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द्वितीय पुतली चित्रलेखा: निर्धन ब्राह्मण, महाकाली की वेदी और सम्राट का शीश-बलिदान

सिंहासन बत्तीसी (३२ पुतलियों की अमर गाथा)• katha

द्वितीय पुतली चित्रलेखा: निर्धन ब्राह्मण, महाकाली की वेदी और सम्राट का शीश-बलिदान

The Second Statue: Chitralekha & The Selfless Sacrifice

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दृश्य 1

द्वितीय प्रभात और पुतली चित्रलेखा का आह्वान

The Second Dawn & Chitralekha
Coronation dawn over the royal sandstone audience hall of Dharanagari as King Bhoja approaches the second step

धारानगरी के भव्य राज-प्रासाद में राज्यारोहण का द्वितीय पावन प्रभात उदित हो चुका था; धवल संगमरमर के स्तम्भों के मध्य सहस्त्रों वेदमन्त्रों और शंखों के निनाद के बीच राजा भोज दूसरी स्वर्ण-सीढ़ी की ओर बढ़े।

Panel 1
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King Bhoja lifting his right foot toward the second step as emerald and golden radiance erupts

जैसे ही राजा भोज ने अपना दाहिना चरण दूसरी सीढ़ी पर स्थापित करने हेतु उठाया, सम्पूर्ण सभा-मण्डप में पन्ने जैसी तीव्र हरित और सुवर्ण आभा का अलौकिक प्रकाश प्रस्फुटित हो उठा!

Panel 2
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Statue 2 Chitralekha coming alive, laughing musically with glowing emerald eyes and raised lotus
पुतली चित्रलेखा
ठहरो, मालव-नरेश भोज! इस दूसरी सीढ़ी पर पाँव धरने का दुस्साहस मत करो! यह सिंहासन केवल उस सम्राट के योग्य है जिसका हृदय समुद्र के समान गम्भीर और कामधेनु जैसा निःस्वार्थ त्यागी हो!

दूसरी सीढ़ी पर प्रतिष्ठित कांस्य-पुतली चित्रलेखा के मणिक नेत्रों में सहसा दिव्य चेतना कौंध गई; उसके अधरों पर मन्दिर-घण्टियों जैसी झंकार के साथ तीक्ष्ण हास्य गूँज उठा!

पुतली चित्रलेखा

ठहरो, मालव-नरेश भोज! इस दूसरी सीढ़ी पर पाँव धरने का दुस्साहस मत करो! यह सिंहासन केवल उस सम्राट के योग्य है जिसका हृदय समुद्र के समान गम्भीर और कामधेनु जैसा निःस्वार्थ त्यागी हो!

Panel 3
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King Bhoja halts in deep humility, folding his hands before the living maiden
राजा भोज
हे कल्याणी चित्रलेखा! मुझे सम्राट विक्रमादित्य के उस अलौकिक शीश-बलिदान की गाथा सुनाओ!

उस अलौकिक हास्य से सभा स्तब्ध रह गई; राजा भोज ने हाथ जोड़कर विनीत भाव से मस्तक झुकाया।

राजा भोज

हे कल्याणी चित्रलेखा! मुझे सम्राट विक्रमादित्य के उस अलौकिक शीश-बलिदान की गाथा सुनाओ!

Panel 4
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Chitralekha raising her carved bronze lotus, beginning the second immortal tale
पुतली चित्रलेखा
क्या तुममें सम्राट विक्रमादित्य जैसा निर्भय आत्म-बलिदान और परदुःखभंजन औदार्य है? सुनो उस भयानक अमावस की गाथा!

पुतली चित्रलेखा ने अपने हाथ का सुवर्ण-कमल उठाकर ओजस्वी वाणी में अतीत की अमर गाथा आरम्भ की।

पुतली चित्रलेखा

क्या तुममें सम्राट विक्रमादित्य जैसा निर्भय आत्म-बलिदान और परदुःखभंजन औदार्य है? सुनो उस भयानक अमावस की गाथा!

