प्रथम बेताल: पद्मावती के चार गुप्त संकेत
The Midnight Oath & The Secret Signs of Padmavati
कंधे पर शव और प्रथम आख्यान
The Midnight Shmashana & The First Tale
अडिग संकल्प के साथ महाराज विक्रमादित्य ने शव को कंधे पर लादकर श्मशान में आगे बढ़ना शुरू किया। बेताल ने उनके कान के पास अपना पहला आख्यान आरंभ किया।
राजन! सुनो, वाराणसी के राजकुमार वज्रमुकुट और मंत्री-पुत्र बुद्धिशरीर की यह अद्भुत प्रेम-गाथा!

वाराणसी के राजा प्रतापदमुकुट के पुत्र वज्रमुकुट और उनके मंत्री के विद्वान पुत्र बुद्धिशरीर में प्रगाढ़ मित्रता थी। दोनों एक-दूसरे के प्राणों के समान थे।
मित्र बुद्धिशरीर! तुम्हारी बुद्धि और विद्या के समक्ष संसार का कोई रहस्य नहीं टिक सकता।

एक दिन दोनों मित्र घोड़ों पर सवार होकर आखेट (शिकार) के लिए घने प्राचीन वन की ओर निकल पड़े।
कमल-सरोवर और पद्मावती के चार मूक संकेत
The Enchanted Lotus Lake & The Four Silent Signs
घने वन के मध्य उन्हें एक अत्यंत मनोहारी सरोवर दिखाई दिया, जिसका जल अमृत के समान स्वच्छ था और जो सहस्त्रों खिले हुए कमलों से महक रहा था।

सरोवर में सखियों के साथ जल-क्रीड़ा कर रही एक अनुपम सुंदरी राजकुमारी पर राजकुमार की दृष्टि पड़ी, जो साक्षात् लक्ष्मी के समान दमक रही थी।
यह स्वर्ग की अप्सरा है या साक्षात् भगवती रति?! मेरा हृदय इसके चरणों में समर्पित हो गया!

अशोक वृक्ष की ओट से राजकुमार मुग्ध होकर उसे देखता रहा। राजकुमारी ने भी उस तेजस्वी युवक को देख लिया।

राजकुमारी ने बिना एक शब्द बोले, अपनी आँखों में चुलबुली मुस्कान भरकर राजकुमार की ओर चार रहस्यमयी संकेत किए।

प्रथम संकेत: उसने सरोवर से एक कमल तोड़ा और उसे अपने कान पर खोंस लिया।

द्वितीय संकेत: उसने अपने गले के हाथी-दांत के लॉकेट को दांतों से छुआ और अपनी उंगलियों से खरोंचा।

तृतीय संकेत: उसने उस कमल को अपने मस्तक पर रख लिया।

चतुर्थ संकेत: उसने अपनी कोमल हथेली को अपने हृदय पर रखा और सखियों के साथ रथ में बैठकर वन से ओझल हो गई!
प्रेम-ज्वर और बुद्धिशरीर का तर्कशास्त्र
The Lovesick Prince & The Master Deduction
वाराणसी लौटकर राजकुमार विरह-ज्वर में बिस्तर पर गिर पड़ा। उसने अन्न-जल त्याग दिया, क्योंकि उसे उन गूढ़ संकेतों का अर्थ समझ नहीं आया था।
यदि वह मुझे न मिली, तो मैं अपने प्राण त्याग दूँगा!

बुद्धिशरीर मुस्कुराया और उसने राजकुमार को ढाढ़स बंधाते हुए कहा: 'धैर्य रखो मित्र! उसने अपने सारे पते तुम्हारे हाथों में सौंप दिए हैं!'

बुद्धिशरीर ने अर्थ खोला: 1. कान पर कमल (कर्णोत्पल) = वह कलिंग देश के राजा 'कर्णोत्पल' के नगर में रहती है! 2. दांत का संकेत = उसका पिता राजा का प्रमुख दंतवैद्य है! 3. सिर पर कमल = उसका नाम 'पद्मावती' है! 4. हृदय पर हाथ = उसका हृदय तुम्हें समर्पित हो चुका है!
चलो मित्र कलिंग! तुम्हारी पद्मावती तुम्हारी ही प्रतीक्षा कर रही है!
कलिंग-यात्रा और धात्री का संदेश
The Journey to Kalinga & The Old Wet-Nurse
दोनों मित्र साधारण व्यापारियों के वेश में घोड़े दौड़ाते हुए कलिंग देश की राजधानी पहुँचे।

बुद्धिशरीर ने बड़ी युक्ति से एक वृद्ध स्त्री के घर में आश्रय लिया, जो संयोग से पद्मावती की बचपन की धात्री (दाई माँ) निकली!

