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तृतीय बेताल: शुक-सारिका का द्युत और कटी नाक का रहस्य

बेताल पच्चीसी (सोमदेव भट्ट कृत)• katha

तृतीय बेताल: शुक-सारिका का द्युत और कटी नाक का रहस्य

The Battle of Sexes: The Scholar Parrot & The Wise Myna

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दृश्य 1

तीसरी चढ़ाई और राज-पिंजरे की शर्त

The Third Retrieval & The Royal Aviary Wager
King Vikramaditya climbing down the gnarled Shinshapa tree carrying Betal over his shoulders
Betal
राजन! पुरुष और स्त्री में अधिक कपटी कौन है, यह इस कथा से सिद्ध होगा!

महाराज विक्रमादित्य ने पुनः उसी भयानक श्मशान में जाकर शीशम के वृक्ष से बेताल के शव को उतारा और कंधे पर लादकर चल पड़े। बेताल ने कहा: 'राजन! मार्ग-विनोद के लिए पाटलीपुत्र के शुक-सारिका की यह ज्ञानवर्धक कथा सुनो!'

Betal

राजन! पुरुष और स्त्री में अधिक कपटी कौन है, यह इस कथा से सिद्ध होगा!

Panel 1
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The scholar parrot Vidagdha and wise myna Somika arguing in their royal cage before the prince
विदग्ध (तोता)
तुम्हारा कथन सर्वथा मिथ्या है! पुरुष तो त्यागी और निष्ठावान होते हैं, स्त्रियां ही कुटिल और पापिनी होती हैं!

पाटलीपुत्र के राजमहल में दो श्रापग्रस्त दिव्य पक्षी रहते थे—शास्त्रवेत्ता शुक 'विदग्धचूड़ामणि' और समस्त विज्ञान-पारंगत मैना 'सोमिका'। जब तोते ने प्रेम-प्रस्ताव रखा, तो मैना ने पुरुष जाति को पापी और कृतघ्न कहकर ठुकरा दिया!

विदग्ध (तोता)

तुम्हारा कथन सर्वथा मिथ्या है! पुरुष तो त्यागी और निष्ठावान होते हैं, स्त्रियां ही कुटिल और पापिनी होती हैं!

Panel 2
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The parrot and myna perched in the golden cage making their binding wager
सोमिका (मैना)
तो सुनो पुरुष के कपट की यह साक्षात कथा!

दोनों में विवाद बढ़ गया और उन्होंने युवराज के समक्ष शर्त रखी: जो अपनी बात प्रमाणित नहीं कर सका, वह जीवन भर दूसरे का दास बनेगा!

सोमिका (मैना)

तो सुनो पुरुष के कपट की यह साक्षात कथा!

Panel 3
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दृश्य 2

मैना की कथा: धनदत्त का पाखंड और खड्ड में धकेलना

The Myna
Merchant Arthadatta with his young son Dhanadatta in the prosperous trading city of Kamandika

मैना ने कथा सुनाई: कामंदिका नगरी के विख्यात कुलीन महासेठ अर्थदत्त का पुत्र था धनदत्त। वह उच्च कुल और अकूत वैभव में पला-बढ़ा था।

Panel 4
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Dhanadatta losing his fortune on the dice table in a smoky gambling tavern

पिता के देहांत के बाद दुष्ट मित्रों ने उसे जुए के दुर्व्यसन में डाल दिया। कुछ ही दिनों में धनदत्त ने अपने पिता का सारा अकूत धन जुए में लुटा दिया और लज्जावश विदेश भाग निकला!

Panel 5
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Penniless Dhanadatta wandering through dusty roads into the trading town of Chandanpur

भटकते हुए वह चंदनपुर पहुँचा, जहाँ महासेठ धर्मदत्त उसके उच्च कुल और सुसंस्कृत वाणी से प्रभावित हो गए।

Panel 6
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Traditional Vedic wedding between Dhanadatta and wealthy merchant's daughter Ratnavati

सेठ धर्मदत्त ने अपनी गुणवती और रूपवती कन्या 'रत्नावती' का विवाह धनदत्त से कर दिया और उसे अपार स्वर्ण और आभूषणों से लाद दिया।

Panel 7
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Dhanadatta and Ratnavati traveling in bullock cart through lonely wilderness canyon

रत्नावती को विदा कराकर धनदत्त अपने नगर की ओर चला। मार्ग में एक अत्यंत निर्जन, बीहड़ पहाड़ी खड्ड और खाई आई।

Panel 8
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Greedy Dhanadatta pushing the screaming Ratnavati off a cliff edge into a rocky ravine
रत्नावती
स्वामी! यह आपने क्या किया?!

