Skip to content

पंचम बेताल: सोमप्रभा और तीन गुणी वर

बेताल पच्चीसी (सोमदेव भट्ट कृत)• katha

पंचम बेताल: सोमप्रभा और तीन गुणी वर

Somaprabha & The Three Prodigies

ऑडियो सुनें•0:00 / --:--
0:00 / --:--
दृश्य 1

पांचवीं चढ़ाई और सोमप्रभा का प्रण

The Fifth Ascent & The Maiden
King Vikramaditya climbing the gnarled Shinshapa tree for the fifth time
Betal
राजन! बुद्धि, शिल्प और शौर्य में से किसका अधिकार सर्वोच्च है, ध्यानपूर्वक सुनो!

काली अमावस की रात श्मशान भूमि में राजा विक्रमादित्य ने पांचवीं बार बेताल को पेड़ से उतारकर कंधे पर लादा। बेताल ने एक नई कथा आरंभ की।

Betal

राजन! बुद्धि, शिल्प और शौर्य में से किसका अधिकार सर्वोच्च है, ध्यानपूर्वक सुनो!

Panel 1
•
The beautiful gifted maiden Somaprabha reading manuscripts in Pataliputra palace
सोमप्रभा
पिताजी! मैं उसी पुरुष को वरमाला पहनाऊँगी जो अलौकिक शिल्प, दिव्य दृष्टि या असीम पराक्रम में अद्वितीय हो।

पाटलीपुत्र के धर्माधिकारी हरिस्वामी की पुत्री सोमप्रभा अपने अनुपम सौंदर्य और प्रखर बुद्धि के लिए पूरे आर्यावर्त में प्रसिद्ध थी। उसने असाधारण गुणों वाले वर से ही विवाह करने का प्रण लिया था।

सोमप्रभा

पिताजी! मैं उसी पुरुष को वरमाला पहनाऊँगी जो अलौकिक शिल्प, दिव्य दृष्टि या असीम पराक्रम में अद्वितीय हो।

Panel 2
•
Hariswami searching across ancient Pataliputra for extraordinary suitors
हरिस्वामी
आप में से कौन ऐसा है जिसके पास साधारण मनुष्यों से परे अलौकिक विद्या है?

पुत्री के प्रण को पूरा करने के लिए हरिस्वामी ने असाधारण प्रतिभा वाले वरों की खोज शुरू की। सोमप्रभा के प्रण की चर्चा दूर-दूर तक फैल गई।

हरिस्वामी

आप में से कौन ऐसा है जिसके पास साधारण मनुष्यों से परे अलौकिक विद्या है?

Panel 3
•
दृश्य 2

तीन असाधारण गुणी वर

The Three Prodigies of Exceptional Genius
The 1st prodigy demonstrating his mechanical flying wooden aerial chariot vimana
विमान-शिल्पी
मेरा यह विमान पलक झपकते ही किसी को भी पृथ्वी के किसी भी कोने में पहुंचा सकता है!

पहला वर आया—एक कुशल विमान-शिल्पी, जो काष्ठ का ऐसा उड़ने वाला रथ बना सकता था जो वायु के वेग से बादलों में उड़ता था!

विमान-शिल्पी

मेरा यह विमान पलक झपकते ही किसी को भी पृथ्वी के किसी भी कोने में पहुंचा सकता है!

Panel 4
•
The 2nd prodigy suitor, an omniscient seer with glowing third eye perception
त्रिकालदर्शी ज्ञानी
तीनों लोकों में कोई भी रहस्य मेरी दिव्य दृष्टि से छिपा नहीं रह सकता!

दूसरा वर आया—एक त्रिकालदर्शी ज्ञानी, जो ध्यान लगाते ही तीनों लोकों में किसी भी छिपी वस्तु या व्यक्ति को साक्षात् देख लेता था!

त्रिकालदर्शी ज्ञानी

तीनों लोकों में कोई भी रहस्य मेरी दिव्य दृष्टि से छिपा नहीं रह सकता!

