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अष्टम पुतली सुखाविका: दो दैवज्ञ, राजा का मृत्यु-योग और व्याघ्र-शावक का पावन उद्धार

सिंहासन बत्तीसी (३२ पुतलियों की अमर गाथा)• katha

अष्टम पुतली सुखाविका: दो दैवज्ञ, राजा का मृत्यु-योग और व्याघ्र-शावक का पावन उद्धार

The Eighth Statue: Sukhavika & The Forest Leopard's Mercy

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दृश्य 1

अष्टम सूर्योदय और सुखाविका का प्रबोधन (प्रथम ऋतु पूर्णाहुति)

The Eighth Dawn & Sukhavika
Golden sunlight streams through the sandstone colonnade onto the 32-step golden throne

अष्टम प्रभात की स्वर्णिम किरणों ने धारानगरी के राजप्रासाद को आलोकित किया, जहाँ राजा भोज ने अपनी प्रथम ऋतु (सीज़न १) की अन्तिम साधना पूर्ण की।

Panel 1
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King Bhoja in sacred saffron silks approaches the eighth step of the golden throne

केसरिया परिधान धारण कर राजा भोज विनीत चरणों से आठवीं सीढ़ी की ओर बढ़े।

Panel 2
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The marble dais erupts with brilliant diamond-crystal and golden radiance

जैसे ही राजा का चरण आठवीं सीढ़ी के निकट पहुँचा, मणिक वेदी हीरक-शुभ्र और स्वर्णिम दिव्य प्रकाश से प्रदीप्त हो उठी!

Panel 3
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The eighth carved statue Sukhavika opens her glowing diamond-crystal eyes, laughing musically
पुतली सुखाविका
ठहरो, राजा भोज! इस आठवीं सीढ़ी पर पग धरने का दुस्साहस मत करो!

आठवीं कांस्य-पुतली—सुखाविका—की हीरक-समान आँखें खुलीं और वह ज्योतिर्विद यन्त्र हाथ में लिए दिव्य हँसी के साथ सजीव हो उठी!

पुतली सुखाविका

ठहरो, राजा भोज! इस आठवीं सीढ़ी पर पग धरने का दुस्साहस मत करो!

Panel 4
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King Bhoja halts in deep reverence with folded hands, gazing at the living bronze maiden
राजा भोज
हे सुखाविका देवि! विक्रमादित्य के किस काल-जयी पराक्रम की पावन गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

राजा भोज ने नतमस्तक होकर हाथ जोड़े और हीरक-नेत्रा पुतली की ओर देखा।

राजा भोज

हे सुखाविका देवि! विक्रमादित्य के किस काल-जयी पराक्रम की पावन गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

Panel 5
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Sukhavika speaks: 'Do you possess the transcendent fearlessness and compassion of Vikramaditya?'
पुतली सुखाविका
क्या तुममें विक्रमादित्य जैसा काल-जयी निर्भय साहस है, जब ज्योतिषियों द्वारा अपनी मृत्यु की भविष्यवाणी सुनकर भी वे निहत्थे वन में चले गए, और एक हिंसक व्याघ्र के मरणासन्न शावक को बचाकर स्वयं विधाता के लिखे लेख को बदल दिया?

सुखाविका ने नक्षत्र-पट्टिका उठाकर दिव्य वाणी में कहा:

पुतली सुखाविका

क्या तुममें विक्रमादित्य जैसा काल-जयी निर्भय साहस है, जब ज्योतिषियों द्वारा अपनी मृत्यु की भविष्यवाणी सुनकर भी वे निहत्थे वन में चले गए, और एक हिंसक व्याघ्र के मरणासन्न शावक को बचाकर स्वयं विधाता के लिखे लेख को बदल दिया?

Panel 6
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दृश्य 2

उज्जयिनी की वेधशाला और सम्राट का मृत्यु-योग

The Fatal Royal Horoscope of Ujjayini
In the royal observatory of ancient Ujjayini, astrologer Varahamitra examines planetary charts

प्राचीन उज्जयिनी की वेधशाला में तारों भरे आकाश के नीचे राज-ज्योतिषी वराहमित्र और विद्वानों ने सम्राट की जन्म-कुण्डली का सूक्ष्म गणित किया।

Panel 7
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The scholars discover a terrifying planetary conjunction (Mrityu-Yoga)

काँपते हाथों से उन्होंने देखा कि आगामी पूर्णमासी के ग्रहण की मध्यरात्रि को महावन में एक काल-शार्दूल (काला तेंदुआ) के हाथों सम्राट का निश्चित 'मृत्यु-योग' बन रहा था!

