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अष्टम बेताल: तीन अतिसुकुमार रानियां

बेताल पच्चीसी (सोमदेव भट्ट कृत)• katha

अष्टम बेताल: तीन अतिसुकुमार रानियां

The Three Delicate Queens of Dharmadhvaja

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दृश्य 1

आठवीं चढ़ाई और तीन अतिसुकुमार रानियां

The Eighth Retrieval & The Ultra-Delicate Queens
King Vikramaditya climbing down the gnarled Shinshapa tree carrying Betal on his back
Betal
राजन! सुकुमारता और संवेदनशीलता की पराकाष्ठा क्या है, सुनो कांचनपुर के राजा धर्मध्वज की यह अद्भुत कथा!

आठवीं बार महाराज विक्रमादित्य ने श्मशान भूमि में शीशम के वृक्ष से बेताल को उतारा और कंधे पर लादकर चल पड़े। बेताल ने एक नई मनोरंजक कथा आरंभ की।

Betal

राजन! सुकुमारता और संवेदनशीलता की पराकाष्ठा क्या है, सुनो कांचनपुर के राजा धर्मध्वज की यह अद्भुत कथा!

Panel 1
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King Dharmadhvaja of Kanchanpur on his golden lion throne admiring his three queens
राजा धर्मध्वज
मेरी तीनों रानियां नवपल्लवित पुष्पों से भी अधिक कोमल और निष्कलंक हैं।

कांचनपुर के प्रतापी राजा धर्मध्वज की तीन परम सुंदरी रानियां थीं—इंदुलेखा, तारावली और कुसुमावती। तीनों अपने अलौकिक सौंदर्य और अद्वितीय सुकुमारता के लिए विख्यात थीं।

राजा धर्मध्वज

मेरी तीनों रानियां नवपल्लवित पुष्पों से भी अधिक कोमल और निष्कलंक हैं।

Panel 2
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Portrait of Queen Indulekha, fair as snow in shimmering white silks

प्रथम रानी 'इंदुलेखा' चंद्रमा के समान गौर वर्ण और श्वेत मोतियों से सुसज्जित थी, जिसकी देह का स्पर्श भी केवल रेशम से कराया जाता था।

Panel 3
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दृश्य 2

प्रथम कौतुक: चंद्र-किरणों से दाह

The First Wonder: The Scorch of Moonlight
Portrait of Queen Taravali in royal blue silk with delicate gold embroidery

द्वितीय रानी 'तारावली' कनक जैसी कांति वाली थी, जो फूलों की सेज पर भी केवल कोमल पंखुड़ियों के बीच विश्राम करती थी।

Panel 4
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Portrait of Queen Kusumavati in emerald silk with jasmine flowers

तृतीय रानी 'कुसुमावती' इतनी सुकोमल थी कि किसी कठोर कार्य या भारी आभूषण का भार भी उसकी देह सहन नहीं कर सकती थी।

Panel 5
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The royal marble terrace bathed in the silver light of the autumn Sharad Purnima moon

शरद पूर्णिमा की मनोहारी रात्रि में, महल की श्वेत संगमरमर की छत पर शीतल अमृतमयी चांदनी बरस रही थी।

Panel 6
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Queen Indulekha walking on the terrace as moonlight rays strike her bare arms
रानी इंदुलेखा
आह्ह्ह! चंद्रमा की शीतल किरणें भी मेरी त्वचा को अग्नि की भांति जला रही हैं!

रानी इंदुलेखा चांदनी का आनंद लेने छत पर टहलने निकली। ज्योंही पूर्ण चंद्रमा की शीतल किरणों ने उसके शरीर को छुआ, वह दर्द से चीख उठी!

रानी इंदुलेखा

आह्ह्ह! चंद्रमा की शीतल किरणें भी मेरी त्वचा को अग्नि की भांति जला रही हैं!

Panel 7
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Close-up of Queen Indulekha's skin covered in fiery red burn blisters

चांदनी के स्पर्श मात्र से रानी इंदुलेखा के कोमल अंगों पर गंभीर लाल छाले और फफोले पड़ गए, मानो वह दहकते अंगारों से छू गई हो!

