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एकोनविंशति बेताल: चतुर चोर और निडर राजकुमारी

बेताल पच्चीसी (सोमदेव भट्ट कृत)• katha

एकोनविंशति बेताल: चतुर चोर और निडर राजकुमारी

The Master Thief & The Fearless Princess

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दृश्य 1

उन्नीसवीं चढ़ाई और उज्जयिनी का चतुर चोर

The Nineteenth Retrieval & The Shadow of the Citadel
King Vikramaditya carrying the corpse of Betal through the stormy charnel ground
बेताल
राजन! शौर्य, प्रेम और स्वाभिमान का एक अद्वितीय उदाहरण सुनो—उज्जयिनी के चतुर चोर चंडक और स्वाभिमानी राजकुमारी शशिप्रभा की यह अद्भुत गाथा!

उन्नीसवीं बार महाराज विक्रमादित्य ने श्मशान भूमि में शीशम के वृक्ष से बेताल को नीचे उतारा और दृढ़ता से अपने कंधे पर लादकर मौन यात्रा पर चल पड़े। बेताल ने एक नई रोमांचक और नैतिक पहेली आरंभ की।

बेताल

राजन! शौर्य, प्रेम और स्वाभिमान का एक अद्वितीय उदाहरण सुनो—उज्जयिनी के चतुर चोर चंडक और स्वाभिमानी राजकुमारी शशिप्रभा की यह अद्भुत गाथा!

Panel 1
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Master thief Chandaka perched agilely upon the high moonlit rooftops of ancient Ujjayini
चंडक
जो धनी और भ्रष्ट अधिकारी अकाल में प्रजा का अन्न और धन दबाकर बैठे हैं, उनका खजाना रिक्त करना कोई पाप नहीं, बल्कि जन-कल्याण है!

उज्जयिनी नगरी में चंडक नाम का एक असाधारण रूप से निपुण, बुद्धिमान और साहसी चोर रहता था। वह चौंसठ कलाओं और सुरंग-विद्या में निष्णात था।

चंडक

जो धनी और भ्रष्ट अधिकारी अकाल में प्रजा का अन्न और धन दबाकर बैठे हैं, उनका खजाना रिक्त करना कोई पाप नहीं, बल्कि जन-कल्याण है!

Panel 2
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Starving citizens discovering sacks of grain and gold anonymously delivered to their thresholds

चंडक कभी किसी निर्धन या असहाय को नहीं लूटता था; वह भ्रष्ट सामंतों के तहखानों में सेंध लगाकर सारा धन रात के अंधेरे में भूखी प्रजा की झोपड़ियों में बांट देता था।

Panel 3
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दृश्य 2

राजकोष में सेंध और विश्वासघात

The Citadel Vault Heist & The Treachery
Chandaka deftly leaping across high battlements of the royal fortress using silken ropes

जब राज्य में अकाल का संकट गहराया, तो चंडक ने एक भ्रष्ट राजकोषाध्यक्ष के गुप्त तहखाने में सेंध लगाई और अभेद्य सुरक्षा को धता बताते हुए राजसी तिजोरी खोल दी।

Panel 4
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A treacherous fence betraying Chandaka to the Captain of the Royal Guards for a bounty

किंतु एक लालची आढ़ती ने सोने के पुरस्कार के लालच में चंडक के गुप्त ठिकाने की सूचना राजसी सैनिकों को दे दी।

Panel 5
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Chandaka fighting heroically against overwhelming royal guards before being trapped in heavy iron chains

सैकड़ों सैनिकों ने चंडक को घेर लिया। उसने अद्भुत वीरता से युद्ध किया, किंतु अंततः लोहे के भारी जालों और शृंखलाओं में जकड़कर उसे बंदी बना लिया गया।

Panel 6
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King Viradeva sternly sentencing the unbowed thief to the execution stake
राजा वीरदेव
जिसने राजसी दुर्ग की अभेद्यता को तोड़ा, उसे कल प्रातः सूर्योदय के साथ सूली पर चढ़ा दिया जाए!

