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पाखंड-खंडन और शाही षड्यंत्र: 'एकै माटी के सब भांडे' और सिकंदर लोदी का फरमान

संत कबीर साहिब (कबीर मन्शूर)• life

पाखंड-खंडन और शाही षड्यंत्र: 'एकै माटी के सब भांडे' और सिकंदर लोदी का फरमान

The Shattering of Dogmas & The Royal Conspiracy

दृश्य 1

मीनारों पर बांग और चींटी के पग नेवर

The Loud Azan & The Ant
Dawn breaks over a tall red sandstone mosque minaret as an orthodox Mullah climbs to the top

काशी में प्रातःकाल का समय। लाल बलुआ पत्थर की ऊंची मस्जिद की मीनार पर चढ़कर मुल्ला जी प्रभातकालीन नमाज़ के लिए ऊंची आवाज़ में बांग (अज़ान) देने लगे।

Panel 1
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The Mullah screaming loudly from the minaret tower into the quiet sky

मुल्ला जी गला फाड़-फाड़कर आकाश की ओर चिल्ला रहे थे, मानो उनका परमात्मा किसी सातवें आसमान पर बहुत दूर बैठा हो।

Panel 2
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On a clean stone below, a tiny black ant walks gracefully with delicate glowing bells on its feet

नीचे गली के पत्थरों पर एक नन्हीं चींटी रेंग रही थी। उसके सूक्ष्म पैरों की आहट भी उस परम चैतन्य प्रभु के कान में स्पष्ट गूंज रही थी।

Panel 3
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14yo Kabir standing in pure white clothes looking toward the minaret with a compassionate smile

चौदह वर्षीय कबीर साहिब अपनी शुद्ध श्वेत धोती में गली के मोड़ पर खड़े हो गए और उन्होंने जमा हुई भीड़ के सामने सत्य का आईना दिखाया।

Panel 4
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Kabir declaring the immortal sakhi on minarets and the all-hearing God
कबीर साहिब
कांकर पाथर जोरि कै, मसजिद लई बनाय। ता चढ़ि मुल्ला बांग दे, क्या बहिरा हुआ खुदाय? चींटी के पग नेवर बाजे, सो भी साहिब सुनता है!
कबीर साहिब

कांकर पाथर जोरि कै, मसजिद लई बनाय। ता चढ़ि मुल्ला बांग दे, क्या बहिरा हुआ खुदाय? चींटी के पग नेवर बाजे, सो भी साहिब सुनता है!

Panel 5
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The Mullah and clerics descending from the mosque in flushed anger muttering furiously

मीनार से उतरे मौलवी और कट्टरपंथी कबीर साहिब की निडर वाणी सुनकर क्रोध से लाल-पीले हो गए। बाहरी दिखावे की धज्जियां उड़ते देख वे बदले की आग में जलने लगे।

Panel 6
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दृश्य 2

रोज़ा, जीव-हिंसा और सुन्नत का तीखा सवाल

Day Fasting vs. Night Slaughter & The Sunnat Question
An evening banquet where clerics feast on slaughtered meat after a day of fasting

शाम के समय काज़ी के आंगन में दावत सजी थी। दिनभर भूखे रहकर रोज़ा रखने वाले मौलवी रात होते ही बेजुबान पशुओं का वध कर उनके मांस पर टूट पड़े थे।

Panel 7
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Kabir confronting the feasting clerics on true compassion
कबीर साहिब
दिन को रोजा रहत हैं, रात हनत हैं गाय। यह तो खून वह बंदगी, कैसे खुसी खुदाय!
कबीर साहिब

दिन को रोजा रहत हैं, रात हनत हैं गाय। यह तो खून वह बंदगी, कैसे खुसी खुदाय!

Panel 8
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The Chief Qazi rising furiously with clenched fists shouting at Kabir
मुख्य काज़ी
कबीर! तू हमारी शरीयत और सुन्नत पर उंगली उठाने वाला कौन होता है? हम खुदा के सच्चे बंदे हैं!
मुख्य काज़ी

कबीर! तू हमारी शरीयत और सुन्नत पर उंगली उठाने वाला कौन होता है? हम खुदा के सच्चे बंदे हैं!

