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विंशति बेताल: मृत्यु-वेदी पर हंसने वाला ब्राह्मण बालक

बेताल पच्चीसी (सोमदेव भट्ट कृत)• katha

विंशति बेताल: मृत्यु-वेदी पर हंसने वाला ब्राह्मण बालक

The Brahman Boy Who Laughed at Death

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दृश्य 1

बीसवीं चढ़ाई और वेदी की छाया

The Twentieth Retrieval & The Shadow of the Altar
King Vikramaditya carrying Betal across the haunted cremation ground under a tempestuous night sky
बेताल
राजन! संसार के समस्त संबंधों की नश्वरता और आत्म-ज्ञान के चरम रहस्य को प्रकट करने वाली यह कथा सुनो—बलि-वेदी पर मृत्यु के मुख में हंसने वाले उस नन्हें ब्राह्मण बालक की अमर गाथा!

बीसवीं बार महाराज विक्रमादित्य ने श्मशान भूमि में शीशम के वृक्ष से बेताल को नीचे उतारा और दृढ़तापूर्वक कंधे पर लादकर मौन रूप से आगे बढ़े। बेताल ने अत्यंत मार्मिक और गूढ़ दार्शनिक पहेली आरंभ की।

बेताल

राजन! संसार के समस्त संबंधों की नश्वरता और आत्म-ज्ञान के चरम रहस्य को प्रकट करने वाली यह कथा सुनो—बलि-वेदी पर मृत्यु के मुख में हंसने वाले उस नन्हें ब्राह्मण बालक की अमर गाथा!

Panel 1
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The kingdom of King Chandraprabha stricken by a catastrophic pestilence and famine

प्राचीन काल में राजा चंद्रप्रभ के राज्य में एक भयानक महामारी और अकाल फैल गया। सहस्रों निर्दोष प्रजाजन काल के गाल में समाने लगे।

Panel 2
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The fierce forest demon demanding the blood sacrifice of a pure Brahman child
महामारी राक्षस
यदि किसी ब्राह्मण बालक की बलि दी जाए जिसे उसके माता-पिता और राजा दोनों ने वेदी पर पकड़ा हो, तभी यह राज्य विनाश से बचेगा!

जब राजा ने वन में महाकाली के मंदिर में प्रार्थना की, तो एक क्रूर वन-राक्षस ने प्रकट होकर कहा कि यदि सात वर्ष के एक कुलीन ब्राह्मण बालक की स्वेच्छा से बलि दी जाए, तो यह महामारी शांत होगी!

महामारी राक्षस

यदि किसी ब्राह्मण बालक की बलि दी जाए जिसे उसके माता-पिता और राजा दोनों ने वेदी पर पकड़ा हो, तभी यह राज्य विनाश से बचेगा!

Panel 3
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दृश्य 2

स्वर्ण का लोभ और माता-पिता का सौदा

The Price of Gold & The Greed of Parents
Royal heralds proclaiming a reward of a hundred golden villages for a sacrificial child

राजा ने पूरे राज्य में ढिंढोरा पिटवा दिया: जो माता-पिता राज्य की रक्षा के लिए अपने सात वर्षीय पुत्र को बलि के लिए समर्पित करेंगे, उन्हें सौ समृद्ध गांव और अपार स्वर्ण-मुद्राएं दी जाएंगी।

Panel 4
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The impoverished Brahman parents overcome by greed agreeing to trade their son for wealth
लोभी ब्राह्मण पिता
हमारे पास अन्य संतानें हैं! इस एक बालक के बदले हमारी सात पीढ़ियां राजाओं की भांति राज करेंगी!

एक दरिद्र ब्राह्मण और उसकी पत्नी अपार धन के लोभ में अंधा हो गए। उन्होंने अपने तेजस्वी, मासूम और परम निष्पाप सात वर्षीय पुत्र गुणकर को राजा के हाथों बेच दिया!