Panel 5
•
The 3rd prodigy suitor, an invincible archer drawing a mighty celestial recurve bow
अपराजित धनुर्धर
मेरी प्रत्यंचा की टंकार से शत्रु कांप उठते हैं! धर्म की रक्षा के लिए मैं अपने प्राणों की बाजी लगाने को सदैव तत्पर हूँ!

तीसरा वर आया—एक अपराजित धनुर्धर, जिसके अचूक बाण शब्दवेधी थे और जो दानवों को भी रणभूमि में धूल चटाने का साहस रखता था!

अपराजित धनुर्धर

मेरी प्रत्यंचा की टंकार से शत्रु कांप उठते हैं! धर्म की रक्षा के लिए मैं अपने प्राणों की बाजी लगाने को सदैव तत्पर हूँ!

Panel 6
•
दृश्य 3

राक्षस का हरण और आशा की किरण

The Demon
The dark demon Dhoomrasikha seizing Somaprabha in a whirlwind storm cloud
राक्षस धूम्रशिखा
हा-हा-हा! यह रूपवती कन्या अब मेरी विंध्य-गुफा की बंदिनी बनेगी!

किंतु निर्णय होने से पूर्व ही विंध्याचल का क्रूर राक्षस 'धूम्रशिखा' बवंडर बनकर आया और सोमप्रभा का हरण करके आकाश-मार्ग से उड़ गया!

राक्षस धूम्रशिखा

हा-हा-हा! यह रूपवती कन्या अब मेरी विंध्य-गुफा की बंदिनी बनेगी!

Panel 7
•
Hariswami weeping in anguish on the palace terrace surrounded by the three suitors
हरिस्वामी
मेरी पुत्री छिन गई! इस अनंत संसार में कौन उस दानव की खोज कर सकता है?!

पुत्री के वियोग में हरिस्वामी विलाप करने लगे। पूरे भवन में शोक छा गया, क्योंकि किसी को ज्ञात नहीं था कि राक्षस कहाँ गया।

हरिस्वामी

मेरी पुत्री छिन गई! इस अनंत संसार में कौन उस दानव की खोज कर सकता है?!

Panel 8
•
The Seer in deep meditation revealing the demon's cavern on Mount Vindhya
त्रिकालदर्शी ज्ञानी
मैंने देख लिया! वह दक्षिण में सैकड़ों योजन दूर विंध्याचल पर्वत की एक दुर्गम गुफा में कैद है!

तभी त्रिकालदर्शी ज्ञानी आगे आया और उसने ध्यान लगाया। कुछ ही पलों में उसकी दिव्य दृष्टि ने रहस्य भेद दिया।

त्रिकालदर्शी ज्ञानी

मैंने देख लिया! वह दक्षिण में सैकड़ों योजन दूर विंध्याचल पर्वत की एक दुर्गम गुफा में कैद है!

Panel 9
•
दृश्य 4

विमान से आकाश-यात्रा

The Aerial Pursuit on the Wooden Vimana
The Mechanist readying the winged wooden aerial chariot Vimana
विमान-शिल्पी
विमान में बैठिए! मेरा रथ आज ही हमें विंध्याचल के शिखर तक पहुंचा देगा!

विमान-शिल्पी तुरंत आगे बढ़ा और उसने अपना विशाल काष्ठ-विमान तैयार किया, जो दुर्गम पहाड़ों तक उड़ने में सक्षम था।

विमान-शिल्पी

विमान में बैठिए! मेरा रथ आज ही हमें विंध्याचल के शिखर तक पहुंचा देगा!

Panel 10
•
The three suitors boarding the flying chariot in united resolve
अपराजित धनुर्धर
ज्ञानी मार्ग दिखाओ, शिल्पी गति बढ़ाओ! दानव के संहार का दायित्व मेरी प्रत्यंचा पर छोड़ो!

तीनों गुणी वरों ने आपसी प्रतिद्वंद्विता त्याग दी और सोमप्रभा की रक्षा के लिए एक साथ विमान में सवार हुए।

अपराजित धनुर्धर

ज्ञानी मार्ग दिखाओ, शिल्पी गति बढ़ाओ! दानव के संहार का दायित्व मेरी प्रत्यंचा पर छोड़ो!