Panel 8
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In open Ujjayini court, Varahamitra presents the fatal horoscope with tears, begging the King to hide
ज्योतिषाचार्य वराहमित्र
महाराज! उस रात महावन की ओर पग न धरें! ग्रहों का विधान अटल है!

राजसभा में वराहमित्र ने अश्रु बहाते हुए यह मृत्यु-योग प्रस्तुत किया और सम्राट से सहस्रों धनुर्धरों के लौह-दुर्ग में छिप जाने की प्रार्थना की।

ज्योतिषाचार्य वराहमित्र

महाराज! उस रात महावन की ओर पग न धरें! ग्रहों का विधान अटल है!

Panel 9
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Vikramaditya smiles with serene yogic detachment: 'Death is the natural law of the mortal body!'
सम्राट विक्रमादित्य
नश्वर देह का अन्त प्रकृति का अटल नियम है, दैवज्ञ! क्षत्रिय कभी कायरों की भाँति लौह-दीवारों के पीछे छिपकर काल से नहीं डरता!

विक्रमादित्य ने अचल योग-वैराग्य के साथ मन्द मुस्कान से कहा:

सम्राट विक्रमादित्य

नश्वर देह का अन्त प्रकृति का अटल नियम है, दैवज्ञ! क्षत्रिय कभी कायरों की भाँति लौह-दीवारों के पीछे छिपकर काल से नहीं डरता!

Panel 10
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Vikramaditya orders the royal astrologers rewarded with gold for their scientific accuracy
महामन्त्री
महाराज! कम से कम दस वूट्ज़ खड्गधारी सैनिक साथ ले जाएँ!
सम्राट विक्रमादित्य
शस्त्र भय का प्रतीक हैं, मन्त्रीवर। जहाँ ईश्वर पर विश्वास हो, वहाँ केवल धर्म का कवच पर्याप्त है!

विक्रमादित्य ने ज्योतिषियों को उनकी प्रामाणिक गणना के लिए स्वर्ण-मुद्राओं से पुरस्कृत किया और सभी अंगरक्षकों को लौटने की आज्ञा दी।

महामन्त्री

महाराज! कम से कम दस वूट्ज़ खड्गधारी सैनिक साथ ले जाएँ!

सम्राट विक्रमादित्य

शस्त्र भय का प्रतीक हैं, मन्त्रीवर। जहाँ ईश्वर पर विश्वास हो, वहाँ केवल धर्म का कवच पर्याप्त है!

Panel 11
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At twilight on the eclipse day, Vikramaditya removes his royal armor and sword

ग्रहण की सन्ध्या को सम्राट ने राजसी कवच और खड्ग उतारकर केवल सादे श्वेत रेशमी वस्त्र धारण किए।

Panel 12
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दृश्य 3

महावन में एकाकी पदयात्रा और काल-शार्दूल का प्राकट्य

The Midnight Walk into Mahavana
Under the full moon eclipse, Vikramaditya walks alone into the dense Mahavana wilderness

चन्द्र-ग्रहण के मन्द रजत प्रकाश में विक्रमादित्य पूरी तरह निहत्थे होकर महावन के बीहड़ अरण्य में अकेले प्रविष्ट हुए।

Panel 13
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Walking through dark twisted banyan trees and granite gorges shrouded in creeping fog

घने वटवृक्षों और कुहासे से ढँकी पाषाण-कन्दराओं के मध्य वे शान्त मन से आगे बढ़ते रहे।

Panel 14
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Entering a deep rocky canyon where a bloodcurdling predator roar echoes off the walls

एक संकरी पथरीली घाटी में प्रवेश करते ही चट्टानों को कँपाने वाली भयानक हिंसक दहाड़ गूँज उठी!

Panel 15
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On a high rocky ledge, the giant black leopard crouches with bared fangs and glowing green eyes

ऊँचे पाषाण-कगार पर रक्त-नेत्रों वाला विशालकाय काला तेंदुआ (काल-शार्दूल) नुकीले दाँत निकाले झपटने को तैयार बैठा था!

Panel 16
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Vikramaditya stands calmly in the clearing with folded hands, projecting unconditional love
सम्राट विक्रमादित्य
हे वन-राज! यदि विधाता ने मेरा शरीर तुम्हारी क्षुधा-शान्ति हेतु निश्चित किया है, तो मैं सहर्ष प्रस्तुत हूँ!

विक्रमादित्य हाथ जोड़कर चाँदनी में शान्त खड़े रहे; उनके हृदय से हिंसक पशु के प्रति केवल असीम करुणा (मैत्री-भाव) का प्रवाह बह रहा था।

सम्राट विक्रमादित्य

हे वन-राज! यदि विधाता ने मेरा शरीर तुम्हारी क्षुधा-शान्ति हेतु निश्चित किया है, तो मैं सहर्ष प्रस्तुत हूँ!