Panel 8
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Royal physicians applying cooling sandalwood paste to Indulekha's burns
राजा धर्मध्वज
ऐसी सुकुमारता संसार में कभी किसी ने न देखी होगी!

राजवैद्यों ने तुरंत चंदन और खस का शीतल लेप लगाकर रानी के छालों की जलन को शांत करने का प्रयास किया। राजा विस्मय में पड़ गया।

राजा धर्मध्वज

ऐसी सुकुमारता संसार में कभी किसी ने न देखी होगी!

Panel 9
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दृश्य 3

द्वितीय कौतुक: कमल-पंखुड़ी से गहरा घाव

The Second Wonder: The Bruise of a Lotus Petal
Queen Taravali resting peacefully on an ultra-soft silk divan in her bedchamber

कुछ दिनों बाद, द्वितीय रानी 'तारावली' अपने सुगंधित शयनकक्ष में मखमली रेशमी गद्दों पर गहरी नींद में सो रही थी।

Panel 10
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A single fresh red lotus petal falling gently from the ceiling garland onto Taravali's thigh

छत पर लटकी पुष्प-माला से एक अत्यंत कोमल लाल कमल की पंखुड़ी टूटकर हवा में तैरती हुई रानी की जांघ पर गिरी।

Panel 11
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Close-up of a deep purple bruise and swelling appearing where the lotus petal touched
रानी तारावली
हाय! कमल की एक पंखुड़ी ने मेरी देह को बुरी तरह कुचल दिया!

पंखुड़ी के गिरते ही रानी तारावली दर्द से तड़प उठी। उस कोमल स्पर्श से उसकी जांघ पर भारी पत्थर की चोट जैसा गहरा नीला घाव और नील पड़ गया!

रानी तारावली

हाय! कमल की एक पंखुड़ी ने मेरी देह को बुरी तरह कुचल दिया!

Panel 12
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Maidens gently tending to Queen Taravali's bruise with herbal oils

दासियां पंखा झलने लगीं और वैद्यों ने दर्द निवारक लेप लगाया। राजा सोचने लगा कि तारावली ही संसार की सबसे सुकुमार नारी है।

Panel 13
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दृश्य 4

तृतीय कौतुक: मूसल के शब्द से फफोले

The Third Wonder: The Blisters of Sound
Queen Kusumavati sleeping peacefully in her inner quiet royal pavilion

एक अन्य रात्रि को तृतीय रानी 'कुसुमावती' अपने एकांत अंतःपुर में विश्राम कर रही थी। चारों ओर पूर्ण सन्नाटा था।

Panel 14
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Distant village hut where a peasant woman is rhythmically pounding grain with a heavy wooden pestle

महल से दूर, किसी किसान की कुटिया में एक स्त्री भारी काष्ठ के मूसल से धान कूटने लगी। 'धम-धम' की धीमी गूंज दूर तक फैली।

Panel 15
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Queen Kusumavati stirring uncomfortably in her bed as the distant thudding sound echoes

उस मूसल की धीमी आवाज रानी कुसुमावती के कानों में पड़ी। नींद में ही रानी के हाथ कांपने लगे और वह असहज हो उठी।

Panel 16
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Dramatic close-up of Queen Kusumavati's palms breaking out in raw blisters and calluses from the sound

आश्चर्य! बिना किसी वस्तु को छुए, केवल दूर के मूसल की आवाज सुनकर ही रानी कुसुमावती की दोनों हथेलियों पर खून से भरे फफोले और छाले निकल आए!

Panel 17
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Queen Kusumavati showing her bleeding blistered palms in tears to the horrified King
रानी कुसुमावती
उस दूर बजते मूसल की ध्वनि ने मेरी हथेलियों को छील डाला है स्वामी!

रानी रोती हुई चीख पड़ी: 'हाय! मेरे हाथ जल रहे हैं!' राजा ने जब उसकी हथेलियों पर फफोले देखे, तो वह सन्न रह गया!

रानी कुसुमावती

उस दूर बजते मूसल की ध्वनि ने मेरी हथेलियों को छील डाला है स्वामी!