Panel 5
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Flashback to ancient Ujjayini under torrential monsoon gale and lightning

शताब्दियों पूर्व, चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य की राजधानी उज्जयिनी में घनघोर अमावस्या की मूसलाधार वर्षा और आँधी छाई थी।

Panel 6
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दृश्य 2

मध्यरात्रि उज्जयिनी और विप्रवर का विलाप

Midnight Ujjayini & The Starving Family
Disguised Vikramaditya in a dark traveler's wool cloak patrolling the flooded alleys

सम्राट विक्रमादित्य साधारण पथिक का काला कम्बल ओढ़कर, कटि में वूट्ज़ खड्ग छिपाकर प्रजा के सुख-दुःख की थाह लेने गुप्त गश्त पर निकले थे।

Panel 7
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Vikramaditya pauses beside a leaking mud hovel at the edge of the city

महाकाल मन्दिर की परिधि पार कर, नगर के निर्जन छोर पर एक टूटी मिट्टी की झोपड़ी के समीप उनके चरण सहसा ठिठक गए।

Panel 8
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Inside the hovel: poor scholar Haridatta weeping over his starving children
पण्डित हरिदत्त
हे विधाता! इस भीषण अकाल में मेरे कुल का अन्त निश्चित है! मेरी असहाय सन्तानें मेरी आँखों के सम्मुख भूखी मर जाएँगी!

टिमटिमाते दीपक के प्रकाश में, प्रकाण्ड वेदज्ञ किंतु नितान्त दरिद्र पण्डित हरिदत्त अपनी अश्रुमुखी भार्या और भूख से तड़पते तीन अबोध शिशुओं को देखकर रो रहे थे।

पण्डित हरिदत्त

हे विधाता! इस भीषण अकाल में मेरे कुल का अन्त निश्चित है! मेरी असहाय सन्तानें मेरी आँखों के सम्मुख भूखी मर जाएँगी!

Panel 9
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Haridatta speaks of the secret temple of Mahakali in the Mahashmashan
पण्डित हरिदत्त
किंतु मुझ दुर्बल ब्राह्मण में उस भयंकर तन्त्र-परीक्षा का सामर्थ्य कहाँ? हमारे भाग्य में केवल भूख से मरना लिखा है!

पण्डित अपनी पत्नी से कह रहे थे: 'महाश्मशान के गुप्त तान्त्रिक मन्दिर में यदि कोई निष्काम साधक अग्नि-वेदी पर सर्वोच्च बलिदान दे, तो माँ महाकाली अकाल मिटा देती हैं!'

पण्डित हरिदत्त

किंतु मुझ दुर्बल ब्राह्मण में उस भयंकर तन्त्र-परीक्षा का सामर्थ्य कहाँ? हमारे भाग्य में केवल भूख से मरना लिखा है!

Panel 10
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Vikramaditya steps inside, placing a heavy purse of gold coins before the family
सम्राट विक्रमादित्य
अश्रु पोंछिए, विप्रवर! अन्न ग्रहण कीजिए और शिशुओं के प्राण बचाइए!

दीन विप्र का दारुण क्रन्दन सुनकर सम्राट का क्षत्रिय हृदय द्रवित हो उठा; वे कुटिया में प्रविष्ट हुए और स्वर्ण-मुद्राओं की थैली चरणों में रख दी।

सम्राट विक्रमादित्य

अश्रु पोंछिए, विप्रवर! अन्न ग्रहण कीजिए और शिशुओं के प्राण बचाइए!

Panel 11
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Vikramaditya vows to face the midnight ordeal at the Mahakali temple himself

विक्रमादित्य ने विप्र के कन्धों पर हाथ रखकर कहा: 'मैं उज्जयिनी का एक क्षत्रिय सेवक हूँ। आपके कुल के उद्धार और अकाल के विनाश हेतु, महाकाली की वेदी पर मैं स्वयं आहुति दूँगा!'

