Skip to content

नवम बेताल: राजकुमारी अनंगरति और चार गुणी कारीगर

बेताल पच्चीसी (सोमदेव भट्ट कृत)• katha

नवम बेताल: राजकुमारी अनंगरति और चार गुणी कारीगर

Princess Anangarati & The Four Craftsmen

ऑडियो सुनें•0:00 / --:--
0:00 / --:--
दृश्य 1

नौवीं चढ़ाई और राजकुमारी का प्रण

The Ninth Retrieval & The Royal Maiden
King Vikramaditya retrieving Betal from Shinshapa tree
Betal
राजन! कला, ज्ञान, शिल्प और क्षात्र-धर्म में किसका अधिकार श्रेष्ठ है, सुनो अवंती की राजकुमारी अनंगरति की यह गाथा!

नौवीं बार महाराज विक्रमादित्य ने श्मशान भूमि में शीशम के वृक्ष से बेताल को उतारा और कंधे पर लादकर चल पड़े। बेताल ने एक नई ज्ञानवर्धक कथा सुनाई।

Betal

राजन! कला, ज्ञान, शिल्प और क्षात्र-धर्म में किसका अधिकार श्रेष्ठ है, सुनो अवंती की राजकुमारी अनंगरति की यह गाथा!

Panel 1
•
Grand palace of Avanti with Princess Anangarati and King Mahasena
राजा महासेन
पुत्री! अब तुम्हारे विवाह की आयु आ गई है। कैसा वर तुम्हें स्वीकार होगा?

अवंती नगरी के राजा महासेन की रूपवती और विदुषी कन्या थी—राजकुमारी अनंगरति। वह राजसी गुणों, तेज और विद्या से संपन्न थी।

राजा महासेन

पुत्री! अब तुम्हारे विवाह की आयु आ गई है। कैसा वर तुम्हें स्वीकार होगा?

Panel 2
•
Princess Anangarati declaring her vow before the royal assembly
राजकुमारी अनंगरति
जो मनुष्य असंभव को अपनी अद्वितीय कला से सिद्ध कर दिखाए, वही मेरा पति होगा!

राजकुमारी ने सभा में प्रतिज्ञा की: 'मैं केवल उसी पुरुष का वरण करूंगी जो अपनी कला या विद्या में पूरे संसार में अद्वितीय और चमत्कारी हो!'

राजकुमारी अनंगरति

जो मनुष्य असंभव को अपनी अद्वितीय कला से सिद्ध कर दिखाए, वही मेरा पति होगा!

Panel 3
•
दृश्य 2

चार गुणी वर और उनकी अलौकिक कलाएं

The Four Prodigies & Their Supernatural Arts
The 1st suitor, the Celestial Weaver, presenting an ethereal glowing silk garment
वस्त्र-शिल्पी
मेरे बुने वस्त्र देवराज इंद्र के वैभव को भी मात देते हैं!

प्रथम वर आया—एक दिव्य वस्त्र-शिल्पी, जो ऐसी अलौकिक सूक्ष्म रेशमी पोशाकें बुनता था जो अंगूठी से निकल जाएं और जो शरीर को व्याधियों से मुक्त रखें।

वस्त्र-शिल्पी

मेरे बुने वस्त्र देवराज इंद्र के वैभव को भी मात देते हैं!

Panel 4
•
The 2nd suitor, the Astrologer & Linguist, interpreting animal speech
ज्योतिषी व भाषाविद
संसार का कोई भी रहस्य या भविष्य की कोई भी घटना मेरी दृष्टि से ओझल नहीं रह सकती!

द्वितीय वर आया—एक त्रिकालदर्शी ज्योतिषी और भाषाविद, जो सभी पशु-पक्षियों की भाषा समझता था और भूत, भविष्य तथा छिपे रहस्यों को प्रत्यक्ष देख लेता था।

ज्योतिषी व भाषाविद

संसार का कोई भी रहस्य या भविष्य की कोई भी घटना मेरी दृष्टि से ओझल नहीं रह सकती!

Panel 5
•
The 3rd suitor, the Aerial Architect, presenting a winged flying mechanical chariot
विमान-शिल्पी
मेरा यह विमान बादलों को चीरकर किसी भी दुर्गम शिखर तक पलक झपकते ले जा सकता है!

तृतीय वर आया—एक महान यंत्र-शिल्पी, जो काष्ठ और धातुओं से उड़ने वाले अद्भुत विमान (विहंगम रथ) बनाता था जो आकाश-मार्ग से कुछ ही पलों में सुदूर देशों तक पहुंचा देते थे।

विमान-शिल्पी

मेरा यह विमान बादलों को चीरकर किसी भी दुर्गम शिखर तक पलक झपकते ले जा सकता है!

