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पञ्चदश पुतली कमलिनी: चारण कवि का गीत, समुद्र-तट का गोताखोर और अनन्त मुक्ता-दान का रहस्य

सिंहासन बत्तीसी (३२ पुतलियों की अमर गाथा)• katha

पञ्चदश पुतली कमलिनी: चारण कवि का गीत, समुद्र-तट का गोताखोर और अनन्त मुक्ता-दान का रहस्य

The Fifteenth Statue: Kamalini & The Ocean Pearl Diver

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दृश्य 1

पञ्चदश सूर्योदय और कमलिनी का प्रबोधन

The Fifteenth Dawn & Kamalini
Morning sunlight streams across the sandstone colonnade onto the 32-step golden throne

पंद्रहवें प्रभात की स्वर्णिम किरणों ने धारानगरी के राजप्रासाद को आलोकित किया, जहाँ राजा भोज ने पूर्ण निष्ठा से अपनी साधना पूर्ण की।

Panel 1
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King Bhoja in sacred saffron silks approaches the fifteenth step of the throne

केसरिया परिधान धारण कर राजा भोज विनीत चरणों से पंद्रहवीं सीढ़ी की ओर बढ़े।

Panel 2
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The marble dais erupts with brilliant lotus-azure and pearl-white radiance

जैसे ही राजा का चरण पंद्रहवीं सीढ़ी के निकट पहुँचा, मणिक वेदी पद्म-नील और मुक्ता-शुभ्र दिव्य प्रकाश से प्रदीप्त हो उठी!

Panel 3
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The fifteenth carved statue Kamalini opens her glowing lotus-azure eyes, laughing musically
पुतली कमलिनी
ठहरो, राजा भोज! इस पंद्रहवीं सीढ़ी पर कदम रखने का दुस्साहस मत करो!

पंद्रहवीं कांस्य-पुतली—कमलिनी—की नील-कमल आँखें खुलीं और वह स्वर्ण-कमल-नाल व मुक्ता-माला हाथ में लिए दिव्य हँसी के साथ सजीव हो उठी!

पुतली कमलिनी

ठहरो, राजा भोज! इस पंद्रहवीं सीढ़ी पर कदम रखने का दुस्साहस मत करो!

Panel 4
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King Bhoja halts in deep reverence with folded hands, gazing at the living bronze maiden
राजा भोज
हे कमलिनी देवि! विक्रमादित्य के किस दान-वैभव और समुद्र-साहस की पावन गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

राजा भोज ने नतमस्तक होकर हाथ जोड़े और मुक्ता-माला धारण की हुई पुतली की ओर देखा।

राजा भोज

हे कमलिनी देवि! विक्रमादित्य के किस दान-वैभव और समुद्र-साहस की पावन गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

Panel 5
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Kamalini speaks: 'Do you possess the boundless generosity of Vikramaditya?'
पुतली कमलिनी
क्या तुममें विक्रमादित्य जैसा असीम दान-वैभव और समुद्री साहस है, जब एक निर्धन चारण कवि के सत्य-गीत से मुग्ध होकर उन्होंने गोताखोरों की प्राण-रक्षा हेतु तूफानी सागर में छलांग लगाई और चालीस जहाजों का पूरा बेड़ा निर्धन मछुआरों को दान कर दिया?

कमलिनी ने मुक्ता-माला उठाकर गम्भीर वाणी में कहा:

पुतली कमलिनी

क्या तुममें विक्रमादित्य जैसा असीम दान-वैभव और समुद्री साहस है, जब एक निर्धन चारण कवि के सत्य-गीत से मुग्ध होकर उन्होंने गोताखोरों की प्राण-रक्षा हेतु तूफानी सागर में छलांग लगाई और चालीस जहाजों का पूरा बेड़ा निर्धन मछुआरों को दान कर दिया?

