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एकादश पुतली कीर्तिमती: सहस्र दीपों का नगर, निष्ठावान् प्रहरी वीरवर और राज-लक्ष्मी का पावन उद्धार

सिंहासन बत्तीसी (३२ पुतलियों की अमर गाथा)• katha

एकादश पुतली कीर्तिमती: सहस्र दीपों का नगर, निष्ठावान् प्रहरी वीरवर और राज-लक्ष्मी का पावन उद्धार

The Eleventh Statue: Kirtimati & The Night Watchman's Sacrifice

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दृश्य 1

एकादश सूर्योदय और कीर्तिमती का प्रबोधन

The Eleventh Dawn & Kirtimati
Morning sunlight streams across the sandstone colonnade onto the 32-step golden throne

ग्यारहवें प्रभात की स्वर्णिम किरणों ने धारानगरी के राजप्रासाद को आलोकित किया, जहाँ राजा भोज ने पूर्ण निष्ठा से अपनी साधना पूर्ण की।

Panel 1
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King Bhoja in sacred saffron silks approaches the eleventh step of the throne

केसरिया परिधान धारण कर राजा भोज विनीत चरणों से ग्यारहवीं सीढ़ी की ओर बढ़े।

Panel 2
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The marble dais erupts with brilliant flame-gold and diamond radiance

जैसे ही राजा का चरण ग्यारहवीं सीढ़ी के निकट पहुँचा, संगमरमर का फर्श ज्वाला-स्वर्ण और हीरक-शुभ्र दिव्य प्रकाश से प्रदीप्त हो उठा!

Panel 3
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The eleventh carved statue Kirtimati opens her glowing diamond-crystal eyes, laughing musically
पुतली कीर्तिमती
ठहरो, राजा भोज! इस ग्यारहवीं सीढ़ी पर कदम रखने का दुस्साहस मत करो!

ग्यारहवीं कांस्य-पुतली—कीर्तिमती—की हीरक आँखें खुलीं और वह अखण्ड दीप-पात्र हाथ में लिए दिव्य हँसी के साथ सजीव हो उठी!

पुतली कीर्तिमती

ठहरो, राजा भोज! इस ग्यारहवीं सीढ़ी पर कदम रखने का दुस्साहस मत करो!

Panel 4
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King Bhoja halts in deep reverence with folded hands, gazing at the living bronze maiden
राजा भोज
हे कीर्तिमती देवि! विक्रमादित्य के किस कृतज्ञता और आत्म-बलिदान की अमर गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

राजा भोज ने नतमस्तक होकर हाथ जोड़े और अखण्ड ज्योति धारण की हुई पुतली की ओर देखा।

राजा भोज

हे कीर्तिमती देवि! विक्रमादित्य के किस कृतज्ञता और आत्म-बलिदान की अमर गाथा आज आप मुझे सुनाना चाहती हैं?

Panel 5
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Kirtimati speaks: 'Do you possess the boundless humility and gratitude of Vikramaditya?'
पुतली कीर्तिमती
क्या तुममें विक्रमादित्य जैसा असीम कृतज्ञता-भाव और आत्म-त्याग है, जब एक निष्ठावान् प्रहरी ने राजा के प्राण बचाने हेतु अपने पूरे परिवार का शीश काट दिया, और विक्रमादित्य ने उस सेवक को जीवित करने के लिए वेदी पर अपना शीश धर दिया?

कीर्तिमती ने अखण्ड दीप उठाकर गम्भीर वाणी में कहा:

पुतली कीर्तिमती

क्या तुममें विक्रमादित्य जैसा असीम कृतज्ञता-भाव और आत्म-त्याग है, जब एक निष्ठावान् प्रहरी ने राजा के प्राण बचाने हेतु अपने पूरे परिवार का शीश काट दिया, और विक्रमादित्य ने उस सेवक को जीवित करने के लिए वेदी पर अपना शीश धर दिया?