लोभी धनदत्त ने स्वर्ण के लालच में अपनी पतिव्रता पत्नी रत्नावती को गहरी खाई में धक्का दे दिया और उसके सारे आभूषण लूटकर भाग खड़ा हुआ!

रत्नावती

स्वामी! यह आपने क्या किया?!

Panel 9
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दृश्य 3

रत्नावती की निष्ठा और पति का दूसरा कुकर्म

The Pure Forgiveness & The Midnight Betrayal
Ratnavati catching onto tangled mountain roots and shrubs along the cliffside

सौभाग्यवश रत्नावती पहाड़ी झाड़ियों में उलझकर जीवित बच गई और रक्तरंजित अवस्था में खाई से बाहर निकली।

Panel 10
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Bruised Ratnavati tearfully lying to passing travelers to protect her husband's honor
रत्नावती
मेरे पति निर्दोष हैं, डाकुओं ने हमारा सर्वस्व लूट लिया।

जब राहगीरों ने पूछा, तो उसने पति का नाम छिपाकर कहा: 'डाकुओं ने लूट लिया और मेरे पति जान बचाकर भागे।' उसने अपने पापी पति को कलंक से बचाया!

रत्नावती

मेरे पति निर्दोष हैं, डाकुओं ने हमारा सर्वस्व लूट लिया।

Panel 11
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Ratnavati welcomed in tears by her father in Chandanpur living as a chaste wife

वह पिता के घर लौट आई और पतिव्रता नारी की भांति पति की प्रतीक्षा करने लगी।

Panel 12
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Years later destitute Dhanadatta arriving begging and Ratnavati embracing him with forgiveness

वर्षों बाद जब जुए में लुटकर धनदत्त पुनः भिखारी बनकर उसी नगर में आया, तो रत्नावती ने उसे पहचानकर गले लगाया और पिता के घर में आश्रय दिया!

Panel 13
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Wicked Dhanadatta creeping over the sleeping Ratnavati with a dagger to steal remaining gold

किंतु दुष्ट धनदत्त का हृदय नहीं बदला! आधी रात को उसने सोती हुई रत्नावती का गला दबाकर हत्या करने का प्रयास किया, उसके गहने चुराए और पुनः भाग गया! मैना बोली: 'बताओ, क्या पुरुष से बढ़कर कोई कृतघ्न है?!'

Panel 14
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दृश्य 4

शुक की कथा: वासुदत्ता का कुकर्म और कटी नाक का रहस्य

The Parrot
Palace courtyard in Harshavati where merchant Samudradatta is seated with his wife Vasudatta
विदग्ध (तोता)
अब सुनो स्त्री के भयानक छल और षड्यंत्र की यह सच्ची गाथा!

अब तोते ने उत्तर दिया: 'हर्षवती नगरी के धर्मात्मा सेठ समुद्रदत्त की पत्नी थी वासुदत्ता। वह बाहर से पतिव्रता दिखती थी, किंतु भीतर से अत्यंत कुटिल थी!'

विदग्ध (तोता)

अब सुनो स्त्री के भयानक छल और षड्यंत्र की यह सच्ची गाथा!

Panel 15
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Vasudatta secretly meeting her rogue lover in a secluded alley while her husband sleeps

वासुदत्ता का नगर के एक दुराचारी लंपट युवक से गुप्त प्रेम-प्रसंग था, जिससे वह नित्य रात को छिपकर मिला करती थी।

Panel 16
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Vasudatta walking secretly through royal pleasure garden while a thief watches from trees

एक रात वह अपने प्रेमी से मिलने राजोद्यान में पहुँची। उसी समय पेड़ पर छिपा एक सत्यवादी चोर उसे देख रहा था।

Panel 17
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Vasudatta discovering her lover hanged from a tree branch by the royal watchmen

किंतु उद्यान में उसने देखा कि उसके प्रेमी को राज-रक्षकों ने चोरी के अपराध में फांसी पर लटका दिया था और उसका शव झूल रहा था!

Panel 18
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दृश्य 5

शव का दंश, झूठा आरोप और सत्यवादी चोर

The Ghoul
The spectral corpse biting off Vasudatta's nose in the moonlight as she screams in horror
वासुदत्ता
आह्ह्ह! मेरी नाक काट ली इस प्रेत ने!