लोभी ब्राह्मण पिता

हमारे पास अन्य संतानें हैं! इस एक बालक के बदले हमारी सात पीढ़ियां राजाओं की भांति राज करेंगी!

Panel 5
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The innocent seven-year-old boy Gunakar smiling gently, completely trusting his parents
बालक गुणकर
पिताजी, यदि मेरे शरीर से आपका दारिद्र्य मिटता है और राज्य के प्राण बचते हैं, तो मैं सहर्ष चलूंगा।

बालक गुणकर अत्यंत कोमल, निर्दोष और अलौकिक रूप से शांत था। उसने अपने माता-पिता के इस निर्णय का कोई विरोध नहीं किया, मानो वह नियति के खेल को पहले से जानता हो।

बालक गुणकर

पिताजी, यदि मेरे शरीर से आपका दारिद्र्य मिटता है और राज्य के प्राण बचते हैं, तो मैं सहर्ष चलूंगा।

Panel 6
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King Chandraprabha looking at the young boy with mixed sorrow, duty, and determination

राजा ने भारी मन से किंतु अपने साम्राज्य की रक्षा के नाम पर उस निर्दोष बालक को स्वीकार कर लिया और मध्यरात्रि में बलि की तैयारी का आदेश दिया।

Panel 7
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दृश्य 3

मध्यरात्रि की भयानक बलि-वेदी

The Midnight Altar of Chandika
The eerie midnight temple of Goddess Chandika illuminated by blood-red torches and mystic fires

मध्यरात्रि की काली निशा में, वन के भीतर स्थित मां चंडिका के प्राचीन मंदिर में रक्त-चंदन और मसान की धूप से बलि-वेदी सजाई गई।

Panel 8
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The royal priest raising the massive consecrated sacrificial scimitar
राजपुरोहित
हे देवी! इस पवित्र बालक के रक्त से अपनी तृष्णा शांत करो और राज्य को महामारी से मुक्त करो!

राजपुरोहित ने लाल वस्त्र धारण कर महाभैरव और चंडिका का आह्वान किया और बलि के लिए चमचमाती महा-खड्ग को मंत्रों से अभिमंत्रित किया।

राजपुरोहित

हे देवी! इस पवित्र बालक के रक्त से अपनी तृष्णा शांत करो और राज्य को महामारी से मुक्त करो!

Panel 9
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The parents holding down their own child's head and hands upon the sacrificial stone

शर्त के अनुसार, बालक के माता-पिता ने आगे बढ़कर अपने ही नन्हें पुत्र के दोनों हाथ और मस्तक को पत्थर की वेदी पर मजबूती से जकड़ लिया ताकि वह हिल न सके!

Panel 10
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King Chandraprabha holding the child's feet down upon the altar

महाराज चंद्रप्रभ ने आगे बढ़कर बालक के दोनों चरणों को कसकर पकड़ लिया। रक्षक ही भक्षक की भूमिका में उपस्थित थे।

Panel 11
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दृश्य 4

खड्ग की धार पर बालक का दिव्य अट्टहास

The Radiant Laughter at the Edge of the Blade
The priest raising the heavy sacrificial blade to strike the final decapitating blow

पुरोहित ने अपनी दोनों भुजाओं से भारी खड्ग को आकाश में उठाया। रक्तपिपासु राक्षस अंधकार में अपनी लाल आंखें चमकाते हुए ग्रास की प्रतीक्षा कर रहा था।

Panel 12
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Young Gunakar looking at his parents, the King, and the descending sword, his face breaking into an angelic smile

मृत्यु के उस अंतिम क्षण में, जब खड्ग नीचे गिरने ही वाला था, बालक गुणकर ने पहले अपने माता-पिता को देखा, फिर राजा को देखा, और फिर आकाश की ओर देखकर खिलखिलाकर हंस पड़ा!

Panel 13
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Gunakar laughing with pure, transcendent, musical joy, illuminating the dark temple with spiritual light
बालक गुणकर (हंसते हुए)
हा-हा-हा! अहा! विधाता की कैसी अद्भुत माया है! कितना विचित्र है यह संसार!