Panel 12
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दृश्य 3

मध्यरात्रि महाश्मशान और तान्त्रिक मन्दिर

The Midnight Mahashmashan & The Tantric Portal
Vikramaditya walks alone through the stormy midnight cremation grounds past burning pyres

प्रलयंकारी मध्यरात्रि में, मूसलाधार वर्षा को चीरते हुए सम्राट विक्रमादित्य एकाकी महाश्मशान की ओर बढ़ चले, जहाँ चिताओं के लाल अंगारे अँधियारे में भयानक नृत्य कर रहे थे।

Panel 13
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Ancient basalt stone temple of Mahakali rising out of sulfurous mist

श्मशान के मध्य, गन्धक और रक्त-चन्दन के धूम्र से घिरा, सहस्रों वर्ष प्राचीन महाकाली का भयंकर मन्दिर पाषाण-पर्वत की भाँति खड़ा था।

Panel 14
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Massive iron temple doors creak open into the dark sanctum

मन्दिर के विशाल लौह कपाट चरमराते हुए खुले; गर्भगृह में त्रिशूल, खप्पर और मुण्ड-माला धारण किए संहारक रूपी महाकाली की विशाल कृष्ण-पाषाण प्रतिमा स्थापित थी।

Panel 15
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A towering sacrificial fire pit blazes before the altar beside a vat of boiling oil
सम्राट विक्रमादित्य
ॐ क्रीं कालिकायै नमः! सत्य और धर्म ही मेरा कवच हैं।

प्रतिमा के सम्मुख एक विशाल अग्नि-कुण्ड प्रज्वलित था, जिसकी ज्वालाएँ आकाश चूम रही थीं और पार्श्व में उबलते तैल का ताम्र-कड़ाह खदबदा रहा था।

सम्राट विक्रमादित्य

ॐ क्रीं कालिकायै नमः! सत्य और धर्म ही मेरा कवच हैं।

Panel 16
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Dark phantoms and howling spirits swarm around Vikramaditya to instill terror

अग्नि-वेदी के निकट पहुँचते ही भयानक डाकिनी-शाकिनी और तामसिक शक्तियों की अट्टहास-युक्त ध्वनियाँ गूँजने लगीं; फुंकारते विषधर सम्राट की ओर झपटे!

Panel 17
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Vikramaditya sits in meditation before the altar, chanting Vedic hymns as illusions dissolve

योगेश्वर विक्रमादित्य अचल पर्वत की भाँति स्थिर रहे; चित्त को भगवती के चरणों में समर्पित कर, सम्राट ने गम्भीर वैदिक मन्त्रों से समस्त तामसिक मायावी विकारों को भस्म कर दिया!

Panel 18
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दृश्य 4

महा-परीक्षा और सम्राट का शीश-बलिदान

The Cosmic Test & The Sovereign
The basalt temple tremors; a thunderous cosmic voice roars from the darkness
वेदी की आकाशवाणी
इस अग्नि-कुण्ड में स्वर्ण अथवा पशुओं की आहुति स्वीकार नहीं होगी!

तभी मन्दिर का समूचा पाषाण-मण्डप तीव्र भूकम्प के समान काँप उठा; गर्भगृह के अन्धकार से एक अमानवीय और प्रचण्ड आकाशवाणी गूँजी!

वेदी की आकाशवाणी

इस अग्नि-कुण्ड में स्वर्ण अथवा पशुओं की आहुति स्वीकार नहीं होगी!

Panel 19
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The voice demands the severed head of a sinless emperor to appease the famine

आकाशवाणी ने ललकारा: 'यदि तू ब्राह्मण हरिदत्त के कुल की दरिद्रता सदा के लिए मिटाना चाहता है, तो एक निष्कलंक चक्रवर्ती राजा के कटे हुए शीश का रक्त ही माँ को तृप्त कर सकता है!'

Panel 20
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Vikramaditya smiles serenely, feeling zero attachment to his mortal body
सम्राट विक्रमादित्य
शरीर तो नश्वर है, किंतु प्रजा की रक्षा का धर्म अमर है!