Panel 18
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दृश्य 5

राजसभा का विस्मय और धर्मसंकट

The Royal Debate & The Unresolvable Enigma
Grand assembly of scholars and ministers in Kanchanpur debating the three cases of delicacy

कांचनपुर की राजसभा में यह कौतुक चर्चा का विषय बन गया। राजवैद्य और विद्वान यह तय नहीं कर पा रहे थे कि तीनों रानियों में सर्वाधिक सुकुमार कौन है।

Panel 19
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Split three-way court view displaying the three queens and their unique sensitivities

दरबारियों ने कहा: 'एक को चांदनी ने जलाया, दूसरी को कमल ने घायल किया, और तीसरी को ध्वनि मात्र ने फफोले दिए! न्याय असंभव है!'

Panel 20
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दृश्य 6

बेताल का यक्ष-प्रश्न और महाराज विक्रम का अमर निर्णय

The Riddle of Delicacy & Vikram
In the midnight misty jungle Betal whispering the riddle into Vikramaditya's ear
Betal
बताओ राजन! इंदुलेखा, तारावली और कुसुमावती—इन तीनों में सबसे अधिक सुकुमार कौन थी? उत्तर जानते हुए भी मौन रहे तो तुम्हारा मस्तक फट जाएगा!

श्मशान के सन्नाटे में बेताल ने कथा रोककर राजा विक्रमादित्य को ललकारा।

Betal

बताओ राजन! इंदुलेखा, तारावली और कुसुमावती—इन तीनों में सबसे अधिक सुकुमार कौन थी? उत्तर जानते हुए भी मौन रहे तो तुम्हारा मस्तक फट जाएगा!

Panel 21
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Heroic close-up of Emperor Vikramaditya delivering his razor-sharp verdict
King Vikramaditya
प्रथम दो रानियों को चांदनी और कमल की पंखुड़ी का प्रत्यक्ष भौतिक स्पर्श हुआ था। किंतु तीसरी रानी 'कुसुमावती' को बिना किसी भौतिक स्पर्श के, केवल दूर से सुनाई देने वाली ध्वनि से ही हथेलियों पर फफोले पड़ गए! अतः इंद्रिय-संवेदना की ऐसी सूक्ष्मता ही सुकुमारता की चरम सीमा है!

धर्म और विवेक से बंधे महाराज विक्रमादित्य ने मौन तोड़ते हुए अकाट्य निर्णय दिया: 'तृतीय रानी 'कुसुमावती' ही संसार में सबसे अधिक सुकुमार है!'

King Vikramaditya

प्रथम दो रानियों को चांदनी और कमल की पंखुड़ी का प्रत्यक्ष भौतिक स्पर्श हुआ था। किंतु तीसरी रानी 'कुसुमावती' को बिना किसी भौतिक स्पर्श के, केवल दूर से सुनाई देने वाली ध्वनि से ही हथेलियों पर फफोले पड़ गए! अतः इंद्रिय-संवेदना की ऐसी सूक्ष्मता ही सुकुमारता की चरम सीमा है!

Panel 22
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Betal laughing wickedly as his corpse-body dissolves into mist and soars back to the tree
Betal
अचूक न्याय, राजन! कुसुमावती ही सर्वाधिक सुकुमार है! किंतु तुम्हारा मौन टूटा—और मैं चला! खे-खे-खे!

निर्णय सुनते ही राजा का मौन पुनः भंग हो गया! बेताल ठहाका लगाते हुए धुएँ की भांति उड़कर पुनः शीशम के पेड़ पर जा लटका।

Betal

अचूक न्याय, राजन! कुसुमावती ही सर्वाधिक सुकुमार है! किंतु तुम्हारा मौन टूटा—और मैं चला! खे-खे-खे!

Panel 23
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King Vikramaditya standing resolute in the dark moonless Amavasya jungle turning back to retrieve Betal
King Vikramaditya
तुम जितनी बार भागोगे बेताल, मैं उतनी बार आऊँगा—क्षत्रिय अपना वचन कभी नहीं छोड़ता!

अमावस की घोर अंधियारी रात में, बीहड़ और भयानक श्मशान वन में महाराज विक्रमादित्य बिना थके, दृढ़ संकल्प के साथ पुनः बेताल को पकड़ने चल पड़े।

King Vikramaditya

तुम जितनी बार भागोगे बेताल, मैं उतनी बार आऊँगा—क्षत्रिय अपना वचन कभी नहीं छोड़ता!

Panel 24
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