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विन्ध्याटवी में महा-सम्मेलन: दस राजकुमारों का समागम और पुष्पपुरी का युद्ध-घोष

दशकुमारचरितम् (दस राजकुमारों की गुप्त गाथाएँ)• katha

विन्ध्याटवी में महा-सम्मेलन: दस राजकुमारों का समागम और पुष्पपुरी का युद्ध-घोष

The Grand Assembly in Vindhyatavi: The Ten Masters Swear the Imperial March

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दृश्य 1

महर्षि वामदेव के पावन आश्रम में प्रत्यागमन

Return to the Sacred Hermitage of Vamadeva
Wide panoramic shot of sacred hermitage of Sage Vamadeva in Vindhya valley at sunrise with waterfalls and deer

विन्ध्याचल की सुरम्य उपत्यका में स्थित महर्षि वामदेव का पावन तपोवन, प्रभात के स्वर्णिम आलोक, कल-कल बहते निर्झरों और वैदिक मंत्रों की गूंज से आलोकित हो रहा था।

Panel 1
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The Ten Companion Princes ride together in majestic formation entering the hermitage gates with victorious smiles
युवराज राजवाहन
भाइयों! वर्षों के गुप्त अभियानों और कठिन परीक्षाओं के उपरांत, हम पुनः अपनी मातृ-भूमि और पूज्य गुरुदेव के चरणों में उपस्थित हैं!

दसों दिशाओं पर अपनी प्रज्ञा और शौर्य का परचम फहराकर, दशों राजकुमार एक साथ अश्वों पर सवार होकर आश्रम के मुख्य द्वार में प्रविष्ट हुए।

युवराज राजवाहन

भाइयों! वर्षों के गुप्त अभियानों और कठिन परीक्षाओं के उपरांत, हम पुनः अपनी मातृ-भूमि और पूज्य गुरुदेव के चरणों में उपस्थित हैं!

Panel 2
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King Rajahamsa and Queen Vasumati stand at hermitage entrance gazing in joy at their returning son and princes

आश्रम के द्वार पर खड़े महाराज राजहंस और महारानी वसुमती ने अपने वीर पुत्रों को जीवित और विजयी लौटते देखा, तो उनके नेत्रों से अश्रु बह निकले।

Panel 3
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Emotional reunion: Rajavahana dismounts bowing touching parents feet who embrace him tightly
महाराज राजहंस
पुत्र राजवाहन! तुमने और तुम्हारे भाइयों ने असंभव को संभव कर दिखाया! मगध का सूर्य पुनः उदय होने को है!
महारानी वसुमती
मेरे वीर पुत्रो! तुम्हारी तपस्या और धर्म-निष्ठा ने आज आर्यावर्त का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया है!

राजकुमार राजवाहन ने नतमस्तक होकर माता-पिता के चरण स्पर्श किए। महाराज और महारानी ने अपने तेजस्वी पुत्र को छाती से लगाकर आशीष दिया।

महाराज राजहंस

पुत्र राजवाहन! तुमने और तुम्हारे भाइयों ने असंभव को संभव कर दिखाया! मगध का सूर्य पुनः उदय होने को है!

महारानी वसुमती

मेरे वीर पुत्रो! तुम्हारी तपस्या और धर्म-निष्ठा ने आज आर्यावर्त का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया है!

Panel 4
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All ten princes kneel respectfully before Maharishi Vamadeva touching his feet with folded hands

दसों राजकुमारों ने प्राचीन वटवृक्ष के नीचे विराजमान ब्रह्मर्षि वामदेव के चरणों में सिर झुकाकर उनका पावन आशीर्वाद ग्रहण किया।

Panel 5
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दृश्य 2

दश-राज्यों की संधियों और विजयरत्नों का समर्पण

The Presentation of Triumphs & Allied Charters
Assembly under banyan tree: The ten princes present imperial charters and treaties before King and Sage

वटवृक्ष की छाया में आयोजित भव्य राजसभा में दसों राजकुमारों ने अपने-अपने अभियानों की विजय-पताकाएं और सैन्य-संधि पत्र समर्पित किए।

Panel 6
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Pushpodbhava unrolls commercial treaties of Ujjayini, Somadatta presents naval charter and diamond of Saurashtra
राजकुमार पुष्पोद्भव
मालवा का आंतरिक व्यापारिक तंत्र और सौराष्ट्र का समुद्री बेड़ा अब मगध के धर्म-युद्ध के लिए समर्पित है!