Panel 17
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The giant black leopard leaps off the cliff ledge, landing five paces from the unarmed Emperor

विशाल तेंदुए ने कगार से छलांग लगाई और तीखे पंजों के साथ निहत्थे सम्राट के सम्मुख आ गिरा!

Panel 18
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दृश्य 4

दबे हुए शावक की रक्षा और पाषाण-उत्तोलन

The Trapped Cub & The Act of Fearless Mercy
As the beast crouches to strike, Vikramaditya hears a faint whimper from beneath a boulder
सम्राट विक्रमादित्य
ठहरो, माता! तुम्हारी दहाड़ में क्रोध नहीं, तुम्हारी सन्तान की प्राण-रक्षा की पुकार है!

आक्रमण से ठीक पहले विक्रमादित्य ने एक गिरे हुए विशाल ग्रेनाइट पाषाण के नीचे से अत्यन्त मन्द करुण क्रन्दन सुना।

सम्राट विक्रमादित्य

ठहरो, माता! तुम्हारी दहाड़ में क्रोध नहीं, तुम्हारी सन्तान की प्राण-रक्षा की पुकार है!

Panel 19
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Beneath the heavy rock lies the leopard's newborn cub, pinned and slowly dying

शिला के नीचे तेंदुए का नवजात शावक दबा हुआ था, जिसकी हड्डियाँ कुचली जा रही थीं और वह प्यास से दम तोड़ रहा था!

Panel 20
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Ignoring the snarling mother, Vikramaditya uses immense warrior strength to hoist the boulder
सम्राट विक्रमादित्य
उठो, नन्हें जीव! धर्म के राज्य में कोई निरपराध अकाल मृत्यु नहीं मरेगा!

घुर्राती माता की परवाह किए बिना विक्रमादित्य घुटनों के बल झुके और अपने असीम बाहुबल से उस भारी पाषाण को उठा दिया!

सम्राट विक्रमादित्य

उठो, नन्हें जीव! धर्म के राज्य में कोई निरपराध अकाल मृत्यु नहीं मरेगा!

Panel 21
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Vikramaditya gently lifts the injured cub, applying herbal balm and pouring water

उन्होंने घायल शावक को गोद में उठाया, दिव्य जड़ी-बूटी का लेप लगाया और तुम्बे से शीतल जल उसके मुख में डाला।

Panel 22
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The healed little cub purrs and playfully licks Vikramaditya's fingers

क्षण-भर में शावक की पीड़ा दूर हो गई और वह आनन्द से गुर्राते हुए सम्राट की उँगलियों को चाटने लगा!

Panel 23
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Overwhelmed by love, the leopard lowers her fangs, nuzzling against Vikramaditya's feet

शावक को जीवित देख हिंसक तेंदुए का क्रोध पिघल गया; उसने दाँत भीतर कर मस्तक झुका दिया और कृतज्ञता के आँसुओं से सम्राट के चरणों को चूमने लगी!

Panel 24
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दृश्य 5

दिव्य वन-देवताओं का वरदान और भाग्य का पुनर्लेखन

The Celestial Transfiguration & Rewritten Destiny
The lunar eclipse passes as a golden light envelops the canyon, transfiguring the leopards

ग्रहण समाप्त होते ही आकाश से दिव्य स्वर्णिम प्रकाश उतरा और दोनों व्याघ्र पंखयुक्त तेजस्वी वन-देवताओं के रूप में रूपान्तरित हो गए!

Panel 25
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The celestial forest spirit blesses Emperor Vikramaditya with perpetual victory
वन-देवता
हे धर्म-अवतार विक्रमादित्य! आपकी कीर्ति से समस्त अरण्य सदा अभय रहेंगे!

वन-देवता ने विक्रमादitya को वरदान दिया: 'जिसके हृदय में हिंसक पशु के लिए भी निष्काम प्रेम हो, काल भी उसका दास बन जाता है!'

वन-देवता

हे धर्म-अवतार विक्रमादित्य! आपकी कीर्ति से समस्त अरण्य सदा अभय रहेंगे!

Panel 26
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Astrologer Varahamitra and royal ministers drop their torches and fall to their knees in awe
ज्योतिषाचार्य वराहमित्र
त्राहि माम्, महाराज! आपकी निस्वार्थ करुणा ने काल के चक्र को मोड़ दिया!

पीछे से छिपकर आए राज-ज्योतिषी वराहमित्र और मन्त्रियों ने मशालें फेंक दीं और विस्मय से भूमि पर साष्टांग नमन किया।

ज्योतिषाचार्य वराहमित्र

त्राहि माम्, महाराज! आपकी निस्वार्थ करुणा ने काल के चक्र को मोड़ दिया!

