Skip to content

लहरतारा का कमल: कबीर साहिब का प्राकट्य, अबोध वाणी और काशी में आगमन

संत कबीर साहिब (कबीर मन्शूर)• life

लहरतारा का कमल: कबीर साहिब का प्राकट्य, अबोध वाणी और काशी में आगमन

The Descent on the Lotus: Lahartara & The Arrival in Kashi

दृश्य 1

सत्यलोक का प्रकाश और ब्रह्म मुहूर्त की पदयात्रा

The Cosmic Vision & The Dawn Walk
Midnight over 15th-century Varanasi with the sacred River Ganga shimmering under stars

विक्रम संवत् १४५५ (सन् १३९८ ई.) के ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा (ज्येष्ठ पूर्णिमा) का पावन पर्व। प्राचीन काशी नगरी के घाट और मिट्टी के घर रात्रि के शांत सन्नाटे में विश्राम कर रहे थे। गंगा की लहरें तारों की छांव में चुपचाप बह रही थीं।

Panel 1
•
Sage Ashtanand in deep meditation on the grassy banks of Lahartara Lake

काशी के बाहरी छोर पर स्थित विशाल लहरतारा सरोवर के तट पर स्वामी रामानंद जी के वरिष्ठ शिष्य ऋषि अष्टानंद ब्रह्म मुहूर्त में समाधिस्थ थे।

Panel 2
•
A blinding pillar of golden-white celestial light descending straight from Satlok upon the lake

सहसा आकाश चीरता हुआ सत्यलोक से एक असीम ज्योतिपुंज उतरा! दस सहस्र सूर्यों के समान दिव्य श्वेत-स्वर्ण प्रकाश ने संपूर्ण सरोवर को जगमगा दिया।

Panel 3
•
Sage Ashtanand shielding his eyes from the blinding divine radiance in utter astonishment
ऋषि अष्टानंद
यह कैसा अलौकिक प्रकाश है? क्या साक्षात् परम पुरुष का इस नश्वर धरा पर अवतरण हुआ है?

ऋषि अष्टानंद ने नेत्र खोले तो चकाचौंध से उनके हाथ अपने आप उठ गए। उन्होंने देखा कि वह दिव्य तेजपुंज सरोवर के जल पर आकर सिमट रहा था।

ऋषि अष्टानंद

यह कैसा अलौकिक प्रकाश है? क्या साक्षात् परम पुरुष का इस नश्वर धरा पर अवतरण हुआ है?

Panel 4
•
Newlywed 20yo Neeru and 19yo Neema traveling on the path toward Kashi in morning mist after their Gauna ceremony

उधर बीस वर्षीय नव-विवाहित जुलाहा नीरू अपनी उन्नीस वर्षीया नववधू नीमा का गौना कराकर अपने ससुराल से काशी की ओर पदयात्रा कर रहा था। सुबह के सुहाने मौसम में वे विश्राम और जल के लिए लहरतारा सरोवर के समीप पहुंचे।

Panel 5
•
Neema feeling the heat of travel, walking gracefully beside her young husband Neeru
माता नीमा
नीरू जी, थोड़ा ठहरिए! इस सरोवर का जल कितना निर्मल और शीतल है, यहां थोड़ा विश्राम कर लेते हैं।

लंबी यात्रा की थकान के कारण युवा वधू नीमा सरोवर के शीतल तट की ओर बढ़ी ताकि मुख-हाथ धोकर अपनी प्यास बुझा सके। दोनों युवा दंपत्ति अपने नए गृहस्थ जीवन के सुंदर स्वप्न संजोए आगे बढ़ रहे थे।

माता नीमा

नीरू जी, थोड़ा ठहरिए! इस सरोवर का जल कितना निर्मल और शीतल है, यहां थोड़ा विश्राम कर लेते हैं।

Panel 6
•
दृश्य 2

कमल पर नवजात और जुलाहा दंपति का तीव्र विवाद

The Radiant Lotus & The Standoff
A giant hundred-petaled glowing pink lotus blossoming in the center of Lahartara Lake

जैसे ही वे सरोवर के तट पर पहुंचे, अरुणोदय की किरणों के मध्य सरोवर के बीचोंबीच एक विशाल, शतदल गुलाबी कमल प्रफुल्लित दिखा।

Panel 7
•
Radiant divine infant Kabir resting with a blissful smile on the lotus petals

उस दिव्य कमल दल पर एक अत्यंत रूपवान, स्वर्ण-ज्योतिर्मय नवजात शिशु मंद-मंद मुस्कुरा रहा था! उसके मुखमंडल से शांत ब्रह्मांडीय आभा प्रस्फुटित हो रही थी।

Panel 8
•
Young bride Neema dropping her earthen pot in pure motherly ecstasy and rushing into the water
माता नीमा
नीरू, देखो! कमल के फूल पर साक्षात् चांद का टुकड़ा मुस्कुरा रहा है!

