नवम बेताल: राजकुमारी अनंगरति और चार गुणी कारीगर
Princess Anangarati & The Four Craftsmen
नौवीं चढ़ाई और राजकुमारी का प्रण
The Ninth Retrieval & The Royal Maiden
नौवीं बार महाराज विक्रमादित्य ने श्मशान भूमि में शीशम के वृक्ष से बेताल को उतारा और कंधे पर लादकर चल पड़े। बेताल ने एक नई ज्ञानवर्धक कथा सुनाई।
राजन! कला, ज्ञान, शिल्प और क्षात्र-धर्म में किसका अधिकार श्रेष्ठ है, सुनो अवंती की राजकुमारी अनंगरति की यह गाथा!

अवंती नगरी के राजा महासेन की रूपवती और विदुषी कन्या थी—राजकुमारी अनंगरति। वह राजसी गुणों, तेज और विद्या से संपन्न थी।
पुत्री! अब तुम्हारे विवाह की आयु आ गई है। कैसा वर तुम्हें स्वीकार होगा?

राजकुमारी ने सभा में प्रतिज्ञा की: 'मैं केवल उसी पुरुष का वरण करूंगी जो अपनी कला या विद्या में पूरे संसार में अद्वितीय और चमत्कारी हो!'
जो मनुष्य असंभव को अपनी अद्वितीय कला से सिद्ध कर दिखाए, वही मेरा पति होगा!
चार गुणी वर और उनकी अलौकिक कलाएं
The Four Prodigies & Their Supernatural Arts
प्रथम वर आया—एक दिव्य वस्त्र-शिल्पी, जो ऐसी अलौकिक सूक्ष्म रेशमी पोशाकें बुनता था जो अंगूठी से निकल जाएं और जो शरीर को व्याधियों से मुक्त रखें।
मेरे बुने वस्त्र देवराज इंद्र के वैभव को भी मात देते हैं!

द्वितीय वर आया—एक त्रिकालदर्शी ज्योतिषी और भाषाविद, जो सभी पशु-पक्षियों की भाषा समझता था और भूत, भविष्य तथा छिपे रहस्यों को प्रत्यक्ष देख लेता था।
संसार का कोई भी रहस्य या भविष्य की कोई भी घटना मेरी दृष्टि से ओझल नहीं रह सकती!

तृतीय वर आया—एक महान यंत्र-शिल्पी, जो काष्ठ और धातुओं से उड़ने वाले अद्भुत विमान (विहंगम रथ) बनाता था जो आकाश-मार्ग से कुछ ही पलों में सुदूर देशों तक पहुंचा देते थे।
मेरा यह विमान बादलों को चीरकर किसी भी दुर्गम शिखर तक पलक झपकते ले जा सकता है!

चतुर्थ वर आया—एक अपराजित क्षत्रिय धनुर्धर और खड्गधारी शूरवीर, जो अकेले ही विशाल सेनाओं और दानवों को युद्धभूमि में परास्त करने का शौर्य रखता था।
मेरी तलवार धर्म की रक्षक है! राजकुल और प्रजा के प्राणों की रक्षा करना ही मेरा जीवन है!
राजसभा में अद्भुत कला-प्रदर्शन
The Grand Demonstrations in the Royal Court
वस्त्र-शिल्पी ने सभा में ऐसा दिव्य वस्त्र प्रस्तुत किया जो दिन के प्रहर के अनुसार अपने रंग बदलता था। राजा और दरबारी स्तब्ध रह गए।

ज्योतिषी ने महल के कपोतों की बोली सुनकर सिंहासन के नीचे दबे प्राचीन गुप्त खजाने और आने वाले आंधी-तूफान की सटीक भविष्यवाणी कर दिखाई।

विमान-शिल्पी ने अपने काष्ठ-विमान को अवंती के आकाश में उड़ाकर दिखाया। वह रथ पवन के वेग से बादलों में गोते लगाते हुए वापस उतरा।

क्षत्रिय योद्धा ने अपने धनुष और तलवार का ऐसा भीषण पराक्रम दिखाया कि उड़ते हुए बाणों को हवा में काट दिया और अकेले ही दर्जनों सैनिकों के प्रहार को रोक दिया।
राजसभा का असमंजस और दावों का टकराव
The Royal Dilemma & The Clash of Claims
राजकुमारी अनंगरति राजोद्यान में विचारमग्न थी। चारों युवकों की विद्या और कलाएं एक से बढ़कर एक थीं, जिससे चुनाव अत्यंत कठिन हो गया था।

राजा महासेन ने अपने मंत्रियों से परामर्श किया: 'चारों वर असाधारण हैं। इनमें से किसे अपनी पुत्री का वर चुनूँ?'

