Skip to content

प्रथम बेताल: पद्मावती के चार गुप्त संकेत

बेताल पच्चीसी (सोमदेव भट्ट कृत)• katha

प्रथम बेताल: पद्मावती के चार गुप्त संकेत

The Midnight Oath & The Secret Signs of Padmavati

ऑडियो सुनें•0:00 / --:--
0:00 / --:--
दृश्य 1

कंधे पर शव और प्रथम आख्यान

The Midnight Shmashana & The First Tale
King Vikramaditya carrying the corpse across his shoulder while Betal whispers his tale
Betal
राजन! सुनो, वाराणसी के राजकुमार वज्रमुकुट और मंत्री-पुत्र बुद्धिशरीर की यह अद्भुत प्रेम-गाथा!

अडिग संकल्प के साथ महाराज विक्रमादित्य ने शव को कंधे पर लादकर श्मशान में आगे बढ़ना शुरू किया। बेताल ने उनके कान के पास अपना पहला आख्यान आरंभ किया।

Betal

राजन! सुनो, वाराणसी के राजकुमार वज्रमुकुट और मंत्री-पुत्र बुद्धिशरीर की यह अद्भुत प्रेम-गाथा!

Panel 1
•
Prince Vajramukuta in emerald silks and his companion Buddhidhari in navy blue robes
Prince Vajramukuta
मित्र बुद्धिशरीर! तुम्हारी बुद्धि और विद्या के समक्ष संसार का कोई रहस्य नहीं टिक सकता।

वाराणसी के राजा प्रतापदमुकुट के पुत्र वज्रमुकुट और उनके मंत्री के विद्वान पुत्र बुद्धिशरीर में प्रगाढ़ मित्रता थी। दोनों एक-दूसरे के प्राणों के समान थे।

Prince Vajramukuta

मित्र बुद्धिशरीर! तुम्हारी बुद्धि और विद्या के समक्ष संसार का कोई रहस्य नहीं टिक सकता।

Panel 2
•
Prince Vajramukuta and Buddhidhari departing on steeds for a royal hunt into the forest

एक दिन दोनों मित्र घोड़ों पर सवार होकर आखेट (शिकार) के लिए घने प्राचीन वन की ओर निकल पड़े।

Panel 3
•
दृश्य 2

कमल-सरोवर और पद्मावती के चार मूक संकेत

The Enchanted Lotus Lake & The Four Silent Signs
Forest clearing opening up to a hidden crystal-clear lake blossoming with pink lotuses

घने वन के मध्य उन्हें एक अत्यंत मनोहारी सरोवर दिखाई दिया, जिसका जल अमृत के समान स्वच्छ था और जो सहस्त्रों खिले हुए कमलों से महक रहा था।

Panel 4
•
Princess Padmavati of Kalinga stepping gracefully into the water with her handmaidens
Prince Vajramukuta
यह स्वर्ग की अप्सरा है या साक्षात् भगवती रति?! मेरा हृदय इसके चरणों में समर्पित हो गया!

सरोवर में सखियों के साथ जल-क्रीड़ा कर रही एक अनुपम सुंदरी राजकुमारी पर राजकुमार की दृष्टि पड़ी, जो साक्षात् लक्ष्मी के समान दमक रही थी।

Prince Vajramukuta

यह स्वर्ग की अप्सरा है या साक्षात् भगवती रति?! मेरा हृदय इसके चरणों में समर्पित हो गया!

Panel 5
•
Prince Vajramukuta gazing from behind flowering Ashoka trees overwhelmed with love

अशोक वृक्ष की ओट से राजकुमार मुग्ध होकर उसे देखता रहा। राजकुमारी ने भी उस तेजस्वी युवक को देख लिया।

Panel 6
•
Princess Padmavati smiling with subtle mischief noticing the prince

राजकुमारी ने बिना एक शब्द बोले, अपनी आँखों में चुलबुली मुस्कान भरकर राजकुमार की ओर चार रहस्यमयी संकेत किए।

Panel 7
•
1st Gesture: Princess Padmavati gracefully tucking a pink lotus behind her ear

प्रथम संकेत: उसने सरोवर से एक कमल तोड़ा और उसे अपने कान पर खोंस लिया।

Panel 8
•
2nd Gesture: Princess Padmavati scratching her ivory tooth pendant with a radiant smile

द्वितीय संकेत: उसने अपने गले के हाथी-दांत के लॉकेट को दांतों से छुआ और अपनी उंगलियों से खरोंचा।

Panel 9
•
3rd Gesture: Princess Padmavati placing the lotus blossom delicately upon her head

तृतीय संकेत: उसने उस कमल को अपने मस्तक पर रख लिया।

Panel 10
•
4th Gesture: Princess Padmavati pressing her delicate palm firmly against her heart

चतुर्थ संकेत: उसने अपनी कोमल हथेली को अपने हृदय पर रखा और सखियों के साथ रथ में बैठकर वन से ओझल हो गई!