Panel 6
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दृश्य 2

शूरवीर वीरवर का आगमन और पाँच सौ दीनारों का दान

The Arrival of Loyal Warrior Viravara
In the grand audience hall of ancient Ujjayini, Vikramaditya receives a warrior petitioner

प्राचीन उज्जयिनी के राज-सभागार में एक तेजपुंज राजपूत योद्धा अपने परिवार सहित सम्राट विक्रमादित्य के सम्मुख उपस्थित हुआ।

Panel 7
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Warrior Viravara kneels before the throne with his wife and sixteen-year-old son Shaktidhara
शूरवीर वीरवर
महाराज! यदि आप मुझे पाँच सौ दीनार दैनिक वेतन दें, तो मेरा खड्ग आपकी रक्षा में दिन-रात तत्पर रहेगा!

वीरवर ने अपने सोलह वर्षीय तेजस्वी पुत्र शक्तिधर और पत्नी के साथ घुटने टेककर प्रतिदिन पाँच सौ स्वर्ण-दीनार वेतन की प्रार्थना की।

शूरवीर वीरवर

महाराज! यदि आप मुझे पाँच सौ दीनार दैनिक वेतन दें, तो मेरा खड्ग आपकी रक्षा में दिन-रात तत्पर रहेगा!

Panel 8
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Ministers murmur in shock, but Vikramaditya grants it immediately
सम्राट विक्रमादित्य
स्वीकार है, वीरवर! आज से तुम उज्जयिनी राजप्रासाद के मुख्य प्रहरी नियुक्त होते हो!

दरबारी मन्त्री इतने भारी वेतन पर चौंक उठे, परन्तु विक्रमादित्य ने वीरवर के नयनों में निष्ठा का अगाध सागर देखकर तुरन्त स्वीकार कर लिया।

सम्राट विक्रमादित्य

स्वीकार है, वीरवर! आज से तुम उज्जयिनी राजप्रासाद के मुख्य प्रहरी नियुक्त होते हो!

Panel 9
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Disguised in traveler's cloak, Vikramaditya secretly follows Viravara through Ujjayini

छद्मवेश में विक्रमादित्य ने रात्रि में वीरवर का पीछा किया कि वह इतनी बड़ी धनराशि का क्या करता है।

Panel 10
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Viravara distributes four hundred and fifty gold dinars to deities, beggars, and widows

वीरवर दो सौ दीनार मन्दिरों में, दो सौ दीनार अनाथ-दीनों को और पचास दीनार विधवाओं को बाँट देता था, केवल पचास दीनार में अपना परिवार पालता था!

Panel 11
•
Through scorching sun and freezing monsoon downpours, Viravara stands guard with unsheathed sword

धूप हो या मूसलाधार वर्षा, वीरवर नंगी तलवार हाथ में लिए सिंहद्वार पर अडिग प्रहरी बना खड़ा रहता था।

Panel 12
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दृश्य 3

तूफानी मध्यरात्रि और श्मशान में रुदन की ध्वनि

The Midnight Wailing in the Wilderness
On a pitch-black stormy midnight with deafening thunder, Vikramaditya stands on the balcony

भाद्रपद मास की घनघोर तूफानी मध्यरात्रि को मेघों की भयानक गर्जना और मूसलाधार वर्षा के मध्य विक्रमादित्य झरोखे में खड़े थे।

Panel 13
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Piercing the storm thunder, an agonizing woman's weeping echoes from the distant cremation ground

तूफान को चीरती हुई नदी पार श्मशान भूमि से किसी स्त्री के हृदय-विदारक करुण रुदन की ध्वनि गूँजी!

Panel 14
•
Vikramaditya calls down into the tempest: 'Who is on guard at the gates tonight?'

विक्रमादित्य ने अन्धकार में पुकारा: 'आज राजद्वार पर कौन प्रहरी उपस्थित है?'

Panel 15
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Standing drenched in torrential rain, Viravara salutes with his steel sword
शूरवीर वीरवर
आज्ञा दें, देव! इस आधी रात को आपके सेवक की क्या सेवा है?

