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Bharatiya Comics
प्रभावती
Young Merchant Wife, Intelligent, Spirited & Curious• ग्रंथ: Shuka Saptati

प्रभावती

Prabhavati

The youthful, strikingly beautiful wife of merchant Madanavinoda. Endowed with sharp intellect but vulnerable to loneliness and deceitful companions in her husband's long overseas absence, she finds herself intellectually challenged and morally guided by Shuka's nightly riddles.

अन्य नाम व उपाधियाँ
The Merchant's BrideMistress of the Golden MansionThe Restless Beauty of Chandravati
संबंधित अध्याय

कहानियां जिनमें यह पात्र उपस्थित हैं

अध्याय 0

कथामुख: मदनविनोद का विदेश-गमन, मैना का अपमान और शुक की कूटनीति

अध्याय 1

प्रथम रात्रि: बुद्धिमती का साहस, व्याघ्र का भय और शृंगाल की दुर्दशा

अध्याय 2

द्वितीय रात्रि: सोमदत्त वणिक, वज्रदंष्ट्र चौर और सुवर्ण-कूप की चतुराई

अध्याय 3

तृतीय रात्रि: राजा यशोधर्म का हठ और तीन चतुर बुनकरों का न्याय

अध्याय 4

चतुर्थ रात्रि: महारानी का खोया माणिक्य और गायन-पक्षी की गवाही

अध्याय 5

पञ्चम रात्रि: स्वर्णकार की धूर्तता और नूपुर की चोरी का न्याय

अध्याय 6

षष्ठ रात्रि: राजा का सन्देह और हास्ययुक्त मत्स्य का रहस्य

अध्याय 7

सप्तम रात्रि: चतुर भार्या, मध्यरात्रि का संकट और दण्डपाशिक का भ्रम

अध्याय 8

अष्टम रात्रि: राजकीय अश्व, चतुर रजक और चौर का न्याय

अध्याय 9

नवम रात्रि: तीन वर, पारिजात माला और राजकुमारी की परीक्षा

अध्याय 10

दशम रात्रि: लौह-भक्षी मूषक, श्येन-हरण और धर्माधिकारी का न्याय

अध्याय 11

एकादश रात्रि: महारानी का मयूर, चतुर चौर और सुवर्ण-शलाका की परीक्षा

अध्याय 12

द्वादश रात्रि: अन्ध मुनि, सुवर्ण दर्पण और सच्चे रूप का रहस्य

अध्याय 13

त्रयोदश रात्रि: चार पण्डित, उष्ट्र का पदचिह्न और राजा की परीक्षा

अध्याय 14

चतुर्दश रात्रि: महारानी की मुद्रिका, धूर्त स्वर्णकार और तप्त-तैल परीक्षा

अध्याय 15

पञ्चदश रात्रि: चतुर ग्राम-कन्या, राजा का असम्भव प्रश्न और तृण-रज्जु का न्याय

अध्याय 16

षोडश रात्रि: स्वामी-भक्त श्वान, वणिक का बन्धक और पश्चात्ताप का रहस्य

अध्याय 17

सप्तदश रात्रि: राजदर्पण, गुप्त चौर और चतुर मन्त्री की अन्वेषणा

अध्याय 18

अष्टादश रात्रि: सिंह, चतुर शृंगाल, प्रतिध्वनि-गुहा और प्रथम ऋतु का महा-निष्कर्ष

अध्याय 19

एकोनविंशति रात्रि: दो नर्तकी, सुवर्ण-आम्र और राजा जयपाल का न्याय

अध्याय 20

विंशति रात्रि: धूर्त शुल्काध्यक्ष, बालुका-पात्र और तुला का रहस्य