पुष्पोद्भव ने उज्जयिनी का व्यापारिक राजकोष और सोमदत्त ने सौराष्ट्र की नौसैनिक संधि और दिव्य वज्रमणि महाराज के चरणों में रखी।

राजकुमार पुष्पोद्भव

मालवा का आंतरिक व्यापारिक तंत्र और सौराष्ट्र का समुद्री बेड़ा अब मगध के धर्म-युद्ध के लिए समर्पित है!

Panel 7
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Apaharavarman presents alliance of Anga, Upaharavarman presents charter of Mithila with 20,000 troops
राजकुमार उपहारवर्मा
महाराज! मिथिला और अंग के समस्त शस्त्रागार अब मगध की सेना के साथ जुड़ चुके हैं!

अपहारवर्मा ने चम्पा (अंग) के दस हजार धनुर्धरों और उपहारवर्मा ने मिथिला के बीस हजार रथियों की संधि-मुद्रा समर्पित की।

राजकुमार उपहारवर्मा

महाराज! मिथिला और अंग के समस्त शस्त्रागार अब मगध की सेना के साथ जुड़ चुके हैं!

Panel 8
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Arthapala presents sacred seal of Kashi, Pramati presents 20,000-cavalry charter of Kosala

अर्थपाल ने काशी के पच्चीस हजार सैनिकों का ताम्र-पत्र और प्रमति ने श्रावस्ती (कौशल) के बीस हजार अश्वारोहियों का राज-पत्र प्रस्तुत किया।

Panel 9
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Mitragupta presents Suhma treaty, Mantragupta presents Kalinga elephants, Vishruta presents Vidarbha treaty
राजकुमार विश्रुत
दसों दिशाओं के दो लाख अजेय योद्धा विन्ध्याचल की तलहटी में मगध के ध्वज तले एकत्र हो चुके हैं!

मित्रगुप्त ने तीस हजार नौसैनिक, मन्त्रगुप्त ने चालीस हजार गज-सैनिक और विश्रुत ने विदर्भ के तीस हजार रथ-सैनिकों का सैन्य-दल समर्पित किया!

राजकुमार विश्रुत

दसों दिशाओं के दो लाख अजेय योद्धा विन्ध्याचल की तलहटी में मगध के ध्वज तले एकत्र हो चुके हैं!

Panel 10
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दृश्य 3

महर्षि वामदेव का महायज्ञ और चिन्तामणि-खड्ग का अभिषेक

The Prophetic Consecration by Sage Vamadeva
Grand Vedic Mahayajna: Maharishi Vamadeva pours sacred oblations chanting Rigvedic hymns

आश्रम में महायज्ञ की प्रज्वलित ज्वालाओं के मध्य महर्षि वामदेव ने ऋग्वेद के विजय-सूक्तों का पाठ करते हुए पूर्णाहुति समर्पित की।

Panel 11
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Consecration of the Sword: Sage Vamadeva sprinkles holy water on Rajavahana sword affixing Chintamani gem

ऋषिवर ने गंगाजल से राजवाहन की तलवार का अभिषेक किया और उसकी मूठ पर पाताल-प्राप्त दिव्य 'चिन्तामणि' रत्न को प्रतिष्ठापित कर दिया!

Panel 12
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Prophetic blessing: Sage Vamadeva raises hand declaring the ten princes invincible across Bharat
महर्षि वामदेव
जाओ राजवाहन! पुष्पपुरी तुम्हारा आह्वान कर रही है! अधर्म के अंधकार को मिटाकर धर्म-साम्राज्य की पुनः स्थापना करो!

महर्षि वामदेव ने अपना हाथ उठाकर दिव्य वाणी में कहा—'दशों कुमारों की कठिन परीक्षा पूर्ण हुई! अब आर्यावर्त का कोई भी अत्याचारी तुम्हारे सम्मुख नहीं ठहर सकता!'

महर्षि वामदेव

जाओ राजवाहन! पुष्पपुरी तुम्हारा आह्वान कर रही है! अधर्म के अंधकार को मिटाकर धर्म-साम्राज्य की पुनः स्थापना करो!

Panel 13
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Queen Vasumati applies auspicious red tilak on foreheads of all ten princes tying gold raksha-sutras
महारानी वसुमती
जाओ मेरे वीरो! सत्य तुम्हारे आगे चले और धर्म तुम्हारी रक्षा करे!

महारानी वसुमती ने सजल नेत्रों से दसों वीरों के मस्तक पर रोली का विजय-तिलक लगाया और उनकी कलाइयों पर स्वर्ण-युक्त रक्षा-सूत्र बांधे।

महारानी वसुमती

जाओ मेरे वीरो! सत्य तुम्हारे आगे चले और धर्म तुम्हारी रक्षा करे!

