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सप्तम बेताल: सत्त्वशील और जलमग्न स्वर्ण-नगरी

बेताल पच्चीसी (सोमदेव भट्ट कृत)• katha

सप्तम बेताल: सत्त्वशील और जलमग्न स्वर्ण-नगरी

Sattvasheel & The Sunken Ocean Palace

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दृश्य 1

सातवीं चढ़ाई और निष्ठावान वीर

The Seventh Retrieval & The Noble Warrior
Emperor Vikramaditya carrying Betal on his back in the stormy midnight cemetery
Betal
राजन! त्याग और स्वामिभक्ति की पराकाष्ठा क्या होती है, सुनो सत्त्वशील की यह अद्भुत गाथा!

सातवीं बार महाराज विक्रमादित्य ने घोर अंधकार में शीशम के वृक्ष से बेताल को उतारा और कंधे पर लादकर चल पड़े। बेताल ने एक नई गाथा आरंभ की।

Betal

राजन! त्याग और स्वामिभक्ति की पराकाष्ठा क्या होती है, सुनो सत्त्वशील की यह अद्भुत गाथा!

Panel 1
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The valiant yet impoverished warrior Sattvasheel bowing before King Shribhatta
सत्त्वशील
महाराज! मेरे बाहुबल और निष्ठा पर आपका पूर्ण अधिकार है।

राजा श्रीभट्ट के दरबार में सत्त्वशील नाम का एक निर्धन किंतु परम पराक्रमी और निष्ठावान क्षत्रिय वीर सेवा में उपस्थित रहता था।

सत्त्वशील

महाराज! मेरे बाहुबल और निष्ठा पर आपका पूर्ण अधिकार है।

Panel 2
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Sattvasheel standing on the rugged ocean cliffs staring at the swirling mysterious waters
सत्त्वशील
इस अथाह समुद्र के भीतर कौन सा रहस्यमयी संसार छिपा है? मुझे इसका पता लगाना ही होगा!

एक बार राजा के कार्य से वह दक्षिण समुद्र के तट पर पहुंचा, जहाँ भयंकर लहरों के बीच एक स्वर्णिम पताका जल के भीतर उठती दिखाई देती थी।

सत्त्वशील

इस अथाह समुद्र के भीतर कौन सा रहस्यमयी संसार छिपा है? मुझे इसका पता लगाना ही होगा!

Panel 3
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दृश्य 2

अथाह सागर में छलांग और स्वर्ण-नगरी

The Fearless Dive & The Sunken City
Sattvasheel fearlessly diving from towering ocean cliffs into the foaming abyss
सत्त्वशील
साहसी पुरुष के लिए समुद्र की गहराइयां भी मार्ग बन जाती हैं!

बिना किसी भय के, सत्त्वशील ने ऊंची चट्टान से गर्जना करते हुए अथाह समुद्र में छलांग लगा दी!

सत्त्वशील

साहसी पुरुष के लिए समुद्र की गहराइयां भी मार्ग बन जाती हैं!

Panel 4
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Sattvasheel swimming through crystal clear waters filled with glowing coral and marine wonders

जल के भीतर प्रवेश करते ही समुद्र का जल अमृत के समान शांत और पारदर्शी हो गया। वह गहराई में उतरता चला गया।

Panel 5
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Panoramic wide view of the breathtaking sunken golden city with pearl spires and crystal streets
सत्त्वशील
यह तो साक्षात् अमरावती से भी अधिक वैभवशाली जलमग्न साम्राज्य है!

समुद्र के तल में उसे एक अलौकिक स्वर्ण-नगरी दिखाई दी, जिसके महल मोतियों, मणियों और मूंगों से जगमगा रहे थे।

सत्त्वशील

यह तो साक्षात् अमरावती से भी अधिक वैभवशाली जलमग्न साम्राज्य है!

Panel 6
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Sattvasheel walking through grand jeweled arches into the coral throne hall

वह विस्मय से भरकर मणिमय राजप्रासाद में प्रविष्ट हुआ, जहाँ सुवासित चंदन और दिव्य संगीत गूंज रहा था।

Panel 7
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दृश्य 3

विद्याधरी राजकुमारी और निषिद्ध कक्ष

The Celestial Maiden & The Forbidden Chamber
The radiant Vidyadhari princess on her ruby throne welcoming Sattvasheel with garlands
विद्याधरी राजकुमारी
हे वीर! तुम्हारे इस अद्वितीय साहस ने मुझे वशीभूत कर लिया है। यह साम्राज्य अब तुम्हारा है!

सिंहासन पर बैठी अलौकिक सुंदरी विद्याधरी राजकुमारी ने सत्त्वशील के अद्वितीय साहस से मुग्ध होकर उसका स्वागत किया।

विद्याधरी राजकुमारी

हे वीर! तुम्हारे इस अद्वितीय साहस ने मुझे वशीभूत कर लिया है। यह साम्राज्य अब तुम्हारा है!

