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प्रारंभ: भिक्षु का गुप्त रत्न, तांत्रिक षड्यंत्र और महाश्मशान का वचन

बेताल पच्चीसी (सोमदेव भट्ट कृत)• katha

प्रारंभ: भिक्षु का गुप्त रत्न, तांत्रिक षड्यंत्र और महाश्मशान का वचन

The Origin: The Monk's Secret Ruby & The Midnight Oath

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दृश्य 1

दस वर्ष का रहस्य और भिक्षु की भेंट

The Ten-Year Mystery of the Daily Fruit
Grand royal court of ancient Ujjayini where Emperor Vikramaditya is seated on his golden lion throne
King Vikramaditya
उज्जयिनी के राजदरबार में प्रजा के प्रत्येक दुख का निवारण धर्मपूर्वक किया जाएगा।

प्राचीन काल में उज्जयिनी नगरी में चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य राज्य करते थे, जिनका यश, सत्यनिष्ठा और न्याय तीनों लोकों में प्रसिद्ध था।

King Vikramaditya

उज्जयिनी के राजदरबार में प्रजा के प्रत्येक दुख का निवारण धर्मपूर्वक किया जाएगा।

Panel 1
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Bhikshu Shantisheel in saffron robes silently presenting a fresh fruit to King Vikramaditya
Bhikshu Shantisheel
चक्रवर्ती सम्राट का यश युगों-युगों तक अमर रहे।

प्रतिदिन प्रातःकाल 'शांतिशील' नाम का एक संन्यासी राजसभा में आता, मौन भाव से राजा को एक फल भेंट करता और बिना कुछ मांगे चुपचाप लौट जाता।

Bhikshu Shantisheel

चक्रवर्ती सम्राट का यश युगों-युगों तक अमर रहे।

Panel 2
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King Vikramaditya handing the fruit to the royal treasurer Malavya
King Vikramaditya
कोषाध्यक्ष! इस साधु की भेंट को आदरपूर्वक भंडारगृह में सुरक्षित रख दो।

महाराज विक्रम उस फल को एक साधारण साधु की भेंट समझकर अपने कोषाध्यक्ष मालव्य को सौंप देते, जो उसे भूमिगत कोशागार में रखवा देता।

King Vikramaditya

कोषाध्यक्ष! इस साधु की भेंट को आदरपूर्वक भंडारगृह में सुरक्षित रख दो।

Panel 3
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Montage of ten years passing over the sandstone spires of Ujjayini

इस प्रकार दिन, महीने और ऋतुएं बीतती गईं। पूरे दस वर्ष (3,650 दिन) तक वह संन्यासी बिना एक दिन चूके नित्य राजदरबार में फल भेंट करता रहा!

Panel 4
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दृश्य 2

वानर का कौतुक और चमत्कारी माणिक्य

The Monkey
Sunlit royal balcony where a pet monkey breaks loose from a guard's leash

एक दिन महाराज विक्रम प्रासाद के झरोखे पर खड़े संन्यासी की भेंट स्वीकार कर रहे थे। तभी एक दरबारी का पालतू वानर रस्सी छुड़ाकर छलांग लगा गया।

Panel 5
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The monkey snatching the fresh fruit from King Vikramaditya's hand

वानर ने झपटकर राजा के हाथ से फल छीन लिया और मुंडेर पर बैठकर उसे अपने दांतों से फोड़ डाला!

Panel 6
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The cracked fruit revealing a dazzling fiery red ruby glowing with blinding crimson light
King Vikramaditya
यह क्या विस्मय है! एक साधारण फल के भीतर ऐसा अमूल्य दिव्य रत्न?!

फल के फटते ही उसमें से एक अत्यंत दुर्लभ, देदीप्यमान रक्त-लाल माणिक्य (रत्न) निकलकर फर्श पर गिरा, जिसकी दिव्य चमक से पूरा प्रासाद जगमगा उठा!

King Vikramaditya

यह क्या विस्मय है! एक साधारण फल के भीतर ऐसा अमूल्य दिव्य रत्न?!

Panel 7
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King Vikram and courtiers staring in shock and wonder at the brilliant gem

दरबार के जोहरी ने जब उस माणिक्य की परीक्षा की, तो उसने हाथ जोड़कर कहा: 'महाराज! यह तीनों लोकों में दुर्लभ ऐसा महामणिरत्न है जिसका मूल्य संसार का सारा कोष भी नहीं चुका सकता!'

Panel 8
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दृश्य 3

भूमिगत तहखाना और मणियों का पर्वत

The Subterranean Vault & The Mountain of Gems
King Vikramaditya urgently questioning the royal treasurer about past fruits
Royal Treasurer
महाराज! मैंने उन्हें बिना खोले तहखाने के गड्ढे में डाल दिया था। चलिए, चलकर देखते हैं!

राजा ने तुरंत कोषाध्यक्ष से पूछा: 'मालव्य! पिछले दस वर्षों में उस संन्यासी द्वारा दिए गए सारे फल कहाँ हैं?'