Panel 11
•
The magical wooden Vimana soaring across lightning storm clouds above mountain ridges

पवन के वेग से बादलों को चीरता हुआ विमान विंध्याचल के बीहड़ शिखरों की ओर तेज़ी से उड़ चला।

Panel 12
•
Landing on the precipitous crags outside Dhoomrasikha's cavern
त्रिकालदर्शी ज्ञानी
सोमप्रभा इसी गुफा के भीतर है, किंतु सावधान! दानव क्रोध में बाहर आ रहा है!

कुछ ही घंटों में विमान उस दुर्गम पहाड़ी गुफा के मुहाने पर उतरा जहाँ राक्षस का पहरा था।

त्रिकालदर्शी ज्ञानी

सोमप्रभा इसी गुफा के भीतर है, किंतु सावधान! दानव क्रोध में बाहर आ रहा है!

Panel 13
•
दृश्य 5

राक्षस-वध और सोमप्रभा की मुक्ति

The Battle at Mount Vindhya & Liberation
Demon Dhoomrasikha charging out with his colossal iron mace
राक्षस धूम्रशिखा
क्षुद्र मानवों! तुम अपनी मृत्यु के स्वयं चलकर मेरी गुफा तक आए हो!

मानवों की गंध पाकर राक्षस धूम्रशिखा भयंकर गर्जना करते हुए अपनी विशाल लौह-गदा लहराकर बाहर झपटा।

राक्षस धूम्रशिखा

क्षुद्र मानवों! तुम अपनी मृत्यु के स्वयं चलकर मेरी गुफा तक आए हो!

Panel 14
•
The Archer standing his ground fearlessly in mortal combat aiming a flaming celestial arrow
अपराजित धनुर्धर
निर्दोष कन्या को छोड़ दे दानव, अन्यथा मेरे अग्नि-बाणों से भस्म होने को तैयार हो जा!

जहाँ अन्य साथी पीछे हटे, वहीं धनुर्धर निर्भय होकर दानव के साक्षात प्रहार के सामने सीना तानकर खड़ा हो गया।

अपराजित धनुर्धर

निर्दोष कन्या को छोड़ दे दानव, अन्यथा मेरे अग्नि-बाणों से भस्म होने को तैयार हो जा!

Panel 15
•
A volley of blazing celestial arrows piercing the demon as he collapses in blood

धनुर्धर ने शब्दवेधी बाणों की ऐसी भयंकर वर्षा की कि दानव की छाती छलनी हो गई और वह रक्त से लथपथ होकर गिर पड़ा।

Panel 16
•
Freeing Somaprabha from chains inside the mountain cave in warm torchlight
सोमप्रभा
आप तीनों के अद्भुत पुरुषार्थ ने मुझे काल के मुख से बचा लिया!

तीनों वीरों ने गुफा में प्रवेश कर सोमप्रभा के बंधन काटे। सोमप्रभा ने कृतज्ञता और राहत से अपने रक्षकों को देखा।

सोमप्रभा

आप तीनों के अद्भुत पुरुषार्थ ने मुझे काल के मुख से बचा लिया!

Panel 17
•
The triumphant flight back to Pataliputra in the aerial chariot with Somaprabha smiling in relief

पुनः विमान में सवार होकर वे सभी सकुशल पाटलीपुत्र लौटे, जहाँ नगरवासियों ने उनका भव्य स्वागत किया।

Panel 18
•
दृश्य 6

राजसभा का धर्मसंकट और महाराज विक्रम का अमर निर्णय

The Royal Dispute & Vikram
Grand interior royal court of Pataliputra where Hariswami embraces his daughter in tears
हरिस्वामी
मेरी पुत्री सकुशल लौट आई! किंतु अब इन तीनों गुणी वरों में से इसका विवाह किससे किया जाए?!