राजा वीरदेव के दरबार में चंडक को प्रस्तुत किया गया। राजा ने उसे राज्य की सुरक्षा में सेंध लगाने के अपराध में सूली पर चढ़ाकर मृत्युदंड देने का कठोर आदेश दिया।

राजा वीरदेव

जिसने राजसी दुर्ग की अभेद्यता को तोड़ा, उसे कल प्रातः सूर्योदय के साथ सूली पर चढ़ा दिया जाए!

Panel 7
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दृश्य 3

राजमहल का झरोखा और राजकुमारी का अनुराग

The Royal Balcony & The Princess
Chandaka marched in heavy chains through the city streets, smiling with serene courage

जब चंडक को भारी जंजीरों में बांधकर राजमार्ग से कारागार की ओर ले जाया जा रहा था, उसके चेहरे पर भय की एक भी रेखा नहीं थी। वह निर्भय होकर मुस्कुरा रहा था।

Panel 8
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Princess Shashiprabha gazing down from the high palace balcony, captivated by the prisoner's fearlessness
राजकुमारी शशिप्रभा
जो मृत्यु के साए में भी इतना निर्भय और तेजस्वी है, वह कोई साधारण चोर नहीं हो सकता! ऐसे शूरवीर को मैं सूली पर नहीं मरने दूंगी!

राजमहल के ऊंचे झरोखे से राजा की रूपवती कन्या राजकुमारी शशिप्रभा ने उस बंदी को देखा। उसकी निर्भीकता, तेजस्वी नैन और आत्मसम्मान देखकर राजकुमारी का हृदय मुग्ध हो उठा!

राजकुमारी शशिप्रभा

जो मृत्यु के साए में भी इतना निर्भय और तेजस्वी है, वह कोई साधारण चोर नहीं हो सकता! ऐसे शूरवीर को मैं सूली पर नहीं मरने दूंगी!

Panel 9
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Princess Shashiprabha making a dangerous vow in her chambers to save the condemned hero

राजकुमारी ने जान लिया कि चंडक ने केवल भूखी प्रजा के लिए यह जोखिम उठाया था। उसने अपनी राजसी पदवी और जीवन की परवाह किए बिना उसे कारागार से मुक्त कराने का प्रण ले लिया।

Panel 10
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Princess Shashiprabha disguising herself in royal guard armor to infiltrate the dungeon

आधी रात को, राजकुमारी ने एक राजसी पहरेदार का वेश धारण किया, कटार और कारागार की गुप्त कुंजियां लेकर अंधेरे रास्तों से काल-कोठरी की ओर बढ़ गई।

Panel 11
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दृश्य 4

काल-कोठरी में प्रवेश और चोर का स्वाभिमान

The Midnight Dungeon Infiltration & The Code of Honor
Princess Shashiprabha unlocking the heavy iron prison bars in the torchlit dungeon

राजकुमारी ने चुपके से पहरेदारों को निद्रामग्न कर दिया और चंडक की काल-कोठरी का भारी ताला खोलकर भीतर प्रवेश किया।

Panel 12
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Princess Shashiprabha revealing her identity and offering freedom and flight to Chandaka
राजकुमारी शशिप्रभा
चंडक! उठो! मैंने बाहर दो तीव्रगामी अश्व तैयार रखे हैं। मैं तुम्हारे साथ इस राज्य की सीमा से दूर भागने के लिए तैयार हूँ!

शशिप्रभा ने अपना शिरस्त्राण हटाया। उसके स्वर्णिम सौंदर्य और राजसी गरिमा को देखकर चंडक स्तब्ध रह गया!

राजकुमारी शशिप्रभा

चंडक! उठो! मैंने बाहर दो तीव्रगामी अश्व तैयार रखे हैं। मैं तुम्हारे साथ इस राज्य की सीमा से दूर भागने के लिए तैयार हूँ!

Panel 13
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Chandaka gently shaking his head and declining to flee with the Princess to safeguard her honor
चंडक
राजकुमारी! आपके इस दिव्य प्रेम और साहस ने मुझे अमर कर दिया। किंतु यदि मैं आपके साथ भागा, तो संसार आपको एक चोर की संगिनी कहेगा और महाराज का गौरव धूल में मिल जाएगा!