मूसलाधार वर्षा में भीगते हुए वीरवर ने खड्ग उठाकर उत्तर दिया: 'आपका सेवक वीरवर उपस्थित है, महाराज!'

शूरवीर वीरवर

आज्ञा दें, देव! इस आधी रात को आपके सेवक की क्या सेवा है?

Panel 16
•
Vikramaditya commands Viravara to investigate the weeping woman in the wilderness
सम्राट विक्रमादित्य
जाओ वीरवर! पता लगाओ कि इस भयानक रात में कौन दुखियारी विलाप कर रही है!

विक्रमादित्य ने वीरवर को श्मशान में जाकर रोती हुई स्त्री का कारण जानने की आज्ञा दी।

सम्राट विक्रमादित्य

जाओ वीरवर! पता लगाओ कि इस भयानक रात में कौन दुखियारी विलाप कर रही है!

Panel 17
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Wrapped in a dark warrior cloak, Vikramaditya secretly follows Viravara through the flooded forest

काली चादर ओढ़कर विक्रमादित्य चुपचाप उस तूफानी अन्धकार में वीरवर के पीछे-पीछे चल पड़े।

Panel 18
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दृश्य 4

देवी राज-लक्ष्मी का प्राकट्य और महाचण्डी का आदेश

The Departing Goddess of Royal Fortune
In the eerie moonlit cremation grounds beneath a banyan tree, Viravara discovers a radiant celestial woman weeping

श्मशान के एक विशाल वटवृक्ष के नीचे वीरवर ने एक अलौकिक, स्वर्ण-कान्ति से दमकती दिव्य देवी को फूट-फूट कर रोते देखा।

Panel 19
•
Viravara bows respectfully before the divine glowing figure, asking the cause of her grief
शूरवीर वीरवर
यदि कोई संकट है तो मुझ क्षत्रिय को आज्ञा दें!

वीरवर ने हाथ जोड़कर पूछा: 'हे कल्याणी! आप कौन हैं और इस श्मशान में आधी रात को क्यों विलाप कर रही हैं?'

शूरवीर वीरवर

यदि कोई संकट है तो मुझ क्षत्रिय को आज्ञा दें!

Panel 20
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Goddess Rajalakshmi reveals: 'I am the Goddess of Prosperity of Ujjayini! The Emperor shall perish!'
देवी राजलक्ष्मी
विक्रमादित्य जैसा धर्मपरायण राजा पुनः नहीं मिलेगा, इसी शोक में मैं रो रही हूँ!

देवी ने रोते हुए कहा: 'मैं उज्जयिनी की अधिष्ठात्री 'राज-लक्ष्मी' हूँ! सम्राट विक्रमादित्य की आयु का समय पूर्ण हो चुका है; तीन दिनों में उनकी मृत्यु निश्चित है, और मुझे यह नगर छोड़ना होगा!'

देवी राजलक्ष्मी

विक्रमादित्य जैसा धर्मपरायण राजा पुनः नहीं मिलेगा, इसी शोक में मैं रो रही हूँ!

Panel 21
•
Devastated, Viravara falls to his knees: 'Is there no sacrifice that can avert the Emperor's death?'

वीरवर चरणों में गिर पड़ा: 'हे माता! क्या इस संसार में ऐसा कोई उपाय या बलिदान नहीं जिससे हमारे प्राण-प्रिय सम्राट की रक्षा हो सके?'

Panel 22
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The Goddess reveals: 'If a pure warrior sacrifices his firstborn son upon the altar of Mother Chandi tonight!'
देवी राजलक्ष्मी
यही एकमात्र मार्ग है, वीरवर!

देवी ने उपाय बताया: 'यदि आज की रात कोई निष्पाप वीर अपने प्रथम पुत्र को भगवती महाचण्डी की वेदी पर बलि चढ़ा दे, तो विक्रमादित्य सौ वर्ष तक जीवित रहेंगे!'

देवी राजलक्ष्मी

यही एकमात्र मार्ग है, वीरवर!