Panel 6
•
The 4th suitor, the Invincible Kshatriya Warrior, drawing his sword with fearless nobility
क्षत्रिय शूरवीर
मेरी तलवार धर्म की रक्षक है! राजकुल और प्रजा के प्राणों की रक्षा करना ही मेरा जीवन है!

चतुर्थ वर आया—एक अपराजित क्षत्रिय धनुर्धर और खड्गधारी शूरवीर, जो अकेले ही विशाल सेनाओं और दानवों को युद्धभूमि में परास्त करने का शौर्य रखता था।

क्षत्रिय शूरवीर

मेरी तलवार धर्म की रक्षक है! राजकुल और प्रजा के प्राणों की रक्षा करना ही मेरा जीवन है!

Panel 7
•
दृश्य 3

राजसभा में अद्भुत कला-प्रदर्शन

The Grand Demonstrations in the Royal Court
The Weaver unfurling miraculous shimmering silk before the amazed King

वस्त्र-शिल्पी ने सभा में ऐसा दिव्य वस्त्र प्रस्तुत किया जो दिन के प्रहर के अनुसार अपने रंग बदलता था। राजा और दरबारी स्तब्ध रह गए।

Panel 8
•
The Astrologer listening to palace birds and predicting hidden treasures

ज्योतिषी ने महल के कपोतों की बोली सुनकर सिंहासन के नीचे दबे प्राचीन गुप्त खजाने और आने वाले आंधी-तूफान की सटीक भविष्यवाणी कर दिखाई।

Panel 9
•
The Aerial Architect flying his winged chariot above the spires of Avanti

विमान-शिल्पी ने अपने काष्ठ-विमान को अवंती के आकाश में उड़ाकर दिखाया। वह रथ पवन के वेग से बादलों में गोते लगाते हुए वापस उतरा।

Panel 10
•
The Kshatriya Warrior demonstrating breathtaking swordsmanship and archery

क्षत्रिय योद्धा ने अपने धनुष और तलवार का ऐसा भीषण पराक्रम दिखाया कि उड़ते हुए बाणों को हवा में काट दिया और अकेले ही दर्जनों सैनिकों के प्रहार को रोक दिया।

Panel 11
•
दृश्य 4

राजसभा का असमंजस और दावों का टकराव

The Royal Dilemma & The Clash of Claims
Princess Anangarati walking in royal gardens contemplating the four suitors

राजकुमारी अनंगरति राजोद्यान में विचारमग्न थी। चारों युवकों की विद्या और कलाएं एक से बढ़कर एक थीं, जिससे चुनाव अत्यंत कठिन हो गया था।

Panel 12
•
King Mahasena consulting with his prime minister in the council chamber

राजा महासेन ने अपने मंत्रियों से परामर्श किया: 'चारों वर असाधारण हैं। इनमें से किसे अपनी पुत्री का वर चुनूँ?'

Panel 13
•
The four suitors standing before the royal court to present their final arguments

राजा ने चारों गुणी वरों को पुनः दरबार में बुलाया और प्रत्येक को अपना अंतिम तर्क रखने का अवसर दिया।

Panel 14
•
The Weaver passionately claiming that his art creates beauty and eternal health
वस्त्र-शिल्पी
सौंदर्य और ऐश्वर्य की रचना ही राजमहल का आभूषण है!

वस्त्र-शिल्पी बोला: 'मेरी कला राजकुल को सौंदर्य, स्वास्थ्य और ऐश्वर्य प्रदान करती है, अतः राजकुमारी मेरी अर्धांगिनी होनी चाहिए!'

वस्त्र-शिल्पी

सौंदर्य और ऐश्वर्य की रचना ही राजमहल का आभूषण है!

Panel 15
•
The Astrologer arguing that divine foresight guides rulers away from doom
ज्योतिषी
ज्ञान और भविष्य-दृष्टि से ही साम्राज्य सुरक्षित रहता है!

ज्योतिषी बोला: 'मेरी दिव्य दृष्टि राज्य को विपत्तियों से बचाती है और भविष्य का मार्गदर्शन करती है, अतः राजकुमारी का हाथ मुझे मिलना चाहिए!'

ज्योतिषी

ज्ञान और भविष्य-दृष्टि से ही साम्राज्य सुरक्षित रहता है!

Panel 16
•
The Aerial Architect claiming that mastery over flight conquers distance and time
विमान-शिल्पी
आकाश पर विजय ही मानव सामर्थ्य की सर्वोच्च विजय है!

विमान-शिल्पी बोला: 'मेरा विमान दूरी और समय को समाप्त करता है। मेरी विद्या से राज्य अजेय बनता है, अतः राजकुमारी पर मेरा अधिकार है!'

विमान-शिल्पी

आकाश पर विजय ही मानव सामर्थ्य की सर्वोच्च विजय है!