Panel 8
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Sattvasheel and the Princess enjoying celestial banquets and divine luxuries in the underwater palace

सत्त्वशील उस जलमग्न साम्राज्य का स्वामी बनकर अलौकिक सुख और वैभव का आनंद लेने लगा। राजकुमारी उससे अगाध प्रेम करने लगी।

Panel 9
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The Princess pointing to a sealed carved stone portal with a serious warning
विद्याधरी राजकुमारी
उस चित्र में एक मायावी रहस्य बंधा है, उसे छूते ही हमारा वियोग हो जाएगा!

राजकुमारी ने उसे सावधान किया: 'स्वामी! इस महल के सभी कक्ष आपके हैं, किंतु उस पूर्वी दालान के मायावी चित्र को कभी मत छूना!'

विद्याधरी राजकुमारी

उस चित्र में एक मायावी रहस्य बंधा है, उसे छूते ही हमारा वियोग हो जाएगा!

Panel 10
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Curious Sattvasheel touching the lifelike painted figure on the silk canvas in the secret chamber
सत्त्वशील
यह कैसा अद्भुत चित्र है... आह! यह क्या खिंचाव है?!

एक दिन उत्सुकतावश सत्त्वशील उस निषिद्ध कक्ष में गया। उस जीवंत चित्र के सौंदर्य को देखकर जैसे ही उसने उसे स्पर्श किया, चित्र से एक तीव्र प्रकाश फूटा!

सत्त्वशील

यह कैसा अद्भुत चित्र है... आह! यह क्या खिंचाव है?!

Panel 11
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दृश्य 4

तट पर वापसी और राजा का विरह

The Awakening on Shore & The King
Sattvasheel waking up drenched on the sandy ocean shore looking around in utter shock
सत्त्वशील
हाय! एक क्षण की भूल ने मुझे उस अलौकिक स्वर्ग से दूर कर दिया!

क्षण भर में सत्त्वशील उछलकर समुद्र से बाहर उसी रेतीले तट पर आ गिरा! जलमग्न नगरी और राजकुमारी सब ओझल हो चुके थे।

सत्त्वशील

हाय! एक क्षण की भूल ने मुझे उस अलौकिक स्वर्ग से दूर कर दिया!

Panel 12
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Sattvasheel in royal court describing the sunken city and celestial princess to King Shribhatta
सत्त्वशील
महाराज! समुद्र के तल में ऐसी दिव्य सुंदरी है जिसके समक्ष देवलोक की अप्सराएं भी फीकी पड़ जाएं!

वह लौटकर अपनी राजधानी आया और उसने बिना कुछ छिपाए अपने राजा श्रीभट्ट को जलमग्न नगरी और विद्याधरी राजकुमारी का सारा वृत्तांत सुनाया।

सत्त्वशील

महाराज! समुद्र के तल में ऐसी दिव्य सुंदरी है जिसके समक्ष देवलोक की अप्सराएं भी फीकी पड़ जाएं!

Panel 13
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King Shribhatta enchanted by the tale, pacing his throne room consumed by love
राजा श्रीभट्ट
सत्त्वशील! यदि मैं उस राजकुमारी के दर्शन न कर सका, तो मेरे इस जीवन का कोई अर्थ नहीं रहेगा!

राजकुमारी के रूप का वर्णन सुनते ही राजा श्रीभट्ट उसके प्रेम में व्याकुल हो उठे और उन्होंने उस कन्या को पाने की तीव्र इच्छा प्रकट की।

राजा श्रीभट्ट

सत्त्वशील! यदि मैं उस राजकुमारी के दर्शन न कर सका, तो मेरे इस जीवन का कोई अर्थ नहीं रहेगा!

Panel 14
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दृश्य 5

पुनः समुद्र-यात्रा और सर्वोच्च त्याग

The Second Dive & The Supreme Sacrifice
Sattvasheel holding King Shribhatta's hand diving together from the cliff into the sea
सत्त्वशील
महाराज! निर्भय रहिए, मैं आपको साक्षात् जलमग्न स्वर्ण-प्रासाद तक ले चलूंगा!

स्वामी की आज्ञा शिरोधार्य कर, सत्त्वशील राजा को लेकर समुद्र-तट पर पहुंचा और दोनों ने एक साथ गहरे जल में छलांग लगा दी।

सत्त्वशील

महाराज! निर्भय रहिए, मैं आपको साक्षात् जलमग्न स्वर्ण-प्रासाद तक ले चलूंगा!

Panel 15
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Sattvasheel and King Shribhatta arriving before the startled yet welcoming Vidyadhari Princess
विद्याधरी राजकुमारी
हे प्राणनाथ! आप पुनः लौट आए! और आपके साथ यह तेजस्वी पुरुष कौन हैं?

वे पुनः उसी जगमगाती स्वर्ण-नगरी में पहुंचे। अपने प्रेमी सत्त्वशील को लौट आया देखकर राजकुमारी अत्यंत प्रसन्न हुई।

विद्याधरी राजकुमारी

हे प्राणनाथ! आप पुनः लौट आए! और आपके साथ यह तेजस्वी पुरुष कौन हैं?