सम्राट विक्रमादित्य के अधरों पर एक अलौकिक शान्ति की मुस्कान तैर गई; उन्होंने विचार किया कि यदि इस रक्त-मांस के शरीर की बलि से प्रजा का जीवन बचता है, तो यह क्षत्रिय धर्म की सर्वोच्च सिद्धि है!

सम्राट विक्रमादित्य

शरीर तो नश्वर है, किंतु प्रजा की रक्षा का धर्म अमर है!

Panel 21
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Vikramaditya unsheathes his razor-sharp Wootz steel sword before the flaming altar

बिना एक क्षण का संकोच किए, विक्रमादित्य ने म्यान से तीक्ष्ण धार वाली वूट्ज़ खड्ग खींच ली और दोनों हाथ जोड़कर जगज्जननी को प्रणाम किया।

Panel 22
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Vikramaditya raises the sword with full force to sever his own crowned neck
सम्राट विक्रमादित्य
जय माँ भवानी! मेरी प्रजा का कल्याण हो!

'हे जगज्जननी! यह शीश आपके चरणों में स्वीकार हो!' यह कहकर सम्राट ने प्रचण्ड वेग से अपनी ही नंगी गर्दन पर खड्ग चला दी!

सम्राट विक्रमादित्य

जय माँ भवानी! मेरी प्रजा का कल्याण हो!

Panel 23
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Just as the steel touches his skin, a blinding divine light erupts

जैसे ही खड्ग की तीखी धार सम्राट के कण्ठ को स्पर्श करने वाली थी, उसी क्षण गर्भगृह में सहस्र सूर्यों के समान एक अवर्णनीय दिव्य प्रकाश कौंध गया!

Panel 24
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दृश्य 5

भगवती महाकाली का प्राकट्य और अक्षय वरदान

The Divine Manifestation & The Eternal Boons
Goddess Mahakali's glowing golden hand catches the falling sword in mid-air

स्वयं करुणामयी भगवती महाकाली ने साक्षात् प्रकट होकर अपनी कोमल दिव्य हथेली से सम्राट की खड्ग की धार को हवा में ही पकड़ लिया!

Panel 25
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Showers of fragrant Parijata blossoms rain down as the Goddess smiles with motherly love
भगवती महाकाली
धन्य हो, चक्रवर्ती विक्रमादित्य! तुम्हारे जैसा निष्काम त्यागी और प्रजावत्सल नृपति सम्पूर्ण त्रिलोकी में दूसरा कोई नहीं है!

मन्दिर में रक्त-पिपासा के स्थान पर अमृत-तुल्य पारिजात पुष्पों की वर्षा होने लगी और देवी का वात्सल्यपूर्ण स्वर मन्दिर में गूँज उठा।

भगवती महाकाली

धन्य हो, चक्रवर्ती विक्रमादित्य! तुम्हारे जैसा निष्काम त्यागी और प्रजावत्सल नृपति सम्पूर्ण त्रिलोकी में दूसरा कोई नहीं है!

Panel 26
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Goddess Mahakali blesses Vikramaditya with hands glowing with golden amrita

देवी ने वरदान दिया: 'एक अनजाने दरिद्र ब्राह्मण के दुःख निवारण हेतु तुमने अपना शीश सहर्ष अर्पित कर दिया। पण्डित हरिदत्त का कुल सात पीढ़ियों तक अक्षय धन-धान्य से परिपूर्ण रहेगा!'

Panel 27
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Vikramaditya bows with tears of devotion at the lotus feet of the Goddess
सम्राट विक्रमादित्य
प्रजा का कल्याण ही मेरी मुक्ति है, हे जगदम्बा!

विक्रमादित्य ने हाथ जोड़कर शीश झुकाया: 'माँ! मुझे केवल इतना वरदान दीजिए कि मेरा मन कभी धर्म और परोपकार के मार्ग से विचलित न हो!'

