नामकरण लीला: कलाम-ए-पाक के अक्षरों का चमत्कार और कबीर नाम की घोषणा
The Naming Ceremony & The Shifting Quran
रूढ़िवादी काज़ियों का आगमन और सभा
The Gathering of Orthodoxy
कामधेनु गौ के विस्मयकारी चमत्कार की चर्चा काशी भर में फैल चुकी थी। बिरादरी के दबाव में बालक के पारंपरिक नामकरण (तस्मिया) हेतु काशी के मुख्य काज़ी अपने शिष्यों और भारी धर्म-ग्रंथों के साथ नीरू की चौखट पर पहुंचे।

नीरू ने हाथ जोड़कर अत्यंत विनम्रता से मुख्य काज़ी का स्वागत किया, जबकि आंगन में काशी के जुलाहे और मौलवी कौतूहल से एकत्र थे।

मुख्य काज़ी ने काष्ठ की रेहल पर भारी कुरान स्थापित की और आसन ग्रहण करते हुए नामकरण की प्रक्रिया आरंभ करने की घोषणा की।

नीरू! हम शरीयत के नियमों के अनुसार कलाम-ए-पाक खोलकर इस बच्चे के लिए कोई अदना नाम मुक़र्रर करेंगे।

काज़ी ने अपनी सुनहरी कशीदाकारी वाली भारी कुरान को काष्ठ की रेहल पर स्थापित किया।
कलाम-ए-पाक के अक्षरों का घूमना और अल-कबीर
The Shifting Quran & The Divine Name
काज़ी ने जैसे ही पहला पृष्ठ खोला और नाम खोजने के लिए अपनी अंगुली पन्ने पर रखी...

विस्मयकारी लीला! काज़ी की आंखों के सामने अरबी के सारे हर्फ़ घूम गए और पूरे पृष्ठ पर केवल एक ही महा-नाम स्वर्णिम अक्षरों में चमक उठा—'अल-कबीर' (सबसे महान/परमेश्वर)!

काज़ी पसीने से तर-बतर हो गया। उसने झटके से अपनी कांपती अंगुली पीछे खींच ली।
यह कैसे मुमकिन है? 'कबीर' तो परवरदिगार की सिफ़त (ईश्वरीय नाम) है! किसी साधारण जुलाहे के बच्चे का यह नाम कैसे निकल सकता है?

काज़ी ने घबराकर दूसरा पृष्ठ खोला, फिर तीसरा अध्याय खोला और अन्य धर्म-ग्रंथ मंगवाए।

किंतु वह जिस भी पृष्ठ को खोलता, समस्त आयतें केवल 'कबीर', 'अकबर', 'किबरिया' और 'अल-हक़' के रूप में ही परिवर्तित हो जाती थीं!

काज़ी ने घबराकर भारी ग्रंथ को बंद कर दिया और उसका चेहरा भय से पीला पड़ गया।
मौलवियों का क्रोध और जादूगरी का आरोप
The Accusation of Sorcery
रूढ़िवादी मौलवी और कट्टरपंथी क्रोध और भय से उबल पड़े। उन्होंने बालक पर शैतानी जादूगरी का आरोप लगा दिया।

यह कोई शैतानी तिलिस्म है! यह बच्चा बड़ा होकर हमारे मजहब की बुनियाद हिला देगा! इस जादूगरी की तुरंत परीक्षा होनी चाहिए!

काज़ी ने तैश में आकर बालक की ओर अंगुली उठाई और उसकी ईश्वरीयता की कठोर परीक्षा लेने की घोषणा की।

उन्नीस वर्षीया माता नीमा ने कांपते हुए बालक को अपने आंचल में छिपा लिया, जबकि युवा नीरू अपनी पत्नी और पुत्र के आगे ढाल बनकर खड़ा हो गया।
कठोर लौह का मोम बनना और अभय बालक
The Miracle of the Melting Blade
काज़ी के आदेश पर एक तीक्ष्ण, कठोर लौह अस्त्र बालक के समीप लाया गया।

साक्षात् परमेश्वर का तेज! जैसे ही वह कठोर लोहा बालक कबीर के समीप पहुंचा, तीक्ष्ण धार मोम की भांति पिघलकर मुड़ गई! कोई भी लौह अस्त्र उस अविनाशी ज्योति को स्पर्श न कर सका!

बालक कबीर अपनी खाट पर श्वेत वस्त्र में सुरक्षित लेटे रहे, उनके मुख पर वही शाश्वत, मनमोहक मुस्कान थी।
काज़ी का नतमस्तक होना और कबीर नाम की घोषणा
The Humble Surrender & Proclamation
मुड़े हुए लोहे को देखकर काज़ी की सारी हेकड़ी काफूर हो गई। उसके हाथ से शस्त्र छूट गया और वह आंगन की मिट्टी में साष्टांग गिर पड़ा।

माफ़ करना परवरदिगार! यह कोई साधारण मनुष्य नहीं है। इसका नाम वही होगा जो साक्षात् खुदा ने अपनी किताब में लिख दिया है—कबीर! कबीर साहिब!

समस्त जुलाहा मोहल्ला और काशी के विद्वान नतमस्तक हो गए। बीस वर्षीय नीरू और उन्नीस वर्षीया नीमा ने भक्ति-भाव से अपने बालक को गोद में उठा लिया। चारों ओर 'कबीर साहिब' के नाम की गूंज फैल गई।

बालक कबीर का नामकरण तो परमात्मा के विधान से संपन्न हो गया, किंतु अब बालक धीरे-धीरे बड़ा हो रहा है और करघे पर सूत कातते हुए काशी के पंडितों और रूढ़ियों को झकझोरने वाला है! देखिए अगले अध्याय में—करघे की तान और सच्चा जनेऊ!