द्वादश बेताल: तीन अति-संवेदनशील भाई
The Three Fastidious Brothers
बारहवीं चढ़ाई और तीन सुकुमार भाई
The Twelfth Retrieval & The Three Prodigies
बारहवीं बार महाराज विक्रमादित्य ने श्मशान भूमि के कंटीले पथरीले मार्ग को पार कर शीशम के वृक्ष से बेताल को नीचे उतारा और अपने कंधे पर लादकर मौन व्रत के साथ चल पड़े।
राजन! तुम्हारी अदम्य निष्ठा सराहनीय है! सुनो, सूक्ष्म संवेदना, अद्भुत सुकुमारता और शारीरिक अनुभूति की यह विलक्षण पहेली!

अंग देश में गुणशेखर नामक प्रतापी राजा राज्य करते थे। उनके दरबार में तीन कुलीन और सुसंस्कृत सगे भाई आए, जो संसार में अपनी अद्वितीय सुकुमारता और अति-संवेदनशीलता के लिए विख्यात थे।

तीनों भाइयों ने राजा को बताया कि वे क्रमशः भोजन के रसिक पारखी (भोजन-सुकुमार), गंध के अति-संवेदनशील ज्ञाता (गंध-सुकुमार) और स्पर्श के परम कोमल अनुभवकर्ता (शय्या-सुकुमार) हैं।
महाराज! हमारा शरीर और इंद्रियां प्रकृति के सूक्ष्मतम विकार को भी तत्काल अनुभव कर लेती हैं!

राजा गुणशेखर ने उनकी अद्भुत परीक्षा लेने का निर्णय किया और राजमहल में तीनों के लिए अलग-अलग विशिष्ट व्यवस्थाएं करने का आदेश दिया।
यदि तुम्हारी सुकुमारता सत्य सिद्ध हुई, तो तुम्हें सहस्त्र स्वर्ण मुद्राएं और राजसम्मान मिलेगा! हम स्वयं तुम्हारी परीक्षा लेंगे!
प्रथम परीक्षा: भोजन-सुकुमार और चिता की गंध
The First Test: The Gourmet & The Funeral Pyre
राजा ने प्रथम भाई (भोजन-सुकुमार) के लिए छप्पन भोग और अत्यंत सुगंधित, शुद्ध घी में पके राजसी बासमती चावल का भोजन परोसा।

किंतु जैसे ही भोजन-सुकुमार ने चावल की सुगंध ली, उसका चेहरा पीला पड़ गया। उसने वमन करते हुए भोजन की थाली दूर ढकेल दी और भोजन करने से साफ मना कर दिया!
छिः! यह भोजन सर्वथा अभक्ष्य है! इस सुगंधित चावल में से जलती हुई मानव-चिता और शव की दुर्गंध आ रही है!

राजा को पहले तो भारी क्रोध आया, किंतु संदेह दूर करने के लिए उन्होंने तुरंत राज कर्मचारियों को उस धान के खेत की जांच करने भेजा जहां यह चावल उगाया गया था।
जाओ! पता लगाओ कि यह सर्वोत्तम अन्न किस खेत से आया है! क्या इसमें कोई अशुद्धि है?

जांच में सत्य सामने आया—वह धान श्मशान भूमि के ठीक पास वाले खेत में उगा था, जहां चिताओं की भस्म और धुएं से खेत की मिट्टी पोषित हुई थी! भोजन-सुकुमार की सूक्ष्म घ्राण-शक्ति सिद्ध हो गई!
द्वितीय परीक्षा: गंध-सुकुमार और बकरी की गंध
The Second Test: Scent & The Courtesan
अगली संध्या राजा ने दूसरे भाई (गंध-सुकुमार) की परीक्षा के लिए नगर की सबसे अनुपम, सुंदरी और सुगंधित इत्रों से महकती राजनर्तकी को बुलाया।

जैसे ही वह रूपवती सुंदरी निकट आई, गंध-सुकुमार ने तुरंत अपनी नासिका ढक ली और सिरदर्द से तड़पने लगा। उसने सुंदरी को तत्काल दूर हटाने की प्रार्थना की।
महाराज! इस स्त्री को दूर कीजिए! इत्रों के पीछे से इसके शरीर से बकरी की असह्य और तीक्ष्ण दुर्गंध आ रही है!

राजा को घोर आश्चर्य हुआ। उन्होंने नर्तकी की धात्री और परिजनों को बुलाकर उसके जन्म और पालन-पोषण का सत्य पूछा।
महाराज! इसके जन्म के समय इसकी माता का देहांत हो गया था। शैशवावस्था में हमने इसे केवल बकरी का दूध पिलाकर पाला था!