शिशु को देखते ही युवा नीमा की ममता का बांध टूट पड़ा। उसके हाथ से मिट्टी की गगरी पत्थरों पर गिरकर चकनाचूर हो गई और वह दोनों हाथ फैलाए जल में कूद पड़ी।

माता नीमा

नीरू, देखो! कमल के फूल पर साक्षात् चांद का टुकड़ा मुस्कुरा रहा है!

Panel 9
•
Young husband Neeru violently grabbing Neema's arm, pulling her back to the muddy bank in panic
नीरू जुलाहा
रुक जा नीमा! होश में आ! तू यह क्या अनर्थ करने जा रही है?

नीरू ने घबराकर झपटते हुए नीमा की बांह पकड़ ली और उसे पीछे खींचते हुए भय से कांप उठा।

नीरू जुलाहा

रुक जा नीमा! होश में आ! तू यह क्या अनर्थ करने जा रही है?

Panel 10
•
Young Neeru shouting in fear and anxiety about societal scandal and bringing a baby with a new bride
नीरू जुलाहा
नीमा, होश संभाल! आज ही तो मैं तेरा गौना कराकर तुझे पहली बार घर ले जा रहा हूं! काशी के लोग क्या कहेंगे? वे हंसेंगे और कहेंगे कि नीरू ससुराल से नई दुल्हन के साथ-साथ किसी का बच्चा भी ले आया है! पूरा समाज हम पर थूकेगा और हमें बिरादरी से निकाल देगा!

नीरू लोक-लाज और बदनामी के भय से कांप उठा। आज ही वह अपनी नववधू को पहली बार काशी लेकर जा रहा था!

नीरू जुलाहा

नीमा, होश संभाल! आज ही तो मैं तेरा गौना कराकर तुझे पहली बार घर ले जा रहा हूं! काशी के लोग क्या कहेंगे? वे हंसेंगे और कहेंगे कि नीरू ससुराल से नई दुल्हन के साथ-साथ किसी का बच्चा भी ले आया है! पूरा समाज हम पर थूकेगा और हमें बिरादरी से निकाल देगा!

Panel 11
•
Young Neema weeping bitterly, standing firm in fierce motherly love
माता नीमा
चाहे पंच मुझे पत्थरों से मार डालें, चाहे बिरादरी हुक्का-पानी बंद कर दे! मैं इस अनाथ, ज्योतिर्मय बालक को इस वीराने में मरने के लिए कभी नहीं छोड़ूंगी!

नीमा ने अपनी बांह छुड़ाते हुए आंसुओं से भीगी आंखों से नीरू की ओर देखा। उसकी ममता के आगे समाज का सारा भय तिनके के समान बिखर गया।

माता नीमा

चाहे पंच मुझे पत्थरों से मार डालें, चाहे बिरादरी हुक्का-पानी बंद कर दे! मैं इस अनाथ, ज्योतिर्मय बालक को इस वीराने में मरने के लिए कभी नहीं छोड़ूंगी!

Panel 12
•
Dramatic standoff between young Neeru gripped by fear and young Neema standing firm in devotion

तट पर दोनों के मध्य घोर अंतर्द्वंद्व छिड़ गया—एक ओर लोक-लाज और बदनामी का भय था, तो दूसरी ओर ममता का अगाध समुद्र।

Panel 13
•
दृश्य 3

शिशु का दिव्य संभाषण और नीरू का समर्पण

The Miracle of the Speaking Infant
The tiny newborn infant Kabir on the lotus turning his head and speaking in clear melodious voice
बाल कबीर
हे नीरू! सांसारिक मनुष्यों के मिथ्या भय से अपने हृदय को व्याकुल मत कर।

दोनों का विवाद सुनकर कमल पर लेटे नवजात शिशु ने अपना शीश मोड़ा। उसके अधरों पर अलौकिक मुस्कान थी और उसने स्पष्ट, मधुर देव-वाणी में पुकारा!

बाल कबीर

हे नीरू! सांसारिक मनुष्यों के मिथ्या भय से अपने हृदय को व्याकुल मत कर।

Panel 14
•
Young 20yo Neeru stumbling backward in the water in absolute shock and disbelief
नीरू जुलाहा
हे परवरदिगार! एक नवजात अबोध शिशु... पूर्ण ज्ञानियों की भांति अमृत वाणी बोल रहा है?!

