठ में बंधी हैं। इस दिव्य आसन पर वही राजा बैठ सकता है, जिसका हृदय उज्जयिनी के सम्राट विक्रमादित्य के समान निष्काम, परोपकारी, निर्भीक और अहंकार-शून्य हो!

Panel 35
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King Bhoja withdraws his foot in humility, folding his hands to hear the first tale

राजा भोज लज्जित होकर हाथ जोड़कर पीछे हट गए: 'हे देवि! मुझे सम्राट विक्रमादित्य के उस पावन चरित्र का श्रवण कराओ।' रत्नमञ्जरी ने मुस्कुराकर पहली अमर गाथा आरम्भ की!

Panel 36
•