Panel 11
•
दृश्य 3

प्रेम-ज्वर और बुद्धिशरीर का तर्कशास्त्र

The Lovesick Prince & The Master Deduction
Prince Vajramukuta lying lovesick on his royal bed refusing food and water in despair
Prince Vajramukuta
यदि वह मुझे न मिली, तो मैं अपने प्राण त्याग दूँगा!

वाराणसी लौटकर राजकुमार विरह-ज्वर में बिस्तर पर गिर पड़ा। उसने अन्न-जल त्याग दिया, क्योंकि उसे उन गूढ़ संकेतों का अर्थ समझ नहीं आया था।

Prince Vajramukuta

यदि वह मुझे न मिली, तो मैं अपने प्राण त्याग दूँगा!

Panel 12
•
Buddhidhari sitting beside the prince's bed with a calm confident smile

बुद्धिशरीर मुस्कुराया और उसने राजकुमार को ढाढ़स बंधाते हुए कहा: 'धैर्य रखो मित्र! उसने अपने सारे पते तुम्हारे हाथों में सौंप दिए हैं!'

Panel 13
•
Buddhidhari decoding the four gestures with palm-leaf scrolls
Buddhidhari
चलो मित्र कलिंग! तुम्हारी पद्मावती तुम्हारी ही प्रतीक्षा कर रही है!

बुद्धिशरीर ने अर्थ खोला: 1. कान पर कमल (कर्णोत्पल) = वह कलिंग देश के राजा 'कर्णोत्पल' के नगर में रहती है! 2. दांत का संकेत = उसका पिता राजा का प्रमुख दंतवैद्य है! 3. सिर पर कमल = उसका नाम 'पद्मावती' है! 4. हृदय पर हाथ = उसका हृदय तुम्हें समर्पित हो चुका है!

Buddhidhari

चलो मित्र कलिंग! तुम्हारी पद्मावती तुम्हारी ही प्रतीक्षा कर रही है!

Panel 14
•
दृश्य 4

कलिंग-यात्रा और धात्री का संदेश

The Journey to Kalinga & The Old Wet-Nurse
Prince Vajramukuta and Buddhidhari disguised as ordinary travelers riding to Kalinga

दोनों मित्र साधारण व्यापारियों के वेश में घोड़े दौड़ाते हुए कलिंग देश की राजधानी पहुँचे।

Panel 15
•
Buddhidhari and the Prince taking lodging at the cottage of an old woman

बुद्धिशरीर ने बड़ी युक्ति से एक वृद्ध स्त्री के घर में आश्रय लिया, जो संयोग से पद्मावती की बचपन की धात्री (दाई माँ) निकली!

Panel 16
•
The old nurse secretly delivering Prince Vajramukuta's love message to Princess Padmavati

वृद्धा ने महल जाकर पद्मावती को एकांत में राजकुमार का संदेश दिया कि सरोवर वाला वीर युवक तुमसे मिलने आया है।

Panel 17
•
Padmavati slapping the nurse with white sandalwood paste leaving ten white finger marks

पद्मावती ने बनावटी क्रोध दिखाकर श्वेत चंदन में हाथ डुबोए और बुढ़िया के दोनों गालों पर दस उंगलियों के निशान लगाकर उसे डांटकर भगा दिया!

Panel 18
•
Buddhidhari laughing warmly decoding the ten white sandalwood marks

बुढ़िया रोती हुई लौटी, किंतु बुद्धिशरीर ने हँसकर समझाया: 'दस श्वेत उंगलियों का अर्थ है कि शुक्ल पक्ष की दस चांदनी रातें बीतने की प्रतीक्षा करो, ताकि अंधेरी रातों में मिलन हो सके!'

Panel 19
•
The second visit showing three saffron finger marks and the black ink mark on the nurse's back

अगली बार पद्मावती ने तीन पीली केसर की उंगलियों (3 दिन का मासिक एकांत) और अंत में पीठ पर काली स्याही के तीन निशान (रात को दक्षिणी जल-मार्ग से छत पर आना) का संकेत दिया!

