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द्वितीय बेताल: तीन प्रेमी, तीन मार्ग और संजीवनी विद्या

बेताल पच्चीसी (सोमदेव भट्ट कृत)• katha

द्वितीय बेताल: तीन प्रेमी, तीन मार्ग और संजीवनी विद्या

The Three Suitors & The Sanjeevani Resurrection

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दृश्य 1

दूसरी चढ़ाई और ब्रह्मस्थल की रूपवती कन्या

The Second Retrieval & The Maiden of Brahmashthala
King Vikramaditya climbing down the gnarled Shinshapa tree for the second time carrying Betal
Betal
राजन! प्रेम की पराकाष्ठा और त्याग का रहस्य इस कथा में छिपा है!

राजा विक्रमादित्य ने पुनः उसी भयानक श्मशान में जाकर शीशम के वृक्ष से बेताल के शव को उतारा और कंधे पर लादकर चल पड़े। बेताल ने कहा: 'राजन! तुम्हारा यह अद्वितीय धैर्य देखकर मैं अत्यंत प्रसन्न हूँ। लो, मार्ग का श्रम मिटाने के लिए यह रोचक कथा सुनो!'

Betal

राजन! प्रेम की पराकाष्ठा और त्याग का रहस्य इस कथा में छिपा है!

Panel 1
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Pious scholar Keshava teaching Vedic scriptures in his beautiful courtyard in Brahmashthala

यमुना-तट पर स्थित ब्रह्मस्थल नगर के अग्निहोत्री ब्राह्मण केशव की 'मंदारवती' नाम की एक कन्या थी, जो रूप और लावण्य में साक्षात् अप्सरा के समान अनुपम थी।

Panel 2
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Portrait of Mandaravati carrying a brass puja thali with fresh lotus flowers
मंदारवती
विद्या और शील ही कन्या का वास्तविक आभूषण हैं।

मंदारवती का रूप और सदाचार ऐसा था कि जो भी उसे देखता, मुग्ध हो जाता। उसके पिता उसके योग्य वर की खोज में चिंतित रहते थे।

मंदारवती

विद्या और शील ही कन्या का वास्तविक आभूषण हैं।

Panel 3
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दृश्य 2

तीन गुणी वर और पिता का धर्मसंकट

The Three Suitors & The Father
Three handsome noble Brahmin scholars arriving simultaneously at Keshava's home
तीनों वर
हे विप्रवर! हम तीनों में से जो भी आपको योग्य लगे, उसे अपनी कन्या का पाणिग्रहण करने की अनुमति दीजिए!

उसके विवाह योग्य होने पर तीन रूपवान, विद्वान और शूरवीर ब्राह्मण युवक—चंद्रकांत, सोमदत्त और हरिस्वामी—एक साथ विवाह का प्रस्ताव लेकर केशव के पास पहुंचे।

तीनों वर

हे विप्रवर! हम तीनों में से जो भी आपको योग्य लगे, उसे अपनी कन्या का पाणिग्रहण करने की अनुमति दीजिए!

Panel 4
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Chandrakanta in pure white linen hands folded with heartfelt devotion

प्रथम वर 'चंद्रकांत' परम निष्ठावान और मूक प्रेमी था, जिसका हृदय केवल मंदारवती के सुख के लिए समर्पित था।

Panel 5
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Somadatta holding sacred rudraksha beads and holy scriptures

द्वितीय वर 'सोमदत्त' वेदों का प्रकांड ज्ञाता और पवित्र तीर्थ-व्रती था, जो धर्म और तप में लीन रहता था।

Panel 6
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Hariswami with determined fearless eyes holding a seeker's walking staff

तृतीय वर 'हरिस्वामी' निर्भीक, साहसी और गुप्त विद्याओं का अन्वेषक था, जो असंभव को संभव करने का सामर्थ्य रखता था।

Panel 7
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The father Keshava in deep dilemma unable to choose between the three equal suitors
केशव (पिता)
तीनों ही अद्वितीय गुणवान हैं... किसे चुनूं और किसे मना करूं? यह कैसा विचित्र धर्मसंकट है!

पिता केशव घोर धर्मसंकट में पड़ गए—तीनों युवक रूप, कुल, विद्या और शील में एक समान थे! किसी एक को कन्या देने पर शेष दो के प्राण त्यागने का भय था।

केशव (पिता)

तीनों ही अद्वितीय गुणवान हैं... किसे चुनूं और किसे मना करूं? यह कैसा विचित्र धर्मसंकट है!

Panel 8
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दृश्य 3

काल-सर्प का दंश और देह-संरक्षण का संकल्प

The Fatal Cobra Strike & The Vow of Preservation
A deadly black cobra striking Mandaravati's ankle in the twilight garden

किंतु निर्णय होने से पूर्व ही एक दिन गोधूलि वेला में बगिया में फूल चुनते समय एक विषैले काले नाग ने मंदारवती के पैर में डस लिया!