शोक में पागल होकर वासुदत्ता ज्योंही शव के होंठ चूमने लगी, शव में प्रविष्ट बेताल ने अचानक अपने दांतों से उसकी नाक काट ली! वासुदत्ता चीखती हुई भागी!

वासुदत्ता

आह्ह्ह! मेरी नाक काट ली इस प्रेत ने!

Panel 19
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Bleeding Vasudatta falsely accusing her innocent sleeping husband before the King

घर पहुँचकर उसने रो-रोकर झूठा आरोप लगाया: 'सोते में मेरे इस दुष्ट पति ने मेरी नाक काट ली!' राजा ने बिना जांच किए निर्दोष समुद्रदत्त को फांसी का हुक्म दे दिया!

Panel 20
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Innocent husband Samudradatta bound in heavy chains on the execution block
समुद्रदत्त
मैंने तो स्वप्न में भी पत्नी का अहित नहीं सोचा! हे ईश्वर, सत्य की रक्षा करो!

निर्दोष पति वधस्थल पर ले जाया गया। वह ईश्वर से न्याय की गुहार लगा रहा था।

समुद्रदत्त

मैंने तो स्वप्न में भी पत्नी का अहित नहीं सोचा! हे ईश्वर, सत्य की रक्षा करो!

Panel 21
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The honest thief stepping forward before the King presenting the corpse with the severed nose

तभी उसी चोर ने आगे आकर राजा को रोका: 'महाराज! उद्यान के फांसी लगे शव का मुंह देखिए, कटी हुई नाक अब भी उसके दांतों में दबी है!'

Panel 22
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The King vindicating the innocent husband exiling the deceitful wife and rewarding the thief

सत्य प्रमाणित हुआ! राजा ने निर्दोष पति को रिहा किया, दुष्ट वासुदत्ता को देश-निकाला दिया और सत्यवादी चोर को नगर का धर्माधिकारी बना दिया! तोता बोला: 'बताओ, क्या स्त्री से बढ़कर कोई कपटी है?!'

Panel 23
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दृश्य 6

बेताल का यक्ष-प्रश्न और महाराज विक्रम का अमर निर्णय

The Moral Conundrum & Vikram
In the midnight forest Betal whisper-challenging King Vikramaditya on the wager of sexes
Betal
बताओ विक्रमादित्य! शुक और सारिका के इस विवाद में किसकी विजय हुई? पुरुष और स्त्री में अधिक पापी और कुटिल कौन है? उत्तर जानते हुए मौन रहे तो तुम्हारा सिर फट जाएगा!

श्मशान के सन्नाटे में बेताल ने कथा रोककर राजा विक्रमादित्य से प्रश्न किया।

Betal

बताओ विक्रमादित्य! शुक और सारिका के इस विवाद में किसकी विजय हुई? पुरुष और स्त्री में अधिक पापी और कुटिल कौन है? उत्तर जानते हुए मौन रहे तो तुम्हारा सिर फट जाएगा!

Panel 24
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Heroic close-up of Emperor Vikramaditya delivering his master philosophical verdict
King Vikramaditya
आत्मा के सदाचार में ही धर्म है, लिंग में नहीं!

महाराज विक्रमादित्य ने उत्तर दिया: 'गुण और दोष किसी लिंग के अधीन नहीं होते, वे व्यक्ति के अंतःकरण और आचरण पर निर्भर करते हैं! किंतु पुरुष का दुराचार व्यसन और लोभ के वशीभूत होकर प्रकट होता है, जबकि जो स्त्री पतिव्रता का ढोंग करके अपने निर्दोष रक्षक को ही सूली पर चढ़ाने का षड्यंत्र रचे, उसका कपट कहीं अधिक विनाशकारी है!'

King Vikramaditya

आत्मा के सदाचार में ही धर्म है, लिंग में नहीं!

Panel 25
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King Vikramaditya standing resolute in the dark moonless Amavasya jungle turning back to retrieve Betal
King Vikramaditya
तुम जितनी बार भागोगे बेताल, मैं उतनी बार आऊँगा—क्षत्रिय अपना वचन कभी नहीं छोड़ता!

अमावस की घोर अंधियारी रात में, बीहड़ और भयानक श्मशान वन में महाराज विक्रमादित्य बिना थके, दृढ़ संकल्प के साथ पुनः बेताल को पकड़ने चल पड़े।

King Vikramaditya

तुम जितनी बार भागोगे बेताल, मैं उतनी बार आऊँगा—क्षत्रिय अपना वचन कभी नहीं छोड़ता!

Panel 26
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