Panel 23
•
Viravara bows and hurries home through the storm, while hidden Vikramaditya watches from the shadows

वीरवर ने हाथ जोड़कर प्रणाम किया और दृढ़ संकल्प के साथ अपने घर की ओर दौड़ा; ओट में खड़े विक्रमादित्य का हृदय भय और विस्मय से काँप उठा!

Panel 24
•
दृश्य 5

चण्डी-मन्दिर में सर्वस्व बलिदान की पावन गाथा

The Supreme Family Sacrifice at Chandi Temple
In his humble home, Viravara reveals the Goddess's decree to his wife and son Shaktidhara

घर पहुँचकर वीरवर ने अपनी पत्नी और सोलह वर्षीय पुत्र शक्तिधर को देवी राजलक्ष्मी का सारा वृत्तान्त सुनाया।

Panel 25
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Young son Shaktidhara smiles with radiant pride: 'My life is dust; the Emperor's life protects millions!'
शक्तिधर
सम्राट के लिए प्राण देना क्षत्रिय-धर्म का परम सौभाग्य है!

पुत्र शक्तिधर ने हर्ष से सिर उठाया: 'मेरा जीवन तो धूल-समान है, पिताजी! सम्राट का जीवन करोड़ों प्रजा की रक्षा करता है! मेरा शीश चण्डी-वेदी पर अर्पण कीजिए!'

शक्तिधर

सम्राट के लिए प्राण देना क्षत्रिय-धर्म का परम सौभाग्य है!

Panel 26
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Inside the ancient torchlit sanctum of Mother Chandi, the family kneels before the stone altar

मध्यरात्रि को पूरा परिवार महाचण्डी के मन्दिर पहुँचा, जहाँ स्तम्भ की ओट में विक्रमादित्य अश्रुपूरित नेत्रों से देख रहे थे।

Panel 27
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With steady hands and tears of warrior devotion, Viravara offers his son upon the altar

वीरवर ने खड्ग उठाया और सम्राट की दीर्घायु हेतु मन्त्र पढ़कर अपने पुत्र का शीश वेदी पर समर्पित कर दिया!

Panel 28
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Overcome by pride and grief, Viravara's wife places her head upon the stone

पुत्र का बलिदान देख माता ने भी खड्ग से अपना शीश काट लिया, ताकि परलोक में पुत्र अकेला न रहे!

Panel 29
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Viravara draws his sword and severs his own neck, completing the family offering

वीरवर ने कहा: 'जिसने परिवार का बलिदान कर दिया, उसे अकेले जीने का कोई अधिकार नहीं!'—और उसने स्वयं अपना शीश काटकर वेदी पर चढ़ा दिया!

Panel 30
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दृश्य 6

सम्राट का शीश-दान और भगवती महाचण्डी का वरदान

Emperor Vikramaditya on the Altar & The Resurrection
Vikramaditya steps out from behind the stone pillar, falling to his knees in tears
सम्राट विक्रमादित्य
हाय! मेरे जैसे नश्वर राजा के प्राणों के लिए इस निष्पाप कुल का सर्वनाश हो गया!

स्तम्भ के पीछे से विक्रमादित्य बाहर निकले और तीनों रक्त-रंजित शरीरों को देखकर फूट-फूट कर रो पड़े!

सम्राट विक्रमादित्य

हाय! मेरे जैसे नश्वर राजा के प्राणों के लिए इस निष्पाप कुल का सर्वनाश हो गया!

Panel 31
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Vikramaditya laments: 'A king who outlives his loyal subjects is a demon!'

विक्रमादित्य ने संकल्प किया: 'जो राजा अपनी प्रजा के रक्त पर जीता है, वह राजा नहीं—पिशाच है! यह राज्य मुझे नहीं चाहिए!'

Panel 32
•
Vikramaditya kneels before the altar, placing the razor edge against his bare throat

विक्रमादित्य ने अपनी वूट्ज़ खड्ग निकाली और बिना एक क्षण हिचकिचाए अपनी गर्दन पर रख दी!