वृद्धा ने महल जाकर पद्मावती को एकांत में राजकुमार का संदेश दिया कि सरोवर वाला वीर युवक तुमसे मिलने आया है।

पद्मावती ने बनावटी क्रोध दिखाकर श्वेत चंदन में हाथ डुबोए और बुढ़िया के दोनों गालों पर दस उंगलियों के निशान लगाकर उसे डांटकर भगा दिया!

बुढ़िया रोती हुई लौटी, किंतु बुद्धिशरीर ने हँसकर समझाया: 'दस श्वेत उंगलियों का अर्थ है कि शुक्ल पक्ष की दस चांदनी रातें बीतने की प्रतीक्षा करो, ताकि अंधेरी रातों में मिलन हो सके!'

अगली बार पद्मावती ने तीन पीली केसर की उंगलियों (3 दिन का मासिक एकांत) और अंत में पीठ पर काली स्याही के तीन निशान (रात को दक्षिणी जल-मार्ग से छत पर आना) का संकेत दिया!
रात्रि-मिलन और तांत्रिक योगी की कूटनीति
The Secret Terrace Union & The Yogi Stratagem
नियत रात्रि को राजकुमार वज्रमुकुट काले वस्त्र पहनकर गुप्त जल-मार्ग की सीढ़ियाँ चढ़कर पद्मावती के प्रासाद की छत पर पहुँच गया।

दोनों प्रेमियों का अलौकिक मिलन हुआ। कई दिनों तक राजकुमार गुप्त रूप से महल में रहा और दोनों ने गांधर्व-भाव से एक-दूसरे को अपना लिया।

किंतु बुद्धिशरीर ने सोचा: 'यदि राजकुमार कन्या को चुराकर भागा, तो दो राज्यों में भीषण रक्तपात होगा। इसे धर्मपूर्वक और राज-सम्मान के साथ ले जाना होगा।' उसने एक महाकूटनीति रची!

राजकुमार ने योजनानुसार रात में पद्मावती का रत्नजड़ित कण्ठहार चुरा लिया और उसके सोते समय त्रिशूल के गर्म चिह्न से उसकी जांघ पर एक गुप्त निशान दाग दिया।
राजसभा का विचार और वाराणसी में विवाह
The Royal Trial & The Forest Wedding
बुद्धिशरीर तांत्रिक योगी का भेष बनाकर राजा कर्णोत्पल के दरबार में पहुँचा और वह कंठहार दिखाकर बोला: 'श्मशान में एक डाकिनी (तांत्रिक स्त्री) आई थी, मैंने त्रिशूल से उसकी जांघ दागकर यह हार छीन लिया!'

राजा ने अंतःपुर में जांच कराई तो पद्मावती की जांघ पर त्रिशूल का निशान मिला! कुल-कलंक के भय से राजा ने बिना पूरी जांच किए पद्मावती को निर्जन वन में निर्वासित कर दिया!

वन में रोती हुई पद्मावती को राजकुमार और बुद्धिशरीर ने ससम्मान अपने रथ में बिठाया और सुरक्षित वाराणसी ले आए।

वाराणसी के राजदरबार में विधि-विधान से दोनों का भव्य विवाह संपन्न हुआ। पूरी नगरी में उत्सव मनाया गया।
बेताल का यक्ष-प्रश्न और महाराज विक्रम का अमर निर्णय
The Riddle of Sin & Vikram
बेताल ने कथा रोककर राजा विक्रमादित्य से पूछा: 'बताओ राजन! इस पूरे प्रपंच में सबसे बड़ा पापी कौन था—छल करने वाला बुद्धिशरीर, कन्या चुराने वाला राजकुमार, या राजा कर्णोत्पल? उत्तर जानते हुए मौन रहे तो तुम्हारा सिर फट जाएगा!'
राजन! धर्म और न्याय के अनुसार बताओ सबसे बड़ा पापी कौन था?

महाराज विक्रमादित्य ने उत्तर दिया: 'राजा कर्णोत्पल ही सबसे बड़ा पापी था! मंत्री-पुत्र ने अपने स्वामी के लिए कूटनीति की, और राजकुमार ने प्रेम धर्म निभाया। किंतु एक राजा का परम धर्म प्रजा और अपनी संतान की निष्पक्ष जांच करना है—बिना निष्पक्ष विचार किए निर्दोष कन्या को श्मशान की डाकिनी मानकर वन में त्याग देना ही राजधर्म का सबसे घोर पाप था!'
बिना विचार और न्याय के निर्दोष को दंड देना ही राजा का सबसे बड़ा पाप है!