Panel 6
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दृश्य 2

सौराष्ट्र के चारण कवि का सत्य-गान और राजसभा का विस्मय

The Wandering Minstrel of Saurashtra
In the opulent royal spring court of ancient Ujjayini, Vikramaditya sits surrounded by musicians

उज्जयिनी के वसंतोत्सव के भव्य राज-दरबार में सम्राट विक्रमादित्य रत्न-सिंहासन पर विराजमान थे, जहाँ दूर-दूर के कवि राजा की प्रशंसा में गीत गा रहे थे।

Panel 7
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Minstrel Gunakara enters the court with his simple wooden tambura

तभी फटे वस्त्र पहने सौराष्ट्र के साठ वर्षीय वृद्ध चारण कवि गुणाकर अपनी पुरानी काष्ठ-तम्बूरा लिए दरबार में प्रविष्ट हुए।

Panel 8
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Gunakara plucks the strings of his tambura, singing a profound verse on impermanence
चारण कवि गुणाकर
राज-प्रासाद धूल बन जाते हैं, हे राजन! केवल वही हाथ युगों-युगों तक जीवित रहता है जो बिना अहंकार के दीनों को सर्वस्व सौंप देता है!

गुणाकर ने तम्बूरे के तार छेड़े और चाटुकारिता के स्थान पर सांसारिक नश्वरता और निष्काम दान का गूढ़ सत्य-गीत गाया।

चारण कवि गुणाकर

राज-प्रासाद धूल बन जाते हैं, हे राजन! केवल वही हाथ युगों-युगों तक जीवित रहता है जो बिना अहंकार के दीनों को सर्वस्व सौंप देता है!

Panel 9
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Close-up of the minstrel's singing face filled with detachment

कवि की आँखों में वैराग्य का तेज था; उन्होंने राजा की सेना या खजाने की नहीं, अपितु आत्मा के अमर धर्म की गाथा गाई।

Panel 10
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Flattering courtiers murmur in anger, but Vikramaditya listens with deep tears of spiritual joy
दरबारी
यह भिक्षुक राजसभा में वैराग्य का गीत गाकर उत्सव का अपमान कर रहा है!

दरबारी मन्त्री कवि की निडर सत्य-वाणी पर कुपित हो उठे, परन्तु विक्रमादित्य के नयनों से आनन्द के अश्रु बह निकले!

दरबारी

यह भिक्षुक राजसभा में वैराग्य का गीत गाकर उत्सव का अपमान कर रहा है!

Panel 11
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Vikramaditya stands up, proclaiming: 'Flattery is cheap, but unvarnished truth is priceless!'
सम्राट विक्रमादित्य
इस सच्चे कवि को राजकोष से एक लाख स्वर्ण-दीनार और रेशमी वस्त्र अर्पित किए जाएँ!

विक्रमादित्य सिंहासन से उठ खड़े हुए: 'चाटुकारिता सस्ती है, परन्तु सत्य का मूल्य हीरों से भी बढ़कर है!'

सम्राट विक्रमादित्य

इस सच्चे कवि को राजकोष से एक लाख स्वर्ण-दीनार और रेशमी वस्त्र अर्पित किए जाएँ!

Panel 12
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दृश्य 3

कवि का त्याग और प्रभास के गोताखोरों का संताप

The King
Vikramaditya offers a royal gift of one hundred thousand gold dinars to Gunakara
सम्राट विक्रमादित्य
यह सुवर्ण आपके अद्वितीय काव्य का आदर है, कविराज!

जब थालों में भरकर स्वर्ण-मुद्राएँ कवि के सम्मुख रखी गईं, तो वृद्ध चारण ने हाथ जोड़कर मन्द मुस्कान से मना कर दिया।

सम्राट विक्रमादित्य

यह सुवर्ण आपके अद्वितीय काव्य का आदर है, कविराज!