राजा ने चारों गुणी वरों को पुनः दरबार में बुलाया और प्रत्येक को अपना अंतिम तर्क रखने का अवसर दिया।

वस्त्र-शिल्पी बोला: 'मेरी कला राजकुल को सौंदर्य, स्वास्थ्य और ऐश्वर्य प्रदान करती है, अतः राजकुमारी मेरी अर्धांगिनी होनी चाहिए!'
सौंदर्य और ऐश्वर्य की रचना ही राजमहल का आभूषण है!

ज्योतिषी बोला: 'मेरी दिव्य दृष्टि राज्य को विपत्तियों से बचाती है और भविष्य का मार्गदर्शन करती है, अतः राजकुमारी का हाथ मुझे मिलना चाहिए!'
ज्ञान और भविष्य-दृष्टि से ही साम्राज्य सुरक्षित रहता है!

विमान-शिल्पी बोला: 'मेरा विमान दूरी और समय को समाप्त करता है। मेरी विद्या से राज्य अजेय बनता है, अतः राजकुमारी पर मेरा अधिकार है!'
आकाश पर विजय ही मानव सामर्थ्य की सर्वोच्च विजय है!
शूरवीर का गर्जन और राजसभा का सन्नाटा
The Swordsman
क्षत्रिय योद्धा ने गरजकर कहा: 'शिल्प और ज्ञान कितने भी महान हों, यदि उनकी रक्षा करने वाली तलवार न हो, तो शत्रु क्षण भर में सब नष्ट कर देगा! राजकन्या की रक्षा केवल क्षत्रिय का बाहुबल कर सकता है!'
तलवार के बिना न राज्य बचता है, न प्रजा! राजकन्या केवल क्षत्रिय की शोभा है!

चारों के अकाट्य तर्कों से राजसभा में गहरा सन्नाटा छा गया। राजा महासेन कोई निर्णय नहीं ले सके और पूरा दरबार असमंजस में डूब गया।
बेताल का यक्ष-प्रश्न और महाराज विक्रम का अमर निर्णय
The Riddle of Rightful Claim & Vikram
श्मशान के अंधकार में बेताल ने कथा रोककर चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य से प्रश्न किया।
बताओ विक्रमादित्य! इन चारों गुणी पुरुषों में से राजकुमारी अनंगरति का वास्तविक पति कौन होना चाहिए? उत्तर जानते हुए मौन रहे तो तुम्हारा सिर फट जाएगा!

बेताल ने कहा: 'राजन! शास्त्रों और राजधर्म के अनुसार न्याय करो!'

महाराज विक्रमादित्य ने उत्तर दिया: 'राजकुमारी अनंगरति राजकुल की क्षत्राणी है। वस्त्र-शिल्पी, ज्योतिषी और विमान-निर्माता अपनी-अपनी कलाओं के गुणी शिल्पी और सहायक हैं। किंतु राजकन्या का विवाह केवल उसी शूरवीर क्षत्रिय से हो सकता है जो समान वर्ण और कुल का हो, राजधर्म का निर्वाह करे और युद्धभूमि में प्राण देकर राज्य तथा प्रजा की रक्षा कर सके! अतः अनंगरति क्षत्रिय योद्धा की ही पत्नी है!'
समान राजधर्म, क्षात्र-तेज और प्राणों की बाजी लगाने वाला शौर्य ही राजकन्या के पाणिग्रहण का वास्तविक अधिकार है!

निर्णय सुनते ही राजा का मौन पुनः भंग हो गया! बेताल ठहाका लगाते हुए धुएँ की भांति उड़कर पुनः शीशम के पेड़ पर जा लटका।
अचूक न्याय, राजन! क्षात्र-धर्म ही राजकन्या का सच्चा रक्षक है! किंतु तुम्हारा मौन टूटा—और मैं चला! खे-खे-खे!

अमावस की घोर अंधियारी रात में, बीहड़ और भयानक श्मशान वन में महाराज विक्रमादित्य बिना थके, दृढ़ संकल्प के साथ पुनः बेताल को पकड़ने चल पड़े।
तुम जितनी बार भागोगे बेताल, मैं उतनी बार आऊँगा—क्षत्रिय अपना वचन कभी नहीं छोड़ता!