Panel 14
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King Rajahamsa formally hands over imperial war conch of Magadha to Crown Prince Rajavahana
महाराज राजहंस
पुत्र राजवाहन! यह शंख मगध की संप्रभुता का प्रतीक है! इसका नाद पुष्पपुरी के प्राचीरों पर गूंजना चाहिए!

महाराज राजहंस ने मगध का प्राचीन विजय-शंख युवराज राजवाहन के हाथों में सौंपते हुए साम्राज्य के मुक्ति-संग्राम का सेनापतित्व प्रदान किया।

महाराज राजहंस

पुत्र राजवाहन! यह शंख मगध की संप्रभुता का प्रतीक है! इसका नाद पुष्पपुरी के प्राचीरों पर गूंजना चाहिए!

Panel 15
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The ten princes raise glowing blades into sky in triumphant salute as temple conches sound

दसों राजकुमारों ने अपनी चमकती तलवारें आकाश में उठाकर एक स्वर में 'मगध की जय और धर्म की जय' का गगनभेदी उद्घोष किया!

Panel 16
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दृश्य 4

विन्ध्य की तलहटी में दो लाख चतुरंगिणी सेना का समागम

The Convergence of 200,000 Allied Armies
Breathtaking wide shot: Vast river plains below Vindhya mountains filled to horizon with 200,000 warriors

विन्ध्याचल की तलहटी में फैले विशाल मैदानों पर आर्यावर्त के दस शक्तिशाली राज्यों की दो लाख चतुरंगिणी सेनाएं असीम महासागर के समान उमड़ पड़ीं।

Panel 17
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Armored elephant corps: Hundreds of colossal war elephants from Kalinga with gilded armor and archer towers

कलिंग और आन्ध्र की विशाल गज-सेना, कांस्य-कवचों और स्वर्ण-होदों से सुसज्जित होकर युद्ध की अगली पंक्ति में खड़ी थी।

Panel 18
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Golden chariot brigades: Thousands of swift war chariots from Vidarbha, Mithila, and Kosala gleaming

विदर्भ, मिथिला और कौशल के सहस्रों स्वर्णिम युद्ध-रथ सूर्य के प्रकाश में दमक रहे थे, जिनके अश्व रण-भूमि में दौड़ने को आतुर थे।

Panel 19
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Heavy infantry and cavalry: Battalions of veteran archers from Anga, cavalry from Shravasti, and spear phalanxes
संयुक्त सेनानायक
दशों राजकुमारों की जय! मगध के साम्राज्य की पुनः प्रतिष्ठा के लिए हम प्राण न्योछावर करेंगे!

अंग के कुशल धनुर्धर, श्रावस्ती के बख्तरबंद घुड़सवार और काशी के भाला-सैनिक अनुशासित पंक्तियों में खड़े थे।

संयुक्त सेनानायक

दशों राजकुमारों की जय! मगध के साम्राज्य की पुनः प्रतिष्ठा के लिए हम प्राण न्योछावर करेंगे!

Panel 20
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Maritime river fleet: Dozens of war galleys from Suhma and Saurashtra anchored along riverfront

सुह्म और सौराष्ट्र के युद्ध-पोतों का विशाल बेड़ा नदी के तट पर लंगर डाले हुए था, जो भारी रसद और तोप-तुल्य यंत्रों से सज्जित था।

Panel 21
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दृश्य 5

शाही युद्ध-परिषद और पुष्पपुरी-मुक्ति का चक्रव्यूह

The Imperial War Council & Strategic Plan
Imperial war tent: Crown Prince Rajavahana presides over large leather map surrounded by nine brothers

शाही युद्ध-तंबू के भीतर, युवराज राजवाहन ने आर्यावर्त और पुष्पपुरी के किलेबंदी के विशाल मानचित्र पर अपनी अंतिम रणनीति निश्चित की।

Panel 22
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Strategic coordination: Rajavahana assigns river transport to Mitragupta, elephant vanguard to Mantragupta
युवराज राजवाहन
पुष्पपुरी की प्राचीरों पर अधर्म का शासन अधिक देर नहीं टिकेगा! चतुरंगिणी सेना चारों दिशाओं से एक साथ घेराबंदी करेगी!