Panel 16
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King Shribhatta gazing at the Vidyadhari Princess in utter awe and silent adoration

राजकुमारी के साक्षात् दर्शन करते ही राजा श्रीभट्ट सुध-बुध खो बैठे और विरह की अग्नि में जलने लगे।

Panel 17
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Sattvasheel placing the princess's hand into King Shribhatta's hand with pure joy and no regret
सत्त्वशील
राजकुमारी! ये मेरे पूज्य स्वामी राजा श्रीभट्ट हैं। आप इन्हीं के वरमाला पहनाकर इस साम्राज्य को धन्य करें!

सत्त्वशील ने अपने स्वामी के हृदय का भाव ताड़ लिया। बिना एक क्षण सोचे, उसने अपने ही प्रेम और साम्राज्य का त्याग कर दिया!

सत्त्वशील

राजकुमारी! ये मेरे पूज्य स्वामी राजा श्रीभट्ट हैं। आप इन्हीं के वरमाला पहनाकर इस साम्राज्य को धन्य करें!

Panel 18
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Grand underwater wedding ceremony between King Shribhatta and the Princess with Sattvasheel blessing them

सत्त्वशील ने स्वयं खड़े होकर दोनों का विधिपूर्वक विवाह संपन्न कराया और अपने राजा को वह अलौकिक साम्राज्य सौंपकर स्वयं निष्काम भाव से अलग हो गया।

Panel 19
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दृश्य 6

बेताल का यक्ष-प्रश्न और महाराज विक्रम का अमर निर्णय

The Moral Conundrum & Vikram
Sattvasheel standing peacefully on the mortal ocean shore, humble and content in his duty

राजा को सुख और साम्राज्य देकर सत्त्वशील पुनः अपने साधारण जीवन में लौट आया, उसके मन में लेशमात्र भी पश्चाताप या लोभ नहीं था।

Panel 20
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Betal leaning close to Vikramaditya's ear in the dark foggy jungle posing the riddle
Betal
बताओ राजन! राजा श्रीभट्ट और वीर सत्त्वशील में से किसका त्याग और बड़प्पन अधिक महान था? उत्तर जानते हुए भी मौन रहे तो तुम्हारा सिर फट जाएगा!

कथा रोककर श्मशान के सन्नाटे में बेताल ने राजा विक्रमादित्य से यह गूढ़ यक्ष-प्रश्न पूछा।

Betal

बताओ राजन! राजा श्रीभट्ट और वीर सत्त्वशील में से किसका त्याग और बड़प्पन अधिक महान था? उत्तर जानते हुए भी मौन रहे तो तुम्हारा सिर फट जाएगा!

Panel 21
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Emperor Vikramaditya delivering his razor-sharp verdict on supreme magnanimity
King Vikramaditya
स्वयं अर्जित सर्वोच्च सुख का सहर्ष और निःस्वार्थ त्याग ही मनुष्य को देवतुल्य बनाता है!

महाराज विक्रमादित्य ने उत्तर दिया: 'सत्त्वशील का त्याग कहीं अधिक श्रेष्ठ और अद्वितीय था! राजा तो प्रजा और सेवकों से दान-उपहार लेने के अभ्यस्त होते हैं। किंतु एक निर्धन सेवक ने अपने बाहुबल और प्राणों की बाजी लगाकर जो स्वर्ग-तुल्य साम्राज्य और सुंदरी पाई थी, उसे सहर्ष अपने स्वामी को समर्पित कर देना ही सर्वोच्च क्षत्रिय धर्म और निष्कामता की पराकाष्ठा है!'

King Vikramaditya

स्वयं अर्जित सर्वोच्च सुख का सहर्ष और निःस्वार्थ त्याग ही मनुष्य को देवतुल्य बनाता है!

Panel 22
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Betal cackling wildly dissolving into mist soaring through the trees back to the Shinshapa tree
Betal
अचूक न्याय राजन! सत्त्वशील ही सर्वोच्च वीर है! किंतु तुम्हारा मौन टूटा—और मैं चला! खे-खे-खे!

निर्णय सुनते ही राजा का मौन पुनः भंग हो गया! बेताल ठहाका लगाते हुए धुएँ की भांति उड़कर पुनः शीशम के पेड़ पर जा लटका।

Betal

अचूक न्याय राजन! सत्त्वशील ही सर्वोच्च वीर है! किंतु तुम्हारा मौन टूटा—और मैं चला! खे-खे-खे!

Panel 23
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King Vikramaditya standing resolute in the dark moonless Amavasya jungle turning back to retrieve Betal
King Vikramaditya
तुम जितनी बार भागोगे बेताल, मैं उतनी बार आऊँगा—क्षत्रिय अपना वचन कभी नहीं छोड़ता!

अमावस की घोर अंधियारी रात में, बीहड़ और भयानक श्मशान वन में महाराज विक्रमादित्य बिना थके, दृढ़ संकल्प के साथ पुनः बेताल को पकड़ने चल पड़े।

King Vikramaditya

तुम जितनी बार भागोगे बेताल, मैं उतनी बार आऊँगा—क्षत्रिय अपना वचन कभी नहीं छोड़ता!

Panel 24
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