Panel 9
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Kabir in pure white robes questioning the Qazi with piercing logic on gender and circumcision
कबीर साहिब
जे तू तुरक तुरकनी जाया, पेट ही काहे न सुन्नत कराया? मुसलमान होके सुन्नत कराया, मुसलमानी का क्या कटाया? आधे हिन्दू आधे तुर्क, दोनों में एक ही नूर समाया!
कबीर साहिब

जे तू तुरक तुरकनी जाया, पेट ही काहे न सुन्नत कराया? मुसलमान होके सुन्नत कराया, मुसलमानी का क्या कटाया? आधे हिन्दू आधे तुर्क, दोनों में एक ही नूर समाया!

Panel 10
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Muslim women and weavers looking on with nods of realization as Qazis grind teeth in defeat

आंगन में उपस्थित जुलाहे और माताएं कबीर साहिब की बात सुनकर सिर हिलाने लगे। काज़ी और मुल्ला लज्जित होकर दांत पीसते रह गए।

Panel 11
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The orthodox Qazis storming away into the dark alley humiliated

काज़ी अपने शिष्यों के साथ क्रोध में आगबबूला होकर गलियों में निकल गया, यह ठानकर कि इस जुलाहे का अंत निकट लाना होगा।

Panel 12
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दृश्य 3

पंडितों का जाति-अहंकार और

The Brahmin Pride &
The Chief Pandit on the Ganga steps boasting of his Brahmin birth and touching his Janeu

उधर गंगा के घाटों पर पंडित जी अपनी उच्च जाति और कुलीनता का डंका पीट रहे थे और शूद्रों को अछूत कहकर दूर भगा रहे थे।

Panel 13
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Kabir looking into the Pandit's eyes questioning birth and Janeu
कबीर साहिब
जे तू बाम्हन बाम्हनी का जाया, आन बाट ह्वै काहे न आया? पंडित होके जनेऊ पहिना, पंडितानी का क्या पहिनाया?
कबीर साहिब

जे तू बाम्हन बाम्हनी का जाया, आन बाट ह्वै काहे न आया? पंडित होके जनेऊ पहिना, पंडितानी का क्या पहिनाया?

Panel 14
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A village potter's wheel shaping different pots from a single lump of brown clay

कबीर साहिब ने समीप स्थित कुम्हार के चाक की ओर संकेत किया, जहां एक ही मिट्टी के लोंदे से छोटे-बड़े सभी प्रकार के पात्र गढ़े जा रहे थे।

Panel 15
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Kabir declaring the immortal verse on the oneness of all human clay
कबीर साहिब
एकै माटी के सब भांडे, एकै सिरजनहारा! एकै पवन एक ही पानी, एकै जोति पसारा! गर्भ वास में कुल नहिं जाती, ब्रह्म बिंदु ते सब उतपाती!
कबीर साहिब

एकै माटी के सब भांडे, एकै सिरजनहारा! एकै पवन एक ही पानी, एकै जोति पसारा! गर्भ वास में कुल नहिं जाती, ब्रह्म बिंदु ते सब उतपाती!

Panel 16
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Humble devotees and weavers on the ghat smiling in deep joy and dignity

कबीर साहिब के इन वचनों ने सदियों से दबे-कुचले निर्धनों और बुनकरों के हृदय में आत्म-गौरव और सत्य का दीप जला दिया।

Panel 17
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Proud Brahmin scholars gathering scriptures in deep bitterness and hostility

किंतु रूढ़िवादी ब्राह्मणों का अहंकार तिलमिला उठा। हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के ठेकेदार कबीर की बढ़ती लोकप्रियता से भयभीत हो गए।

Panel 18
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दृश्य 4

अंधेरे कमरे में पंडितों और काज़ियों का गुप्त षड्यंत्र

The Secret Conclave of Pandits & Qazis
A secluded dark room in Varanasi lit by a smoky bronze lamp with Pandits and Qazis sitting together

रात्रि के गहन अंधकार में काशी के एक गुप्त भवन में एक अभूतपूर्व दृश्य दिखा—जो पंडित और काज़ी एक-दूसरे की छाया से बचते थे, वे आज कबीर के विरोध में एक जाजम पर बैठे थे!

Panel 19
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Chief Pandit and Chief Qazi leaning across a low wooden table in conspiracy
मुख्य काज़ी
पंडित जी! यह जुलाहा न वेदों को मानता है, न कुरान को! अगर इसे नहीं रोका गया, तो हमारी सारी गद्दियां और धर्म-धंधा उजड़ जाएगा!
मुख्य काज़ी

पंडित जी! यह जुलाहा न वेदों को मानता है, न कुरान को! अगर इसे नहीं रोका गया, तो हमारी सारी गद्दियां और धर्म-धंधा उजड़ जाएगा!