Panel 13
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Gunakara declines the gold: 'I live by the sky, but three thousand pearl divers in Prabhasa suffer!'
चारण कवि गुणाकर
वे गहरे समुद्र में बिना सुरक्षा के जान जोखिम में डालते हैं और बदले में उन्हें सूखी रोटियाँ भी नहीं मिलतीं!

गुणाकर ने कहा: 'मैं प्रकृति के आश्रय में जीता हूँ, राजन! परन्तु सौराष्ट्र के प्रभास पाटन में तीन हज़ार मुक्ता-गोताखोर लोभी व्यापारियों के चंगुल में तड़प रहे हैं!'

चारण कवि गुणाकर

वे गहरे समुद्र में बिना सुरक्षा के जान जोखिम में डालते हैं और बदले में उन्हें सूखी रोटियाँ भी नहीं मिलतीं!

Panel 14
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Vikramaditya listens intently as the minstrel describes the plight of the coastal divers

विक्रमादित्य का हृदय करुणा से भर गया; उन्होंने समुद्र-तट के श्रमजीवियों की मुक्ति का संकल्प लिया।

Panel 15
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Vikramaditya makes a solemn vow before the assembly
सम्राट विक्रमादित्य
कविराज! मैं स्वयं आपके साथ प्रभास पाटन चलूँगा!

सम्राट ने राजसभा में घोषणा की: 'भारत का दक्षिणी समुद्र शोषण का नहीं, समृद्धि और स्वतंत्रता का धाम बनेगा!'

सम्राट विक्रमादित्य

कविराज! मैं स्वयं आपके साथ प्रभास पाटन चलूँगा!

Panel 16
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Vikramaditya dons practical riding leather, saddling his swift stallion

राजसी वस्त्र उतारकर विक्रमादित्य ने साधारण योद्धा के चर्म-वस्त्र धारण किए और अपने तीव्रगामी अश्व पर सवार हुए।

Panel 17
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Vikramaditya and the minstrel ride across the rugged sunlit hills of Saurashtra

सम्राट और कवि सौराष्ट्र की पथरीली पहाड़ियों को पार करते हुए अरब सागर के तट की ओर अग्रसर हुए।

Panel 18
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दृश्य 4

प्रभास का तूफानी सागर और अगाध जल में छलांग

The Coastal Reefs & The Heroic Ocean Rescue
Arriving at the rocky shores of Prabhasa Patan, turquoise ocean waves crash against jagged cliffs

प्रभास पाटन के पथरीले तट पर पहुँचते ही विशाल समुद्री लहरें चट्टानों से टकराकर गरज रही थीं।

Panel 19
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Impoverished fishermen and pearl divers dive into deep reefs without safety gear

सैकड़ों दीन गोताखोर बिना किसी सुरक्षा-रस्सी के शार्क-भरे गहरे जल में डुबकी लगा रहे थे, जबकि तट पर बैठे धनी व्यापारी कोड़ों से उन पर पहरा दे रहे थे।

Panel 20
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A sudden violent ocean tempest strikes; dark storm clouds churn the sea

अचानक भयानक समुद्री तूफान आया; आकाश में काले मेघ घिर आए और विशाल लहरों ने गोताखोरों को प्रवाल-चट्टानों के नीचे फँसा दिया!

Panel 21
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Vikramaditya dives fearlessly off the cliff into the churning ocean abyss
चारण कवि गुणाकर
सम्राट ने स्वयं समुद्र में छलांग लगा दी! हे ईश्वर, इनकी रक्षा करो!

नाविकों की प्रतीक्षा किए बिना विक्रमादित्य ने दाँतों में वूट्ज़ खंजर दबाया और ऊँची चट्टान से उफनते समुद्र में छलांग लगा दी!

चारण कवि गुणाकर

सम्राट ने स्वयं समुद्र में छलांग लगा दी! हे ईश्वर, इनकी रक्षा करो!