Royal Treasurer

महाराज! मैंने उन्हें बिना खोले तहखाने के गड्ढे में डाल दिया था। चलिए, चलकर देखते हैं!

Panel 9
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King Vikram and the treasurer descending torchlit stone stairs into the dark vaults

महाराज और कोषाध्यक्ष मशालें लेकर राजमहल के सबसे गहरे भूमिगत कोशागार की सीढ़ियाँ उतरे।

Panel 10
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The dark cellar containing a glittering mountain of 3,650 glowing rubies from decayed fruits

तहखाना खोलते ही सबकी आँखें चौंधिया गईं! 3,650 फलों का गूदा सड़कर समाप्त हो चुका था और वहां हज़ारों दिव्य माणिक्यों का जगमगाता हुआ विशाल पर्वत खड़ा था!

Panel 11
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King Vikramaditya generously gifting the entire mountain of rubies to the honest treasurer
King Vikramaditya
मालव्य! तुम्हारी सत्यनिष्ठा अद्वितीय है। यह सारा रत्न-भंडार तुम्हारा हुआ!

कोषाध्यक्ष की निष्कलंक ईमानदारी से प्रसन्न होकर, महाराज विक्रमादित्य ने वह समूचा रत्नों का पर्वत उसी कोषाध्यक्ष को उपहार में दे दिया!

King Vikramaditya

मालव्य! तुम्हारी सत्यनिष्ठा अद्वितीय है। यह सारा रत्न-भंडार तुम्हारा हुआ!

Panel 12
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दृश्य 4

तांत्रिक का गुप्त रहस्य और महाश्मशान का वचन

The Monk
King Vikramaditya catching the monk's arm in court refusing the fruit until the truth is told
King Vikramaditya
संन्यासी! अपना वास्तविक प्रयोजन प्रकट करो!

अगले दिन जब संन्यासी पुनः फल लेकर आया, तो विक्रम ने उसका हाथ पकड़ लिया: 'जब तक आप यह नहीं बताएंगे कि एक राजा को ऐसा अपार धन क्यों दे रहे हैं, मैं यह फल स्वीकार नहीं करूँगा!'

King Vikramaditya

संन्यासी! अपना वास्तविक प्रयोजन प्रकट करो!

Panel 13
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The monk kneeling before King Vikram in a secluded corridor with feigned humility

संन्यासी राजा को एकांत दालान में ले गया और हाथ जोड़कर बोला: 'राजन! मैं शांतिशील नाम का तांत्रिक साधक हूँ। मुझे एक महान सिद्धि प्राप्त करनी है।'

Panel 14
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The monk describing his midnight tantric sacrifice in the cremation ground to gain celestial dominion
Bhikshu Shantisheel
राजन! उस रात्रि यदि आप मेरी वेदी के रक्षक बनेंगे, तो मेरी सिद्धि पूर्ण होगी!

'आने वाली भाद्रपद कृष्ण चतुर्दशी (अमावस) की घोर रात्रि में मैं महाश्मशान में एक महान तांत्रिक अनुष्ठान कर रहा हूँ। उस सिद्धि की रक्षा के लिए मुझे संसार के सबसे निर्भीक चक्रवर्ती वीर की सहायता चाहिए!'

Bhikshu Shantisheel

राजन! उस रात्रि यदि आप मेरी वेदी के रक्षक बनेंगे, तो मेरी सिद्धि पूर्ण होगी!

Panel 15
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King Vikramaditya solemnly pledging his royal word to assist the monk without fear
King Vikramaditya
जाओ संन्यासी! चक्रवर्ती विक्रमादित्य का वचन है—अमावस की मध्यरात्रि मैं अकेला तुम्हारी वेदी पर उपस्थित रहूँगा!

शरणागत और याचक की सहायता करना क्षत्रिय का परम धर्म मानकर, महाराज विक्रमादित्य ने अमावस की आधी रात श्मशान पहुँचने का पवित्र वचन दे दिया!

King Vikramaditya

जाओ संन्यासी! चक्रवर्ती विक्रमादित्य का वचन है—अमावस की मध्यरात्रि मैं अकेला तुम्हारी वेदी पर उपस्थित रहूँगा!

Panel 16
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दृश्य 5

महाश्मशान का भयानक दृश्य और तांत्रिक की आज्ञा

The Horrors of Mahashmashana & The Sorcerer
Chilling wide shot of Mahashmashana Ujjayini under pitch-black moonless sky with skulls and blue pyres

अमावस की घोर अंधियारी रात आई। मूसलाधार वर्षा, चमकती बिजली, सियारों की डरावनी चीखें और जलती चिताओं की नीली लपटों से महाश्मशान काँप रहा था।

Panel 17
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King Vikramaditya arriving alone in warrior armor with drawn talwar sword

महाराज विक्रमादित्य काले वस्त्र धारण कर, नंगी तलवार हाथ में लिए, बिना किसी भय के अकेले उस पिशाचों से भरे श्मशान में जा पहुँचे।

Panel 18
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Shantisheel seated inside a glowing vermilion tantric mandala surrounded by human skulls
Bhikshu Shantisheel
अहा चक्रवर्ती! आपने अपना वचन निभाया! अब केवल एक अंतिम कार्य शेष है!