Panel 20
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Chief Pandit nodding in agreement
मुख्य पंडित
शास्त्रार्थ में तो कोई इसे हरा नहीं सका। जनता इसकी साखियों पर मुग्ध है। इसे मिटाने के लिए केवल राज-दंड (शाही तलवार) का ही सहारा लेना होगा!
मुख्य पंडित

शास्त्रार्थ में तो कोई इसे हरा नहीं सका। जनता इसकी साखियों पर मुग्ध है। इसे मिटाने के लिए केवल राज-दंड (शाही तलवार) का ही सहारा लेना होगा!

Panel 21
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Chief Qazi smiling wickedly about Sultan Sikandar Lodi's illness
मुख्य काज़ी
सुल्तान सिकंदर लोदी इस समय हमारी सीमा के समीप पड़ाव डाले हुए है! वह अत्यंत क्रूर और धार्मिक रूप से कट्टर है। साथ ही वह एक असाध्य दाह-रोग (अंग-जलन) से तड़प रहा है, जिससे उसका गुस्सा आसमान पर है!
मुख्य काज़ी

सुल्तान सिकंदर लोदी इस समय हमारी सीमा के समीप पड़ाव डाले हुए है! वह अत्यंत क्रूर और धार्मिक रूप से कट्टर है। साथ ही वह एक असाध्य दाह-रोग (अंग-जलन) से तड़प रहा है, जिससे उसका गुस्सा आसमान पर है!

Panel 22
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Clerics drafting a treason petition to Sultan Sikandar Lodi

दोनों पक्षों ने मिलकर सुल्तान के नाम एक शिकायती फरमान तैयार किया—'कबीर राजद्रोह और धर्मद्रोह का अपराधी है। वह सुल्तान के सामने कभी सिर नहीं झुकाएगा।' उन्हें पूरा विश्वास था कि क्रूर सुल्तान कबीर को देखते ही मौत के घाट उतार देगा।

Panel 23
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दृश्य 5

सुल्तान सिकंदर लोदी का संताप और गिरफ्तारी का शाही आदेश

The Torment of Sikandar Lodi & Royal Summons
Grand palace pavilion of Sultan Sikandar Lodi with silk drapes and royal guards

शाही छावनी के भव्य तंबू में दिल्ली के सुल्तान सिकंदर लोदी का दरबार सजा था। किंतु वैभव के मध्य सुल्तान का जीवन नर्क बन चुका था।

Panel 24
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Sultan Sikandar Lodi writhing in agonizing burning skin pain on his throne

सुल्तान के पूरे शरीर में असह्य जलन और भयंकर दाह-रोग फैल चुका था। साम्राज्य के बड़े-बड़े शाही हकीम और पीर-फकीर लेप लगाकर हार चुके थे, किंतु सुल्तान की पीड़ा का कोई अंत न था।

Panel 25
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Delegation of Pandits and Qazis kneeling before the agonizing Sultan submitting their scroll

पंडितों और काज़ियों के प्रतिनिधिमंडल ने तड़पते हुए सुल्तान के सामने झुककर कबीर के विरुद्ध विषैली शिकायतें पेश कीं।

Panel 26
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Sultan Sikandar Lodi slamming his royal mace down in rage commanding Kabir's arrest
सुल्तान सिकंदर लोदी
मेरी सल्तनत में ऐसा गुस्ताख जुलाहा जो हमारे मजहब और तख्त को चुनौती दे?! सिपाहियों! अभी जाओ और उस कबीर को लोहे की बेड़ियों में जकड़कर हमारे दरबार में पेश करो!
सुल्तान सिकंदर लोदी

मेरी सल्तनत में ऐसा गुस्ताख जुलाहा जो हमारे मजहब और तख्त को चुनौती दे?! सिपाहियों! अभी जाओ और उस कबीर को लोहे की बेड़ियों में जकड़कर हमारे दरबार में पेश करो!

Panel 27
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Armored royal cavalry riding out under moonlight toward the weaver colony while 14yo Kabir sits peacefully in white robes

शाही घुड़सवार नंगी तलवारें लिए कबीर साहिब की झोपड़ी की ओर दौड़ पड़े! षड्यंत्रकारियों को लगा कि कबीर का अंत निश्चित है, किंतु वे नहीं जानते थे कि सुल्तान का रोग मिटने और कबीर के ५२ चमत्कारों का नया इतिहास रचने वाला है! देखिए अगले अध्याय में—सिकंदर लोदी की सभा और दाह-रोग मुक्ति!

Panel 28
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