Panel 22
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Deep beneath the waves, Vikramaditya slices through tangled seaweed ropes, freeing trapped divers

अगाध गहरे जल में उतरकर विक्रमादित्य ने जल-लताओं और टूटी रस्सियों को काटकर दम तोड़ते दो गोताखोरों को मुक्त कराया!

Panel 23
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Vikramaditya bursts through the foaming waves, carrying the rescued divers onto the sandy beach
बचाया गया गोताखोर
आपने हमें यमराज के मुख से खींच लिया, हे महापुरुष!

सम्राट दोनों जीवित युवकों को अपने कन्धों पर उठाकर झागदार लहरों को चीरते हुए सुरक्षित तट पर लौट आए!

बचाया गया गोताखोर

आपने हमें यमराज के मुख से खींच लिया, हे महापुरुष!

Panel 24
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दृश्य 5

चालीस मुक्ता-जहाजों का बेड़ा और मछुआरों का उद्धार

The Gift of the Pearl Fleet & Royal Charter
Hundreds of fishermen and divers gather around the drenched Emperor in tears of awe

तट पर हज़ारों मछुआरे और गोताखोर उस भीगे हुए शूरवीर के चरणों में श्रद्धा से झुक गए।

Panel 25
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Vikramaditya purchases the entire fleet of forty oceanic pearl barges with state gold

विक्रमादित्य ने लोभी साहूकारों को तलब कर राजकोष के स्वर्ण से उनके सभी चालीस मुक्ता-जहाज तत्काल खरीद लिए।

Panel 26
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Vikramaditya presents the golden copper charter granting full ownership to the divers forever
सम्राट विक्रमादित्य
समुद्र की सम्पत्ति पर पसीना बहाने वाले श्रमिकों का प्रथम अधिकार है!

विक्रमादित्य ने ताम्र-पत्र का राज-शासनादेश जारी किया: 'आज से ये चालीस जहाज और समुद्र की समस्त मुक्ता-सम्पदा इन तीन हज़ार गोताखोरों की सामूहिक सम्पत्ति होगी!'

सम्राट विक्रमादित्य

समुद्र की सम्पत्ति पर पसीना बहाने वाले श्रमिकों का प्रथम अधिकार है!

Panel 27
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The grateful divers offer the King the supreme ocean pearl (Maha-Shankha Mukta)

कृतज्ञ गोताखोरों ने समुद्र की अतल गहराइयों से निकाला गया सबसे बड़ा, अलौकिक 'महा-शंख मुक्ता' सम्राट को भेंट किया।

Panel 28
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Vikramaditya gently places the priceless cosmic pearl into the wooden bowl of Minstrel Gunakara
चारण कवि गुणाकर
आप नश्वर राजा नहीं, साक्षात् दीनानाथ हैं, महाराज!

विक्रमादित्य ने वह अमूल्य मोती अपने खजाने में रखने के बजाय चारण कवि गुणाकर के काष्ठ-पात्र में रख दिया: 'यह उस सत्य-वाणी का सम्मान है जिसने तीन हज़ार कुलों का उद्धार कराया!'

चारण कवि गुणाकर

आप नश्वर राजा नहीं, साक्षात् दीनानाथ हैं, महाराज!

Panel 29
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Under the golden morning sun, forty pearl barges raise saffron sails as Gunakara sings hymns

स्वर्णिम प्रभात में चालीस मुक्ता-जहाजों ने केसरिया पाल फहराए और कवि गुणाकर के मंगलगान के साथ प्रभास का समुद्र उत्सव में डूब गया।

Panel 30
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दृश्य 6

कमलिनी का निर्णय और राजा भोज का संकोच

Kamalini
Back in Dharanagari palace, Kamalini looks directly at King Bhoja with lotus-azure eyes

धारानगरी के सभा-भवन में सजीव पुतली कमलिनी ने राजा भोज को गम्भीर नील-नयनों से देखा।

Panel 31
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Kamalini challenges: 'Have you ever rewarded the hard truth of a poet, and gifted an entire maritime fleet?'
पुतली कमलिनी
अब कहो, राजा भोज—क्या तुमने कभी किसी कवि की कटु सत्य-वाणी का आदर कर तूफानी समुद्र में गोताखोरों की जान बचाई है, और चालीस जहाजों का पूरा बेड़ा निर्धन श्रमिकों को दान दिया है? यदि ऐसा अगाध दान-वीर भाव तुममें है, तो कदम बढ़ाओ! अन्यथा लौट जाओ!

