
Paramara King of Dharanagari, Patron of Arts & Seeker of Justice• ग्रंथ: Singhasan Battisi
राजा भोज
King Bhoja
The noble, scholarly Paramara King of ancient Dharanagari who discovered Emperor Vikramaditya's buried 32-step celestial throne and learned the thirty-two lessons of selfless kingship from the living statues.
अन्य नाम व उपाधियाँ
BhojarajaRaja Bhoja of Dhar
संबंधित अध्याय
कहानियां जिनमें यह पात्र उपस्थित हैं
अध्याय 0
प्रस्तावना: धारानगरी, चरवाहा बालक का टीला और बत्तीस सीढ़ियों के दिव्य सिंहासन का प्राकट्य
अध्याय 1
प्रथम पुतली रत्नमञ्जरी: चिन्तामणि रत्न, दरिद्र पण्डित और परम त्याग का रहस्य
अध्याय 2
द्वितीय पुतली चित्रलेखा: निर्धन ब्राह्मण, महाकाली की वेदी और सम्राट का शीश-बलिदान
अध्याय 3
तृतीय पुतली चन्द्रकला: खोया हुआ दिव्य मुक्ता-हार, समुद्र-यात्रा और घड़ियाल का उद्धार
अध्याय 4
चतुर्थ पुतली कामकन्दला: माधवानल का संगीत, सुवर्ण-वृष्टि और कला-पारखी विक्रमादित्य
अध्याय 5
पञ्चम पुतली लीलावती: वन का चोर, राजा का सत्य-व्रत और पारसमणि का पावन त्याग
अध्याय 6
षष्ठ पुतली प्रभावती: अन्धा महर्षि, विषैला सरोवर और संजीवनी मुकुट का पावन त्याग
अध्याय 7
सप्तम पुतली कौशल्या: दो दिव्य उपहार, दरिद्र ब्राह्मण और अक्षय-पात्र का पावन दान
अध्याय 8
अष्टम पुतली सुखाविका: दो दैवज्ञ, राजा का मृत्यु-योग और व्याघ्र-शावक का पावन उद्धार
अध्याय 9
नवम पुतली अनुराधिका: दो माताएँ, शिशु का विवाद और सुवर्ण-पालने का न्याय
अध्याय 10
दशम पुतली पद्मावती: चोरी की राजमुद्रा, नदी का वणिक और जल-मसी परीक्षण का रहस्य
अध्याय 11
एकादश पुतली कीर्तिमती: सहस्र दीपों का नगर, निष्ठावान् प्रहरी वीरवर और राज-लक्ष्मी का पावन उद्धार
अध्याय 12
द्वादश पुतली आनन्दमयी: मानसरोवर का स्वर्ण-हंस, वन के संन्यासी का कमण्डलु और सहस्र कामधेनु का पावन दान
अध्याय 13
त्रयोदश पुतली रतिप्रिया: तीन समरूप कांस्य-प्रतिमाएँ, शिल्पी की पहेली और सुवर्ण-तार की गूढ़ परीक्षा
अध्याय 14
चतुर्दश पुतली तारामती: असत्य का नगर, मणिक-व्यापारी का संताप और सत्य-दर्पण का न्याय
अध्याय 15
पञ्चदश पुतली कमलिनी: चारण कवि का गीत, समुद्र-तट का गोताखोर और अनन्त मुक्ता-दान का रहस्य
अध्याय 16
षोडश पुतली मनमोहिनी: पाताल-लोक का सिंहासन, नाग-राजकुमारी और आत्म-बलिदान की अमर मणि
अध्याय 17
सप्तदश पुतली विद्यावती: नव-रत्नों की सभा, दण्डी संन्यासी का एक धान्य और ज्ञानी का पावन सत्कार
अध्याय 18
अष्टादश पुतली तारावती: तीन गूढ़ पहेलियाँ, निशीथ जागरण और अक्षय-स्वर्णपात्र का पावन दान
अध्याय 19
एकोनविंशति पुतली रूपरेखा: रेशमी चित्र-पट, गान्धार की लुप्त राजकुमारी और निष्काम रक्षा-धर्म
अध्याय 20
विंशति पुतली ज्ञानवती: देव-अश्व का विवाद, खुर-चिह्न परीक्षण और प्रज्ञाचक्षु का निष्पक्ष न्याय
अध्याय 21
एकविंशति पुतली चन्द्रज्योति: माया-गुहा का भ्रम, योगिनी का शाप और निष्काम आत्म-तेज
अध्याय 22
द्वाविंशति पुतली अनुरोधवती: निष्ठावान् तन्तुवाय का पावन वस्त्र, सुवर्ण-तूरी का विवाद और सत्य-श्रम का न्याय
अध्याय 23
त्रयोविंशति पुतली धर्मवती: मृग-शिशु की करुणा, व्याध का बाण और सम्राट का अभय-दान
अध्याय 24
चतुर्विंशति पुतली करुणावती: चेदि देश का महा-अकाल, राज-अन्नागार का त्याग और सम्राट की अन्तिम ग्रास-रोटी
अध्याय 25
पञ्चविंशति पुतली प्रेमवती: समुद्र-मन्थन का रहस्य, वरुण देव का रत्न-पात्र और निष्काम प्रेम-समर्पण
अध्याय 26
षड्विंशति पुतली ध्वनिमती: सात सुरों का प्रज्ञाचक्षु साधक, वीणा का टूटा तार और गान्धर्व-नाद का चमत्कार
अध्याय 27
सप्तविंशति पुतली वसुमती: भूमि में गड़ा स्वर्ण-कलश, दो निष्कपट किसानों का अनूठा विवाद और सम्राट का धर्म-न्याय
अध्याय 28
अष्टाविंशति पुतली वैदेही: निशीथ प्रच्छन्न-भ्रमण, स्वाभिमानी ब्राह्मण की क्षुधा और गुप्त अन्न-सत्कार
अध्याय 29
एकोनत्रिंशति पुतली मानवती: शापग्रस्त गन्धर्व, दावाग्नि का संहार और सम्राट का जीवन-कवच
अध्याय 30
त्रिंशत् पुतली जयलक्ष्मी: सार्वभौम त्याग का महा-यज्ञ, सुवर्ण-वेदी और निर्धन भिक्षुक की विजय
अध्याय 31