उसकी हंसी कोई पागलपन की चीख नहीं थी; वह वीणा के मधुर स्वर जैसी, निर्मल, दिव्य और परमानंद से भरी हंसी थी! उस हंसी की गूंज से मंदिर का अंधकार कांप उठा!

बालक गुणकर (हंसते हुए)

हा-हा-हा! अहा! विधाता की कैसी अद्भुत माया है! कितना विचित्र है यह संसार!

Panel 14
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The priest dropping the sword in terror as everyone freezes in profound shock and wonder

उस अलौकिक हंसी को सुनकर पुरोहित के हाथ से खड्ग छूटकर जमीन पर गिर पड़ा! माता-पिता की पकड़ ढीली हो गई और राजा चंद्रप्रभ स्तब्ध होकर बालक के सामने घुटनों पर बैठ गए!

Panel 15
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दृश्य 5

बलि का स्थगन और राजा की व्याकुलता

The Miracle & The Halting of the Sacrifice
King Chandraprabha bowing before the young boy, begging to understand the mystery of his laughter
राजा चंद्रप्रभ
हे दिव्य बालक! तुम कोई साधारण मनुष्य नहीं हो! मृत्यु के इस दारुण क्षण में तुम्हारे हंसने का क्या रहस्य था? कृपया मुझे ज्ञान दो!

राजा चंद्रप्रभ ने दोनों हाथ जोड़कर बालक के चरणों में मस्तक रख दिया और व्याकुल होकर पूछा।

राजा चंद्रप्रभ

हे दिव्य बालक! तुम कोई साधारण मनुष्य नहीं हो! मृत्यु के इस दारुण क्षण में तुम्हारे हंसने का क्या रहस्य था? कृपया मुझे ज्ञान दो!

Panel 16
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Young Gunakar sitting peacefully upon the altar, radiating profound philosophical peace

बालक गुणकर ने मंद मुस्कान के साथ उत्तर दिया: 'राजन! जब संकट आता है, तो बालक माता-पिता की शरण में जाता है। यदि माता-पिता विपत्ति डालें, तो वह राजा के पास न्याय के लिए जाता है। और यदि राजा भी प्राण लेने लगे, तो मनुष्य ईश्वर और देवताओं की शरण लेता है!'

Panel 17
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Visual metaphor of the total collapse of all mortal dependencies revealing the eternal soul

'किंतु आज यहाँ देखो! मेरे माता-पिता ने स्वर्ण के लोभ में मुझे बेचकर स्वयं मेरे हाथ पकड़ लिए! रक्षा करने वाले राजा ने अपनी शक्ति के लिए मेरे पैर जकड़ लिए! और जिस देवी की मूर्ति है, वह मेरा मांस खाने की प्रतीक्षा कर रही है! जब सब रक्षक ही भक्षक बन गए, तो मुझे संसार की इस खोखली माया और विधाता की लीला पर हंसी आ गई!'

Panel 18
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The demon fleeing in terror as the child's spiritual enlightenment purifies the entire kingdom

बालक के इस ज्ञान-वचन को सुनकर राक्षस भयभीत होकर भाग गया और उसकी छाया विलीन हो गई। राजा ने बलि तुरंत रोक दी, राज्य की महामारी स्वतः समाप्त हो गई और बालक को गुरु का सर्वोच्च स्थान प्राप्त हुआ।

Panel 19
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दृश्य 6

अमावस्या की पहेली और विक्रम का अमर निर्णय

The Midnight Riddle & King Vikramaditya
King Vikramaditya carrying Betal near the haunted Shinshapa tree as Betal poses the ultimate existential riddle
बेताल
राजन! अब तुम्हारे तत्व-ज्ञान की परीक्षा है! मृत्यु के मुंह में खड़े होकर उस नन्हें बालक के हंसने का वास्तविक, गूढ़ कारण क्या था? उसने मृत्यु के भय को कैसे जीत लिया? यदि जानते हुए भी मौन रहे, तो तुम्हारा मस्तक तड़पकर शत-खंड हो जाएगा!