Panel 33
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In a blinding flash of celestial light, Mother Goddess Mahachandi manifests, grabbing Vikramaditya's arm
भगवती महाचण्डी
रुक जा, विक्रमादित्य! तेरे इस असीम त्याग और धर्म-निष्ठा ने मुझे पराजित कर दिया! वर माँग!

प्रचण्ड दिव्य प्रकाश के साथ भगवती महाचण्डी प्रकट हुईं और उन्होंने विक्रमादित्य का हाथ पकड़ लिया!

भगवती महाचण्डी

रुक जा, विक्रमादित्य! तेरे इस असीम त्याग और धर्म-निष्ठा ने मुझे पराजित कर दिया! वर माँग!

Panel 34
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Goddess Chandi sprinkles celestial Amrita, instantly reviving Viravara, his wife, and son

विक्रमादित्य ने वीरवर के परिवार का जीवन माँगा; देवी ने अमृत छिड़ककर तीनों को तुरन्त सजीव और कान्तिमान बना दिया!

Panel 35
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Vikramaditya slips away through the rain before the revived family awakens

परिवार के होश में आने से पूर्व ही विक्रमादित्य चुपचाप वर्षा के मध्य राजमहल लौट आए।

Panel 36
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दृश्य 7

प्रातःकाल का राज-सभागार और कीर्तिमती का निर्णय

The Sovereign
At dawn in Ujjayini court, Viravara reports calmly: 'The weeping woman has vanished, all is peaceful'
शूरवीर वीरवर
रात का संकट टल चुका है, देव!

प्रातःकाल वीरवर ने दरबार में आकर सहज भाव से कहा: 'महाराज! वह रोने वाली स्त्री चली गई है; उज्जयिनी में सब कुशल-मंगल है!'

शूरवीर वीरवर

रात का संकट टल चुका है, देव!

Panel 37
•
Vikramaditya steps down from the throne, weeping and embracing Viravara before the assembly
सम्राट विक्रमादित्य
तुम केवल मेरे प्रहरी नहीं, मेरे प्राण-दाता हो! आज से तुम कर्नाटक प्रान्त के अधिपति हो!

विक्रमादित्य सिंहासन से उतरे, रोते हुए वीरवर को गले लगाया और पूरी सभा के सम्मुख रात के महा-बलिदान का रहस्य खोल दिया!

सम्राट विक्रमादित्य

तुम केवल मेरे प्रहरी नहीं, मेरे प्राण-दाता हो! आज से तुम कर्नाटक प्रान्त के अधिपति हो!

Panel 38
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Back in Dharanagari palace, Kirtimati challenges King Bhoja with penetrating diamond eyes
पुतली कीर्तिमती
यदि ऐसा त्याग नहीं, तो इस ग्यारहवीं सीढ़ी से पीछे हटो!

पुतली कीर्तिमती ने राजा भोज को चुनौती दी: 'क्या तुमने कभी किसी साधारण सेवक के लिए वेदी पर अपना शीश रखा है? यदि ऐसा साहस है, तो आगे बढ़ो!'

पुतली कीर्तिमती

यदि ऐसा त्याग नहीं, तो इस ग्यारहवीं सीढ़ी से पीछे हटो!

Panel 39
•
King Bhoja bows in deep humility, stepping down from the eleventh step as conches echo
राजा भोज
कल प्रातःकाल हम बारहवीं सीढ़ी पर चरण रखेंगे और बारहवीं पुतली—आनन्दमयी—की अमर गाथा सुनेंगे!

राजा भोज लज्जा और श्रद्धा से नतमस्तक होकर नीचे उतरे और राज्य के सभी सैनिकों के परिजनों हेतु आजीवन पेंशन की घोषणा की। **ग्यारहवाँ दिन सम्पन्न हुआ!**

राजा भोज

कल प्रातःकाल हम बारहवीं सीढ़ी पर चरण रखेंगे और बारहवीं पुतली—आनन्दमयी—की अमर गाथा सुनेंगे!

Panel 40
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