Panel 9
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Mandaravati collapsing unconscious onto the grass as maidens scream in terror

विष का प्रभाव इतनी तीव्र गति से फैला कि मंदारवती तुरंत अचेत होकर गिर पड़ी और उसके प्राण-पखेरू उड़ गए!

Panel 10
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Tantric healers and physicians shaking their heads in despair declaring Mandaravati dead

राजवैद्य और तांत्रिक विष-चिकित्सक दौड़े आए, किंतु समस्त मन्त्र और औषधियां निष्फल रहीं। परिजनों में हाहाकार मच गया।

Panel 11
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The three suitors weeping over Mandaravati's body refusing to burn her on a pyre
तीनों प्रेमी
हम अपनी प्राणवल्लभा को भस्म नहीं होने देंगे! हम तीनों अलग-अलग मार्गों से इसकी रक्षा करेंगे!

तीनों प्रेमी युवक वहां पहुंचे। उन्होंने मंदारवती की देह को अग्नि में भस्म करने से मना कर दिया और सुगंधित तेलों व फूलों से उसके शरीर को सुरक्षित रखने का संकल्प लिया!

तीनों प्रेमी

हम अपनी प्राणवल्लभा को भस्म नहीं होने देंगे! हम तीनों अलग-अलग मार्गों से इसकी रक्षा करेंगे!

Panel 12
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दृश्य 4

प्रेम के तीन मार्ग: साधना, तीर्थ और विद्या-खोज

The Three Paths of Devotion
Chandrakanta keeping unbroken day-and-night vigil beside Mandaravati's preserved body
चंद्रकांत
जब तक मेरे शरीर में प्राण हैं, मैं इस देह की रक्षा अपनी आँखों की पलकों की तरह करूँगा।

प्रथम प्रेमी 'चंद्रकांत' ने वहीं एक कुटिया बनाकर दिन-रात मंदारवती के शव के पास पहरा दिया, उसे ताजे फूलों से ढका और उसकी सेवा में लीन रहा।

चंद्रकांत

जब तक मेरे शरीर में प्राण हैं, मैं इस देह की रक्षा अपनी आँखों की पलकों की तरह करूँगा।

Panel 13
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Somadatta walking along the holy Ganga with brass kamandalu performing austerities

द्वितीय प्रेमी 'सोमदत्त' संन्यासी बनकर गंगा के समस्त पवित्र तीर्थों की यात्रा पर निकल पड़ा, ताकि मंदारवती की आत्मा की शांति और मुक्ति हेतु पुण्य अर्जित कर सके।

Panel 14
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Hariswami climbing snow-clad Himalayan mountain passes seeking immortal sages

तृतीय प्रेमी 'हरिस्वामी' मृत-संजीवनी विद्या की खोज में हिमालय के दुर्गम हिमाच्छादित शिखरों और सिद्ध गुफाओं की ओर निकल पड़ा।

Panel 15
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Hariswami taking shelter in a mystical cave with a venerable hermit sage

महीनों की कठिन तपस्या के बाद वह एक सिद्ध महायोगी की गुफा में पहुँचा और उनकी सेवा में लीन हो गया।

Panel 16
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दृश्य 5

संजीवनी विद्या की प्राप्ति और घर वापसी

The Sanjeevani Secret & The Race Against Time
The sage reading a sacred manuscript and sprinkling water resurrecting a dead child in golden light

एक दिन एक विलाप करती माता अपने मृत बालक को लेकर आई। योगी ने एक प्राचीन ताड़पत्र से संजीवनी मन्त्र पढ़कर जल छिड़का, और बालक जीवित उठ बैठा!

Panel 17
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Hariswami reverently memorizing and copying the sacred Sanjeevani mantra
हरिस्वामी
मेरी तपस्या सफल हुई! अब मंदारवती पुनः जीवित होगी!

हरिस्वामी ने उस गुप्त संजीवनी मन्त्र को कंठस्थ कर लिया और उस पावन ग्रन्थ की प्रतिलिपि बनाकर अपने हृदय से लगा ली!

हरिस्वामी

मेरी तपस्या सफल हुई! अब मंदारवती पुनः जीवित होगी!

Panel 18
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Hariswami running tirelessly across mountain trails and river plains back to Brahmashthala

दिन-रात दौड़े हुए हरिस्वामी पहाड़ों और नदियों को पार कर पुनः ब्रह्मस्थल नगरी पहुँचा।

Panel 19
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The emotional reunion of the three suitors at the floral bier

कुटिया में पहुँचकर उसने देखा कि चंद्रकांत अब भी निष्ठा से पहरा दे रहा था और सोमदत्त भी तीर्थों का पवित्र गंगाजल लेकर ठीक उसी समय लौटा था!