राजवाहन ने कमान बांटी: मित्रगुप्त जल-मार्ग का नियंत्रण करेंगे, मन्त्रगुप्त गज-सेना का नेतृत्व संभालेंगे और प्रमति-विश्रुत घुड़सवार सेना का संचालन करेंगे।

युवराज राजवाहन

पुष्पपुरी की प्राचीरों पर अधर्म का शासन अधिक देर नहीं टिकेगा! चतुरंगिणी सेना चारों दिशाओं से एक साथ घेराबंदी करेगी!

Panel 23
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Siege engineering: Prince Arthapala and Apaharavarman unroll plans to disarm outer moats and gate winches

अर्थपाल और अपहारवर्मा ने चौरशास्त्र की विधियों से पुष्पपुरी के मुख्य फाटकों और खंदकों के यांत्रिक अवरोधों को चुपचाप निष्क्रिय करने का दायित्व लिया।

Panel 24
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Economic supply lines: Prince Pushpodbhava and Somadatta confirming continuous grain caravans and medical tents

पुष्पोद्भव और सोमदत्त ने दो लाख सैनिकों के लिए अबाध अन्न-भंडार, स्वर्ण-कोष और चिकित्सा-शिविरों की पूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित की।

Panel 25
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Unanimous resolve: All ten commanders place hands upon central map of Magadha sealing unified battle plan
दशों राजकुमार
एक प्राण, एक लक्ष्य, एक खड्ग! मगध की स्वतंत्रता तक विश्राम नहीं!

दसों सेनापतियों ने मगध के मानचित्र पर एक साथ हाथ रखकर मातृभूमि की मुक्ति की अंतिम प्रतिज्ञा पर अपनी मुहर लगाई!

दशों राजकुमार

एक प्राण, एक लक्ष्य, एक खड्ग! मगध की स्वतंत्रता तक विश्राम नहीं!

Panel 26
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दृश्य 6

पुष्पपुरी की ओर महा-प्रयाण और विजय का शंखनाद

The Departure & The Imperial March on Pushpapuri
On a high promontory: King Rajahamsa blows sacred imperial victory conch echoing across mountain ranges

विन्ध्याचल के सर्वोच्च शिखर पर खड़े होकर महाराज राजहंस ने मगध का पावन शंख फूंका, जिसकी गूंज से दिशाएं कांप उठीं!

Panel 27
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Crown Prince Rajavahana raises blazing Chintamani sword from war chariot shouting royal command
युवराज राजवाहन
पुष्पपुरी की ओर आगे बढ़ो! धर्म, सत्य और मगध की स्वतंत्रता के लिए हर अन्याय को धूल में मिला दो!

युवराज राजवाहन ने अपने स्वर्ण-रथ से प्रदीप्त चिन्तामणि-खड्ग हवा में लहराते हुए महा-प्रयाण का आदेश दिया!

युवराज राजवाहन

पुष्पपुरी की ओर आगे बढ़ो! धर्म, सत्य और मगध की स्वतंत्रता के लिए हर अन्याय को धूल में मिला दो!

Panel 28
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The colossal 200,000-strong grand army begins forward march banners waving and war drums booming

दो लाख सैनिकों की चतुरंगिणी सेना ने नगाड़ों की गड़गड़ाहट और फहराते ध्वजों के साथ उत्तर की ओर प्रयाण प्रारंभ कर दिया!

Panel 29
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From hermitage heights: Queen Vasumati and Sage Vamadeva watch dust clouds of departing host with prayers

आश्रम के शिखर से महारानी वसुमती और महर्षि वामदेव ने उठती हुई स्वर्णिम धूलि को देखा और विजय की प्रार्थनाएं कीं।

Panel 30
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Tracking shot: The ten companion princes riding at the head of vanguard armor gleaming in afternoon sun
राजकुमार अपहारवर्मा
पुष्पपुरी की प्राचीरों पर न्याय का सूर्य चमकेगा! भाइयों, आगे बढ़ो!

दशों राजकुमार अग्रिम पंक्ति में एक साथ अश्वों पर सवार होकर चल रहे थे, उनके मुखमंडल पर अपनी मातृभूमि की मुक्ति का अपार तेज था।

राजकुमार अपहारवर्मा

पुष्पपुरी की प्राचीरों पर न्याय का सूर्य चमकेगा! भाइयों, आगे बढ़ो!

Panel 31
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Magnificent closing shot: Imperial host stretches across horizon marching into dawn of final battle of liberation

और इस प्रकार विन्ध्याचल से उठी यह न्याय की महा-सेना, मगध के पाषाण-दुर्ग पुष्पपुरी के अंतिम मुक्ति-संग्राम और धर्म-साम्राज्य की पुनः-स्थापना की ओर अग्रसर हुई!

Panel 32
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