Panel 27
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Vikramaditya smiles at the scholars: 'Selfless compassion rewrites the stars!'
सम्राट विक्रमादित्य
तुम्हारा गणित सत्य था, दैवज्ञ! परन्तु निःस्वार्थ करुणा और धर्म में ग्रहों के लिखे लेख को भी बदल देने की सामर्थ्य है!

विक्रमादित्य ने विद्वानों को सम्बोधित किया:

सम्राट विक्रमादित्य

तुम्हारा गणित सत्य था, दैवज्ञ! परन्तु निःस्वार्थ करुणा और धर्म में ग्रहों के लिखे लेख को भी बदल देने की सामर्थ्य है!

Panel 28
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Emperor Vikramaditya leads the joyful royal procession back toward Ujjayini at sunrise

सूर्योदय की स्वर्णिम किरणों में सम्राट विक्रमादित्य समस्त मन्त्रियों के साथ उज्जयिनी के सुवर्ण-द्वारों की ओर लौटे।

Panel 29
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The citizens of Ujjayini celebrate the triumph of fearless love over fatalistic fear

उज्जयिनी के नगरवासियों ने शंख-ध्वनि और पुष्प-वर्षा के साथ भय पर धर्म की विजय का महा-उत्सव मनाया।

Panel 30
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दृश्य 6

सुखाविका का निर्णय और प्रथम ऋतु (सीज़न १) का भव्य समापन

Sukhavika
Back in Dharanagari palace, Sukhavika looks directly at King Bhoja with diamond-crystal eyes

धारानगरी के सभा-भवन में सजीव पुतली सुखाविका ने राजा भोज को गम्भीर हीरक-नयनों से देखा।

Panel 31
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Sukhavika challenges: 'Have you ever walked unarmed to face predicted death, and rewritten fate through love?'
पुतली सुखाविका
अब कहो, राजा भोज—क्या तुम कभी ज्योतिषी द्वारा बताई गई मृत्यु का सामना करने निहत्थे वन में गए हो, और एक हिंसक पशु के बच्चे को बचाकर भाग्य को बदला है? यदि ऐसा काल-जयी साहस है, तो कदम बढ़ाओ!

सुखाविका ने प्रथम ऋतु (सीज़न १) की अन्तिम चुनौती दी:

पुतली सुखाविका

अब कहो, राजा भोज—क्या तुम कभी ज्योतिषी द्वारा बताई गई मृत्यु का सामना करने निहत्थे वन में गए हो, और एक हिंसक पशु के बच्चे को बचाकर भाग्य को बदला है? यदि ऐसा काल-जयी साहस है, तो कदम बढ़ाओ!

Panel 32
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King Bhoja lowers his head in deep humility and introspection, acknowledging Vikramaditya's fearlessness
राजा भोज
मुझमें विक्रमादित्य जैसा काल-जयी निर्भय साहस और पशुओं के प्रति ऐसा असीम प्रेम नहीं है, देवि। मैं इस आठवीं सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

राजा भोज ने लज्जा और श्रद्धा से सिर झुका लिया:

राजा भोज

मुझमें विक्रमादित्य जैसा काल-जयी निर्भय साहस और पशुओं के प्रति ऐसा असीम प्रेम नहीं है, देवि। मैं इस आठवीं सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

Panel 33
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King Bhoja steps down from the eighth step, ordering royal animal sanctuaries established

राजा भोज आठवीं सीढ़ी से नीचे उतरे और धारानगरी तथा पूरे मालवा में वन्य जीवों के शिकार पर प्रतिबन्ध लगाकर अभयारण्य स्थापित करने की आज्ञा दी।

Panel 34
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King Bhoja issues royal edicts prohibiting hunting and establishing wildlife sanctuaries

समस्त अरण्य-प्रदेशों में पशु-रक्षा और जल-कुण्डों की व्यवस्था की गई।

Panel 35
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Twilight conches echo as Sukhavika smiles and freezes back into silent bronze, concluding Season 1
राजा भोज
कल प्रातःकाल हम द्वितीय ऋतु (सीज़न २) में प्रवेश करेंगे और नौवीं पुतली—अनुराधा—की अमर गाथा सुनेंगे!

संध्याकाल के शंख गूँज उठे और सुखाविका मन्द मुस्कान के साथ पुनः मौन कांस्य-प्रतिमा बन गई। **सिंहासन बत्तीसी की प्रथम ऋतु (पुतली १ से ८ / अध्याय ० से ८) का गौरवशाली समापन हुआ!**

राजा भोज

कल प्रातःकाल हम द्वितीय ऋतु (सीज़न २) में प्रवेश करेंगे और नौवीं पुतली—अनुराधा—की अमर गाथा सुनेंगे!

Panel 36
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