चंडक ने राजकुमारी के चरणों का स्पर्श किया, किंतु उसने भागने से स्पष्ट इनकार कर दिया!

चंडक

राजकुमारी! आपके इस दिव्य प्रेम और साहस ने मुझे अमर कर दिया। किंतु यदि मैं आपके साथ भागा, तो संसार आपको एक चोर की संगिनी कहेगा और महाराज का गौरव धूल में मिल जाएगा!

Panel 14
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Chandaka voluntarily placing the iron chains back upon his own wrists to protect the Princess
चंडक
मेरा शरीर नश्वर है, किंतु आपका यश और कुल की मर्यादा शाश्वत है! लौट जाइए, देवी!

चंडक ने पुनः अपनी बेड़ियों को अपने हाथों में धारण कर लिया। उसने कहा कि वह सूली पर हंसते-हंसते चढ़ जाएगा, किंतु राजकुमारी के पावन चरित्र पर कलंक का एक बिंदु भी नहीं लगने देगा।

चंडक

मेरा शरीर नश्वर है, किंतु आपका यश और कुल की मर्यादा शाश्वत है! लौट जाइए, देवी!

Panel 15
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दृश्य 5

राज-दरबार में सत्य का प्रकटीकरण और क्षमादान

The King
Princess Shashiprabha confessing everything proudly before King Viradeva at sunrise
राजकुमारी शशिप्रभा
पिताजी! यदि दंड देना है तो मुझे दीजिए, क्योंकि मैं राजद्रोही बनकर कारागार गई थी! किंतु चंडक ने मुझे ससम्मान लौटाकर आपके कुल के गौरव की रक्षा की है!

प्रातःकाल, राजकुमारी शशिप्रभा स्वयं राजा वीरदेव के सम्मुख उपस्थित हुईं और उन्होंने बीती रात की संपूर्ण घटना राजा के समक्ष सत्य-सत्य कह सुनाई।

राजकुमारी शशिप्रभा

पिताजी! यदि दंड देना है तो मुझे दीजिए, क्योंकि मैं राजद्रोही बनकर कारागार गई थी! किंतु चंडक ने मुझे ससम्मान लौटाकर आपके कुल के गौरव की रक्षा की है!

Panel 16
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King Viradeva rising from his throne, deeply moved by the thief's extraordinary virtue

राजा वीरदेव यह सुनकर स्तब्ध रह गए। उन्होंने देखा कि मृत्यु के सम्मुख खड़ा चोर किसी भी कुलीन राजकुमार से अधिक उच्च चरित्र और मर्यादा का धनी था।

Panel 17
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The King ordering the chains removed, granting Chandaka full pardon and appointing him royal commander
राजा वीरदेव
जो मृत्यु से नहीं डरा और जिसने मेरी पुत्री की मर्यादा के लिए अपने प्राण दांव पर लगा दिए, वह दंड का नहीं, सर्वोच्च सम्मान का अधिकारी है!

राजा वीरदेव ने तुरंत चंडक की बेड़ियां काटने का आदेश दिया। उन्होंने उसका मृत्युदंड रद्द कर दिया और उसके अद्भुत चरित्र के सम्मान में उसे राज्य का प्रमुख रक्षक नियुक्त किया।

राजा वीरदेव

जो मृत्यु से नहीं डरा और जिसने मेरी पुत्री की मर्यादा के लिए अपने प्राण दांव पर लगा दिए, वह दंड का नहीं, सर्वोच्च सम्मान का अधिकारी है!