श्मशान के मध्य, शांतिशील एक नरमुंडों से घिरे रक्त-मंडप में बैठा आहुतियां दे रहा था। राजा को देखकर वह अत्यंत प्रसन्न हुआ।

Bhikshu Shantisheel

अहा चक्रवर्ती! आपने अपना वचन निभाया! अब केवल एक अंतिम कार्य शेष है!

Panel 19
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The sorcerer pointing south into the pitch-black forest commanding Vikram to retrieve the corpse

तांत्रिक ने दक्षिण दिशा की ओर संकेत किया: 'यहाँ से दो कोस दूर एक विशाल शीशम का वृक्ष है, जिस पर एक शव उल्टा लटक रहा है। उस शव को उतारकर यहाँ मेरी वेदी पर ले आओ!'

Panel 20
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दृश्य 6

शीशम का वृक्ष और बेताल का बंधन

The Gnarled Shinshapa Tree & The Capture of Betal
King Vikramaditya marching fearlessly through thick graveyard mist toward the southern woods

विक्रम बिना झिझक के घने जंगलों, काँटों और भूत-पिशाचों के भयानक अट्टहासों को चीरते हुए दक्षिण दिशा की ओर बढ़ चले।

Panel 21
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Eerie wide shot of the massive ancient Shinshapa tree with the corpse hanging upside down

सामने शीशम का विशाल प्राचीन वृक्ष दिखा। उसकी एक शाखा से एक भयानक शव रस्सी से उल्टा लटक रहा था, जिसमें एक चालाक बेताल का वास था!

Panel 22
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King Vikram climbing the tree and severing the hanging rope with his sharp sword

विक्रम ने फुर्ती से वृक्ष पर चढ़कर तलवार के एक ही वार से रस्सी काट दी। शव धड़ाम से ज़मीन पर गिरा और कराहने लगा।

Panel 23
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The corpse laughing with a shrill demonic cackle and climbing back up the tree
Betal
खे-खे-खे! मुझे पकड़ना इतना सरल नहीं है, राजन!

ज्योंही राजा ने उसे उठाना चाहा, शव ज़ोर-ज़ोर से ठहाके मार कर हँसा और बिजली की गति से पुनः पेड़ की शाखा पर जा लटका!

Betal

खे-खे-खे! मुझे पकड़ना इतना सरल नहीं है, राजन!

Panel 24
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दृश्य 7

अडिग सम्राट और पच्चीस पहेलियों का चक्रव्यूह

The Unyielding Emperor & The Twenty-Five Riddles Trap
King Vikram climbing the tree again gripping the corpse firmly by its hair
King Vikramaditya
चाहे तुम सौ बार भागो, मैं तुम्हें तांत्रिक की वेदी तक ले जाकर ही रहूँगा!

धैर्य के धनी विक्रमादित्य पुनः वृक्ष पर चढ़े, बेताल के केश कसकर पकड़े और उसे खींचकर नीचे ज़मीन पर ले आए।

King Vikramaditya

चाहे तुम सौ बार भागो, मैं तुम्हें तांत्रिक की वेदी तक ले जाकर ही रहूँगा!

Panel 25
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King Vikramaditya strapping the silent corpse across his broad back beginning the silent trek

राजा ने शव को अपनी चादर से कसकर अपने कंधे पर लाद लिया और बिना एक शब्द बोले शांतिशील की वेदी की ओर कदम बढ़ा दिए।

Panel 26
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Betal whispering the sinister trap into Vikram's ear as they walk through mist
Betal
सुनो राजन! मार्ग का श्रम मिटाने के लिए यह प्रथम पहेली!

शव में प्रविष्ट बेताल ने राजा के कान में फुसफुसाया: 'राजन! मार्ग लंबा है। यदि तुमने मार्ग में एक भी शब्द बोला, तो मैं उड़कर पुनः पेड़ पर चला जाऊँगा; और यदि मेरे पूछे प्रश्न का उत्तर जानते हुए भी तुमने मौन साधा, तो तुम्हारा सिर खंड-खंड हो जाएगा!'

Betal

सुनो राजन! मार्ग का श्रम मिटाने के लिए यह प्रथम पहेली!

Panel 27
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Emperor Vikramaditya standing resolute in the dark moonless Amavasya jungle turning back to retrieve Betal
King Vikramaditya
तुम जितनी बार भागोगे बेताल, मैं उतनी बार आऊँगा—क्षत्रिय अपना वचन कभी नहीं छोड़ता!

अमावस की घोर अंधियारी रात में, बीहड़ और भयानक श्मशान वन में महाराज विक्रमादित्य बिना थके, दृढ़ संकल्प के साथ पुनः बेताल को पकड़ने चल पड़े।

King Vikramaditya

तुम जितनी बार भागोगे बेताल, मैं उतनी बार आऊँगा—क्षत्रिय अपना वचन कभी नहीं छोड़ता!

Panel 28
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