नवजात अबोध शिशु के मुख से अमृत वाणी फूटते देख युवा नीरू जल में दो कदम पीछे लड़खड़ा गया। उसके रोंगटे खड़े हो गए और नेत्र फटे के फटे रह गए।

नीरू जुलाहा

हे परवरदिगार! एक नवजात अबोध शिशु... पूर्ण ज्ञानियों की भांति अमृत वाणी बोल रहा है?!

Panel 15
•
Close-up of Infant Kabir declaring his uncreated divine origin from Satlok
बाल कबीर
नीरू, मैं किसी नश्वर माता के गर्भ से उत्पन्न नहीं हुआ, न ही मैं हाड़-मांस और कर्म के बंधनों में बंधा हूं। मैं सत्यलोक से जीवों को मोक्ष का मार्ग दिखाने उतरा अविनाशी प्रकाश हूं!

शिशु कबीर ने अभय मुद्रा में अपना नन्हा हाथ उठाया और अपने सत्य स्वरूप का रहस्य उद्घाटित किया।

बाल कबीर

नीरू, मैं किसी नश्वर माता के गर्भ से उत्पन्न नहीं हुआ, न ही मैं हाड़-मांस और कर्म के बंधनों में बंधा हूं। मैं सत्यलोक से जीवों को मोक्ष का मार्ग दिखाने उतरा अविनाशी प्रकाश हूं!

Panel 16
•
Young Neeru and Neema listening with folded hands as Infant Kabir tells them to take him with them
बाल कबीर
हे नीरू, अपने मन की सारी चिंताएं त्याग दो। मैं सत्यलोक से जीवों के कल्याण हेतु आया हूं। मुझे अपने साथ ले चलो।
बाल कबीर

हे नीरू, अपने मन की सारी चिंताएं त्याग दो। मैं सत्यलोक से जीवों के कल्याण हेतु आया हूं। मुझे अपने साथ ले चलो।

Panel 17
•
Young Neeru bowing in devotion while young bride Neema gently lifts the tiny newborn wrapped in white khadi

नीरू ने हाथ जोड़कर जल में मस्तक झुका दिया। युवा नीमा ने असीम वात्सल्य से उस अलौकिक बालक को उठाकर अपनी छाती से लगा लिया और श्वेत खादी की चादर में लपेट लिया।

Panel 18
•
दृश्य 4

काशी में उपहास और गृह-आगमन

The Mockery of Kashi & Arrival at Home
Young Neeru and Neema walking through Varanasi bazaar holding the glowing white bundle

जब युवा नीरू और नीमा उस ज्योतिर्मय बालक को लेकर काशी की गलियों में पहुंचे, तो लोगों की आंखें फटी रह गईं।

Panel 19
•
Crowds of neighbors and weavers gathering outside Neeru's mud hut, pointing fingers and mocking the newlywed couple

जुलाहा मोहल्ले में खबर आग की तरह फैल गई कि नीरू अपनी ससुराल से नई दुल्हन के साथ-साथ एक नवजात शिशु भी ले आया है! पड़ोसी और बिरादरी के लोग आंगन में जमा होकर ठहाके लगाने लगे।

Panel 20
•
A sneering neighbor elder mocking Neeru in the courtyard
मोहल्ले का वृद्ध
अरे वाह भाई नीरू! क्या गजब का गौना हुआ है! ससुराल गया था दुल्हन ब्याहने, और पहले ही दिन बना-बनाया बेटा भी साथ ले आया! ऐसा चमत्कार तो हमने काशी में कभी नहीं सुना!

एक पड़ोसी ने ताली पीटते हुए उपहास उड़ाया।

मोहल्ले का वृद्ध

अरे वाह भाई नीरू! क्या गजब का गौना हुआ है! ससुराल गया था दुल्हन ब्याहने, और पहले ही दिन बना-बनाया बेटा भी साथ ले आया! ऐसा चमत्कार तो हमने काशी में कभी नहीं सुना!

Panel 21
•
Young Neema holding the newborn baby in the hut with Neeru standing beside her wondering what the infant will drink

कबीर साहिब का काशी में गृह-आगमन तो हो गया, किंतु अब सबसे बड़ा प्रश्न यह था कि यह दिव्य अबोध शिशु क्या पिएगा? क्या संसार का दूध यह बालक स्वीकार करेगा? देखिए अगले अध्याय में—कामधेनु गौ लीला!

Panel 22
•