पिता हरिस्वामी ने अपनी कन्या को गले लगाकर ईश्वर को धन्यवाद दिया। पूरी राजसभा ने तीनों वीरों की जयकार की।

हरिस्वामी

मेरी पुत्री सकुशल लौट आई! किंतु अब इन तीनों गुणी वरों में से इसका विवाह किससे किया जाए?!

Panel 19
•
The three suitors passionately presenting their conflicting claims before the royal court
तीनों वर
ज्ञानी: 'मेरी दृष्टि बिना खोज असंभव थी!' • शिल्पी: 'मेरा विमान न होता तो कोई पहुँच न पाता!' • धनुर्धर: 'मैंने प्राणों की बाजी लगाकर शत्रु का वध किया!'

राजसभा में धर्मसंकट उत्पन्न हो गया, क्योंकि तीनों वरों का योगदान अमूल्य और अनिवार्य था।

तीनों वर

ज्ञानी: 'मेरी दृष्टि बिना खोज असंभव थी!' • शिल्पी: 'मेरा विमान न होता तो कोई पहुँच न पाता!' • धनुर्धर: 'मैंने प्राणों की बाजी लगाकर शत्रु का वध किया!'

Panel 20
•
In the dark midnight jungle Betal whisper-hissing directly into Vikramaditya's ear
Betal
राजन! बताओ, सोमप्रभा का वास्तविक पति कौन है? यदि जानकर भी मौन रहे, तो तुम्हारा शीश खंड-खंड हो जाएगा!

बेताल ने कथा रोककर मौन चल रहे महाराज विक्रमादित्य से प्रश्न किया।

Betal

राजन! बताओ, सोमप्रभा का वास्तविक पति कौन है? यदि जानकर भी मौन रहे, तो तुम्हारा शीश खंड-खंड हो जाएगा!

Panel 21
•
King Vikramaditya delivering his verdict declaring the warrior archer the rightful husband
King Vikramaditya
ज्ञानी और विमान-शिल्पी केवल साधन और सहायक थे। किंतु जिसने प्रत्यक्ष रणभूमि में खड़े होकर अपने प्राणों की बाजी लगाई और दानव का वध किया, वही वास्तविक शूरवीर और पति होने का अधिकारी है! अतः सोमप्रभा धनुर्धर की हुई!

धर्म और न्याय से बंधे महाराज विक्रमादित्य ने अपने मौन को तोड़ते हुए निर्भीक होकर धर्मसम्मत उत्तर दिया।

King Vikramaditya

ज्ञानी और विमान-शिल्पी केवल साधन और सहायक थे। किंतु जिसने प्रत्यक्ष रणभूमि में खड़े होकर अपने प्राणों की बाजी लगाई और दानव का वध किया, वही वास्तविक शूरवीर और पति होने का अधिकारी है! अतः सोमप्रभा धनुर्धर की हुई!

Panel 22
•
Betal laughing wickedly as he dissolves into smoke soaring back to the Shinshapa tree
Betal
अचूक निर्णय राजन! किंतु तुम्हारा मौन टूट गया—और मैं चला पुनः वृक्ष पर! खे-खे-खे!

न्याय सटीक था, किंतु राजा के बोलते ही मौन का प्रण टूट गया! बेताल ठहाका लगाते हुए पुनः वृक्ष की ओर उड़ गया।

Betal

अचूक निर्णय राजन! किंतु तुम्हारा मौन टूट गया—और मैं चला पुनः वृक्ष पर! खे-खे-खे!

Panel 23
•
King Vikramaditya standing resolute in the dark moonless Amavasya jungle turning back to retrieve Betal
King Vikramaditya
तुम जितनी बार भागोगे बेताल, मैं उतनी बार आऊँगा—क्षत्रिय अपना वचन कभी नहीं छोड़ता!

अमावस की घोर अंधियारी रात में, बीहड़ और भयानक श्मशान वन में महाराज विक्रमादित्य बिना थके, दृढ़ संकल्प के साथ पुनः बेताल को पकड़ने चल पड़े।

King Vikramaditya

तुम जितनी बार भागोगे बेताल, मैं उतनी बार आऊँगा—क्षत्रिय अपना वचन कभी नहीं छोड़ता!

Panel 24
•