Panel 17
•
दृश्य 5

शूरवीर का गर्जन और राजसभा का सन्नाटा

The Swordsman
The Kshatriya Swordsman declaring that only the warrior's blade protects Dharma and the realm
क्षत्रिय योद्धा
तलवार के बिना न राज्य बचता है, न प्रजा! राजकन्या केवल क्षत्रिय की शोभा है!

क्षत्रिय योद्धा ने गरजकर कहा: 'शिल्प और ज्ञान कितने भी महान हों, यदि उनकी रक्षा करने वाली तलवार न हो, तो शत्रु क्षण भर में सब नष्ट कर देगा! राजकन्या की रक्षा केवल क्षत्रिय का बाहुबल कर सकता है!'

क्षत्रिय योद्धा

तलवार के बिना न राज्य बचता है, न प्रजा! राजकन्या केवल क्षत्रिय की शोभा है!

Panel 18
•
The entire royal court sitting in stunned silence at the intractable dilemma

चारों के अकाट्य तर्कों से राजसभा में गहरा सन्नाटा छा गया। राजा महासेन कोई निर्णय नहीं ले सके और पूरा दरबार असमंजस में डूब गया।

Panel 19
•
दृश्य 6

बेताल का यक्ष-प्रश्न और महाराज विक्रम का अमर निर्णय

The Riddle of Rightful Claim & Vikram
In the midnight misty jungle Betal whispering the dilemma of craft vs royal duty
Betal
बताओ विक्रमादित्य! इन चारों गुणी पुरुषों में से राजकुमारी अनंगरति का वास्तविक पति कौन होना चाहिए? उत्तर जानते हुए मौन रहे तो तुम्हारा सिर फट जाएगा!

श्मशान के अंधकार में बेताल ने कथा रोककर चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य से प्रश्न किया।

Betal

बताओ विक्रमादित्य! इन चारों गुणी पुरुषों में से राजकुमारी अनंगरति का वास्तविक पति कौन होना चाहिए? उत्तर जानते हुए मौन रहे तो तुम्हारा सिर फट जाएगा!

Panel 20
•
Close-up of Betal grinning wickedly issuing his solemn challenge

बेताल ने कहा: 'राजन! शास्त्रों और राजधर्म के अनुसार न्याय करो!'

Panel 21
•
Heroic close-up of Emperor Vikramaditya delivering his unassailable verdict
King Vikramaditya
समान राजधर्म, क्षात्र-तेज और प्राणों की बाजी लगाने वाला शौर्य ही राजकन्या के पाणिग्रहण का वास्तविक अधिकार है!

महाराज विक्रमादित्य ने उत्तर दिया: 'राजकुमारी अनंगरति राजकुल की क्षत्राणी है। वस्त्र-शिल्पी, ज्योतिषी और विमान-निर्माता अपनी-अपनी कलाओं के गुणी शिल्पी और सहायक हैं। किंतु राजकन्या का विवाह केवल उसी शूरवीर क्षत्रिय से हो सकता है जो समान वर्ण और कुल का हो, राजधर्म का निर्वाह करे और युद्धभूमि में प्राण देकर राज्य तथा प्रजा की रक्षा कर सके! अतः अनंगरति क्षत्रिय योद्धा की ही पत्नी है!'

King Vikramaditya

समान राजधर्म, क्षात्र-तेज और प्राणों की बाजी लगाने वाला शौर्य ही राजकन्या के पाणिग्रहण का वास्तविक अधिकार है!

Panel 22
•
Betal laughing triumphantly as his corpse-form dissolves into smoke flying back to the tree
Betal
अचूक न्याय, राजन! क्षात्र-धर्म ही राजकन्या का सच्चा रक्षक है! किंतु तुम्हारा मौन टूटा—और मैं चला! खे-खे-खे!

निर्णय सुनते ही राजा का मौन पुनः भंग हो गया! बेताल ठहाका लगाते हुए धुएँ की भांति उड़कर पुनः शीशम के पेड़ पर जा लटका।

Betal

अचूक न्याय, राजन! क्षात्र-धर्म ही राजकन्या का सच्चा रक्षक है! किंतु तुम्हारा मौन टूटा—और मैं चला! खे-खे-खे!

Panel 23
•
King Vikramaditya standing resolute in the dark moonless Amavasya jungle turning back to retrieve Betal
King Vikramaditya
तुम जितनी बार भागोगे बेताल, मैं उतनी बार आऊँगा—क्षत्रिय अपना वचन कभी नहीं छोड़ता!

अमावस की घोर अंधियारी रात में, बीहड़ और भयानक श्मशान वन में महाराज विक्रमादित्य बिना थके, दृढ़ संकल्प के साथ पुनः बेताल को पकड़ने चल पड़े।

King Vikramaditya

तुम जितनी बार भागोगे बेताल, मैं उतनी बार आऊँगा—क्षत्रिय अपना वचन कभी नहीं छोड़ता!

Panel 24
•