अध्याय 21

एकविंशति रात्रि: राजा का स्वप्न, कटु-वाणी का दण्ड और चतुर ज्योतिषी का मधुर न्याय

अध्याय 22

द्वाविंशति रात्रि: धूर्त वणिक, वटवृक्ष की झूठी गवाही और धूम्र-परीक्षण

अध्याय 23

त्रयोविंशति रात्रि: राजकीय शुक, रङ्जित पक्षी और वर्षा-स्नान की परीक्षा

अध्याय 24

चतुर्विंशति रात्रि: तीन धूर्त द्यूतकार, भारित पाशा और जल-प्लवन परीक्षा

अध्याय 25

पञ्चविंशति रात्रि: सुवर्ण-पात्र, कज्जल-युक्त गर्दभ-पुच्छ और अपराधी का भय

अध्याय 26

षड्विंशति रात्रि: राजवैद्य-कन्या, विष-निदान और संजीवनी परीक्षा

अध्याय 27

सप्तविंशति रात्रि: अन्ध ज्ञानी, मध्यरात्रि की मशाल और परोपकार का रहस्य

अध्याय 28

अष्टाविंशति रात्रि: कृपण वणिक, घृत-कुम्भ और निखात सुवर्ण का अन्वेषण

अध्याय 29

एकोनत्रिंशति रात्रि: छद्मवेषी राजकुमार, तन्तुवाय-कन्या और कुलीन-लक्षण का रहस्य

अध्याय 30

त्रिंशति रात्रि: विदूषक की चतुरता, गज-भार और नौका-प्लवन परीक्षा

अध्याय 31

एकत्रिंशति रात्रि: उद्दण्ड वणिक-पुत्र, समुद्र-तूफ़ान और दृढ लौह-लंगर का रहस्य

अध्याय 32

द्वात्रिंशति रात्रि: कपटी स्वर्णकार, पारद-युक्त तुला और अग्नि-परीक्षा का रहस्य

अध्याय 33

त्रयस्त्रिंशति रात्रि: राज-अश्वपाल, उन्मत्त अश्व और खुर-कण्टक का रहस्य

अध्याय 34

चतुस्त्रिंशति रात्रि: दो तपस्वी, अहंकार का दर्पण और सच्ची सेवा का रहस्य

अध्याय 35

पञ्चत्रिंशति रात्रि: राजमुद्रिका, पद्म-सरोवर का मत्स्य और धीवर का न्याय

अध्याय 36

षट्त्रिंशति रात्रि: विदेशी पोत-व्यूह, द्वितीय ऋतु का महा-निष्कर्ष और मदनविनोद का विजय-सन्देश

अध्याय 37

सप्तत्रिंशति रात्रि: दो राज-श्येन, शाखा-कर्तन और गगन-उड़ान का रहस्य

अध्याय 38

अष्टत्रिंशति रात्रि: मुक्ताहार, मन्दिर का वानर और चतुर मन्त्री की युक्ति

अध्याय 39

एकोनचत्वारिंशति रात्रि: तीन परिव्राजक, अन्तर्धान-औषधि और दृष्टि-दोष का रहस्य

अध्याय 40

चत्वारिंशति रात्रि: दो राजकन्या, सर्षप-मुष्टि और धैर्य का रहस्य

अध्याय 41

एकचत्वारिंशति रात्रि: व्याध, हरिण-युगल और दया-पाश का रहस्य

अध्याय 42

द्विचत्वारिंशति रात्रि: राजवैद्य, पञ्चेन्द्रिय निदान और रोग-मुक्ति का रहस्य

अध्याय 43

त्रिचत्वारिंशति रात्रि: राजज्योतिषी, उल्का-पतन और कर्मफल का रहस्य

अध्याय 44

चतुश्चत्वारिंशति रात्रि: निष्कपट तन्तुवाय, सुवर्ण-तूरी और न्याय का वस्त्र

अध्याय 45

पञ्चचत्वारिंशति रात्रि: राजोद्यानपाल, वाचाल आम्रवृक्ष और कन्द-परीक्षण का रहस्य

अध्याय 46

षट्चत्वारिंशति रात्रि: दो शिल्पी, वस्त्र-आच्छादित देवी-प्रतिमा और दर्पण-परीक्षण का रहस्य