Panel 20
•
दृश्य 5

रात्रि-मिलन और तांत्रिक योगी की कूटनीति

The Secret Terrace Union & The Yogi Stratagem
Prince Vajramukuta climbing the stone water conduit reaching the palace terrace

नियत रात्रि को राजकुमार वज्रमुकुट काले वस्त्र पहनकर गुप्त जल-मार्ग की सीढ़ियाँ चढ़कर पद्मावती के प्रासाद की छत पर पहुँच गया।

Panel 21
•
Prince Vajramukuta and Princess Padmavati embracing in pure joy on the moonlit terrace

दोनों प्रेमियों का अलौकिक मिलन हुआ। कई दिनों तक राजकुमार गुप्त रूप से महल में रहा और दोनों ने गांधर्व-भाव से एक-दूसरे को अपना लिया।

Panel 22
•
Buddhidhari planning a master stratagem in the cottage to marry her legally without war

किंतु बुद्धिशरीर ने सोचा: 'यदि राजकुमार कन्या को चुराकर भागा, तो दो राज्यों में भीषण रक्तपात होगा। इसे धर्मपूर्वक और राज-सम्मान के साथ ले जाना होगा।' उसने एक महाकूटनीति रची!

Panel 23
•
Buddhidhari disguised as an Aghori Yogi branding the sleeping princess with a trident mark

राजकुमार ने योजनानुसार रात में पद्मावती का रत्नजड़ित कण्ठहार चुरा लिया और उसके सोते समय त्रिशूल के गर्म चिह्न से उसकी जांघ पर एक गुप्त निशान दाग दिया।

Panel 24
•
दृश्य 6

राजसभा का विचार और वाराणसी में विवाह

The Royal Trial & The Forest Wedding
Buddhidhari in yogi robes presenting the necklace before King Karnotpala

बुद्धिशरीर तांत्रिक योगी का भेष बनाकर राजा कर्णोत्पल के दरबार में पहुँचा और वह कंठहार दिखाकर बोला: 'श्मशान में एक डाकिनी (तांत्रिक स्त्री) आई थी, मैंने त्रिशूल से उसकी जांघ दागकर यह हार छीन लिया!'

Panel 25
•
King Karnotpala verifying the trident mark and angrily banishing Padmavati to the forest

राजा ने अंतःपुर में जांच कराई तो पद्मावती की जांघ पर त्रिशूल का निशान मिला! कुल-कलंक के भय से राजा ने बिना पूरी जांच किए पद्मावती को निर्जन वन में निर्वासित कर दिया!

Panel 26
•
Prince Vajramukuta and Buddhidhari rescuing the weeping Padmavati in the forest

वन में रोती हुई पद्मावती को राजकुमार और बुद्धिशरीर ने ससम्मान अपने रथ में बिठाया और सुरक्षित वाराणसी ले आए।

Panel 27
•
Grand Vedic wedding between Prince Vajramukuta and Princess Padmavati in Varanasi

वाराणसी के राजदरबार में विधि-विधान से दोनों का भव्य विवाह संपन्न हुआ। पूरी नगरी में उत्सव मनाया गया।

Panel 28
•
दृश्य 7

बेताल का यक्ष-प्रश्न और महाराज विक्रम का अमर निर्णय

The Riddle of Sin & Vikram
In the midnight forest Betal whisper-challenging King Vikramaditya
Betal
राजन! धर्म और न्याय के अनुसार बताओ सबसे बड़ा पापी कौन था?

बेताल ने कथा रोककर राजा विक्रमादित्य से पूछा: 'बताओ राजन! इस पूरे प्रपंच में सबसे बड़ा पापी कौन था—छल करने वाला बुद्धिशरीर, कन्या चुराने वाला राजकुमार, या राजा कर्णोत्पल? उत्तर जानते हुए मौन रहे तो तुम्हारा सिर फट जाएगा!'

Betal

राजन! धर्म और न्याय के अनुसार बताओ सबसे बड़ा पापी कौन था?

Panel 29
•
Emperor Vikramaditya standing resolute in the dark moonless Amavasya jungle turning back to retrieve Betal
King Vikramaditya
बिना विचार और न्याय के निर्दोष को दंड देना ही राजा का सबसे बड़ा पाप है!

महाराज विक्रमादित्य ने उत्तर दिया: 'राजा कर्णोत्पल ही सबसे बड़ा पापी था! मंत्री-पुत्र ने अपने स्वामी के लिए कूटनीति की, और राजकुमार ने प्रेम धर्म निभाया। किंतु एक राजा का परम धर्म प्रजा और अपनी संतान की निष्पक्ष जांच करना है—बिना निष्पक्ष विचार किए निर्दोष कन्या को श्मशान की डाकिनी मानकर वन में त्याग देना ही राजधर्म का सबसे घोर पाप था!'

King Vikramaditya

बिना विचार और न्याय के निर्दोष को दंड देना ही राजा का सबसे बड़ा पाप है!

Panel 30
•