दरबार सन्न रह गया! शैशव में पिए गए बकरी के दूध की सूक्ष्म गंध को वयस्क होने पर भी पहचान लेना गंध-सुकुमार की अलौकिक घ्राण-शक्ति का अकाट्य प्रमाण था!
तृतीय परीक्षा: शय्या-सुकुमार और सात गद्दे
The Third Test: The Bed of Seven Mattresses
अब तीसरे और सबसे छोटे भाई (शय्या-सुकुमार) की बारी थी। राजा ने उसके लिए एक भव्य शयनकक्ष में सात अत्यंत कोमल, रेशमी और रुईदार गद्दों की विशाल शय्या सजवाई।

शय्या-सुकुमार को उस मखमली शय्या पर विश्राम करने के लिए कहा गया। कमरे में मंद सुगंध और शीतल वायु की व्यवस्था की गई।

किंतु आधी रात होते ही शय्या-सुकुमार असह्य पीड़ा से चीख उठा! वह सारी रात करवटें बदलता रहा मानो कांटों की सेज पर सोया हो!
आह! मेरे शरीर में कोई तीक्ष्ण वस्तु गड़ रही है! मेरी पसलियां छिल गई हैं! दया करो!

प्रातःकाल जब राजा और राजवैद्य पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि युवक की कोमल पीठ और पसलियों पर सचमुच एक गहरा लाल, सूजा हुआ और रक्त-रिसता हुआ घाव उभर आया था!
बाल का रहस्य और श्मशान की पहेली
The Strand of Hair & The Deepening Enigma
राजा के आदेश पर सेवकों ने उस शय्या के सातों भारी रेशमी गद्दों को एक-एक करके हटाया ताकि उस भयानक चुभन का कारण खोजा जा सके।

सातवें गद्दे के सबसे नीचे, लकड़ी की तख्ती पर केवल एक बारीक बाल (केश) पड़ा मिला! सातों गद्दों के दबाव के बावजूद उस अकेले बाल ने युवक के शरीर को लहूलुहान कर दिया था!

राजा गुणशेखर ने तीनों भाइयों के अद्वितीय गुणों को नमन करते हुए उन्हें भारी धन और उपाधियों से सम्मानित किया। तीनों ही अपनी-अपनी विधा में बेजोड़ सिद्ध हुए थे।

कथा समाप्त कर श्मशान के सन्नाटे में बेताल ने राजा विक्रमादित्य से वह गहन बौद्धिक प्रश्न पूछा।
राजन! अब अपने विवेक की परीक्षा दो! इन तीनों भाइयों में वास्तव में सबसे बड़ा और सच्चा सुकुमार (संवेदनशील) कौन था?
बेताल का प्रश्न, विक्रम का अमर निर्णय और पलायन
The Riddle, The Verdict, & The Flight
बेताल ने राजा को चेतावनी देते हुए प्रश्न दोहराया।
क्या वह भोजन-पारखी था? गंध-पारखी था? या सात गद्दों पर सोने वाला? यदि उत्तर जानते हुए भी मौन रहे, तो तुम्हारा मस्तक फटकर चूर-चूर हो जाएगा!

महाराज विक्रमादित्य ने उत्तर दिया: 'सात गद्दों पर सोने वाला तीसरा भाई (शय्या-सुकुमार) ही संसार में सर्वश्रेष्ठ और सच्चा सुकुमार है!'
पहले दोनों भाइयों की संवेदना केवल घ्राण-इंद्रिय, तीव्र बुद्धि और अनुमान पर आधारित थी—उसमें अभ्यास, चातुर्य या तर्क की संभावना हो सकती थी। किंतु तीसरे भाई के शरीर पर सात भारी गद्दों के नीचे दबे एक बारीक बाल के कारण प्रत्यक्ष, वास्तविक, सूजा हुआ और रक्त-रिसता हुआ घाव उभर आया था! यह शारीरिक प्रमाण (Physical evidence) न बुद्धि से गढ़ा जा सकता है, न छल से दिखाया जा सकता है। अतः वास्तविक और पराकाष्ठा की सुकुमारता केवल तीसरे भाई में ही थी!

सत्य निर्णय सुनते ही राजा का मौन पुनः भंग हो गया! बेताल ठहाका लगाते हुए धुएं की भांति उड़ा और पुनः शीशम की डाल पर जा लटका।
अकाट्य तर्क, राजन! शारीरिक प्रमाण ही सर्वोच्च सत्य है! किंतु तुम्हारा मौन टूटा—और मैं चला! खे-खे-खे!

अमावस की काली रात में, श्मशान के घोर सन्नाटे को चीरते हुए महाराज विक्रमादित्य ने अपनी तलवार निकाली और बिना रुके पुनः बेताल को लाने चल पड़े।
बेताल! तुम्हारी हर पहेली का उत्तर दूंगा और तुम्हें तांत्रिक के पास अवश्य ले जाऊँगा!