अध्याय 47

सप्तचत्वारिंशति रात्रि: हस्ति-वैद्य, पद्म-नाल और गज-चिकित्सा का रहस्य

अध्याय 48

अष्टचत्वारिंशति रात्रि: तीन यात्री वणिक, मुक्ता-पोटली और शुष्क-मृत्तिका परीक्षा

अध्याय 49

एकोनपञ्चाशत् रात्रि: दो मन्त्री, लौह-स्तम्भ और प्रज्ञा-बल का रहस्य

अध्याय 50

पञ्चाशत् रात्रि: शब्दवेधी अन्ध धनुर्धर, सुवर्ण-घण्टा और एकाग्रता का रहस्य

अध्याय 51

एकपञ्चाशत् रात्रि: राजमहिषी की सारिका, सुवर्ण-दर्पण और सत्य-वाणी का रहस्य

अध्याय 52

द्विपञ्चाशत् रात्रि: वणिक के तीन वसीयतनामा, गुप्त मसी और अग्नि-परीक्षण का रहस्य

अध्याय 53

त्रिपञ्चाशत् रात्रि: राजरक्षक, विषैला कूप और धन्वन्तरि-परीक्षण का रहस्य

अध्याय 54

चतुःपञ्चाशत् रात्रि: मुनि-मण्डल, तृतीय ऋतु का महा-निष्कर्ष और शुक का अमर आशीर्वाद

अध्याय 55

पञ्चपञ्चाशत् रात्रि: दो युद्ध-रथ, लौह-धुरी और सन्तुलन का रहस्य

अध्याय 56

षट्पञ्चाशत् रात्रि: वन-तपस्वी, वशीकृत व्याघ्री और करुणा-बल का रहस्य

अध्याय 57

सप्तपञ्चाशत् रात्रि: राजज्योतिर्विद, सूर्य-ग्रहण और गणित-सिद्धि का रहस्य

अध्याय 58

अष्टपञ्चाशत् रात्रि: धर्मनिष्ठ कृषक, ताम्र-शासन और भूमि-दान का रहस्य

अध्याय 59

एकोनषष्ठि रात्रि: राज-श्येनपाल, शैल-श्येन और दृष्टि-संधान का रहस्य

अध्याय 60

षष्ठि रात्रि: प्रधान रंजक, सप्तरंग सिल्क और इन्द्रधनुष का रहस्य

अध्याय 61

एकषष्ठि रात्रि: राज-कर्मकार, वूट्ज़ इस्पात और लचीली खड्ग का रहस्य

अध्याय 62

द्विषष्ठि रात्रि: प्रज्ञाचक्षु संगीतकार, वीणा-तन्त्री और नाद-ब्रह्म का रहस्य

अध्याय 63

त्रिषष्ठि रात्रि: सेतु-निर्माता, प्रस्तर-तोरण और कील-प्रस्तर का रहस्य

अध्याय 64

चतुःषष्ठि रात्रि: वन-मधुपाल, षट्कोण मधुच्छत्र और प्रकृति-न्याय का रहस्य

अध्याय 65

पञ्चषष्ठि रात्रि: राज-काचकार, अभेद्य स्फटिक-चषक और ताप-शमन का रहस्य

अध्याय 66

षट्षष्ठि रात्रि: दो राज-लेखक, अभेद्य आय-व्यय पंजिका और सुवर्ण-स्याही का रहस्य

अध्याय 67

सप्तषष्ठि रात्रि: दो राजवैद्य, विष-शोधक मुकुट और धन्वन्तरि-परीक्षण का रहस्य

अध्याय 68

अष्टषष्ठि रात्रि: निष्कपट कुम्भकार, अक्षुण्ण मृत्तिका-दीप और अग्नि-शुद्धि का रहस्य

अध्याय 69

एकोनसप्तति रात्रि: दो समुद्र-पोत, दीप-स्तम्भ और धर्म-दिशा का रहस्य

अध्याय 70

सप्तति रात्रि: मदनविनोद का विजय-प्रत्यागमन, शुक की मुक्ति और पातिव्रत्य-महिमा का महा-उत्सव