Panel 18
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Chandaka and Princess Shashiprabha honored together in the court of Ujjayini

पूरे राज्य में हर्ष की लहर दौड़ गई। चोर कुल में जन्म लेकर भी चंडक ने सिद्ध कर दिया कि मनुष्य का चरित्र उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्म और त्याग से महान होता है।

Panel 19
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दृश्य 6

शीशम वृक्ष की पहेली और विक्रम का अमर निर्णय

The Midnight Riddle & King Vikramaditya
King Vikramaditya carrying Betal near the haunted Shinshapa tree as Betal poses the subtle moral riddle
बेताल
राजन! अब न्याय करो! इस कथा में तीनों पात्रों में सबसे अधिक उदात्त और कठिन त्याग किसका था—कारागार में घुसकर राजद्रोह करने वाली राजकुमारी का, मृत्यु के मुंह में रहकर भी राजकुमारी का मान बचाने वाले चोर का, या एक अपराधी को क्षमा कर सम्मान देने वाले राजा का? यदि जानते हुए भी मौन रहे, तो तुम्हारा शीश टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा!

कथा समाप्त कर बेताल ने श्मशान की अंधियारी में तीखा प्रश्न उछाला।

बेताल

राजन! अब न्याय करो! इस कथा में तीनों पात्रों में सबसे अधिक उदात्त और कठिन त्याग किसका था—कारागार में घुसकर राजद्रोह करने वाली राजकुमारी का, मृत्यु के मुंह में रहकर भी राजकुमारी का मान बचाने वाले चोर का, या एक अपराधी को क्षमा कर सम्मान देने वाले राजा का? यदि जानते हुए भी मौन रहे, तो तुम्हारा शीश टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा!

Panel 20
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King Vikramaditya delivering his discerning philosophical judgment with absolute clarity
महाराज विक्रमादित्य
बेताल! इस प्रसंग में निसंदेह चोर चंडक का चरित्र और त्याग सबसे अधिक महान और अद्वितीय था!

महाराज विक्रमादित्य ने गंभीर वाणी में निष्पक्ष निर्णय सुनाया।

महाराज विक्रमादित्य

बेताल! इस प्रसंग में निसंदेह चोर चंडक का चरित्र और त्याग सबसे अधिक महान और अद्वितीय था!

Panel 21
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Vikramaditya explaining why the thief's refusal of life itself represented the pinnacle of virtue

राजकुमारी प्रेम और दया के वशीभूत थी; राजा का क्षमादान न्याय और औदार्य था। किंतु चंडक तो मृत्यु के द्वार पर खड़ा था! जीवन की अंतिम आशा और एक सुंदर राजकुमारी का साथ पाकर भी, केवल उस कन्या के सम्मान की रक्षा के लिए मृत्यु का वरण कर लेना—ऐसा त्याग केवल एक महापुरुष ही कर सकता है!

Panel 22
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Betal cackling wildly and flying high into the dark branches of the Shinshapa tree
बेताल
अचूक न्याय, राजन! किंतु वाणी का प्रयोग करते ही तुम्हारा मौन समाप्त हुआ—और मैं चला पुनः अपने वृक्ष पर! पकड़ सको तो पकड़ो! खे-खे-खे!

जैसे ही राजा के मुख से सत्य वाणी निकली, उनका मौन टूट गया! बेताल ने भयंकर अट्टहास किया और राजा के कंधे से उड़कर पुनः शीशम के वृक्ष की शाखाओं में जा लटका!

बेताल

अचूक न्याय, राजन! किंतु वाणी का प्रयोग करते ही तुम्हारा मौन समाप्त हुआ—और मैं चला पुनः अपने वृक्ष पर! पकड़ सको तो पकड़ो! खे-खे-खे!

Panel 23
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King Vikramaditya firmly gripping his sword and turning back into the haunted forest with unyielding resolve
महाराज विक्रमादित्य
बेताल! धर्म और सत्य की विजय होकर रहेगी, और मेरा यह प्रयास निष्फल नहीं जाएगा!

महाराज विक्रमादित्य ने एक पल भी व्यर्थ नहीं गंवाया। उन्होंने पुनः अपनी तलवार खींची और बेताल को बीसवीं बार नीचे उतारने के लिए दृढ़ कदमों से वृक्ष की ओर बढ़ चले!

महाराज विक्रमादित्य

बेताल! धर्म और सत्य की विजय होकर रहेगी, और मेरा यह प्रयास निष्फल नहीं जाएगा!

Panel 24
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