Panel 20
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दृश्य 6

पुनर्जीवन का चमत्कार और विवाह का विवाद

The Golden Resurrection & The Great Dispute
Hariswami chanting the Sanjeevani mantra while Somadatta sprinkles holy Ganga water
हरिस्वामी
ॐ ह्रीं संजीवनी प्राणाया स्वाहा!

हरिस्वामी ने संजीवनी मन्त्र का उच्च स्वर में पाठ किया और सोमदत्त ने उस पर पवित्र गंगाजल छिड़का!

हरिस्वामी

ॐ ह्रीं संजीवनी प्राणाया स्वाहा!

Panel 21
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Divine golden radiance enveloping Mandaravati as she awakens alive and whole

चमत्कार हुआ! दिव्य स्वर्णिम प्रकाश के साथ मंदारवती के अंगों में रक्त दौड़ा, उसके गालों पर लाली लौटी और वह ऐसे उठ बैठी जैसे सुखद नींद से जागी हो!

Panel 22
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Mandaravati smiling in wonder while all three suitors passionately claim her hand

मंदारवती को जीवित देखकर नगर में जयजयकार हुई। किंतु तुरंत ही तीनों युवकों में यह भीषण विवाद छिड़ गया कि मंदारवती का विवाह किससे होगा!

Panel 23
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The three suitors arguing their claims: life-giver, purifier, and faithful protector

हरिस्वामी बोला: 'मेरे मन्त्र ने प्राण दिए!', सोमदत्त बोला: 'मेरे गंगाजल ने पवित्र किया!', चंद्रकांत बोला: 'यदि मैं इसके शरीर की रक्षा न करता, तो तुम मन्त्र किस पर पढ़ते?!'

Panel 24
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दृश्य 7

बेताल का यक्ष-प्रश्न और महाराज विक्रम का अमर निर्णय

The Riddle of Kinship & Vikram
In the midnight forest Betal whisper-challenging King Vikramaditya
Betal
बताओ विक्रमादित्य! इन तीनों में से मंदारवती का वास्तविक पति कौन हुआ? उत्तर जानते हुए मौन रहे तो तुम्हारा मस्तक फट जाएगा!

श्मशान के अंधकार में बेताल ने कथा रोककर राजा विक्रमादित्य से प्रश्न किया।

Betal

बताओ विक्रमादित्य! इन तीनों में से मंदारवती का वास्तविक पति कौन हुआ? उत्तर जानते हुए मौन रहे तो तुम्हारा मस्तक फट जाएगा!

Panel 25
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Heroic close-up of Emperor Vikramaditya delivering his master verdict on Father, Son, and Husband
King Vikramaditya
जीवन देने वाला पिता है, संस्कार करने वाला पुत्र है, किंतु अनन्य प्रेम से देह की रक्षा करने वाला ही सच्चा पति है!

महाराज विक्रमादित्य ने उत्तर दिया: 'जिसने मन्त्र से नया जीवन दिया, वह जीवनदाता होने के कारण उसका 'पिता' हुआ। जिसने तीर्थों का जल छिड़ककर संस्कार किया, वह 'पुत्र' के समान हुआ। किंतु जिसने उसके मृत शरीर को छोड़े बिना, दिन-रात कुटिया में रहकर अनन्य प्रेम से उसकी देह की रक्षा की, वही उसका सच्चा प्रेमी और धर्मसम्मत 'पति' हुआ! अतः मंदारवती चंद्रकांत की पत्नी हुई!'

King Vikramaditya

जीवन देने वाला पिता है, संस्कार करने वाला पुत्र है, किंतु अनन्य प्रेम से देह की रक्षा करने वाला ही सच्चा पति है!

Panel 26
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Betal laughing triumphantly as his corpse-form dissolves into smoke and flees back to the tree
Betal
अचूक न्याय, राजन! चंद्रकांत ही सच्चा पति है! किंतु तुम्हारा मौन टूटा—और मैं चला! खे-खे-खे!

निर्णय सुनते ही राजा का मौन पुनः भंग हो गया! बेताल ठहाका लगाते हुए धुएँ की भांति उड़कर पुनः शीशम के पेड़ पर जा लटका।

Betal

अचूक न्याय, राजन! चंद्रकांत ही सच्चा पति है! किंतु तुम्हारा मौन टूटा—और मैं चला! खे-खे-खे!

Panel 27
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King Vikramaditya standing resolute in the dark moonless Amavasya jungle turning back to retrieve Betal
King Vikramaditya
तुम जितनी बार भागोगे बेताल, मैं उतनी बार आऊँगा—क्षत्रिय अपना वचन कभी नहीं छोड़ता!

अमावस की घोर अंधियारी रात में, बीहड़ और भयानक श्मशान वन में महाराज विक्रमादित्य बिना थके, दृढ़ संकल्प के साथ पुनः बेताल को पकड़ने चल पड़े।

King Vikramaditya

तुम जितनी बार भागोगे बेताल, मैं उतनी बार आऊँगा—क्षत्रिय अपना वचन कभी नहीं छोड़ता!

Panel 28
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