सम्राट विक्रमादित्य

प्रजा का कल्याण ही मेरी मुक्ति है, हे जगदम्बा!

Panel 28
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Golden rain clouds gather over Ujjayini, showering abundant rain and revitalizing fields

उज्जयिनी के आकाश में अमृतमयी बादलों ने मण्डराते हुए प्रचुर वर्षा की; सूखे खेत लहलहा उठे और नगर में अकाल का अंधकार सदा के लिए मिट गया।

Panel 29
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Pandit Haridatta's granary miraculously fills to the ceiling with golden grain and coins

पण्डित हरिदत्त की कुटिया में अन्न और स्वर्ण के भण्डार स्वतः भर गए; पूरा परिवार आँसुओं में डूबकर उस अज्ञात रक्षक सैनिक को नमन करने लगा।

Panel 30
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दृश्य 6

चित्रलेखा का निर्णय और राजा भोज की विनम्रता

Chitralekha
Living statue Chitralekha looks down at King Bhoja with a sharp, regal challenge
पुतली चित्रलेखा
अब सत्य कहो, राजा भोज! क्या तुमने कभी किसी दीन याचक अथवा अश्रुमुखी प्रजा के लिए महाकाली की वेदी पर अपनी गर्दन पर स्वयं खड्ग चलाई है?

कथा समाप्त कर, सजीव पुतली चित्रलेखा ने राजा भोज की आँखों में देखकर गम्भीर वाणी में ललकारा:

पुतली चित्रलेखा

अब सत्य कहो, राजा भोज! क्या तुमने कभी किसी दीन याचक अथवा अश्रुमुखी प्रजा के लिए महाकाली की वेदी पर अपनी गर्दन पर स्वयं खड्ग चलाई है?

Panel 31
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King Bhoja lowers his head in deep introspection and self-awareness
राजा भोज
हे देवि! मुझमें ऐसा महान त्याग नहीं है। मैं इस सिंहासन की दूसरी सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

पुतली की वज्र-समान वाणी सुनकर राजा भोज का शीश लज्जा और श्रद्धा से नत हो गया; उनका समस्त गर्व क्षण भर में तिरोहित हो गया।

राजा भोज

हे देवि! मुझमें ऐसा महान त्याग नहीं है। मैं इस सिंहासन की दूसरी सीढ़ी के भी योग्य नहीं हूँ।

Panel 32
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King Bhoja steps down from the second step onto the marble floor
राजा भोज
मालवा के समस्त मण्डलों में अन्न-सत्र आरम्भ किए जाएँ! कोई नागरिक भूख से पीड़ित न रहे!

राजा भोज नतमस्तक होकर पीछे हट गए और उन्होंने सम्पूर्ण राज्य में निःशुल्क अन्न-सत्र और औषधालय खोलने का राज्यादेश जारी किया!

राजा भोज

मालवा के समस्त मण्डलों में अन्न-सत्र आरम्भ किए जाएँ! कोई नागरिक भूख से पीड़ित न रहे!

Panel 33
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Living statue Chitralekha smiles warmly, her bronze form freezing back into silent metal

राजा भोज की विनम्रता देखकर पुतली चित्रलेखा मुस्कुराई और उसका सजीव तेज धीरे-धीरे पुनः शान्त कांस्य-मूर्ति में विलीन हो गया।

Panel 34
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Twilight falls across the palace hall as evening conches echo; the throne stands silent

संध्याकालीन शंखनाद के मध्य चित्रलेखा मौन हो गई, और सिंहासन बत्तीसी का द्वितीय दिवस सम्पन्न हुआ।

Panel 35
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King Bhoja returns to his chambers in fasting and prayer, awaiting the dawn of Statue 3 Chandrakala

राजा भोज उपवास और ईश्वर-प्रार्थना में लीन होकर अगले प्रभात की प्रतीक्षा करने लगे, जब तीसरी पुतली चन्द्रकला अपना आह्वान प्रस्तुत करेगी।

Panel 36
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