कथा समाप्त कर बेताल ने श्मशान के सन्नाटे में अपना सबसे गंभीर और गूढ़ प्रश्न पूछा।

बेताल

राजन! अब तुम्हारे तत्व-ज्ञान की परीक्षा है! मृत्यु के मुंह में खड़े होकर उस नन्हें बालक के हंसने का वास्तविक, गूढ़ कारण क्या था? उसने मृत्यु के भय को कैसे जीत लिया? यदि जानते हुए भी मौन रहे, तो तुम्हारा मस्तक तड़पकर शत-खंड हो जाएगा!

Panel 20
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King Vikramaditya delivering his sublime Vedantic verdict with absolute clarity and authority
महाराज विक्रमादित्य
बेताल! वह बालक इसलिए हंसा क्योंकि उस क्षण उसे संसार की संपूर्ण 'माया' और संबंधों के झूठेपन का प्रत्यक्ष साक्षात्कार हो गया!

महाराज विक्रमादित्य ने परम शांत और गंभीर वाणी में अपना अमर निर्णय सुनाया।

महाराज विक्रमादित्य

बेताल! वह बालक इसलिए हंसा क्योंकि उस क्षण उसे संसार की संपूर्ण 'माया' और संबंधों के झूठेपन का प्रत्यक्ष साक्षात्कार हो गया!

Panel 21
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Vikramaditya explaining the boy's realization that the immortal soul is beyond physical destruction

जब मनुष्य के सारे सांसारिक सहारे—माता-पिता का स्नेह, राजा का न्याय और देवताओं की कृपा—एक साथ स्वार्थ और रक्तपिपासा में विलीन हो गए, तो बालक समझ गया कि यह संसार केवल स्वार्थ का रंगमंच है। उसने जान लिया कि देह नश्वर है किंतु आत्मा अमर और अजर है! विधाता की इस विचित्र विडंबना और आत्म-मुक्ति के आनंद में ही वह अट्टहास कर उठा!

Panel 22
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Betal cackling wildly and flying high into the dark branches of the Shinshapa tree
बेताल
परम ज्ञानी राजन! तुम्हारे विवेक की कोई तुलना नहीं! किंतु मौन टूटते ही मैं मुक्त हुआ—और मैं चला पुनः अपने वृक्ष पर! पकड़ सको तो पकड़ो! खे-खे-खे!

जैसे ही राजा के मुख से यह परम सत्य निर्णय निकला, उनका मौन पुनः भंग हो गया! बेताल ने कान फाड़ देने वाला अट्टहास किया और राजा के कंधे से उड़कर पुनः शीशम के वृक्ष की शाखाओं में जा लटका!

बेताल

परम ज्ञानी राजन! तुम्हारे विवेक की कोई तुलना नहीं! किंतु मौन टूटते ही मैं मुक्त हुआ—और मैं चला पुनः अपने वृक्ष पर! पकड़ सको तो पकड़ो! खे-खे-खे!

Panel 23
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King Vikramaditya firmly gripping his sword and turning back into the haunted forest with unyielding resolve
महाराज विक्रमादित्य
बेताल! सत्य का मार्ग कठिन हो सकता है, किंतु मेरा संकल्प मृत्यु से भी परे है!

महाराज विक्रमादित्य के मुख पर तनिक भी थकान या क्षोभ नहीं था। उन्होंने अपनी चमचमाती तलवार खींची, अपनी कटार कसी और इक्कीसवीं बार बेताल को वश में करने के लिए श्मशान के घने अंधकार में आगे बढ़ गए!

महाराज विक्रमादित्य

बेताल! सत्य का मार्ग कठिन हो सकता है, किंतु मेरा संकल्प मृत्यु से भी परे है!

Panel 24
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