कमलिनी ने पंद्रहवीं सीढ़ी की चुनौती दी:

पुतली कमलिनी

अब कहो, राजा भोज—क्या तुमने कभी किसी कवि की कटु सत्य-वाणी का आदर कर तूफानी समुद्र में गोताखोरों की जान बचाई है, और चालीस जहाजों का पूरा बेड़ा निर्धन श्रमिकों को दान दिया है? यदि ऐसा अगाध दान-वीर भाव तुममें है, तो कदम बढ़ाओ! अन्यथा लौट जाओ!

Panel 32
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King Bhoja lowers his head in deep humility and introspection, acknowledging Vikramaditya's courage
राजा भोज
मुझमें विक्रमादित्य जैसा असीम समुद्री साहस, सत्य को सुनने का धैर्य और संपूर्ण मुक्ता-बेड़ा त्यागने की उदारता नहीं है, देवि। मैं इस पंद्रहवीं सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

राजा भोज ने लज्जा और श्रद्धा से सिर झुका लिया:

राजा भोज

मुझमें विक्रमादित्य जैसा असीम समुद्री साहस, सत्य को सुनने का धैर्य और संपूर्ण मुक्ता-बेड़ा त्यागने की उदारता नहीं है, देवि। मैं इस पंद्रहवीं सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

Panel 33
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King Bhoja steps down from the fifteenth step, ordering maritime welfare guilds established

राजा भोज पंद्रहवीं सीढ़ी से नीचे उतरे और धारानगरी तथा पूरे मालवा के सभी मछुआरों व नदी-नाविकों हेतु कर-मुक्ति और समुद्री राहत कोष स्थापित करने की आज्ञा दी।

Panel 34
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King Bhoja issues royal proclamations granting tax exemptions to all fishing communities

राज्य-भर के जल-मार्गों पर श्रमिकों के कल्याण हेतु सुरक्षा-निधियों का गठन हुआ।

Panel 35
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Twilight conches echo across Dharanagari as Kamalini smiles and freezes back into silent bronze

संध्याकाल के शंख गूँज उठे और कमलिनी मन्द मुस्कान के साथ पुनः मौन कांस्य-प्रतिमा बन गई। **सिंहासन बत्तीसी का पंद्रहवाँ दिन सम्पन्न हुआ!**

Panel 36
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The remaining seventeen celestial statues gleam in the evening torchlight

शेष सत्रह कांस्य-पुतलियाँ सन्ध्या की मशालों में जगमगाती रहीं, सोलहवीं पुतली (सीज़न २ के समापन) की अमर गाथा की प्रतीक्षा करते हुए।

Panel 37
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King Bhoja departs the throne hall in quiet contemplation, inspired by Vikramaditya's magnanimity
राजा भोज
कल प्रातःकाल हम सोलहवीं सीढ़ी पर कदम रखेंगे और सोलहवीं पुतली—मनमोहिनी—की अमर गाथा सुनेंगे!

राजा भोज त्याग और असीम करुणा के अमर आदर्शों से प्रेरित होकर मौन भाव से राजसभा से प्रस्थान कर गए।

राजा भोज

कल प्रातःकाल हम सोलहवीं सीढ़ी पर कदम रखेंगे और सोलहवीं पुतली—मनमोहिनी—की अमर गाथा सुनेंगे!

Panel 38
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